Friday, June 21, 2013

KANGRA 2013 : KANGRA FORT

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

काँगड़ा दुर्ग 



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      मंदिर के ठीक सामने से एक रास्ता काँगड़ा के किले के लिए भी जाता है, यहाँ से किला तीन किमी दूर है । मैं, कुमार, बाबा और मंजू चल दिए काँगड़ा के किले को देखने के लिए, शुरुआत में रास्ता चढ़ाई भरा है फिर बाद में एक सड़क आती है जो सीधे पुराने काँगड़ा की ओर गई है और वही पर है काँगड़ा का किला, रास्ता बिलकुल सुनसान था, रास्ते में हमें एकाध गाडी देखने को मिली और एक या दो लोग जिनसे हमने किले की दूरी भी पूछी। मैं चलता ही जा रहा था, वाकी तीनो मेरे काफी पीछे ही रह गए थे, मेरा तेज चलने का कारण था जल्दी वापद भी लौटना, हमें आज ही ज्वालादेवी के लिए भी निकलना था ।

KANGRA 2013 : MCLEODGANJ

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

 मैक्लोडगंज की ओर


हिमाचल परिवहन की एक बस 

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     मैंने घड़ी में देखा दोपहर के डेढ़ बजे थे, अचानक मन कर गया कि धर्मशाला और मैक्लोडगंज घूम के आया जाय, कौनसा यहाँ रोज रोज आते हैं, मैंने सभी से पुछा पहले तो कोई राजी नहीं हुआ, मैंने प्लान कैंसिल कर दिया, बाद में कुमार और मंजू का मन आ गया, अनके साथ बाबा और ख़ुशी भी राजी हो गए। सो चल दिए आज एक नई यात्रा पर काँगड़ा से धर्मशाला। धर्मशाला, काँगड़ा से करीब अठारह किमी है ऊपर पहाड़ो में और उससे भी आगे चार किमी ऊपर है मैक्लोडगंज।

Thursday, June 20, 2013

KANGRA 2013 : NAGARKOT DHAM

UPADHYAY TRIPS PRESENTS

नगरकोट धाम 2013 




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   बैजनाथ से आखिरी ट्रेन पकड़कर हम शाम तलक काँगड़ा मंदिर स्टेशन पहुंचे, यह नगरकोट धाम का स्टेशन है, यहाँ से नगरकोट मंदिर तीन चार किमी दूर है, स्टेशन से बाहर निकल कर एक नदी पड़ती है जिसपर अंग्रेजों के समय का रस्सी का पुल बना है जो हिलाने पर जोर से हिलता भी है , यहाँ से आगे टेम्पू खड़े मिलते है जो दस रुपये प्रति सवारी के हिसाब से मंदिर के दरवाजे तक छोड़ देते हैं, और यहाँ से बाजार युक्त गलियों में होकर मंदिर तक पहुंचते हैं, यह माँ बज्रेश्वरी देवी का मंदिर है, और एक प्रख्यात शक्तिपीठ धाम है, यह उत्तर प्रदेश की कुलदेवी हैं कहलाती हैं, भक्त यहाँ ऐसे खिचे चले आते हैं जैसे चुम्बक से लोहा खिंचा चला आता है। मंदिर में आने पर एक अलग ही अनुभव सा होता है ।

KANGRA 2013 : BAIJNATH PAPROLA

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

बैजनाथ धाम में इस बार 




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     जोगिन्दर नगर से हम बैजनाथ की ओर रवाना हुए, जोगिन्दर नगर की ओर आते वक़्त जो उत्साह हमारे अन्दर था अब वो सुस्ती में बदल चल गया, ट्रेन खाली पड़ी हुई थी सभी बैठने वाली सीटों पर लेट कर आ रहे थे, समय भी दोपहर का था और यहाँ गर्मी का तापमान अपने चरमोत्कर्ष पर था। इसीलिए कुमार भी सो गया, परन्तु मुझे ट्रेन में नींद बहुत ही कम आती है, मैं अब यहाँ से हमारी यात्रा लौटने की शुरू हो चुकी थी, और मैं लौटते हुए हिमालय की इन घनी वादियों को बाय बाय कह रहा था ।

Wednesday, June 19, 2013

NG TRIP : CHAMUNDA MARG TO JOGINDER NAGAR 2013

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चामुंडा मार्ग से जोगिन्दर नगर की ओर 




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      आज सुबह मैं चार बजे ही उठ गया, नित्यक्रिया से न्रिवृत होकर मैंने सभी को जगाया और जल्दी से तैयार होने के लिए कहा, कारण था स्टेशन से जोगिन्दर नगर जाने वाली पैसेंजर को पकड़ना, जो सवा सात बजे चामुंडामार्ग स्टेशन आजाती है, इसके बाद जोगिन्दर नगर के लिए अगली ट्रेन शाम को पौने चार बजे थी जो हमारे किसी मतलब की नहीं थी। हम सभी जल्दी से तैयार होकर चामुंडामार्ग स्टेशन पहुंचे, अपने निर्धारित समय पर ट्रेन भी आ पहुंची, हमने इस बार भी अलग अलग डिब्बों में स्थान ग्रहण किया और चल दिए जोगिन्दर नगर की ओर ।

KANGRA 2013 : CHAMUNDA DEVI TEMPLE


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चामुंडा देवी के मंदिर में 



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     ट्रेन से उतरकर सभी ने राहत की सांस ली, मानो ऐसा लगा जाने कितने दिनों बाद धरती पर पैर रखा है। कुमार की बुआ और बहिन तो अपनी चादर बिछाकर लेट गईं और वाकी सब भी ऐसे ही बैठ गए, चामुंडा मार्ग एक छोटा सा स्टेशन है, ट्रेन के जाने के कुछ ही समय बाद स्टेशन बिलकुल खाली हो गया, गर अब स्टेशन पर कोई मुसाफिर बचा तो वो हम ही लोग थे, स्टेशन के ठीक सामने पहाड़ है जिसके नीचे एक छोटी सी नदी बहती है। स्टेशन पर हमें काफी समय हो चुका था अब समय था माँ के दरबार में हाजिरी लगाने का, यह हमारी कांगड़ा यात्रा का पहला पड़ाव स्थल था जहाँ आज रात हमें ठहरना था ।

Tuesday, June 18, 2013

NG TRIP : PTK TO CMMG 2013

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काँगड़ा वैली पैसेंजर ट्रेन यात्रा 






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      पठानकोट से ट्रेन सुबह दस बजे प्रस्थान कर चुकी थी, मैं और कुमार लेड़ीज कोच के दरवाजे पर बैठे हुए थे, कुमार पहली बार नेरो गेज की ट्रेन में बैठा था, गाड़ी की स्पीड और प्रकृति के नज़ारे देखकर उसे काफी प्रशन्नता हो रही थी, मेरे साथ आये सभी लोगों को जहाँ और जैसे जगह मिली घुस गए, ट्रेन में एक भी ऐसी जगह नहीं बची थी जो खाली हो। डलहौजी रोड के बाद ट्रेन कंडवाल स्टेशन पहुंची, यह एक छोटा स्टेशन है यहाँ एक देवी माता का मंदिर भी है जिनका नाम है नागिनी माँ ।

AGC TO PTK : SAMTA & DHOULADHAR EXPRESS

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आगरा छावनी से पठानकोट जँ. रेल यात्रा 




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     समता एक्सप्रेस के आने से पांच मिनट पहले ही हम स्टेशन पहुँच गए थे, आज ट्रेन अपने निर्धारित समय से पहले ही आ गयी थी, हमने अपनी सीट पर अपना स्थान ग्रहण किया और चल दिए निजामुद्दीन की ओर। मुझे इस यात्रा मैं कल्पना को अपने साथ ना लाने का बड़ा ही दुःख रहा। जल्द ही हम निजामुद्दीन स्टेशन गए, समता एक्सप्रेस की यात्रा यहीं तक थी। यहाँ से आगे  हमें एक लोकल शटल मिली जो शकूरबस्ती जा रही थी, हम इसी लोकल में सवार हो लिए, थोड़ी देर बाद यह प्रगति मैदान स्टेशन पर आकर खड़ी हो गयी, वैसे यहाँ बहुत ही कम ट्रेनों का ठहराव है।

Monday, June 17, 2013

KANGRA TRIP PLAN 2013

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   काँगड़ा यात्रा - 2013 



      करीब दो साल से ज्यादा समय हो गया था इसबार बिना काँगड़ा गए हुए, इसलिए आगरा के इस बढ़ते हुए गर्म तापमान को देखकर काँगड़ा जाने का विचार मन में आया, माँ से यात्रा की आज्ञा ली और माँ भी चलने के लिए तैयार हो गईं, बस वैष्णोदेवी जाने से इनकार कर दिया, क्योंकि अब उन्हें अत्यधिक चढ़ाई की जगहों से परेशानी होने लगी थी और वैसे भी पिछले दो साल पहले काँगड़ा यात्रा के दौरान हम वैष्णोदेवी होकर आये थे। 

इस बार भी कुमार मेरे साथ था, और हमेशा की तरह इसबार भी बाबा और अम्मा मेरे साथ जाने को तैयार हो गए। मैंने अपना और कल्पना का रिजर्वेशन पहले ही करवा लिए था, पापाजी पास निकलवा लाये थे सो उनका रिजर्वेशन उनके पास पर हो गया, भारतीय रेलवे के पास पर फ्री में रिजर्वेशन हो जाता है ।

Friday, June 14, 2013

ETAH 2013

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एटा यात्रा 2013

  
एटा रेलवे स्टेशन 



 यूँ तो एटा आगरा के नजदीक ही है, दोनों में केवल 85 किमी का ही फासला है परन्तु मेरा एटा जाने का जब भी विचार बनता तो कोई न कोई अड़चन आ ही जाती थी और एटा जाने का विचार आगे के लिए खिसक जाता था एटा के लिए रास्ता टूंडला होकर गया है, और टूंडला से ही एक रेलवे लाइन बरहन होकर एटा के लिए गई है , जिस पर दिन में एक ही पैसेंजर ट्रेन चलती है जो टूंडला से एटा के २ चक्कर लगाती है, मेरा इस रेलवे लाइन को देखने का बड़ा ही मन था, पर कभी मौका नहीं मिल पाया । 

Friday, June 7, 2013

RUPBAS : LAL MAHAL

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एक सफ़र रूपवास की ओर




      आगरा से एक रास्ता जगनेर और तांतपुर की तरफ जाता है, रास्ते में रघुकुल कॉलेज भी पड़ता है जहाँ आज निधि का इतिहास का पेपर था, मैंने निधि को कॉलेज तक छोड़ दिया और इससे आगे चल दिया जगनेर की ओर। आगरा से जगनेर करीब पचास किमी दूर है, और उत्तर प्रदेश का आखिरी हिस्सा भी है जगनेर के तीनों ओर रूपवास की सीमा है, जगनेर से कुछ किमी पहले सरेंधी नामक एक चौराहा भी है जहाँ राजस्थान के भरतपुर से एक सड़क धोलपुर की ओर जाती है और उत्तरप्रदेश की एक सड़क तांतपुर से आगरा की ओर आती है अतः दोनों राज्यों की सडकों का मेल सरेंधी पर ही होता है मैं सरेंधी पहुंचा, यहाँ नाश्ते की कुछ दुकाने खुली हुई थी , मैंने दो कचोड़ी खाई और रूपवास की ओर चल दिया

Monday, April 15, 2013

VILLAGE TRIP : DHAURPUR 2013

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अदभुत ग्राम धौरपुर 




          धौरपुर ग्राम,  दिल्ली - हावड़ा रेल मार्ग पर स्थित हाथरस जंक्शन स्टेशन से 1 किलोमीटर दूर है। यह उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में स्थित है। हाथरस एक छोटा शहर है जिसकी सीमाए आगरा, मथुरा, अलीगढ, एटा तथा कासगंज से छूती हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती ने इसका नाम हाथरस से बदलकर महामाया नगर कर दिया था किन्तु उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद इस जिले का नाम पुनः हाथरस रख दिया गया। पता नहीं क्यों मायावती जी को जिलों के नाम बदलने में बड़ा मजा आता है जैसे कासगंज को कांशीराम नगर बनाकर या अमरोहा को ज्योतिबा फुले नगर। खैर हमारे गाँव का नाम नहीं बदलने वाला वो तो धौरपुर ही रहेगा। फिर चाहे वो हाथरस जिले में आये या अलीगढ जिले में। 

Saturday, March 16, 2013

VILLAGE TRIP : RATMANGARHI 2013

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एक यात्रा मुरसान होकर 

    
मुरसान स्टेशन पर कुमार भाटिया 



 आज मैं और कुमार रतमान गढ़ी के लिए रवाना हुए। यह मेरी छोटी मौसी का गाँव है जो मथुरा कासगंज वाली रेल लाइन पर स्थित मुरसान स्टेशन से पांच किमी दूर है। आज माँ ने कहा जा अपनी मौसी के यहाँ से आलू ले आ । दरअसल मेरे मौसा जी एक किसान हैं और हरबार की तरह उनके खेतों में इसबार भी आलू हुए। इसलिए मैं भी चल दिया एकाध बोरी लेने और साथ मैं कुमार भी। 

     आगरा कैंट से होते हुए हम मथुरा पहुंचे और मथुरा से पैसेंजर पकड़कर सीधे मुरसान। मुरसान पूर्वोत्तर रेलवे का स्टेशन है जिसका मुख्यालय बड़ा ही इज्ज़तदार है मतलब इज्ज़त नगर, जो बरेली में हैं। मथुरा से कासगंज वाली पैसेंजर ट्रेनों में अधिकतर भीड़ चलती है, कारण है सड़क मार्ग से कम समय और सस्ता किराया। परन्तु हम तो मथुरा से ही सीट पर बैठकर आये थे, बस उतरने में ही थोड़ी परेशानी हुई । 

Wednesday, February 20, 2013

TAMILNADU 2013 : KANYAKUMARI

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भारत का अंतिम छोर - कन्याकुमारी 

कन्याकुमारी 

TRIP DATE - 20 FEB 2013

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      किला पैसेंजर से  सुबह चार बजे हम नागरकोइल स्टेशन पहुंचे । कन्याकुमारी यहाँ से पंद्रह किमी दूर थी , स्टेशन के बाहर आकर हमने दो ऑटो किराये पर किये बस स्टैंड के लिए, बस स्टैंड स्टेशन से एक दो किमी की दूरी पर था, पहले पता होता तो पैदल भी आ जाते। बस स्टैंड पर कन्याकुमारी की बस तैयार खड़ी थी, बस ने हमें सुबह 5 बजे कन्याकुमारी उतार  दिया। कन्याकुमारी की सबसे खास चीज़ है यहाँ का सूर्योदय जिसे देखने दूर दूर से लोग यहाँ आते हैं, आज मुझे भी ये मौका मिलने वाला था, कन्याकुमारी में बस से उतारकर मैं सीधे समुन्द्र के किनारे पहुंचा और सूर्योदय का इन्तजार करने लगा, यहाँ पहले से भी अधिक संख्या में पर्यटक बैठे हुए थे और सूर्योदय होने का इंतजार कर रहे थे ।

TAMILNADU 2013 : MADURAI

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                                                मीनाक्षी मंदिर - मदुरै की शान 


मीनाक्षी मंदिर 

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   सुबह पांच बजे हम मदुरै पैसेंजर से मदुरै की तरफ रवाना हुए, एक्सप्रेस ट्रेनों की अपेक्षा पैसेंजर ट्रेनों मे आपको लोकल संस्कृति देखने को मिल सकती है, क्योंकि वो जिस राज्य में से होकर गुजरती है उसकी सवारियां भी अधिकतर उसी राज्य की होती हैं। हमारे आसपास भी तमिलनाडु के ही लोग बैठे हुए थे जो आपस में बातें करते जा रहे थे , क्या बातें कर रहे थे ये मेरी समझ से बाहर था, और हम भी आपस में जब हिंदी बोल रहे थे तो वे भी नहीं समझ पा रहे थे, गर मुझे उनसे कुछ पूछना होता था तो इंग्लिश का प्रयोग करना पड़ता था। आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ इंग्लिश आपका हर जगह साथ देगी, शायद इसीलिए इसे अंतरराष्ट्रीय भाषा कहा जाता है ।

Tuesday, February 19, 2013

TAMILNADU 2013 : RAMESHWARAM


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 ज्योतिर्लिंग और धाम - रामेश्वरम 

रामेश्वरम मंदिर 

TRIP DATE - 18 FEB 2013

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रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग 

आज से हजारों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जब त्रेतायुग का काल था उस समय भारत के दक्षिण में पृथ्वी के आखिरी छोर पर लंका पहुँचने का मार्ग ढूँढ़ते हुए भगवान् राम ने विशालकाय समुद्र को बाधा बने हुए देखा तो समुद्र को ललकारते हुए उन्होंने अपने धनुष की तेज टंकार दी। समुद्र देव हाथ जोड़ते हुए भगवान श्री राम के समक्ष उपस्थित हुआ और भगवान और उनकी सेना को समुद्र पर सेतु बाँधकर लंका पहुँचने का मार्ग सुझाया। भगवान राम के मित्र और किष्किंधा के राजा सुग्रीव की सेना में नल और नील नामक दो वीर वानर योद्धा थे जो अभियांत्रिक कार्यों में अनुभवी और कुशल थे और साथ उन्हें एक ऋषि द्वारा यह श्राप भी मिला था कि वह जिस वस्तु को उठाकर पानी में फेकेंगे वह वस्तु पानी में तैरने लगेगी। नल - नील को मिला श्राप आज भगवान श्री राम के लिए वरदान साबित हुआ।  

Sunday, February 17, 2013

MS TO RMM : SETHU EXPRESS

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चेन्नई एग्मोर से रामेश्वरम - सेतू एक्सप्रेस 



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शाम के पांच बज गए थे, सेतु एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से चेन्नई से प्रस्थान कर चुकी थी, मैंने सोचा नहीं था कि ये सफ़र इतना रोमांचक हो सकता है , कैसे ?  बताता हूँ , शाम का वक़्त तो था ही, ट्रेन को डीजल इंजन बड़ी मस्त गति से दौड़ा रहा था, और साथ ही साथ हमारे साथ अभी चेन्नई भी चल रहा था, काफी देर बाद मुझे लगा कि ट्रेन समुद्र के किनारे चल रही है परन्तु ये समुद्र नहीं था, ये कोलावई झील थी जो बहुत बड़ी और शानदार झील थी। ट्रेन झील के बिलकुल किनारे किनारे चल रही थी, ये मेरे सफ़र का एक वाकई सुखद अनुभव था ।

Saturday, February 16, 2013

AGC TO MAS : TAMILNADU EXPRESS 2013

UPADHYAY TRIPS PRESENTS   

आगरा कैंट से चेन्नई - तमिलनाडु यात्रा         





     आज मैं अपने परिवार सहित रामेश्वरम के दर्शन हेतु निकल पड़ा। आगरा कैंट स्टेशन पर पहुंचे तो देखा तमिलनाडु एक्सप्रेस एक घंटा लेट आ रही है, हालाँकि मुझे आरक्षण जीटी एक्सप्रेस में करवाना चाहिए था क्योंकि उससे न तो मेरी और साथ के सभी की रात खराब होती और ना ही मुझे एक घंटे का इंतजार करना पड़ता। चलो रात के सही दो बजे तमिलनाडु भी आ गयी। सीट पर पहुंचे तो वहां पहले से ही कोई सोया पड़ा था।

    मैंने उसे जगाया और सीट खाली करने के लिए कहा। उसने मुझसे पुछा कौन सा स्टेशन है भाई, मैंने कहा आगरा है। वो मेरा धन्यवाद करने लगा, जबकि अधिकतर मैंने जब किसी को अपनी सीट से उठाया है ,मन में गाली जरुर देकर जाता है, पर ये श्रीमान जी अलग थे, वो सिर्फ इसलिए क्योंकि इन्हें आगरा ही उतरना था, और मैंने इन्हें जगाकर इनका काम आसान कर दिया था । 

Sunday, January 27, 2013

MG TRIP : KANKROLI TO MARWAR JN.

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कांकरोली से मारवाड़ मीटर गेज पैसेंजर ट्रेन यात्रा




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     मैं राजनगर से कांकरोली स्टेशन पहुंचा, अपने निर्धारित समय पर ट्रेन भी आ पहुंची, सर्दियों के दिन थे इसलिए मुझे धुप बहुत अच्छी लग रही थी। कांकरोली से आगे यह मेरा पहला सफ़र था, मुझे इस लाइन को देखना था, मेवाड़ से ट्रेन मारवाड़ की ओर जा रही थी, मेरे चारों तरफ सिर्फ राजस्थानी संस्कृति ही थी। ट्रेन लावा सरदारगढ़ नामक एक स्टेशन पर पहुंची, यहाँ भी मार्बल की माइंस थीं, और एक किला भी बना हुआ था, शायद उसी का नाम था सरदारगढ़। ट्रेन इससे आगे आमेट पहुंची, आमेट के स्टेशन का नाम चार भुजा रोड है, यहाँ से एक रास्ता चारभुजा जी के लिए जाता है, इससे आगे एक स्टेशन आया नाम था दौला जी का खेडा।

Friday, January 18, 2013

MEWAR TRIP : RAJSAMAND 2013

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राजसमन्द में एक बार फिर

अपनी छत पर पतंग उड़ाते धर्मेन्द्र भाई 


     इस बार आगरा में सर्दी काफी तेज थी और इन सर्दियों में, मैं फ़ालतू घर पर बैठा था। कल्पना भी अपने मायके गई हुई थी इसलिए अपने आपको फ़ालतू और अकेला महसूस कर रहा था। कंप्यूटर भी इन दिनों खराब पड़ा था, सिवाय टीवी देखने के मेरे पास कोई काम नहीं था, लेकिन टीवी भी बेचारी कब तक मेरा मन लगाती।तभी जीतू का फोन आया तो उसे मैंने अपनी परेशानी बताई, उसने मुझे अपने पास आने की कहकर मेरी परेशानी मिनटों में हल कर दी ।मे 

     माँ की आज्ञा लेकर मैं सीधे स्टेशन गया और अनन्या एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करवा लिया । दुसरे दिन मैं राजसमन्द के लिए गया। ट्रेन सही समय पर आगरा फोर्ट पर आ गई और मैंने अपनी सीट ढूँढी, देखा तो ऊपर की थी।कमबख्त से मांगी तो साइड लोअर थी पर नसीब में ऊपर वाली ही लिखी थी। ट्रेन सवाई माधोपुर होते हुए जयपुर पहुंची । यहाँ मेट्रो का काम तेजी पर चल रहा था, ट्रेन दुर्गापुरा स्टेशन पर काफी देर खड़ी रही उसके बाद जयपुर स्टेशन पर पहुंची। यहाँ मुझे चाय पीने का मौका मिल गया, ट्रेन की चाय से यह चाय कई गुना बेहतर थी।

Monday, April 2, 2012

MEWAR TRIP : KUMBHALGARH

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कुम्भलगढ़ और परशुराम महादेव  




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     कल हम हल्दीघाटी घूमकर आये थे, आज हमारा विचार कुम्भलगढ़ जाने की ओर था और ख़ुशी की बात ये थी कि आज धर्मेन्द्र भाई भी हमारे साथ थे। राजनगर से कुम्भलगढ़ करीब पैंतालीस किमी दूर है, भैया ने मेरे लिए एक बाइक का इंतजाम कर दिया।  भैया, भाभी अपने बच्चों के साथ अपनी बाइक पर, जीतू अपनी पत्नी - बच्चों और दिलीप के साथ अपनी बाइक पर और तीसरी बाइक पर मैं और कल्पना थे। 

    पहाड़ी रास्तो से होकर हम कुम्भलगढ़ की तरफ बढ़ते जा रहे थे, मौसम भी काफी सुहावना सा हो गया था , जंगल और ऊँचे नीचे पहाड़ों के इस सफ़र का अलग ही आनंद आ रहा था, मैं बाइक चला रहा था और कल्पना मोबाइल से विडियो बना रही थी। यहाँ काफी दूर तक बाइक बिना पेट्रोल के ही चल रही थी, ढ़लान के रास्तों पर जो करीब तीन किमी लम्बे होते थे ।

MEWAR TRIP : HALDIGHATI 2012

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हल्दीघाटी - एक प्रसिद्ध रणभूमि


मैं और मेरी पत्नी कल्पना ,चेतक की समाधी पर 



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   आज हमारा विचार हल्दीघाटी जाने का बना, जीतू ने आज छुटटी ले थी साथ ही एक बाइक का इंतजाम भी कर दिया। मैं ,कल्पना, दिलीप, जीतू और उसका बेटा अभिषेक दो बाइकों से चल दिए एक प्रसिद्ध रणभूमि की तरफ जिसका नाम था हल्दीघाटी। यूँ तो हल्दीघाटी के बारे में हम कक्षा चार से ही पढ़ते आ रहे हैं, और एक कविता भी आज तक याद है जो कुछ इसतरह से थी,
             
                        रण बीच चौकड़ी भर भर कर , चेतक बन गया निराला था।
                         महाराणा प्रताप के घोड़े से   , पड़  गया  हवा का पाला था ।।

    हल्दीघाटी के मैदान में आज से पांच सौ वर्ष पूर्व मुग़ल सेना और राजपूत सेना के बीच ऐसा भीषण संग्राम हुआ जिसने हल्दीघाटी को इतिहास में हमेशा के लिए अमर कर दिया और साबित कर दिया कि भारत देश के वीर सपूत केवल इंसान ही नहीं,  जानवर भी कहलाते हैं जो अपनी जान की परवाह किये बगैर अपने मालिक के प्रति सच्ची वफ़ादारी का उदाहरण पेश करते हैं और ऐसा ही एक उदाहरण हल्दीघाटी के मैदान में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक ने अपनी जान देकर दिया। ऐसे वीर घोड़े को सुधीर उपाध्याय का शत शत नमन।

Sunday, April 1, 2012

MEWAR TRIP : RAJSAMAND 2012

                                                      UPADHYAY TRIPS PRESENT'S                                                                                    
                                                                                                                                  
राजसमंद और कांकरोली
                                                          

कांकरोली स्टेशन पर जीतू 



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      श्री नाथजी के दर्शन करके हम राजनगर की ओर रवाना हो लिए, दिलीप एक मारुती वन में बैठ गया, मैं ,जीतू और कल्पना बाइक पर ही चल दिए। रात हो चली थी , राष्ट्रीय राजमार्ग - 8  पर आज हम बाइक से सफ़र कर रहे थे, सड़क के दोनों तरफ मार्बल की बड़ी बड़ी दुकाने और गोदाम थे और रास्ता भी बहुत ही शानदार था।
थोड़ी देर में हम कांकरोली पहुँच गए, यहाँ हमें दिलीप भी मिल गया और हम फिर जीतू के घर गए , भईया को अभी पता नहीं था कि मैं कांकरोली में आ गया हूँ, मेरा संपर्क सिर्फ जीतू के ही साथ था । जीतू और धर्मेन्द्र भैया मेरे बड़े मामा जी के लड़के हैं। दोनों ही यहाँ मार्बल माइंस में नौकरी करते हैं, इसलिए अपने परिवार को लेकर दोनों यहीं रहते हैं, मैं पहले भी कई बार कांकरोली और राजनगर आ चुका हूँ, कल्पना और दिलीप पहली बार आये थे। 

Saturday, March 31, 2012

MEWAR TRIP : UDAIPUR CITY 2012

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झीलों की नगरी - उदयपुर

उदयपुर रेलवे स्टेशन 

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      अनन्या एक्सप्रेस ने हमें रात को तीन बजे ही हमें उदयपुर सिटी स्टेशन पहुँचा दिया। रेलवे सुरक्षा बल के सिपाहियों ने मुझे जगाया और कहा कि क्या ट्रेन में ही सोने का इरादा है ? यह ट्रेन आगे नहीं जाती। मैंने देखा ट्रेन उदयपुरसिटी पर खड़ी हुई है, जो दो चार सवारियां ट्रेन में थीं ,पता नहीं कब चली गई। मैंने जल्दी से कल्पना को जगाया और दिलीप को भी जगा दिया था ।

     ट्रेन से उतरकर हम वेटिंग रूम में गए, वहां से नहा धोकर उदयपुर घूमने निकल पड़े, यहाँ से राजमहल करीब तीन किमी था, सुबह सुबह हम पैदल ही राजमहल की ओर निकल पड़े, थोड़ी देर में हम राजमहल के करीब थे , अभी इसके खुलने में काफी समय था इसलिए पास ही के एक पहाड़ पर स्थित किले को देखने के लिए चल पड़े। यूँ तो उदयपुर की विशेषता का वर्णन मैं क्या कर सकता हूँ, इसकी विशेषता का एहसास तो खुद ही यहाँ आकर हो ही जाता है। हम पहाड़ पर पहुंचे, यहाँ एक करणी माता का मंदिर भी है, और एक पुराने किले के अवशेष आज भी देखने को मिलते हैं, यहाँ से पूरे उदयपुर शहर का नजारा स्पष्ट दिखाई देता है।

Friday, March 30, 2012

AJMER 2012

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अजमेर की एक यात्रा 




       मैंने अपनी शादी के बाद अजमेर और उदयपुर जाने का प्लान बनाया, हालांकि मैंने पहले ही सियालदाह-अजमेर एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करवा रखा था, जिसका समय आगरा फोर्ट पर रात को आठ बजे है किन्तु आज यह ट्रेन अपने सही समय से काफी लेट हो गई और सुबह चार बजे आगरा फोर्ट पहुंची। आज हमारी पूरी रात इस ट्रेन के इंतजार में खराब हो गयी। 

मैं आज पहली बार अपनी पत्नी के साथ यात्रा कर रहा था, एक अजीब सी ख़ुशी मेरे दिल में थी, किन्तु हमारी इस  यात्रा की शुरुआत ही विलम्ब से शुरू हुई। ट्रैन आने के बाद हम अपनी सीट पर पहुंचे और सारी रात जगे और थके होने के कारण तुरंत ही अपनी सीट पर नींद के आगोश में समां गए। 

Tuesday, October 11, 2011

IDGAH AGRA TO BANDIKUI : DMU 2011


ईदगाह से बाँदीकुई डीएमयू यात्रा 

ईदगाह आगरा जंक्शन 

आज मैं घर पर फ्री था, कोई काम नहीं था तो स्टेशन की तरफ निकल गया। आज आगरा कैंट ना जाकर सीधे ईदगाह स्टेशन गया, यहाँ अभी कुछ दिन पहले जापानी ट्रेन जैसी दिखने वाली एक डीएमयू शुरू हुई है जो अब बाँदीकुई तक जाने लगी है। यह बांदीकुई जाती है और फिर वहां से वापस आगरा आ जाती है। अपना किराया तो  लगता ही नहीं है इसलिए चल दिए इसी ट्रैन से एक यात्रा बाँदीकुई की और करने।  काफी समय पहले में इस लाइन पर भरतपुर तक यात्रा कर चूका हूँ तब यह लाइन मीटर गेज हुआ करती थी। गेज परिवर्तन के बाद यह मेरा पहला मौका है जब मैं इस ट्रैक पर यात्रा कर रहा हूँ।  मैं ईदगाह स्टेशन पहुंचा, कुछ देर में ट्रेन भी पहुँच गई। ट्रैन में अपना स्थान ग्रहण कर मैं यात्रा पर रवाना हो चला। 

Saturday, January 1, 2011

Gangasagar


गंगासागर की एक यात्रा 



1 JAN 2011, 

    जनवरी की भरी सर्दियों में घर से बाहर कहीं यात्रा पर जाना एक साहस भरा काम है और यह साहस भरा काम भी हमने किया इसबार गंगासागर की यात्रा पर जाकर। भारत देश में अनेकों पर्यटन स्थल हैं और पर्यटन स्थल का एक अनुकूल मौसम भी होता है इसी प्रकार गंगासागर जाने का सबसे उचित मौसम जनवरी का महीना होता है क्योंकि मकरसक्रांति के दिन ही गंगासागर में स्नान का विशेष महत्व है। मकर सक्रांति आने से पहले ही यहाँ मेले की विशेष तैयारी होने लगती है। ये लोकप्रिय कहावत प्रचलित है :- सारे तीर्थ बार बार, गंगासागर एक बार।

Friday, April 16, 2010

KANGRA 2010 : BAIJNATH, KANGRA & JWALA DEVI TEMPLE

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S



बैजनाथ मंदिर और नगरकोट धाम वर्ष 2010



इस यात्रा की शुरुआत के लिए यहाँ क्लिक करें।

     सुबह एक बार फिर चामुंडा माता के दर्शन करने के पश्चात् मैं, माँ और निधि चामुंडा मार्ग रेलवे स्टेशन की तरफ रवाना हो गए। सुबह सवा आठ बजे एक ट्रेन चामुंडा मार्ग स्टेशन से बैजनाथ पपरोला के लिए जाती है जहाँ बैजनाथ जी का विशाल मंदिर स्थित है। इस मंदिर के बारे कहाँ जाता है कि यहाँ स्थित शिवलिंग लंका नरेश रावण के द्वारा स्थापित है, रावण के हठ के कारण जब महादेव ना चाहते हुए भी उसकी भक्ति के आगे विवश हो गये तब उन्होंने रावण से उसका मनचाहा वर मांगने को कहा तब रावण के शिवजी को कैलाश छोड़कर लंका में निवास करने के लिए अपना वरदान माँगा। 

      शिवजी ने एक शिवलिंग के रूप में परवर्तित होकर रावण के साथ लंका में रहने का वरदान तो दे दिया किन्तु साथ ही उससे यह भी कह दिया कि इस शिवलिंग को जहाँ भी धरती पर रख दोगे यह वहीँ स्थित हो जायेगा। रास्ते में रावण को लघुशंका लगी जिसकारण वह इसे एक गड़रिये के बच्चे  में थमाकर लघुशंका के लिए चला गया। वह बच्चा इस भरी शिवलिंग को ना थम सका और उसने इसे धरती पर रख दिया।  वापस आकर रावण ने इस शिवलिंग को उठाने की बहुत कोशिश की किन्तु वह असफल रहा और आज भी यह शिवलिंग बैजनाथ के नाम से पपरोला में स्थित है।

Thursday, April 15, 2010

KANGRA 2010 : CHAMUNDA DEVI TEMPLE

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

                                                 

चामुंडा देवी के मंदिर में 


 

यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

      हमने पहले सीधे चामुंडा जाने का प्लान बनाया । सुबह 10 बजे ट्रेन पठान कोट से रवाना हुई और धीरे धीरे धरती से पहाड़ो की गोद में आ गई। सफ़र बड़ा ही रोमांचक था और मज़ेदार भी, छोटी सी ट्रेन और छोटे छोटे स्टेशन, हिमालय की वादियाँ और व्यास नदी का अद्भुत नजारा वाकई मन को मोह लेने वाला था। मेरा तो मन कर रहा था कि आगरा वापस ही न जाऊं यहीं रह जाऊं ,पर अपना घर अपना ही होता है ,चाहे कहीं भी चले जाओ असली सुकून तो अपने घर में ही मिलता है। शाम तलक हम चामुंडा मार्ग स्टेशन पहुँच गए। यह एक सुन्दर और रमणीक स्टेशन है । 

      मुझे यहाँ के स्थानीय लोगो ने बताया कि पुरानी चामुंडा का मंदिर ऊपर पहाड़ो में है, वहां आने जाने में कम से कम दो दिन लगेंगे। माँ और बहिन की तरफ देखते हुए मैंने वहां जाने का विचार त्याग दिया पर आगे भविष्य में जाने का प्रण जरुर कर लिया। हम नई चामुंडा देवी के मंदिर पर पहुंचे। यह एक सुन्दर और बड़ा मन्दिर है धार्मिक दृष्टि से भी और पर्यटन की दृष्टि से भी। यहाँ बाणगंगा नदी एक सामान्य धारा के रूप में बहती है या यूँ कहिये कि पहाड़ो से निकलकर धरती पर जा रही है। मंदिर को और रमणीक बनाने हेतु इस नदी पर एक पुल भी बनाया गया है ।

      देवी माँ के दर्शन करने के बाद हम नीचे वाले शिव मंदिर में भी गए। रात होने को थी अब खाने का ठहराने का प्रबंध भी करना था। हमे मंदिर ट्रस्ट की तरफ से एक बड़े हॉल में जगह मिल गई जहाँ हमने अपना आसन लगाया। पास में ही लेटे हुए कुछ श्रद्धालु कही जाने लगे, उन्ही में से एक बुजुर्ग ने हमसे कहा कि खाना खा लिया या नहीं, गर नहीं तो चलो हमारे साथ लंगर का समय हो गया है। मंदिर से आधा किमी दूर लंगर भवन है जहाँ रात्रि नौ बजे लंगर चलता है। लंगर में हमें दाल चावल मिले। मैंने भरपेट भोजन किया और हॉल में आकार सो गया। सुबह उठकर हम मलां स्थित रेलवे स्टेशन पहुंचे। 

चामुंडा मार्ग का रेलवे स्टेशन भी कम रमणीय नहीं है। यहाँ एक ही रेलवे लाइन है जो अर्धवृत्ताकार रूप में होने के कारण बहुत शानदार लगती है, स्टेशन भी छोटा सा ही है इसलिए यह स्थान रमणीय होने के साथ साथ प्राकृतिक वातावरण से भरपूर भी है। स्टेशन के ठीक सामने पहाड़ है और उस पहाड़ से ठीक पहले नदी की एक धारा नहर के रूप गुजरती है। स्टेशन के आसपास काफी अच्छे हिमाचली घर भी बने हैं जिनमें बेहद शानदार और खुशबू बिखेरने वाले गुलाब के पौधे लगे हैं। इन गुलाबों की सुगंध से यहाँ आने वाले हर सैलानी का मन बस यहीं का होकर रह जाना चाहता है। 

कुछ ही समय बाद पठानकोट की तरफ से इस रेलवे लाइन की छोटी वाली ट्रेन आ गई। दूर से हॉर्न देती ट्रेन का संकेत पाकर सभी यात्री अपने अपने सामान के साथ सचेत हो जाते हैं। यह पाँच छः डिब्बों वाली नेरो गेज की ट्रेन है जो स्वछन्द वातावरण में हिमालय की वादियों में अपना सफर तय करती है। अपनी अगली यात्रा के लिए हम इसी ट्रेन में सवार हो गए और चामुंडा धाम से बैजनाथ धाम की ओर बढ़ चले। 

CHAMUNDA MARG RAILWAY STATION

RAILWAY STATION OF CHAMUNDA MARG

CHAMUNDA MARG

RIVER IN CHAMUNDA


CHAMUNDA TAMPLE

CHAMUNDA TAMPLE

CHAMUNDA TAMPLE


CHAMUNDA DEVI TEMPLE IN 2010

CHAMUNDA DEVI TEMPLE

CHAMUNDA DEVI TEMPLE

CHAMUNDA DEVI TEMPLE

CHAMUNDA DEVI TEMPLE 2010

CHAMUNDA DEVI TEMPLE 2010


CHAMUNDA DEVI 2010

CHAMUNDA DEVI 2010

CHAMUNDA DEVI TEMPLE 2010

Chamunda Marg railway station

Tuesday, April 13, 2010

NG TRIP : PATHANKOT TO CHAMUNDA MARG 2010

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

काँगड़ा घाटी में रेल यात्रा - 2010



 मैंने दिल्ली से पठानकोट के लिए 4035 धौलाधार एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करा रखा था। तारीख आने पर हम आगरा से दिल्ली की ओर रवाना हुए। मेरे साथ मेरी माँ और मेरी छोटी बहिन थी। हम थिरुकुरल एक्सप्रेस से निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचे और एक लोकल शटल पकड़ कर सीधे नई दिल्ली। नईदिल्ली से हम मेट्रो पकड़ सीधे चांदनी चौक पहुंचे और वहां जाकर गोलगप्पे खाए । सुना चाँदनी चौक के गोलगप्पे काफी मशहूर हैं। चाँदनी चौक के पास ही पुरानी दिल्ली स्टेशन है जहाँ से हमें पठानकोट की ट्रेन पकडनी थी। हम स्टेशन पर पहुंचे तो ट्रेन तैयार खड़ी थी हमने अपना सीट देखी। मेरी बीच वाली सीट थी। उसे ऊपर उठा अपना बिस्तर लगा कर मैं तो सो गया और ट्रेन चलती रही।