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Saturday, July 10, 2021

BHARHUT STUP : MADHYA PRADESH 2021

मानसून की तलाश में एक यात्रा भाग - 2    

भरहुत स्तूप और उसके अवशेष 




 

यात्रा  दिनाँक - 10 Jul 2021 

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मैहर धाम से अब रवाना होने का वक़्त था, मैहर मंदिर के दर्शन करने के पश्चात मैं मंदिर से नीचे उतर आया और एक ऑटो से बस स्टैंड पहुंचा। सतना के नजदीक चौमुखनाथ और भूमरा के ऐतिहासिक मंदिर हैं। चौमुखनाथ का मंदिर वाकाटक शासकों की पूर्ववर्ती राजधानी नचना कुठार में स्थित हैं। मेरा इस स्थान को देखने का बड़ा ही मन था। यह स्थान पन्ना और सतना के मध्य कहीं स्थित था। चौमुखनाथ का मंदिर बड़ा ही भव्य मंदिर है, मैं जानता था कि इस मंदिर की यात्रा, फेसबुक पर हमारे परम मित्र मुकेश पांडेय चन्दन जी कर आये हैं, इसलिए मैंने तुरंत उनसे संपर्क किया और यहाँ तक पहुँचने का मार्ग जाना। उन्होंने मुझे मार्ग तो बतला दिया किन्तु इस मंदिर तक पहुँचने के लिए मुझे आज पूरा दिन लगाना पड़ता इसलिए इस मंदिर को भविष्य पर छोड़ मैं भरहुत स्तूप के लिए बस में बैठ गया। 

Sunday, December 22, 2019

SANCHI AND CANCER TROPIC


साँची के स्तूप और कर्करेखा 



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    अपनी कलिंग विजय के दौरान जब सम्राट अशोक ने रणभूमि में भयंकर रक्तपात देखा, दोनों ओर की सेनाओं के वीर सैनिकों के शव और चारों ओर मची शोकभरी चीत्कार सुनकर उसका हृदय काँप उठा और मानसिक रूप से विचलित हो उठा। भयंकर रक्तपात और नरसंहार ने उसका सुकून छीन सा लिया था। एक राजा के लिए युद्ध लड़ना आवश्यक नहीं बल्कि उसकी मजबूरी होता है फिर चाहे वो युद्ध साम्राज्य वाद के लिए हो, अपने राज्य की रक्षा के लिए हो या फिर किसी राज्य को लूटने के उद्देश्य से हो परन्तु सम्राट अशोक के लिए इस युद्ध के पीछे क्या कारण था यह अज्ञात है किन्तु इस युद्ध के बाद उसका हृदय परिवर्तित हो गया और उसने हिंसा का मार्ग छोड़कर अहिंसा का मार्ग अपनाया और जिस धर्म ने उसे अहिंसा का मार्ग दिखलाया वह था बौद्ध धर्म। जिसकी शुरआत सम्राट अशोक ने साँची का स्तूप बनवाकर की। 

Monday, October 23, 2017

RAJGIR STOOP

UPADHYAY TRIPS PRESENTS


विश्व शांति स्तूप - राजगीर




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      जीवक का दवाखाना देखने के बाद हमारी घोड़ागाड़ी राजगीर के गिद्धकूट पर्वत की तरफ बढ़ चली।  कहा जाता है कि यही वो पर्वत है जिस पर बैठकर महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को उपदेश दिया था। उन्ही की याद में यहाँ एक विशाल स्तूप का निर्माण कराया गया है जो राजगीर स्तूप के नाम से जाना जाता है, इसे विश्व शांति स्तूप भी कहते हैं। यह पिकनिक के लिए बेहद खूबसूरत स्थान है यहाँ स्तूप तक जाने के लिए रोपवे की व्यवस्था है यह रोपवे एक सीट का है इसलिए यह अन्य रोपवे से थोड़ा अलग और एडवेंचर लगता है। स्तूप के चारों तरफ महात्मा बुद्ध की मूर्तियां स्वर्णिम रूप में व्यवस्थित हैं।