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Friday, September 1, 2023

KURUKSHETRA 2023 : STHANESHWAR TEMPLE & BHADRA KALI TEMPLE, DEVIKUP


स्थानेश्वर महादेव मंदिर एवं देवीकूप धाम 


कुरुक्षेत्र की भूमि, ना केवल पौराणिक ग्रंथों में विशेष महत्त्व रखती है बल्कि इसका भारत के प्राचीन इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। छटवीं शताब्दी में यहाँ पुष्यभूति वंश के महान सम्राट हर्षवर्धन का शासन रहा है जिनकी राजधानी कुरुक्षेत्र में स्थित थानेश्वर में ही थी। थानेश्वर शब्द, यहाँ स्थित स्थानेश्वर का ही अपभ्रंश है जो कि भगवान शिव का निवास माना जाता है।  

स्थानेश्वर मंदिर अत्यंत ही प्राचीन है और वर्धन काल में पुष्यभूति वंश के सम्राटों के कुलदेवता के रूप में विद्यमान हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों में हर्षवर्धन के पिता प्रभाकरवर्धन द्वारा इस मंदिर में पूजा का उल्लेख है। 

प्राचीन शक्ति पीठ श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित है। भद्रकाली मंदिर, जिसे श्री देवी कूप के नाम से भी जाना जाता है, 51 शक्ति पीठों में से एक है। यह शक्ति पीठ मंदिर माता भद्रकाली को समर्पित है, जो देवी काली के आठ रूपों में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी सती की दाहिनी एड़ी यहीं गिरी थी। महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान, पांडवों ने इसी भद्रकाली मंदिर में आशीर्वाद लिया था।














 













इस यात्रा के अन्य भाग 

Saturday, May 14, 2022

PURNAGIRI TEMPLE : UTTRAKHAND 2023

 शक्तिपीठ माँ पूर्णागिरि मंदिर 



आख़िरकार दो साल बाद, कोरोना जैसी महामारी को हराकर यात्राएँ फिर से शुरू हो चुकी थीं, इस वर्ष उत्तराखंड और हिमाचल में जैसे टूरिस्टों, तीर्थयात्रियों और घुमक्क्ड़ों की जैसे बाढ़ सी आ गई थी। उत्तराखंड के चारों धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के अलावा समूचे प्रदेश में हर  सड़क, हर होटल में यात्रियों का ताँता सा लगा हुआ था। हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे तीर्थ शहर हॉउसफुल हो चुके थे। आखिरकार लोगों को दो साल बाद प्रकृति से रूबरू होने का मौका जो मिला था। इसबीच मैंने भी अपना यात्रा प्लान उत्तराखंड की ओर ही बना रखा था और अंत में तय हुआ कि कुमाँयु में ही कोई यात्रा की जाए। 

मैं काठगोदाम और नैनीताल नहीं जाना चाहता था और पिछले कुछ समय से मेरा मन टनकपुर स्थित माँ पूर्णागिरि धाम के दर्शनों को बहुत व्याकुल हो रहा था। इस बार वहीँ जाने का विचार लेकर मैं रात को आगरा फोर्ट से रामनगर जाने वाली साप्ताहिक एक्सप्रेस में आकर बैठ गया और रात को 11 बजे ट्रेन के चलने के साथ ही इसकी खाली पड़ी सीट पर बिस्तर लगाकर सो गया। सुबह तक़रीबन तीन बजे जब मेरी आँख खुली तो देखा ट्रेन बरेली के स्टेशन पर खड़ी थी। मेरा गंतव्य यहाँ से अगले स्टेशन इज़्ज़त नगर तक ही था इसलिए इस ट्रेन को मैंने इज़्ज़त नगर पर छोड़ दिया और स्टेशन पर बने वेटिंग रूम में मैंने सुबह होने तक एक नींद और खींच ली। 

अब सुबह के सात बज चुके थे, वेटिंग रूम में ही मैं नहाधोकर तैयार हो गया और अब अपनी अगली यात्रा इज़्ज़त नगर से टनकपुर के लिए होनी थी। बरेली से टनकपुर के बीच सुबह एक डीएमयु ट्रेन चलती है। इसी ट्रैन का टिकट लेकर मैं टनकपुर की ओर रवाना हो चला। टनकपुर उत्तराखंड का आखिरी रेलवे स्टेशन है, जिसतरह देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर और काठगोदाम टर्मिनल रेलवे स्टेशन है ठीक उसी तरह टनकपुर भी उत्तराखंड का टर्मिनल स्टेशन है। कुछ समय पहले तक यहाँ सिर्फ मीटर गेज ट्रैन ही चलती थी किन्तु अब आमान परिवर्तन के बाद यहाँ ब्रॉड गेज लाइन बिछी और टनकपुर देश के कुछ मुख्य शहरों से जुड़ गया। पीलीभीत के बाद उत्तर प्रदेश की सीमा समाप्त हो जाती है और उत्तराखंड की झलक देखने को मिलती है। 

खटीमा उत्तराखंड का मुख्य शहर है जो हल्द्वानी के निकट स्थित है। पीलीभीत के बाद खटीमा ही टनकपुर रेल लाइन का बड़ा स्टेशन है जो प्राकृतिक सौन्दर्यता से निखरा हुआ है, इसके बाद ट्रेन जंगलों के बीच से होती हुई बनबसा पहुँचती है और इससे आगे हिमालय के पहाड़ दृष्टिगोचर होने लगते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ों की तलहटी में टनकपुर बसा हुआ है जो कि चम्पावत जिले में स्थित है। 

ट्रेन टनकपुर रेलवे स्टेशन पहुँच चुकी है, मैंने जिसप्रकार आज से पहले इस रेलवे स्टेशन की कल्पना की थी, उससे इसे परे ही पाया। स्टेशन परिसर के बाहर निकलते ही मुझे इसके मीटर गेज के होने के समय का एहसास सा हो गया। यह उत्तराखंड का आखिरी टर्मिनल रेलवे स्टेशन है जहाँ  ज्यादातर ट्रेनों का आवागमन नहीं है। 

रेलवे स्टेशन के आखिरी सिरे पर एक रेलवे फाटक है जिसके किनारे ही टनकपुर का बस स्टैंड है। इस बस स्टैंड से अन्य शहरों के लिए अनेकों बसें चलती हैं किन्तु अपने अपने समय पर। यहाँ हिमाचल प्रदेश की भी बस सेवा है जो शिमला से टनकपुर के बीच पूरी होती है। मेरे सामने ही हिमाचल की यह बस यहाँ आई और कुछ समय ठहरकर शिमला के लिए वापस चली गई। 

मैंने आज लोहाघाट जाने का प्लान बनाया था परन्तु समय की कमी के चलते मेरा यह प्लान फ्लॉप हो गया और मैंने आज माँ पूर्णागिरि मंदिर जाने का विचार बनाया जहाँ मैं लोहाघाट से लौटकर जाना चाहता था। टनकपुर से पूर्णागिरि की दूरी लगभग 23 किमी है जहाँ जाने के लिए अनेकों जीपें हर समय उपलब्ध रहती हैं। इन्हीं में से एक जीप के द्वारा मैं पूर्णागिरि पहुंचा। 

जीप वाले ने मुझे भैरव मंदिर के समीप उतार दिया। इसके बाद अब रास्ता पैदल का था और चढ़ाई भरा था। किन्तु यहाँ मुझे इस चढ़ाई भरे रास्ते में दोनोंतरफ अनेकों ऐसी दुकाने दिखीं जिनमें अनेकों गद्दे बिछे हुए थे, जिसका मतलब था यह यहाँ आने वाले भक्तों के विश्राम के लिए थे। ऐसी ही एक दुकान पर मैंने भी थोड़ी देर विश्राम किया और इस दुकानदार से यहाँ की अधिकांश जानकारी एकत्र की। थोड़ी देर पश्चात मैं यहाँ से आगे बढ़ चला। मैं जैसे जैसे आगे बढ़ता जा रहा था, रास्ता और भी कठिन और चढ़ाई भरा होता जा रहा था। आज इस यात्रा में मुझे वैष्णो देवी यात्रा की याद आ गई। 

पर्वत की चोटी पर देवी माता का एक छोटा सा मंदिर है, यह एक मुख्य शक्तिपीठ है और यहाँ की मान्यता है कि यहाँ सती की नाभि गिरी थी, जिससे यह स्थान एक प्रमुख शक्तिपीठ बन गया। माता के दर्शन कर अब मैं वापस हो चला। जब मैं पर्वत से उतरकर नीचे पहुंचा तो मुझे यहाँ मेरा चचेरा भाई यतेश मिला जो अपने परिवार सहित माता के दर्शन के लिए यहाँ आया था। मुझे यह पहले से पता नहीं था अन्यथा इस यात्रा को मैं अकेले नहीं बल्कि अपने भाई के साथ कर सकता था। परन्तु अब मेरी यात्रा पूर्ण हो चुकी थी, इसलिए भाई से विदा लेकर मैं वापस तनकपुर के लिए निकल पड़ा। 

शाम को चार बजे के लगभग मैं टनकपुर पहुंचा, यहाँ पहुंचकर मैंने थोड़ी देर बाजार घुमा और रेलवे स्टेशन पहुंचकर अपनी ट्रेन को देखा, जो पीलीभीत तक जाने के लिए तैयार थी। ट्रेन बिलकुल खाली पड़ी थी, यहाँ मैंने उत्तराखंड के जाम का आनंद लिया और अब ट्रैन भी चल पड़ी थी। रात को दस बजे तक मैं पीलीभीत पहुँच चुका था, यहाँ से मेरी अगली ट्रेन बरेली के लिए थी जो रात को साढ़े ग्यारह बजे चलेगी। मेरे पास डेढ़ घंटे का समय था। 

मैंने स्टेशन से बाहर निकलकर बाजार घूमा और एक दुकान पर जाकर रात्रि भोज किया। बरेली पहुंचकर मुझे रामनगर - आगरा एक्सप्रेस मिल गई जिससे मैं मथुरा पहुँच गया। 

जय माता दी  









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Saturday, February 5, 2022

SHRI KAILADEVI TEMPLE : KARAULI 2022


 श्री राजराजेश्वरी कैलादेवी मंदिर - करौली 


यात्रा दिनाँक :- 05 फरवरी 2022 

     भारतवर्ष में अनेकों हिन्दू देवी देवताओं के मंदिर हैं जिनमें भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग, भगवान विष्णु के चार धाम और आदि शक्ति माँ भवानी के 51 शक्तिपीठ विशेष हैं। इन्हीं 51 शक्तिपीठों में से एक है माँ कैलादेवी का भवन, जो राजस्थान राज्य के करौली जिले से लगभग 25 किमी दूर अरावली की घाटियों के बीच स्थित है। माँ कैलादेवी के मन्दिर का प्रांगण बहुत ही भव्य और रमणीय है। जो यहाँ एकबार आ जाता है उसका फिर लौटने का मन नहीं करता किन्तु सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के चलते भक्तों का यहाँ आने और जाने का सिलसिला निरंतर चलता ही रहता है। 

Saturday, July 10, 2021

SHARDA TEMPLE : MAIHAR 2021

मानसून की तलाश में एक यात्रा - भाग 1 

 शारदा माता के दरबार में - मैहर धाम यात्रा 


यात्रा दिनांक - 10 जुलाई 2021 

अक्सर मैंने जुलाई के महीने में बरसात को बरसते हुए देखा है किन्तु इसबार बरसात की एक बूँद भी सम्पूर्ण ब्रजभूमि दिखाई नहीं पड़ रही थी। बादल तो आते थे किन्तु हवा उन्हें कहीं और रवाना कर देती थी। काफी दिनों से समाचारों में सुन भी रहा था कि भारत के इस राज्य में मानसून आ गया है, यहाँ इतनी बारिश पड़ रही है  कि सड़कें तक भर चुकीं हैं। पहाड़ी क्षेत्रों से बादल फटने तक की ख़बरें भी सामने आने लगीं थीं किन्तु ब्रज अभी भी सूखा ही पड़ा था और समस्त ब्रजवासी गर्मीं से हाल बेहाल थे। इसलिए सोचा क्यों ना हम ही मानसून को ढूढ़ने निकल पड़ते हैं। मानसून के मौसम में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भला और कौन सी जगह उचित हो सकती थी इसलिए बघेलखण्ड और रतनपुर की यात्रा का प्लान बन गया। 

Sunday, April 29, 2018

CHINTPURNI DEVI : 2018


माँ चिन्तपूर्णी जन्मोत्सव
चिंतपूर्णी जन्मदिवस 



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        आज शनिवार है और २९ अप्रैल भी। हम माता चिंतपूर्णी के दर्शन हेतु एक लम्बी लाइन में लगे हुए थे। हमारी लाइन के अलावा यहाँ एक और भी लाइन लगी हुई थी। इस लाइन के व्यक्ति भी माता के दर्शन हेतु ही प्रतीक्षारत थे।  कई घंटे लाइन में लगे रहने के बाद हम मंदिर के बाहर बने बाजार तक पहुंचे।  यहाँ हमें दर्शन हेतु एक पर्ची दी गई।  इस पर्ची का पर्याय यही था कि आप बिना लाइन के माता रानी के दर्शन नहीं कर सकते। पर्ची लेने के बाद भी लेने ज्यों की त्यों ही थी। जब काफी समय हो गया और मुझे गर्मी सी मह्सूस होने लगी तो मैं पास की दुकान में पंखे की हवा खाने चला गया। दुकान में बैठना था इसलिए एक कोक भी पीली। तबतक मेरे अन्य सहयात्री लाइन में काफी आगे तक आ चुके थे। 

Saturday, April 28, 2018

JWALA DEVI : 2018


माँ ज्वालादेवी जी की शरण में

जय माँ ज्वालदेवीजी 


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        काफी देर रानीताल पर खड़े रहने के बाद एक पूरी तरह से ठठाठस भरी हुई एक बस आई, जैसे तैसे हम लोग उसमे सवार हुए और ज्वालाजी पहुंचे।  ये शाम का समय था जब हम ज्वालाजी मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के अंदर से मंदिर की तरफ बढ़ रहे थे। बाजार की रौनक देखने लायक थी। मंदिर के नजदीक पहुंचकर हमने एक कमरा बुक किया। कमरा शानदार और साफ़ स्वच्छ था। कुमार किसी दूसरे होटल में अपने परिवार के साथ रूका हुआ था।  नगरकोट की तरह यहाँ भी लाडोमाई जी की गद्दी है।  बड़े मामा और किशोर मामा अपने परिवार के साथ उनके यहाँ रूकने को चले गए।  शाम को सभी लोग मंदिर पर मिले, सबसे अंतिम दर्शन करने वाले मैं और माँ ही थे। इसके बाद मंदिर बंद हो चुका था।

Chamunda Devi : 2018



माँ चामुंडा के दरबार में वर्ष - २०१८

चामुंडा 2018 


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         काँगड़ा से बस द्वारा हम चामुंडा पहुंचे, बस वाले ने हमें ठीक चामुंडा के प्रवेश द्धार के सामने ही उतारा था। यहाँ मौसम काँगड़ा की अपेक्षा काफी ठंडा था और बादल भी हो रहे थे। यह मेरी और माँ की चामुंडा देवी के दरबार में तीसरी हाजिरी थी। पिछले वर्षों की तुलना में यहाँ आज कार्य प्रगति पर था मंदिर के सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है, जब मैं और माँ यहाँ 2010 में आये थे तब यह अत्यंत ही खूबसूरत था परन्तु अत्यधिक बरसात होते रहने के कारण यहाँ बनी मुर्तिया और तालाब अब थोड़े से धूमिल हो चुके थे परन्तु मंदिर की शोभा और गलियारा आज भी वैसा ही है। चामुंडा देवी की कथा का विवरण मैंने अपनी पिछली पोस्टों में किया है। हम सभी मंदिर के बाहर बने प्रांगण में बैठे हुए थे।  माँ को यहाँ शरीर में सूजन थोड़ी ज्यादा आ गई थी इसलिए मंदिर के प्रांगण में बने सरकारी चिकित्सालय से माँ को मुफ्त कुछ दवाइयां दिलवा लाया।

Sunday, October 22, 2017

Tarachandi Devi Temple

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

माँ ताराचंडी देवी शक्तिपीठ धाम




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           मैं रात दो बजे सासाराम स्टेशन उतर गया था, यहाँ आकर स्टेशन पर बने एक बोर्ड पर मैंने देखा कि यहाँ ताराचंडी देवी का शक्तिपीठ धाम है। सासाराम के बारे में कहा जाता है कि यह महान ऋषि परशुराम की भूमि है। सहस्रराम, सहसराम, सासाराम = परशुराम। रात को तो स्टेशन पर बने ब्रिज पर मैं सो गया परन्तु सुबह पांच बजे में उठकर देवी ताराचंडी की तरफ निकल गया। स्टेशन से इस दिव्यधाम की दूरी मात्रा पांच किमी ही है सोचा था पैदल ही नाप दूंगा।

Saturday, February 1, 2014

UJJAIN 2014

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S



     उज्जैन दर्शन ( अवंतिकापुरी )


 उज्जैन जंक्शन 


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       सुबह पांच बजे ही मैं और माँ तैयार होकर उज्जैन दर्शन के लिए निकल पड़े। अपना सामान हमने वेटिंगरूम में ही छोड़ दिया था। सबसे पहले हमें महाकाल दर्शन करने थे, आज दिन भी सोमवार था। यहाँ महाकालेश्वर के अलावा और भी काफी दर्शनीय स्थल हैं। महाकाल के दर्शन के बाद हमने एक ऑटो किराए पर लिया और ऑटो वाले ने हमें दो तीन घंटे में पूरा उज्जैन घुमा दिया। आइये अब मैं आपको उज्जैन के दर्शन कराता हूँ ।  


Monday, September 2, 2013

MAIHAR 2013

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S


माँ शारदा देवी के दरबार में - मैहर यात्रा 

MAIHAR RAILWAY STATION


     मैहर धाम, इलाहाबाद - जबलपुर रेलवे लाइन पर मैहर स्टेशन के समीप है। माना जाता है कि यहाँ रात को पहाड़ पर देवी के मंदिर पर कोई भी नहीं रुक सकता है, यहाँ के लोगों का मानना है यहाँ आल्हा जो कि ऊदल के भाई होने के साथ साथ एक वीर योद्धा भी थे, आज भी देवी माँ कि पूजा सबसे पहले करने आते हैं। यह शक्तिपीठ बुंदेलखंड में स्थित है और आल्हा की भक्ति को समर्पित है। यहाँ आल्हा ने अपना सर काटकर देवी माँ के चरणों में चढ़ाया था। जिस कारण मंदिर कि सीढ़ियाँ चढ़ने से पहले आल्हा कि मूर्ति के दर्शन होते हैं जो भाला लिए हाथी पर सवार हैं।