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Saturday, February 22, 2020

CHANDERI 2020 : JAKHLAUN TO CHANDERI


चंदेरी - एक ऐतिहासिक नगर भाग - 1




   मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में और उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के नजदीक स्थित चंदेरी एक पौराणिक और ऐतिहासिक नगर है। माना जाता है इसे महाभारतकालीन शासक शिशुपाल ने बसाया था जो भगवान श्री कृष्ण के समकालीन थे और उनकी बुआ के पुत्र थे। यह चंदेरी कालान्तर में बूढ़ी चंदेरी के नाम से प्रसिद्ध है जिसके अवशेष वर्तमान अथवा नई चंदेरी कुछ दूरी पर देखने को मिलते हैं। चारों तरफ से छोटे बड़े पहाड़ों से घिरी चंदेरी शुरू से ही भारतीय स्थान में अपनी अमिट छाप बनाये हुए है और अपनी ऐतिहासिक धरोहरों से सहज ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।


Friday, June 14, 2019

BRAJYATRA : RAWAL DHAM


राधारानी का जन्मस्थल - ग्राम रावल 



 गोकुल से 6 किमी दूर यमुना नदी के किनारे रावल ग्राम स्थित है जिसके बारे में प्रचलित है कि यह ब्रज की अधिष्ठात्री देवी श्री राधा रानी जन्म स्थल है। यह स्थान राधारानी का ननिहाल है जहाँ महाराज वृषभान की पत्नी कीर्ति प्रतिदिन यमुना स्नान करने के बाद सूर्यदेव की आराधना करती और एक पुत्री होने कामना करतीं। एक दिन यमुना में खिलने वाले कमल पर उन्हें एक सुन्दर कन्या की प्राप्ति हुई। यही कन्या आगे चलकर राधारानी के नाम से जानी गई और भगवान श्री कृष्ण की प्रिय बनी।

Tuesday, December 4, 2018

Kalinger Fort



कालिंजर किले की तरफ एक सफर





सहयात्री - गंगा प्रसाद त्रिपाठी जी

       पिछली साल जब सासाराम गया था तब वहां मैंने शेरशाह सूरी के शानदार मकबरे को देखा था और वहीँ से मुझे यह जानकारी भी प्राप्त हुई थी कि उसने अपना यह शानदार मक़बरा अपने जीवनकाल के दौरान ही बनबा लिया था। सम्पूर्ण भारत पर जब मुग़ल साम्राज्य का वर्चस्व कायम हो रहा था उनदिनों मुग़ल सिंहासन पर हुमाँयु का शासनकाल चल रहा था और उन्हीं दिनों हूमाँयु के पिता और मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर ने बिहार में एक आम सैनिक को अपनी सेना में भर्ती किया, इस सैनिक की युद्ध नीति और कुशलता को देखते हुए बाबर ने इसे अपना सेनापति और बिहार का सूबेदार नियुक्त कर दिया था। तब बाबर ने यह सपने में भी नहीं सोचा था कि यही आम सैनिक आगे चलकर बाबर द्वारा स्थापित किये गए मुग़ल साम्राज्य को समाप्त कर अपना राज्य स्थापित करेगा और उसके बेटे हूमाँयु को हिंदुस्तान छोड़ने पर मजबूर कर देगा।

Friday, June 29, 2018

Nadrai Bridge


काठगोदाम से मथुरा - आखिरी पड़ाव नदरई पुल, कासगंज। 




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   सोरों देखने के बाद हम अपने आखिरी पड़ाव कासगंज पहुंचे। वैसे तो कासगंज कुछ समय पहले तक एटा जिले का ही एक भाग था परन्तु अप्रैल 2008 में इसे उत्तर प्रदेश का 71वां जिला बना दिया गया। बहुजन समाजवादी पार्टी के संस्थापक कांशीराम की मृत्यु वर्ष 2006 में हो गई थी उन्हीं की याद में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने इसे कांशीराम नगर के नाम से घोषित किया गया। कासगंज पूर्वोत्तर रेलवे का एक मुख्य जंक्शन स्टेशन है जहाँ से बरेली, पीलीभीत, मैलानी तथा फर्रुखाबाद, कानपुर और लखनऊ के लिए अलग से रेलवे लाइन गुजरती हैं। हालाँकि कासगंज गंगा और यमुना के दोआब में स्थित होने के कारण काफी उपजाऊ शील जिला है यहाँ की मुख्य नदी काली नदी है। 

Soron Sookar Kshetra


काठगोदाम से मथुरा - सोरों शूकर क्षेत्र




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     गंगा स्नान के बाद हमारा अगला पड़ाव सोरों शूकर क्षेत्र था।  इस क्षेत्र को शूकर क्षेत्र इसलिए कहते हैं क्योंकि यहाँ भगवान विष्णु के दूसरे अवतार श्री वराह भगवान का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। भगवान विष्णु ने पृथ्वी को दैत्यराज हिरण्याक्ष से बचाने के लिए ब्रह्मा जी की नाक से वराह के रूप में प्रकट होकर पृथ्वी की रक्षा की थी। जब दैत्यराज हिरण्याक्ष पृथ्वी को समुद्र के रसातल में छुपा आया तब भगवान वराह ने अपनी थूथनी की सहायता से पृथ्वी का पता लगाया और समुद्र में जाकर हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी को अपने दाँतों पर रखकर बाहर आये।

Ganga in Kachhla


काठगोदाम से मथुरा - कछला घाट 



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      कछला घाट पहुंचकर देखा तो रेलवे ने अपना वाला पुराना मार्ग बंद कर दिया है जहाँ से कभी रेलमार्ग और सड़कमार्ग एक होकर गंगा जी को पार करते थे। सड़क मार्ग अलग हो गया, मीटरगेज मार्ग भी बंद हो गया परन्तु पब्लिक है कि आज भी रेलवे के बिज के नीचे ही गंगा जी में नहाना पसंद करती है।  लोग आज भी अपनी उस आदत को नहीं बदला पाए जिसपर वर्षों से वे और उनके पूर्वज चलते आ रहे थे।  इसलिए जब रेलवे ही बदल गई तो मजबूरन लोगों की रेलवे ब्रिज की तरफ जाने की आदत को रेलवे ने ब्लॉक् कर दिया। अब मजबूरन लोगों को कछला नगर की तरफ से होकर ही गंगाजी में स्नान करने जाना पड़ता है और हमें भी जाना पड़ा। 

Wednesday, June 27, 2018

Moradabad Railway Station



 मथुरा से मुरादाबाद - एक बाइक यात्रा



       जून की गर्मी मेरे बर्दाश्त से बाहर थी, काम करते हुए भी काफी बोर हो चुका था, इस महीने का और मई का टारगेट इस महीने पूरा कर ही लिया था इसलिए अब कहीं घूमने जाने का विचार मन में आ रहा था, सोचा क्यों न अबकी बार बद्रीनाथ बाबा के दर पर हो ही आएं और हाँ इसबार केनन का एक कैमरा भी ले लिया था फ्लिपकार्ट से। जिस दिन कैमरा हाथ में आया उसी दिन बाइक और वाइफ को लेकर निकल पड़ा।

       मथुरा से बद्रीनाथ जी की दूरी लगभग 600 किमी के आसपास थी, रास्ता रामनगर होते हुए चुना गया और उसी तरफ बाइक को भी मोड़ दिया गया। मथुरा से निकलकर पहला स्टॉप बिचपुरी पर लिया, यहाँ एक नल लगा हुआ है जिसका पानी अत्यंत ही मीठा है और हर आने जाने वाला यात्री इस नल से पानी पीकर अपनी प्यास अवश्य बुझाता है। कल्पना कुछ आम और घर से खाना बनाकर लाई थी, यहाँ आकर भोजन किया और आम ख़राब हो गए तो यहीं छोड़ दिए। बिचपुरी से एक रास्ता अलीगढ की तरफ जाता है और दूसरा हाथरस होते हुए बरेली की ओर।

Saturday, March 31, 2018

Kachhala bridge



यात्रा दिनांक - 31 मार्च 2018 

 पूर्णिमा पर गंगा स्नान - कछला ब्रिज 

कछला ब्रिज - मीटरगेज का स्टेशन 


       चूँकि आज पूर्णिमा थी और मुझे मेरे घर के लिए गंगाजल की आवश्यकता भी थी इसलिए शनिवार की छुट्टी भी थी तो चल दिया आज गंगा स्नानं करने कछला की ओर। आज मेरी कमलेश बुआजी भी अपने गांव अमोखरि जा रही थी तो दोनों चल दिए सुबह सबेरे पांच बजे मथुरा स्टेशन की ओर। स्टेशन पर बाइक खड़ी कर सीधे ट्रेन की तरफ पहुंचे। आगरा कैंट - कोलकाता एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर खड़ी हुई थी और चलने ही वाली थी, सही वक़्त पर पहुंचकर हमने ट्रेन में सीट में जगह पा ली।  यह वही ट्रेन है जिससे मैं कुछ महीनों पहले बिहार की यात्रा पर गया था, आज इस ट्रेन में यात्रा का मेरा दूसरा मौका था। ट्रेन मथुरा से चलकर सीधे हाथरस सिटी  रुकी, बुआजी यहीं उतर गई, अब आगे की यात्रा मुझे अकेले ही करनी थी। 

Thursday, March 15, 2018

Laakhnu Fort



लाखनूं किले के अवशेष और रियासत

        हाथरस उत्तर प्रदेश का एक छोटा शहर है परन्तु यह शहर अनेक छोटी छोटी रियासतों के कारण इतिहास में काफी योगदान रखता है।  पर्यटन दृष्टि से देखा जाए तो हाथरस में आज सबसे ऊँची चोटी पर स्थित दाऊजी महाराज का भव्य मंदिर है जहाँ देवछठ के दौरान विशाल मेला लगता है। कई बड़े बड़े राजनीतिक लोग, बॉलीवुड सितारे इस मेले के दौरान यहाँ देखे जा सकते हैं। दाऊजी महाराज का मंदिर अंग्रेजों के समय का बना हुआ है उस समय यहाँ हाथरस का विशाल किला स्थित था, किला तो अब नष्ट हो चुका है किन्तु  इसमें बना दाऊजी का विशाल मंदिर आज भी ज्यों का त्यों खड़ा है। यह दाऊजी की ही शक्ति है कि इस मंदिर को गिराने के लिए अंग्रेजों ने अनेक तोपों से गोले दागे परन्तु वह गोले मंदिर की दीवारों में जाकर धँस जाते थे। परन्तु मंदिर का बालबांका भी न कर सके। अंग्रेज भी हार गए दाऊजी की शक्ति के आगे और अपनी हार मानकर चलते बने। आज भी इस मंदिर की दीवारों पर तोपों के गोलों के निशान स्पष्ट देखे जा सकते हैं।

Tuesday, August 29, 2017

DAUJI TEMPLE : HATHRAS



देवछठ - श्री दाऊजी महाराज का प्रसिद्ध ऐतिहासिक मेला,  हाथरस यात्रा 


     आज मेरा मूड ज्यादा खराब था इसलिए ऑफिस नहीं गया, बस यूही बाइक उठाई और घर से निकल गया। ये नहीं पता था कि जाना कहाँ है। चलते चलते मन में विचार आया कि बिजली का बिल ही आज जमा कर आऊं, सीधे एटीएम पहुँचा और फिर बिजली विभाग के दफ्तर। यहाँ बहुत लम्बी लाइन लगी हुई थी, यह देखकर मोबाइल पर मौका आजमाया। मौका बिलकुल फिट बैठा,  लो... जी हो गया पहलीबार ऑनलाइन बिल जमा। अब किसी लाइन में लगने की कोई जरुरत ही नहीं थी।