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Thursday, August 31, 2023

MATHURA TO THANESAR : KURUKSHETRA 2023

 मथुरा से थानेश्वर - एक रेल यात्रा 


सितम्बर का महीना चल रहा है जिसका मतलब ना अधिक सर्दी है और ना अधिक गर्मी है और अब बरसात भी थम सी चुकी है। यह यात्रा करने का सर्वोत्तम समय है इसलिए मैंने इस बार हरियाणा की यात्रा को महत्त्व देते हुए कुरक्षेत्र की यात्रा का मन बनाया। यहाँ प्रसिद्ध रणभूमि है जहाँ महाभारत का विशाल युद्ध हुआ था, यहीं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद भगवद गीता का ज्ञान दिया था। इस पुण्य स्थान की यात्रा मेरे ब्लॉग में होनी चाहिए थे इसलिए मैंने इस यात्रा को पूर्ण किया। 

शाम को मैं मथुरा रेलवे स्टेशन पहुंचा और आगरा छावनी से होशियारपुर जाने वाली ट्रैन में बैठा। रात बारह एक बजे अम्बाला पहुँच गया क्योंकि यह ट्रैन कुरुक्षेत्र पर नहीं रुकी। अम्बाला से कुरक्षेत्र वापसी के लिए मैं कालका मेल में बैठा जिसमे टिकट चल दस्ते वालों ने मुझसे मेरा टिकट माँगा। चूँकि मैं सिर्फ कुरुक्षेत्र तक जा रहा था, इसलिए स्टाफ बोलकर उनसे बैठने की रिक्वेस्ट की। उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा। 

मैं कुरुक्षेत्र उतरगया, अभी सुबह होने में काफी समय था इसलिए यहीं प्लेटफॉर्म पर एक बेंच पर सो गया। अगली सुबह जब उठा तो कैथल जाने वाली पैसंजर तैयार खड़ी हुई थी। इसी ट्रेन से मैं थानेसर आ गया जो ब्रह्म कुंड के बिलकुल नजदीक था। 


















अगला भाग - ब्रह्म सरोवर 

इस यात्रा के अन्य भाग 

Saturday, July 29, 2023

UJJAIN CITY AND KSHIPRA RIVER

 अवंतिका से मालवा की एक मानसूनी यात्रा - भाग 1 

उज्जैन में रामघाट पर क्षिप्रा स्नान 

यात्रा दिनाँक : - 29 जुलाई 2023 

    मानसून का मौसम यात्रा करने के लिए सबसे उपयुक्त और बेहद सुहावना मौसम होता है। मानसून के दौरान किसी भी स्थान की सुंदरता अपने पूर्ण चरम पर होती है और यही सुंदरता एक सैलानी के मन को यात्रा के दौरान उत्साह और आनंद से भर देती है। हम इसी मानसून में गत माह कोंकण और मालाबार की यात्रा पर गए थे जहाँ हमने केरला की राजधानी तिरुवनंतपुरम तक की यात्रा पूर्ण की थी, 

इसी यात्रा में वापसी के दौरान हम केरल के मालाबार तट, पुडुचेरी के माहे नगर, कर्नाटक के मुरुदेश्वर, गोवा की राजधानी पणजी और ओल्ड गोवा एवं कोंकण रेलवे की यात्रा पूर्ण करके घर वापस लौटे थे। किन्तु मानसून अभी भी बरक़रार था और यह हमें फिर से उत्साहित कर रहा था एक और नई यात्रा करने के लिए। 

...  

   मैं पिछले कई वर्षों से मानसून के दौरान प्राचीन राज्य मालवा और इसकी मध्यकालीन राजधानी मांडू की यात्रा करना चाहता था। ऑफिस में बैठे बैठे मैंने इस यात्रा का प्लान तैयार किया और अपने सहकर्मी सोहन भाई को इस यात्रा में अपना सहयात्री चुना। सोहन भाई इस यात्रा के लिए तुरंत तैयार हो गए और हमारा यात्रा प्लान अब कन्फर्म हो गया। 

मैंने इस यात्रा को प्राचीन अवन्ति, अर्थात उज्जैन से शुरू करके इंदौर, महेश्वर और मांडू तक पूरा करने का निर्णंय लिया जिसमें अधिकांश मालवा का भाग शामिल था। वर्तमान में यह मध्य प्रदेश कहलाता है, और प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण एवं  अनुपम दृश्यों से भरपूर है। 

Saturday, July 1, 2023

KERLA SAMPARK KRANTI EXP : MAO TO MTJ

 UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 15 

केरला संपर्क क्रांति एक्सप्रेस - मडगांव से मथुरा 

1 जुलाई 2023 

हम शाम होने तक मडगांव रेलवे स्टेशन आ गए थे। यहाँ से हमारा रिजर्वेशन मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस में था, जो रात को दो बजे के लगभग यहाँ आएगी। अभी रात के नौ बजे हैं, हम प्लेटफॉर्म पर बने खानपीन की स्टॉल पर गए और यहाँ कुछ इडली और डोसा खाकर हमने अपने रात्रिभोज को पूर्ण किया, इसके बाद क्लॉक रूम से अपना बैग लेकर अब घर लौटने की तैयारी करने लगे। अब हम अपनी यात्रा के अंतिम चरण में थे, और गोवा आकर हमारी यात्रा पूर्ण हो चुकी थी, अब वापसी यात्रा की बारी थी। 

तभी रेलवे से सन्देश प्राप्त हुआ कि मंगला एक्सप्रेस में हमारी सीट आरएसी में ही रह गई थी। अब ट्रेन बदलने की प्लानिंग मेरे दिमाग में और तेज हो गई। दरअसल मंगला एक्सप्रेस में मुझे RAC सीट मिली जो मेरे लिए पर्याप्त नहीं थी, मंगला एक्सप्रेस वाया भुसावल, भोपाल होकर मथुरा आती है, इस वजह से यह एक लम्बी यात्रा करती है जिसमें समय भी बहुत अधिक लगता है। 

मैंने मोबाइल में रेलवे ऍप्स क्रिस पर यहाँ से दिल्ली जाने वाली गाड़ियों के बारे में जानकारी ली जिसमें मुझे पता चला रात को साढ़े बारह बजे तक केरला संपर्क क्रांति एक्सप्रेस आ रही है जो सीधे दिल्ली जाने के लिए एक सुपरफास्ट ट्रेन है। इसका चार्ट बन चुका था, इसलिए इसमें तत्काल में भी रिजर्वेशन करना संभव नहीं था। 

अतः एप्प में मैने ट्रेन की कोच पोजीशन देखी, जिसमें ट्रेन के अंत में अनेकों सामान्य कोच थे, और इसके बाद इस ट्रेन का शेडूअल देखा। मैंने दो सामान्य टिकट कोटा स्टेशन तक के लिए ले ली, क्योंकि कि इस ट्रेन का स्टॉप कोटा के बाद सीधे निजामुद्दीन ही था, यह मथुरा नहीं रुकने वाली ट्रेन है। इसलिए मैंने इस ट्रेन से कोटा तक आने का विचार किया था, उसके बाद वहाँ से तो मथुरा की अनेकों ट्रेनें हैं, कोई न कोई तो मिल ही जाएगी। मंगला एक्सप्रेस की टिकट कैंसल कर दी और अब केरल संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से हमारी यात्रा निश्चित हो गई। 

Friday, June 30, 2023

MATSAYGANDHA EXPRESS : MRDW TO MAO

UPADHYAY TRIPS PRESENT'

 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 12  

मत्सयगंधा एक्सप्रेस और मडगांव स्टेशन पर एक रात  

30 जून 2023 

मैंने मत्सयगंधा एक्सप्रेस में मुर्देश्वर से मडगांव तक शयनयान कोच में आरक्षण करा रखा था। मुर्देश्वर स्टेशन शाम को साढ़े पांच बजे हम इस ट्रेन में सवार हुए, हमारी सीट साइड लोअर और साइड उपर थी, जोकि हमारे आगमन तक हमें खाली ही मिली। यह पहलीबार था जब मुझे मेरी साइड लोअर सीट खाली मिली हो अन्यथा अधिकतर यात्रियों में मुझे मेरी सीट पर कोई ना कोई बैठा अवश्य मिलता है। यह ट्रेन मंगलुरु सेंट्रल से चलकर मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनल जा रही थी, हमारे आसपास बैठी सभी सवारियां मुंबई ही जा रही थीं। 

मुर्देश्वर से निकलने के बाद मौसम में भी काफी परिवर्तन हो गया। यहां काफी तेज बारिश थी और बाहर का सबकुछ दिखना लगभग बंद सा हो गया था। शाम का समय और उसपर जोरदार बारिश हो उस समय एक कप चाय मिल जाये तो उसके आनंद ही अलग होते हैं। ट्रेन में ही एक वेंडर से मैंने दो कप चाय लीं, एक कल्पना को दी और एक मैंने पी। आज के इस मत्सयगंधा एक्सप्रेस की यात्रा के एक अलग ही आनंद थे। 

KONKAN RAILWAY : MANGALURU CENTRAL TO MURDESHWAR

  UPADHYAY TRIPS PRESENT'

 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 10

मंगलूरु सेन्ट्रल से मुर्देश्वर : कोंकण रेलवे में पैसेंजर रेल यात्रा 


30 JUN 2023

मंगलुरु सेंट्रल स्टेशन पर रात्रि विश्राम के बाद हम अगली सुबह प्लेटफॉर्म न 2 पर पहुंचे। यहाँ मंगलुरु - मडगांव पैसेंजर तैयार खड़ी हुई थी। यह सुबह साढ़े पांच बजे यहाँ से प्रस्थान करेगी। इस ट्रेन से यात्रा करने का हमारा एक मुख्य कारण था क्योंकि यह मंगलुरु से निकलने के बाद कोंकण रेलवे क्षेत्र से होकर गुजरती है, और यह कोंकण का वह क्षेत्र है जो रात के अँधेरे की वजह से इसे हम यहाँ आते समय नहीं देख सके थे। 

सही साढ़े पांच बजे ट्रेन मंगलुरु सेंट्रल से रवाना हो गई, अभी दिन निकला नहीं था और अभी बहार अँधेरा ही था। हम जिस कोच में बैठे थे वो पूरी तरह से खाली पड़ा हुआ था। फ़िलहाल इस कोच में यात्रा करने वाले केवल हम दो ही यात्री थे। मंगलुरु नगर के मध्य से गु जरती हुई यह ट्रेन मेंगलुरु जंक्शन रेलवे स्टेशन पहुंची। 

मंगलुरु जंक्शन, मंगलुरु नगर का एक मुख्य जंक्शन रेलवे स्टेशन है। अधिकतर ट्रेनें यहीं होकर गुजरती हैं, यह केरल से दिल्ली रेलवे लाइन पर स्थित है और यहाँ से एक रेलवे लाइन पश्चिमी घाटों के पर्वतों को पार करती हुई मैसूर निकट हासन जंक्शन के लिए भी जाती है। मैंने अभी इस रेल लाइन पर यात्रा नहीं की है किन्तु इस रेल लाइन मुझे एकबार अवश्य ही यात्रा करनी है। इस स्टेशन से कुछ सवारियां हमारे कोच में सवार हुईं किन्तु अभी भी हमारा वाला कूपा खाली ही पड़ा था। कल्पना ने यहाँ चाय की इच्छा व्यक्त की तो मैं स्टेशन की स्टाल से दो चाय ले आया। जल्द ट्रेन यहाँ से रवाना हो चली। 

Thursday, June 29, 2023

A NIGHT AT MANGLURU RAILWAY STATION

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 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 9

मंगलुरु सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक रात 


यात्रा दिनाँक :- 29 जून 2023

शाम के 5 बजे के आसपास हम माहे रेलवे स्टेशन पर थे। हमें यहाँ से मंगलौर जाना था और आज रात मंगलौर में ही रुककर कल सुबह पुनः कोंकण रेलवे की यात्रा आरम्भ करेंगे। माहे से हमारा रिजर्वेशन परसुराम एक्सप्रेस में था जिसकी आने की उदघोषणा हमें अब सुनाई देने लगी थी।

 जल्द ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आ भी गई, इस ट्रेन में कुर्सीयान कोच था, हमारी सीट खिड़की के तरफ वाली थी जिस पर पहले से ही कुछ सवारियां बैठीं थीं। हमारे सीट पर पहुँचते ही वे लोग बिना कहे ही उठ गए और हमारे लिए सीट खाली कर दी। यह देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई कि यहाँ लोग नियम और दूसरों की आवश्यकताओं का कितना ध्यान रखते हैं, हमारे उत्तर भारत में ऐसा नहीं होता, खासतौर पर हमारे उत्तर प्रदेश में। 

वहां तो आपकी सीट पर अगर कोई बैठा है तो वो आसानी से नहीं उठेगा जब तक आप उसे चार खरी खोटी सुना नहीं दोगे और मुश्किल से जब वो उठ भी जायेगा तो बेवजह की बड़बड़ाहट करता हुआ उठेगा। 

खैर यह केरल प्रदेश है, साक्षरता में यूँहीं भारत में प्रथम स्थान पर नहीं है। यहाँ के पुरुष की अपेक्षा यहाँ की महिलाएं अत्यधिक साक्षर हैं जोकि उत्तर भारत में सामान्य तौर पर कदापि नहीं हैं। ट्रेन माहि रेलवे स्टेशन से रवाना हो चली है और अब हम मालाबार के इस क्षेत्र में मानसून की इस रेल यात्रा का आनंद उठा रहे हैं। 

मालाबार का यह रेल क्षेत्र भी कुछ कुछ कोंकण रेलवे जैसा ही दिखाई देता है क्योंकि कोंकण की तरह ही यहाँ एक तरफ समुद्र है और दूसरी तरफ पश्चिमी घाट की पर्वत माला, इसके अलावा यहाँ अनेकों नदियां हैं जिनके पुलों से होकर ट्रेन बार बार गुजरती है, किन्तु यहाँ सुरंगें नहीं हैं। कोंकण रेलवे में सुरंगों की भरमार है किन्तु मालाबार में नदियों की। 

MAHE - A BEUTIFULL CITY OF WEST PUDUCHERRY

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 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 8

 माहे - पश्चिमी पुडुचेरी का एक सुन्दर नगर 


 यात्रा दिनाँक :- 29 जून 2023 

     सोलहवीं शताब्दी में फ्रांसीसियों ने भारत के पूर्वी तट पर अपनी बस्तियां और औद्योगिक इकाइयां स्थापित की। उन्होंने पांडिचेरी नाम का एक नया नगर बसाया। प्राचीन काल में पांडिचेरी का नाम वेदपुरी था, जहाँ के बारे में जनश्रुति है कि यहाँ अगस्त ऋषि का आश्रम था। पूर्वी तट के बाद भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मालाबार के कुछ क्षेत्र को भी फ्रांसीसियों ने अपने व्यापार के लिए चुना और यहाँ अपनी बस्तियां स्थापित की। यही स्थान आज माहि कहलाता है जो एक ओर से समुद्र, और बाकी ओर से केरल राज्य के जिलों से घिरा हुआ है। इस जिले का नाम यहाँ बहने वाली माहि नदी के नाम पर रखा गया है। 

दोपहर के आसपास हम एरनाड एक्सप्रेस से माहे रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहाँ घूमने के लिए हमारे पास अभी शाम तक का समय था क्योंकि यहाँ से आगे की यात्रा के लिए हमारा रिजर्वेशन परशुराम एक्सप्रेस में था जो यहाँ शाम को छः बजे के बाद आएगी। 

माहि मालाबार के तट पर केंद्रशासित राज्य पुडुचेरी का यह एक छोटा सा नगर है जिसका क्षेत्रफल कुल 9 किमी का है। माहे रेलवे स्टेशन एक छोटा रेलवे स्टेशन है, हमें यहाँ अपना बैग जमा करने के लिए क्लॉक रूम की सुविधा नहीं मिली। हम जैसे ही स्टेशन से बाहर निकले, तो हमें ऑटो वालो ने घेर लिया और वह मलयालम भाषा में पता नहीं कहाँ जाने की कह रहे थे। 

हमें माहे में कहाँ घूमना था, यहाँ क्या देखना था, इसके बारे में हमें कुछ भी ज्ञात नहीं था, बस इतना पता था कि यहाँ समुद्र है और अवश्य ही यहाँ बीच भी होगा। इसके अलावा हमारे यहाँ आने का मुख्य कारण था, कि मैं पुडुचेरी के इस छोटे से नगर की यात्रा करके इसे अपनी यात्रा सूची में शामिल करना चाहता था, क्योंकि इसके बाद पुडुचेरी के बाकी तीन नगर और शेष बचेंगे जो भारत के पूर्वी तट यानी कि बंगाल की खाड़ी के किनारे थे। एक आंध्र प्रदेश में और बाकि तमिलनाडू राज्य की सीमा के आसपास। 

NIL TO MAHE : MANSOON RAILWAY TRIP 2023

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 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 7 

 निलंबूर रोड से माही - केरला में एक रेल यात्रा 


सन 1840 में, अंग्रेजों ने  लकड़ी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नीलांबुर में सागौन का बागान बनाया। 1923 में, साउथ इंडियन रेलवे कंपनी, जो मद्रास-शोरानूर-मैंगलोर लाइन का संचालन करती थी, को मद्रास प्रेसीडेंसी द्वारा नीलांबुर से शोरानूर तक रेलमार्ग बनाने का अनुबंध दिया गया था ताकि इन जंगलों से मैदानी इलाकों तक और  बंदरगाहों  के लिए लकड़ी का आसान परिवहन सुनिश्चित किया जा सके। 

कंपनी ने तीन चरणों में इस रेलमार्ग का निर्माण पूर्ण किया। शोरानूर से अंगदिप्पुरम रेल खंड 3 फरवरी 1927 को, अंगदिप्पुरम से वानियम्बलम 3 अगस्त 1927 को खोला गया और शोरानूर से नीलांबुर तक का पूरा खंड 26 अक्टूबर 1927 को खोला गया। 1941 में इस लाइन का अस्तित्व समाप्त हो गया। देश की स्वतंत्रता पश्चात, जनता के दबाव के बाद, भारतीय रेलवे ने रेलवे लाइन का पुनर्निर्माण इसके मूल संरेखण के अनुसार किया। शोरनूर-अंगदिपुरम लाइन 1953 में फिर से खोली गई और अंगदिपुरम-नीलांबुर 1954 में। यह कुल 66 किमी का रेल खंड है। 

नीलांबुर रोड केरला का एकमात्र टर्मिनल रेलवे स्टेशन है।  

Wednesday, June 28, 2023

TVC TO NIL : KERLA RAIL TRIP 2023

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 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 6

तिरुवनंतपुरम से निलंबूर रोड - केरल में रेल यात्रा 


श्री अनंत पद्यनाभ स्वामी मंदिर के दर्शन करने के पश्चात, हम पैदल ही मंदिर से रेलवे स्टेशन की तरफ रवाना हो गए जोकि यहाँ से ज्यादा दूर नहीं था। रास्ते में बस स्टैंड के समीप एक फलमंडी भी दिखाई दी जहाँ से सोहन भाई ने कुछ फल और आम खरीदे। स्टेशन पहुंचकर हमने क्लॉकरूम से अपने अपने बैग वापस लिए। अब यहाँ से आगे की यात्रा सोहन भाई और मुझे अलग अलग करनी थी।

यहाँ से अब हमारी घर की ओर वापसी की यात्रा शुरू होनी थी, जबकि सोहन भाई अब यहाँ से आगे अपनी तमिलनाडू यात्रा पर प्रस्थान करने वाले थे। हमें यहाँ से वापसी की राह पर निलंबूर रोड स्टेशन जाना था जो केरल के मालाबार प्रान्त के समीप मन्नार पर्वतमाला की तलहटी में स्थित एक छोटा सा नगर है। हमारा रिजर्वेशन कोचुवेली से था और कोचुवेली यहाँ से आगे तीसरा स्टेशन है। 

तिरुवनंतपुरम से कोच्चुवेली जाने वाली डीएमयू ट्रेन का अब समय हो चला था। हमने बड़े भारी मन से सोहन भाई और उनके परिवार से विदा ली। रास्ते के लिए कुछ आम सोहन भाई की माँ ने मुझे भी दे दिए। घर से इतनी दूर आकर अपने मित्र और उनके परिवार से अलग होते समय मेरा दिल भर आया और आँखों में आंसू भी आ गए। सोहन भाई से बिछड़ने के बाद अब एक अजीब सा डर भी मेरे मन में घर कर गया। 

MANGLORE TO TRIVENDRAM : MALABAR RAIL TRIP 2023

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 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 3

मैंगलोर से तिरुवनंतपुरम - केरला रेल यात्रा 



28 JUN 2023

     केरल, भारत देश का एक छोटा और सुन्दर प्रदेश है। भारत के अन्य प्रांतों की अपेक्षा यहाँ के लोग अत्यंत बुद्धिमान, पढ़े लिखे और उद्यमी होते हैं। यहाँ की साक्षरता का स्तर हमेशा से ही उच्च रहा है। सम्पूर्ण केरल प्रदेश में नदियां, नारियल और खजूर के वृक्ष, इलायची एवं अन्य मसालों की खेती के साथ साथ पर्वतीय क्षेत्रों में चाय के बागान भी देखने को मिलते हैं। ओणम यहाँ का प्रमुख त्यौहार है एवं मलयालम यहाँ की प्रमुख भाषा है।  

1 नवंबर 1956 को त्रावणकोर, कोचीन और मालाबार के सम्पूर्ण भूभाग को मिलाकर केरल राज्य का गठन किया गया था। इससे पूर्व केरल राज्य में केवल त्रावणकोर और कोचीन के भूभाग को शामिल किया गया था, मालाबार के तटीय क्षेत्र को इसमें बाद में शामिल किया गया था क्योंकि मालाबार उस समय मद्रास प्रोविन्स का एक भाग था और 1956 में एक एक्ट के तहत यह केरला का एक भाग बन गया। प्राचीन समय में यहाँ चेरों का शासन था। 

रात्रि में मंगलौर पहुँचने के बाद हमारी कोंकण की रेल यात्रा समाप्त हो गई। ट्रेन मध्य रात्रि के आसपास मंगलौर पहुंची थी और मंगलौर से चलकर, कर्नाटक की सीमा से निकलकर अब यह अपने अंतिम प्रदेश केरला में चल रही थी। चूँकि यह रात्रि का समय था इसलिए हमारी यह यात्रा नींद के समय पूरी हुई। अगली सुबह जब मेरी आँख खुली तो देखा ट्रैन एर्नाकुलम से भी आगे आ चुकी है और जल्द ही यह केरला के कायकुलम रेलवे स्टेशन पहुंची।  

नारियल के वृक्षों से आच्छादित इस प्रदेश को प्रकृति ने अपने अनुपम उपहारों से सुसज्जित किया है। केले और कटहल के वृक्ष भी यहाँ बहुतायत मात्रा में देखने को मिलते हैं। एक स्टेशन आया  करूनागपल्ली। 

Tuesday, June 27, 2023

ROHA TO MANGLURU : KONKAN RAIL TRIP 2023

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 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 2

कोंकण रेलवे की एक यात्रा 


27 जून 2023 

    भारत के सुंदर प्राकृतिक क्षेत्रों में कोंकण क्षेत्र का प्रमुख स्थान है। इस क्षेत्र के अंतर्गत महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक कुछ भाग शामिल हैं। कोंकण में एक तरफ अथाह समुद्र है तो वहीँ दूसरी ओर पश्चिमी घाटों के ऊँचे ऊँचे पहाड़ हैं, इन पहाड़ों से निकलने वाली नदियाँ और झरने, इसकी प्राकृतिक सुंदरता को एक अविस्मरणीय अनोखा रूप देते हैं। 

    मुख्यतः कोंकण क्षेत्र के वनों में अनेक किस्मों के पेड़ पौधे देखने को मिलते हैं जिनसे अनेकों प्रकार की दुर्लभ जड़ीबूटियां भी प्राप्त होती हैं। मानसून के समय में कोंकण क्षेत्र की सुंदरता अपने उच्चतम शिखर पर होती है जिसे एकबार देखने वाला, जीवनपर्यन्त उसे भुला नहीं पाता। 

   प्राचीन समय में कोंकण के घने वनों और पहाड़ों के मध्य आवागमन बहुत ही दुर्लभ था, किन्तु वर्तमान में यहाँ सड़कों के साथ साथ रेल मार्ग भी सुचारु है। यह रेलमार्ग समुद्र और पश्चिमी घाटों के पर्वतों के मध्य से होकर गुजरता है। जिसपर अनेकों सुरंगें और छोटे बड़े पुल दिखाई देते हैं। 

   इस रेलमार्ग का सञ्चालन भारतीय रेलवे की एक शाखा 'कोंकण रेलवे' करती है जो भारत के 19 रेलवे जोनों में से एक है। कोंकण रेलमार्ग की कुल लम्बाई 756 किमी है और यह महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक तीन राज्यों को आपस में जोड़ता है। यह महाराष्ट्र के रोहा से शुरू होकर कर्नाटक के ठोकूर स्टेशन पर समाप्त होता है। 

Monday, June 26, 2023

MATHURA TO PANVEL : KERLA RAIL TRIP 2023

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 कोंकण V मालाबार की मानसूनी यात्रा पर - भाग 1 

मथुरा से पनवेल - तिरूवनंतपुरम सुपरफ़ास्ट एक्सप्रेस 


26 जून 2023 

    मानसून के समय में देश के पश्चिमी घाट, कोंकण क्षेत्र, गोवा और केरला की प्राकृतिक सुंदरता अपने चरम पर होती है। देश में सबसे पहले मानसून भी केरल में ही अपनी दस्तक देता है। अतः बरसात का यहाँ अनोखा रूप देखने को मिलता है। कोंकण क्षेत्र और पश्चिमी घाटों की सुंदरता की अलग ही छटा देखते बनती है। 

इसके अलावा इन सब नजारों और प्राकृतिक सौंदर्य को दिखाने के लिए कोंकण रेलवे अपनी अहम् भूमिका निभाती है। मानसून में कोंकण रेलवे की यात्रा, हर मनुष्य के जीवन में एक ऐसा यादगार अनुभव छोड़ती है जिसे शायद ही जीवन पर्यन्त भुलाया जा सके।  

… 

काफी वर्ष पहले मैंने भी कोंकण रेलवे के इन शानदार नजारों के बारे में सुन रखा था तथा इसके बारे में थोड़ी बहुत जानकारी भी एकत्रित की हुई थी। उस समय हम आगरा में रहते थे, और मेरे पिताजी आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर  रेलवे में नौकरी किया करते थे, तब मैंने जाना था कि यहाँ से गुजरने वाली 'मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस' एक ऐसे मार्ग से होकर अपनी यात्रा करती है जिसके नज़ारे और सुंदरता का एक अलग ही अलौलिक वर्णन है। 

आगरा होकर जाने वाली यह एक मात्र ट्रेन थी जो कोंकण रेलवे से होकर गुजरती थी अतः शुरू से ही इसमें यात्रा करने का मन बना लिया था, कि एक बार तो अवश्य इसमें यात्रा करनी है किन्तु ऐसा अवसर मुझे अबतक प्राप्त ही नहीं हो पाया था। किन्तु अब ईश्वर की कृपा से ऐसा अवसर मिला है कि कोंकण रेलवे की यात्रा करने का स्वपन, साकार होने जा रहा है। 

आगरा के बाद हम लोग मथुरा आ गए और यहीं इस ब्रजभूमि में अपना स्थाई निवास स्थान बनाया। अब ये ब्रजभूमि ही अपना निवास स्थान है और अपनी कर्मभूमि भूमि भी। सम्पूर्ण देश में अनेकों यात्राएं करने के बाद प्रत्येक मानसून में मुझे कोंकण यात्रा याद आती ही अतः इसबार मैंने मथुरा से केरल के तिरुवनंतपुरम नगर की यात्रा का विचार बनाया। 

… 

Saturday, April 29, 2023

KACHHALA GHAT : GANGA RIVER 2023

 कछला घाट पर गंगा स्नान - वर्ष 2023 

29 अप्रैल 2023 

अप्रैल का माह चल रहा है और गर्मी अपने चरमोत्कर्ष पर है। इस समय तो केवल ठन्डे स्थानों और नदियों की तरफ यात्रा का रुख स्वतः ही हो जाता है। इस सप्ताह के अंत में शनिवार के अवकाश को मैंने अपनी एक यात्रा में बदल दिया। इस बार गंगा जी जाने का विचार मन में आया और शनिवार को गंगा जी के लिए प्रस्थान करने के पूरी तैयारी कर ली। मेरी पत्नी कल्पना भी मेरे साथ गंगा स्नान के लिए तत्पर हो उठी तो अपनी इस यात्रा में शामिल कर लिया। 

मथुरा से सुबह साढ़े पांच बजे कासगंज जाने वाली पैसेंजर ट्रेन जाती है इसलिए सुबह पांच बजे ही घर से तैयार होकर, माँ को प्रणाम कर हम स्टेशन की तरफ प्रस्थान कर गए। स्टेशन से पहले ही एक रेल फाटक पर बाइक खड़ी करके हम स्टेशन की तरफ दौड़ लिए क्योंकि अब ट्रेन को चलने में ज्यादा समय नहीं रहा गया था और जैसे ही हम स्टेशन पर पहुंचे, तो एक जोरदार सीटी हमारी ट्रेन के इंजन की सुनाई दी और ट्रेन चल पड़ी। मतलब ये था कि अगर हम थोड़ी बहुत और देर से आते तो शायद इस ट्रेन का मिलना मुश्किल ही था। 

मथुरा जंक्शन स्टेशन के बाद मथुरा छावनी स्टेशन आया और इसके बाद यमुना जी  को पार करती हुई ट्रेन गंगा जी की तरफ रवाना हो चली। सुबह सुबह की ठंडी हवा ने मन को प्रफुल्लित कर दिया और यात्रा का आनंद दुगना कर दिया। राया, सोनाई और मुरसान के बाद हम हाथरस पहुंचे, यहीं से अगला स्टेशन हमारे गांव का है हाथरस रोड। 

मीटरगेज के समय में यह मुख्य स्टेशन था क्योंकि अधिकतर मीटरगेज की ट्रेनों का क्रॉस एक दूसरे से इसी स्टेशन पर होता था परन्तु जब से ये बड़ी लाइन हुई है तब से इस स्टेशन की महत्ता और सुंदरता दोनों ही समाप्त हो चले हैं। एक समय में मेरे दादाजी इसी रेलवे स्टेशन पर नौकरी करते थे, आज उनकी ऑफिस एक खंडहर के रूप में बची है सिर्फ।  इस स्टेशन से मेरा गांव सिर्फ एक किमी की दूरी पर है।  यहाँ आकर अनायास ही मुझे मेरे बचपन के दिनों की याद आ जाती है। 

अब आगे बढ़ते हैं - रति का नगला, बस्तोई, सिकंदरा राऊ, अगसौली और मारहरा के बाद आखिर कार हम  अपने अंतिम गंतव्य स्टेशन कासगंज पहुंचे। यह ट्रेन यहीं तक थी और इस समय कछला घाट जाने वाली कोई ट्रेन नहीं थी इसलिए अब आगे की यात्रा बस द्वारा ही होनी थी। इसलिए हम पैदल ही स्टेशन से बस स्टैंड की तरफ रवाना हो चले। एक चौक पर हमने नाश्ते की दूकान देखी, जहाँ बहुत से लोगों की भीड़ सी भी लगी थी। 

 अगर किसी कचौड़ी वाली दूकान पर अत्यधिक भीड़ देखने को मिले तो समझ जाना चाहिए कि वो उस नगर की प्रसिद्ध नाश्ते की दुकान है। मैंने और कल्पना ने भी यहाँ सुबह सुबह गर्मागर्म कचौड़ी का नाश्ता किया। जो कि अत्यंत ही स्वादिष्ट था। 

कुछ समय तक हम बस स्टैंड पर खड़े रहे और फिर थोड़ी देर बाद हमें अलीगढ डिपो की एक बस मिल गई जो कि बरेली जा रही थी। हम इस बस द्वारा कछला घाट पहुंचे। गंगा जी पार करने के बाद हम रेलवे स्टेशन की तरफ से गंगा नदी में उतरे, और पूजा अनुष्ठान के बाद हमने जी भर कर गंगा जी में स्नान किया।  यहाँ गंगा जी की गहराई थोड़ी कम है इसलिए गंगा नहाने का असली आनंद प्राप्त होता है। 

गंगा नदी में ही वो पुराने पिलर दिखाई देते हैं जिनपर कभी मीटरगेज की ट्रैन और बरेली जाने वाला सड़कमार्ग एक साथ गुजरता था। बदलते समय के साथ अब गंगा जी पर दो पुल नए बन गए हैं जिनमें से एक सड़कमार्ग का और दूसरा रेल मार्ग का है। 

गंगा जी में काफी देर नहाने के बाद हम कछला घाट स्टेशन पहुंचे, क्योंकि थोड़ी बहुत देर में अब यहाँ कासगंज  जाने वाली पैसेंजर ट्रेन आने वाली है। कछला घाट स्टेशन पर पुरानी मीटरगेज की अनेकों निशानियाँ आज भी दिखाई देती हैं, जैसे कि गंगा जी पर बने पुराने पुल के अवशेष, कछला घाट का पुराना मीटरगेज का रेलवे स्टेशन और प्लेटफॉर्म। 

इन सबको देखकर मुझे मेरे बचपन के दिनों की और मीटरगेज के दौर की पुरानी यादें ताजा हो उठती हैं। कुछ समय बाद कासगंज जाने वाली ट्रेन आ पहुंची और एक बार  फिर से हम गंगा से यमुना की तरफ रवाना हो चले। यह ट्रेन कासगंज तक ही थी, और अब मथुरा जाने के लिए शाम से पहले यहाँ कोई ट्रेन नहीं थी इसलिए अब वापसी का प्लान बस द्वारा कन्फर्म हुआ। 

 कासगंज स्टेशन के बोर्ड के साथ कुछ फोटो लेने के बाद हम मथुरा रोड पर पहुंचे। यहाँ गन्ने के जूस की स्टाल से दो दो गिलास हमने जूस पिया जिससे एक बार फिर से हमारा मन और शरीर तरोताज़ा हो गया। कुछ समय बाद हमें मथुरा जाने वाली एक रोडवेज बस मिल गई और हम मथुरा अपने घर की तरफ  प्रस्थान कर गए। 



KALPANA AT KASGANJ RAILWAY STATION 

OLD PILLER OF METER GUAGE RAIL TRACK

BANK OF GANGA 

BAREILLY HIGHWAY


KALPANA IN GANAGA





मीटर गेज रेलवे के समय के अवशेष 

मीटर गेज ट्राली 

कभी यहीं होकर गोकुल एक्सप्रेस गुजरती थी। 



गंगा सेतु की तरफ से कछला घाट स्टेशन का एक दृश्य 


गंगा रेल सेतु 


KACHHALA BRIDGE 


मीटर गेज के समय का स्टेशन नामपट 



मीटर गेज का प्लेटफॉर्म 






SORON SHUKAR KSHETRA STATION

KALPNA IN TRAIN 

GANGAGARH RAILWAY STATION 

GANGAGARH HALT

KASGANJ CITY STATION 

KASGANJ JUNCTION


🙏