Tuesday, July 14, 2026

TRIP TO KASHMIR : 2026


उत्तराखंड से कश्मीर एक रेल यात्रा 



 17 मई 2026 

सही पांच बजकर बीस मिनट पर हेमकुंट एक्सप्रेस श्रीमाता वैष्णोंदेवी कटरा के लिए योगनगरी ऋषिकेश से प्रस्थान कर गई। ट्रेन का कोच अभी लगभग खाली ही था। अगला स्टेशन वीरभद्र आया, यहाँ थोड़ी देर ट्रेन खड़ी रही और इसके बाद रायवाला जंक्शन पहुंची। रायवाला पर देहरादून से आने वाली रेलवे लाइन भी इसी में मिल जाती है इसलिए रायवाला एक जंक्शन स्टेशन है और यह राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्र में स्थित है। मोतीचूर के बाद अंततः हमारी ट्रेन हरिद्वार पहुंची और यहाँ हमारे पास की अन्य सीटों पर सभी सवारियां आ गईं। 

पूरी रात सफर करने और दिन में घूमने के कारण मैं काफी थक चुका था और मुझे अब नींद भी आने लगी थी। हमारी सीट पूरी तरह कन्फर्म नहीं हुई थी और यह RAC में ही रह गई थी इसलिए हमें  साइड लोअर सीट पर यात्रा करनी पड़ रही थी। हालांकि रात्रि के समय हमारी साइड अपर सीट लगभग खाली ही थी और कल्पना इसी पर सो चुकी थी। अगली सुबह जम्मू निकलने के बाद मेरी नींद खुली। हम तवी नदी को पार कर रहे थे। 

जम्मू के बाद सुरंगों और घाटियों का नजारा शुरू हो जाता है और हम इन्हीं नजारों को देखते हुए यात्रा कर रहे थे। 

उधमपुर निकलने के बाद सुबह आठ बजे तक हम कटरा पहुँच गए और स्टेशन के बाहर निकले। कटरा रेलवे स्टेशन से हमने त्रिकूट पर्वत के दर्शन किये और यहाँ स्थित श्रीमाता वैष्णोंदेवी जी को प्रणाम किया। हम माता के धाम में थे किन्तु हमारी आज की यात्रा माता के धाम जाने की नहीं थी। हमने दोपहर में अपने अन्य साथियों के साथ आज वन्दे भारत से श्रीनगर कश्मीर जाना था। हमारे अन्य साथी मथुरा से कोटा - कटरा एक्सप्रेस से यहाँ पहुँच रहे हैं जो कि लगभग एक बजे तक यहाँ आ जायेंगे। तब तक हमने रेलवे स्टेशन पर ही रुकने का फैसला किया। 

कटरा रेलवे स्टेशन के प्रथम तल पर बने वातानुकूलित प्रतीक्षालय में हम नहा धोकर तैयार हो गए और अपने अन्य साथियों का इंतज़ार करने लगे। इस प्रथम तल पर IRCTC की तरफ से बने एक भोजनालय में हमने आज सुबह दो मैसूर डोसे का नाश्ता किया और यहीं पास में बने एक बाजार में थोड़ी देर खरीदारी भी की। हमें पल पल अपने साथियों का इंतज़ार था और हम उनकी ट्रेन की लोकेशन निरंतर देख रहे थे। क्योंकि उनकी ट्रेन के यहाँ पहुँचने में और कश्मीर के लिए वन्दे भारत के छूटने में मात्र एक घंटे का ही अंतर् था। 

हमें डर था कि कहीं उनकी ट्रेन लेट ना हो जाये जिससे हमारी आगे की यात्रा रद्द हो जाये। मैं अपने साथियों के बिना अकेला कश्मीर नहीं जाना चाहता था। 

अंततः ढाई बजे तक उनकी ट्रेन कटरा पहुँच गई, और शीघ्र ही वह हमारे पास प्लेटफॉर्म न एक पर पहुँच गए। अपने साथियों को सही समय से आए देख और उनसे मिलकर मुझे अपार प्रसन्नता हुई। जल्द ही श्रीनगर जाने के लिए वंदेभारत भी प्लेटफॉर्म पर आ गई। इस ट्रैन में हम सभी के कोच अलग अलग थे इसलिए हम अपने अपने कोच नंबर के हिसाब से प्लेटफॉर्म पर खड़े हो गए थे और ट्रेन के आने पर उसमें सवार हो गए। 

वंदेभारत में यह हमारी पहली यात्रा थी, और कश्मीर जाने की भी। कटरा से निकलने के बाद ट्रेन लम्बी लम्बी  सुरंगों को पार करती हुई बनिहाल पहुंची। हम कश्मीर घाटी में आ चुके थे, यह थोड़ी देर बनिहाल रुकी और आगे बढ़ चली, काजीगुंड के बाद सुरंगों का सिलसिला लगभग समाप्त हो जाता है और ट्रेन कश्मीर घाटी में दौड़ती नजर आती है। अनंतनाग और अवंतीपोरा जैसे स्टेशनों पर वंदेभारत का ठहराव नहीं है। यह बनिहाल से निकलने के बाद सीधे श्रीनगर ही रूकती है। 

वंदेभारत की इस यात्रा के दौरान हमें रेलवे की ओर से एक पानी की बोतल, एक भेलपुरी की नमकीन की पैकेट और एक कचौरी, गुड़ मूंगफली वाली गजक के साथ शाम के नाश्ते में मिली। शाम को लगभग पांच बजे हम श्रीनगर पहुँच गए। यहाँ हमारा कमरा लालचौक स्थित यात्री निवास में बुक था। एक गाडी के जरिये हम शाम को लाल चौक पहुंचे। 

यात्रा अगले भाग में जारी


योगनगरी ऋषिकेश के वेटिंग रूम में एक सेल्फी 

वीरभद्र रेलवे स्टेशन 

रायवाला जंक्शन 

मोतीचूर रेलवे स्टेशन 


हरिद्वार रेलवे स्टेशन 


जम्मू किले का एक दृश्य और तवी नदी 



ऊधमपुर रेलवे स्टेशन 

कटरा स्टेशन से त्रिकूट पर्वत का एक दृश्य 


कटरा स्टेशन पर सुबह का नाश्ता करती कल्पना 

और मैं भी 


अंततः हमारे साथी हमें मिले 


वंदेभारत में मिला नाश्ता 




श्रीनगर स्टेशन पर पहली सेल्फी 




🙏

Tuesday, June 23, 2026

GITA BHAWAN : RISHIKESH 2026


 अमावस्या पर गंगा स्नान और गीता भवन - ऋषिकेश 2026 



योगनगरी रेलवे स्टेशन के बाहर  हमने नवनिर्मित जानकी झूला जाने के लिए ऑटो तलाश किये, किराया लगभग 40  रूपये माँगा उसने, किन्तु थोड़ी ही देर बाद वह पलट गया और 50 रूपये प्रति सवारी के हिसाब से किराया मांगने लगा। हमने तुरंत अपना रुख इस ऑटो वाले की तरफ से मोड़ लिया और दूसरे साधन का विकल्प ढूढ़ने लगे। जल्द ही हमें बैटरीचलित रिक्शा जानकी झूला जाने के लिए मिल गया। किराया वही चालीस रूपये प्रति सवारी। 

चंद्रभागा नदी का पुल पार किया, यह एक बरसाती नदी है और अभी फिलहाल सुखी है बहुत एक छोटी सी धारा इसमें बहती हुई दिखाई दे रही थी और कुछ धाराएं इसमें नालों के रूप में भी बहती हुई दिखाई देती हैं। थोड़ी देर बाद हम श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के सामने पहुंचे। यूँतो श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा यहाँ से काफी दूर और ऊपर पहाड़ों में बद्रीनाथ जी के निकट है, जहाँ पहुंचने के लिए बहुत ही दुर्गम मार्ग पर पैदल यात्रा करनी पड़ती है। ऋषिकेश में स्थित यह गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट का मुख्यालय है। 

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जल्द ही हम जानकी झूला के निकट पहुँच गए। मैंने आज पहलीबार ही जानकी झूला देखा था, इससे पूर्व जब मैं ऋषिकेश आया था तब जानकी झूला बना ही नहीं था। ऋषिकेश सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध लक्ष्मण झूला है, इसकी प्रसिद्धि और भीड़ के बढ़ते दबाब को देखते हुए कुछ सालों बाद राम झूला का निर्माण हुआ और अब वर्तमान में जानकी झूला प्रमुख है। यह राम झूला और लक्ष्मण झूला से काफी बड़ा और विशाल है। पैदल यात्रियों के अलावा इससे बाइक लेकर भी गुजर सकते हैं। बाइक और पैदल यात्रियों के आने जाने के लिए इसपर अलग अलग बेरिकेडिंग की लाइन हैं जिससे आने जाने वालों को कोई समस्या नहीं होती। 

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जानकी झूला और राम झूला के मध्य में गीता भवन है। यह गीताप्रेस वालों की ही मुख्य शाखा है जिसमें साधु संतों और सन्यासियों के निवास हेतु उचित व्यवस्था है। यहाँ आम यात्रियों को ठहरने की अनुमति नहीं है। भवन में मध्य में भगवान विष्णु का सुन्दर मंदिर बना है। गीता भवन में प्रतिदिन दोपहर और शाम को भोजन मिलता है जो अत्यंत ही स्वादिष्ट और सात्विक होता है। मैंने और कल्पना ने गंगा स्नान के बाद आज दोपहर का भोजन यहीं किया। इस भोजन को पाने के लिए आपको बाजार से कम मूल्य पर कूपन मिलता है और उसी के बाद भोजन की थाली आपने हाथ में आती है। 

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हम जानकी झूला पार करने के बाद गीता भवन के समीप पहुंचे और यहीं बने गंगा घाट पर हमने माँ गंगा को प्रणाम करके स्नान किया। 

आज अमावस्या थी, अमावस्या पर गंगा स्नान करना अत्यंत ही पुण्यदायक माना जाता है, साथ ही हमारे पितृ और देव दोनों ही प्रसन्न होकर हमें आशीर्वाद प्रदान करते हैं। मैं प्रत्येक अमावस्या पर गंगा स्नान हेतु यात्रा करता हूँ और यदि किसी अमावस्या पर नहीं आ पाता हूँ तो घर के ही जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लेता हूँ। पूरे माह में व्यस्त जीवन में से इस दिन थोड़ा सा समय निकालकर मैं गंगातट पर आ जाता हूँ और अपने माता पिता को स्मरण करता हूँ। माँ गंगा के किनारे बैठकर मुझे अपने माता पिता की कमी पूरी होती दिखाई देती है। 

गंगा स्नान करने के बाद, अपने पितरों को जलतर्पण कराना चाहिए और अपनी सामर्थ्यानुसार थोड़ा बहुत दान दक्षिणा भी देनी चाहिए। अपने पितृ पूर्वजों से अपनी किसी भी त्रुटि की क्षमा चाहना करनी चाहिए इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और इससे पितृदोष भी समाप्त हो जाता है। 

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यहाँ गंगा जी के किनारे बैठकर और उनकी बहती धाराओं को देखकर, मन और आत्मा अपने आप ही शुद्ध होने लगते हैं, ह्रदय में आध्यात्मिक भाव जागृत होने लगता है और मन में ईश्वर के प्रति आस्था और भी दृढ़ हो जाती है, श्रद्धा का भाव उत्पन्न होने लगता है जिससे मन एकाग्रचित्त हो जाता है। हम जिन समस्यायों को लेकर ऋषिकेश या हरिद्वार आते हैं तो वे समस्याएँ यहाँ आकर समाधान बन जाती हैं। एक शुद्ध शरीर और पवित्र आत्मा लेकर हम वापस यहाँ से घर लौटते हैं। 

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आज हमें घर नहीं लौटना था, आज शाम को हम ऋषिकेश से श्री माता वैष्णोंदेवी कटरा के लिए यात्रा करेंगे जिसके लिए हमारा आरक्षण हेमकुंड एक्सप्रेस में है। यह ट्रेन शाम को पांच बजकर बीस मिनट पर ऋषिकेश से कटरा के लिए प्रस्थान करेंगे, कटरा से हम पहले श्रीनगर कश्मीर जायेंगे और उसके बाद लौटकर श्री माता वैष्णोंदेवी के दर्शन करेंगे, तत्पश्चात हम अपने घर की ओर प्रस्थान करेंगे। 

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अपनी पिछली ऋषिकेश यात्रा को याद करते हुए मैं और कल्पना, रामझूला  के नजदीक पहुंचे। ऋषिकेश की पिछली हमने 2017 में की थी, तब सहयात्री के रूप में मेरी ममेरी बहिन साधना और उसका परिवार हमारे साथ था, हम और कल्पना उस समय अपनी एवेंजर बाइक से यहाँ आये थे जबकि साधना ट्रेन से आई थी। आज पुनः इतने वर्षों के बाद हम उन्हीं स्थानों पर हैं। 

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अब धूप काफी तेज हो चली थी, इसलिए मैं और कल्पना वापस रेलवे स्टेशन की तरफ रवाना हो चले। हम रामझूला से जानकी झूला होते हुए वापस मुख्य मार्ग पर पहुंचे। यहाँ से हमें रेलवे स्टेशन के लिए एक टेम्पो  मिल गया जिसने 30 रुपया प्रति सवारी के हिसाब से हमसे किराया लिया और हम रेलवे स्टेशन पहुँच गए। तेज धूप और गर्मी ने हमें बेहाल कर दिया था, हम शीध्र ही स्टेशन के वातानुकूलित प्रतीक्षालय में पहुंचे जहाँ जाकर हमें थोड़ी राहत मिली। अभी हमारी ट्रेन के छूटने में काफी वक़्त था तब तक हमने यहीं आराम किया। 

शाम के पांच बजे हम हेमकुंड एक्सप्रेस में आरक्षित अपनी सीट पर पहुंचे और जय माता दी का नारा लगाकर हमने  यात्रा के लिए प्रस्थान किया। 

जय माँ गंगा 

जय माता दी 

स्टेशन से जानकी झूला जाते हुए 

श्री हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा 

जानकी सेतु 





जय बजरंग बली 






राम झूला 






गीता भवन