Monday, September 21, 2026

BIKANER 2023 : DEE TO BKN & JHANJHEU VILLAGE


  मरुस्थलीय भूमि में एक रेल यात्रा - दिल्ली सराय रोहिल्ला से बीकानेर 



24 SEP 2023, 

आज पूरा दिन मैंने राजधानी दिल्ली की तमाम ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया और साथ ही इस्कॉन एवं लोटस टेम्पल जैसी जगहों को भी देखा। अब शाम हो चली थी और अब मुझे दिल्ली से बीकानेर की ओर प्रस्थान करना था। बीकानेर की ट्रेन दिल्ली के सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन से बनकर चलती हैं, मैं देर शाम दिल्ली की नगरीय बस द्वारा दिल्ली सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन पहुंचा। यह स्टेशन किसी समय में मीटर गेज का एक मुख्य स्टेशन था आज यह पूर्ण रूप से ब्रॉड गेज में परवर्तित हो चुका है। 

दिल्ली सराय रोहिल्ला से बीकानेर के लिए रात को दो रेलगाड़ियां प्रस्थान करती हैं। इनमें से एक तो सीधे रेवाड़ी, सादुलपुर और चूरू होते हुए बीकानेर जाती है और दूसरी ट्रैन भटिंडा, श्री गंगा नगर, सूरतगढ़ होते हुए बीकानेर जाती है। इनमें से पहली वाली में कई बार यात्रा कर चुका हूँ, आज दूसरी ट्रेन से मेरा जाने का मन था, इसलिए इसी ट्रेन की मैंने बीकानेर की एक टिकट ली और ट्रेन में पहुंचा। जनरल कोच में भी अधिकांश सीटें खाली पड़ी थीं। एक खाली ऊपर वाली सीट पर मैंने अपना आसन बिछाया और आराम से सो गया। 

Tuesday, July 14, 2026

TRIP TO KASHMIR : 2026


उत्तराखंड से कश्मीर एक रेल यात्रा 



 17 मई 2026 

सही पांच बजकर बीस मिनट पर हेमकुंट एक्सप्रेस श्रीमाता वैष्णोंदेवी कटरा के लिए योगनगरी ऋषिकेश से प्रस्थान कर गई। ट्रेन का कोच अभी लगभग खाली ही था। अगला स्टेशन वीरभद्र आया, यहाँ थोड़ी देर ट्रेन खड़ी रही और इसके बाद रायवाला जंक्शन पहुंची। रायवाला पर देहरादून से आने वाली रेलवे लाइन भी इसी में मिल जाती है इसलिए रायवाला एक जंक्शन स्टेशन है और यह राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्र में स्थित है। मोतीचूर के बाद अंततः हमारी ट्रेन हरिद्वार पहुंची और यहाँ हमारे पास की अन्य सीटों पर सभी सवारियां आ गईं। 

पूरी रात सफर करने और दिन में घूमने के कारण मैं काफी थक चुका था और मुझे अब नींद भी आने लगी थी। हमारी सीट पूरी तरह कन्फर्म नहीं हुई थी और यह RAC में ही रह गई थी इसलिए हमें  साइड लोअर सीट पर यात्रा करनी पड़ रही थी। हालांकि रात्रि के समय हमारी साइड अपर सीट लगभग खाली ही थी और कल्पना इसी पर सो चुकी थी। अगली सुबह जम्मू निकलने के बाद मेरी नींद खुली। हम तवी नदी को पार कर रहे थे। 

जम्मू के बाद सुरंगों और घाटियों का नजारा शुरू हो जाता है और हम इन्हीं नजारों को देखते हुए यात्रा कर रहे थे। 

Tuesday, June 23, 2026

GITA BHAWAN : RISHIKESH 2026


 अमावस्या पर गंगा स्नान और गीता भवन - ऋषिकेश 2026 



योगनगरी रेलवे स्टेशन के बाहर  हमने नवनिर्मित जानकी झूला जाने के लिए ऑटो तलाश किये, किराया लगभग 40  रूपये माँगा उसने, किन्तु थोड़ी ही देर बाद वह पलट गया और 50 रूपये प्रति सवारी के हिसाब से किराया मांगने लगा। हमने तुरंत अपना रुख इस ऑटो वाले की तरफ से मोड़ लिया और दूसरे साधन का विकल्प ढूढ़ने लगे। जल्द ही हमें बैटरीचलित रिक्शा जानकी झूला जाने के लिए मिल गया। किराया वही चालीस रूपये प्रति सवारी। 

चंद्रभागा नदी का पुल पार किया, यह एक बरसाती नदी है और अभी फिलहाल सुखी है बहुत एक छोटी सी धारा इसमें बहती हुई दिखाई दे रही थी और कुछ धाराएं इसमें नालों के रूप में भी बहती हुई दिखाई देती हैं। थोड़ी देर बाद हम श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के सामने पहुंचे। यूँतो श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा यहाँ से काफी दूर और ऊपर पहाड़ों में बद्रीनाथ जी के निकट है, जहाँ पहुंचने के लिए बहुत ही दुर्गम मार्ग पर पैदल यात्रा करनी पड़ती है। ऋषिकेश में स्थित यह गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट का मुख्यालय है। 

Thursday, June 18, 2026

YOG NAGARI RISHIKESH RAILWAY STATION

उत्तराखंड से कश्मीर तक ग्रीष्मकालीन यात्रा : वर्ष 2026 

यात्रा क्रमांक - 1 

मथुरा से योगनगरी ऋषिकेश - एक रेल यात्रा 

15 MAY 2026

    प्राचीन काल से ही माँ गंगा के पावन तट पर बसी ऋषिकेश नगरी, साधु - संतो और ऋषि मुनियों की तपोस्थली रही है। यहाँ का  सुरम्य वातावरण मन को मोह लेता है, यहाँ आकर मन को असीम शांति प्राप्त होती है और शरीर एक नई ऊर्जा को अनुभव करने लगता है। 

शाम के समय माँ गंगा के घाट पर बैठकर गंगा आरती देखने का एक अलग ही आनंद है, मन आध्यत्मिक रूप से प्रफुल्लित हो उठता है ईश्वर का गुणगान करने लगता है। यहाँ आकर आध्यात्म की अनुभूति होना आम बात है। 

ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला एक प्राचीन स्थल है। गंगा नदी के ऊपर बना तारों का एक झूला है जिसे हम बचपन से ही देखते और इसपर गुजरते हुए आ रहे है। लक्ष्मण झूला के आसपास अनेकों मंदिर हैं। यहीं से कुछ दूर गंगाजी के किनारे चलते हुए राम झूला के निकट पहुँच जाते है। लक्ष्मण झूला के बाद राम झूला का निर्माण हुआ था। अब वर्तमान में जानकी झूला का निर्माण होने के बाद यह ऋषिकेश का मुख्य सेतु बन गया है। 

राम झूला और जानकी झूला के मध्य प्रसिद्ध गीता भवन है, यहाँ साधु संतो के ठहरने का अच्छा प्रबंध है। आम यात्रियों को यहाँ ठहरने की आज्ञा नहीं है। गीता भवन में सुबह और शाम अत्यंत ही स्वादिष्ट और सात्विक भोजन मिलता है। 

इस बार मन बना लिया था कि इस अमावस्या पर गंगा स्नान हेतु ऋषिकेश ही जाऊंगा। ईश्वर की कृपा रही और मैंने मई के महीने में एक शानदार यात्रा प्लान की। यह यात्रा कश्मीर की यात्रा थी जिसमें हमने श्रीमाता वैष्णोंदेवी और श्रीनगर जाने का प्लान बनाया। इस यात्रा में मेरी ममेरी बहिन साधना और उसका परिवार, मेरा दोस्त, कुमार अपने परिवार सहित जाने के लिए तैयार थे। 

Wednesday, December 31, 2025

MY TRIP IN AGRA : AGRA 2025

 

MY AGRA TRIPS IN 2025


📅10 FEB' 25

मैं आज अपनी कंपनी की किया करेन्स गाडी लेकर टेस्ट ड्राइव के लिए आगरा गया। पार्श्वनाथ पंचवटी, जो की फतेहाबाद रोड के नजदीक स्थित है, वहां मैं गाडी की एक ग्राहक को टेस्ट ड्राइव कराइ और उसके बाद लौटते समय प्रतापपुरा चौराहे पर मैं अपने मित्र कुमार से मिला। कुमार से थोड़ी देर मिलने के बाद मैं अपने एक अन्य मित्र पप्पू से भी मिला जो कि सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज में ही कार्यरत है। 

बचपन के शहर और दोनों मित्रों से मिलने के बाद मैं वापस आगरा आ गया। 

Tuesday, September 17, 2024

AGRA : LODI MOSQUE & TOMB

 

आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 12

लोदी काल की मस्जिद और मक़बरा 




🖍 - 17 सितम्बर 2024, 

आगरा, मध्यकालीन भारत का ऐतिहासिक नगर है, इस शहर को मुग़लकालीन राजधानी होने का गौरव प्राप्त है इसलिए यहाँ मुग़ल काल से जुड़े हुए अनेकों भव्य स्मारक मौजूद हैं, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण ताजमहल है जिसके कारण आगरा को दुनिया भर में पहचान मिली है। नूरजहां के पिता एत्माउद्दौला का मकबरा, चीनी का रोजा, आगरा किला, जामामस्जिद, फतेहपुर सीकरी और सिकंदरा ये सभी आगरा की प्रमुख मुगलकालीन स्मारक हैं। 

 यूँ तो आगरा शहर की स्थापना 1504 ईसवी में सिकंदर लोदी ने की थी। आगरा से कुछ दूर दिल्ली मार्ग पर उसने सिकंदराबाद नामक शहर बसाया था जो कालांतर में सिकंदरा ने नाम से आज भी स्थित है। परन्तु यह सिकंदरा आज सिकंदर लोदी के कारण नहीं बल्कि मुग़ल सम्राट अकबर के मकबरे के कारण विश्व भर में विख्यात है। 

आगरा शहर की स्थापना का श्रेय सिकंदर लोदी को जाता है किन्तु आगरा शहर को पहचान मुग़ल शासक अकबर के शासनकाल में ही मिली, उसने इसे अपनी राजधानी बनाया और आगरा किला का निर्माण कराया। अकबर ने अपनी मृत्यु से पूर्व ही अपने मकबरे का भी निर्माण भी आगरा में ही कराया था।  

AGRA : SADIK KHAN & SALAWAT KHAN TOMB


आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 11

 सादिक खान और सलाबत खान का मकबरा


सादिक खान और उनके पुत्र सलाबत खान, मुगल काल के प्रमुख रईस थे और बादशाह जहांगीर एवं शाहजहाँ के अधीन उच्च पदस्थ अधिकारी थे। सलाबत खान, बादशाह शाहजहाँ के मुग़ल दरबार में मीर बख्शी (कोषाध्यक्ष) थे, जो 1644 में आगरा किले में अमर सिंह राठौर द्वारा मारे गए थे  जबकि उनके पिता सादिक खान की मृत्यु 1633 में ही हो गई थी। दोनों पिता पुत्र मुग़ल दरबार में क्रमशः बादशाह जहांगीर और शाहजहां के कार्यकाल के दौरान नियुक्त थे। 

AGRA : AKBAR TOMB



आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 10

जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का मक़बरा  


17 सितम्बर  2024,

जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का मकबरा आगरा के सिकंदरा में स्थित एक भव्य मुगलकालीन स्मारक है, जिसे उनके पुत्र जहांगीर ने 1605-1613 के बीच बनवाया था। लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित यह 119 एकड़ में फैली एक अनूठी पिरामिडनुमा संरचना है, जो इस्लामी, हिंदू और बौद्ध वास्तुकला का मिश्रण है।

 मुख्य मकबरे का प्रवेश द्वार बुलंद दरवाजे की शैली में बनाया गया है और जटिल नक्काशी से सजाया गया है।इस मकबरे की चारों कोनों पर सफेद संगमरमर की मीनारें हैं।

औरंगजेब के समय में इस मकबरे को जाटों द्वारा लूटा गया था, माना जाता है कि उन्होंने इस मकबरे से बादशाह अकबर के शरीर के अवशेषों को निकालकर उनका दाह संस्कार कर दिया। ब्रिटिश काल में अंग्रेजों (लॉर्ड कर्जन) ने इसकी मरम्मत कराई थी।

Thursday, August 8, 2024

AGRA : FIROZ KHAN TOMB

 

आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 9


फिरोज खान का मकबरा / FIROZ KHAN TOMB



  • फिरोज खान के मकबरे का निर्माण 17वीं शताब्दी में मुगल बादशाह शाहजहां के शासनकाल के दौरान हुआ था, जब फिरोज खान दीवान-ए-कुल के पद पर थे। फिरोज खान शाहजहां के एक विश्वसनीय अधिकारी थे, जो शाही हरम के प्रभारी के रूप में काम करते थे। उनकी मृत्यु 1637 में हुई थी।

फिरोज खान शाहजहां के शाही हरम के प्रभारी और दीवान-ए-कुल थे। 

लाल बलुआ पत्थर से निर्मित यह दो मंजिला मकबरा मुगलकालीन वास्तुकला का उदाहरण है।
  • यह मकबरा लाल बलुआ पत्थर से बना है और अष्टकोणीय (octagonal) आकार का है। यह दो मंजिला इमारत है।
  •  यह स्मारक एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) द्वारा संरक्षित है, लेकिन यह एत्माद्दौला के मकबरे की तुलना में बहुत कम प्रसिद्ध और उपेक्षित है।
  • यह मकबरा आगरा शहर से लगभग 5 किमी दूर आगरा-ग्वालियर रोड पर स्थित है।

Friday, March 22, 2024

AGRA : ETMAUDDOULA


आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 7

एत्माउद्दौला का मक़बरा 


एत्माउद्दौला का मक़बरा, नूरजहाँ के पिता मिर्ज़ा ग्यासबेग़ का मकबरा है जिसे नूरजहाँ ने 1622-1628 के बीच अपने पिता मिर्ज़ा ग़ियासबेग की याद में बनवाया था। इसे 'बेबी ताज' या 'छोटा ताजमहल' भी कहा जाता है, क्योंकि यह पूरी तरह से सफेद संगमरमर से बना पहला मुगल मकबरा है और इसमें पित्रदुरा (कीमती पत्थरों की जड़ाई) का उत्कृष्ट काम किया गया है।

यह मकबरा मुगल साम्राज्ञी नूरजहाँ ने अपने पिता मिर्ज़ा ग़ियासबेग (जिन्हें जहाँगीर ने एतमादुद्दौला की उपाधि दी थी) की स्मृति में बनवाया था।

यह पूरी तरह से सफेद संगमरमर से निर्मित पहली मुगल इमारत है।

यह उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में यमुना नदी के पूर्वी तट पर स्थित है और यह भारत में पूरी तरह सफेद संगमरमर से बने पहले मकबरों में से एक है।

Sunday, December 31, 2023

A VILLAGE TRIP : AIRAKHERA 2023


आयरा खेड़ा ग्राम में मेरी यात्रायें  - वर्ष 2023 



साल की शुरुआत में तमिलनाडु की यात्रा करने के बाद मैं इस मकर सक्रांति पर रिश्तों के सफर पर निकला था। इस सफर का मेरा प्रथम पड़ाव ग्राम आयराखेड़ा था। यह मेरी ननिहाल है यहाँ मेरे मामा जी रहते हैं अक्सर उन्हीं के पास बचपन से आता रहा हूँ। इस यात्रा का विस्तृत विवरण मैंने अपनी एक अलग पोस्ट में दिया है। इस पोस्ट का नाम है - रिश्तों के सफर पर। आप इस लिंक पर क्लिक करके सम्पूर्ण यात्रा वृतांत पढ़ सकते हैं। 

A VILLAGE TRIP : DHORPUR 2023

वर्ष 2023 में मेरी पैतृक गाँव धौरपुर की यात्रा 


मकर सक्रांति पर अपने गाँव धौरपुर में एक रात 

यूँ तो प्रत्येक वर्ष, मैं होली और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों पर अपने पिताजी के अर्थात अपने गांव धौरपुर जाता हूँ। मेरा यह गाँव उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में है। मेरे गांव का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हाथरस जंक्शन अथवा हाथरस रोड है। यहाँ से मेरे गांव की  कुल दूरी एक किमी के आसपास है। जब कभी कोई साधन नहीं मिलता तो मैं पैदल ही अपने गांव पहुँच जाता हूँ। मेरे गाँव में मेरे चाचा जी और मेरे चचेरे भाई रहते हैं। दादा दादी के गुजर जाने के बाद बस चाचाजी से ही मिलने गाँव आना जाना लगा रहता है और साथ ही साल के इन प्रमुख त्योहारों पर अपने पूवजों और उनके थानों को पूजकर उनसे आशीर्वाद ले लेता हूँ। 

इस बार, मैं मकर सक्रांति पर अपने रिश्तों के सफर पर था, इसलिए मेरा धौरपुर जाना भी हुआ। हाथरस जंक्शन क्षेत्र में अपनी मौसी और बुआजी के गाँव जाकर उनसे मिलने के बाद देर शाम में अपने गाँव धौरपुर पहुंचा। जनवरी का महीना है इसलिए सर्दी जोरों पर थी और वैसे भी मैं आज सुबह से ही बाइक यात्रा कर रहा हूँ, इसलिए घर आते आते और भी ठण्ड में जकड गया हूँ। 

जाते ही मुझे मेरी भाभी ने गर्मागर्म चाय लाकर दी और मैं अगहाने के निकट बैठकर गर्मागर्म चाय का आनद लेता रहा और अपने चाचाजी से बतयाता रहा। अगहाना हमारे गांव में अलाप को कहते हैं अलाप मतलब जलती हुई आग का एक ढेर। 

A VILLAGE TRIP : AMOKHARI 2023

अमोखरी ग्राम में मेरी यात्रायें - वर्ष 2023 




नए साल की शुरुआत में मकर सक्रांति के पर्व पर मैंने एक यात्रा आयोजित की थी जिसका टाइटल मैंने रखा था - रिश्तों के सफर पर।  इस यात्रा के दौरान मैंने अपने सभी रिश्तेदारों के पास बाइक यात्रा की थी और उन्हें सक्रांति के पर्व पर भेंट स्वरूप गजक का बॉक्स दान किया था। इसी यात्रा के दौरान मैं अपनी बड़ी बुआ जी के गाँव अमोखरी भी गया था। 

अमोखरी गाँव से ही मुझे इस पर्व पर अपनी इस यात्रा को करने का विचार आया था जब पिछली बार भी मकर सक्रांति पर, मैं केवल अमोखरी ही आया था और मैंने सोचा था क्यों ना प्रत्येक वर्ष मकर सक्रांति पर और नए साल की शुरुआत पर अपने सभी रिश्तेदारों के पास घूमने जाया जाये क्योंकि फिर पूरी साल मैं अपने कार्यक्षेत्र और अन्य यात्राओं में व्यस्त हो जाता हूँ और अपनों से मिलने का समय भी नहीं निकल पाता है। 


















इसी वर्ष में दूसरी बार मैं, अपनी माँ के साथ अमोखरी गया था। ना जाने क्यों माँ को शायद एहसास सा हो गया था कि यह उनके जीवन की अंतिम वर्ष है इसलिए वह सभी अपनों के पास जाकर कुछ दिन उनके साथ रहीं थीं, फिर चाहे वो उनका अपना गाँव आयराखेड़ा हो या फिर उनकी ससुराल धौरपुर गाँव हो। मैं पांच दिन पहले माँ को अपने गाँव धौरपुर छोड़ गया था और उनके बाद जब मैं उन्हें लेने के लिए वापस गाँव पहुंचा तो उन्होंने वहां से बुआ जी के गाँव अमोखरी जाने की भी इच्छा प्रकट की। 

धौरपुर से अमोखरी की दूरी लगभग 10 किमी के आसपास है. मैं  अपनी नई बाइक स्प्लेंडर से उन्हें अमोखरी लेकर गया। यहाँ वह दोनों बुआ जी से मिली और उनसे उनका हालचाल जाना। बुआ जी भी आज माँ से मिलकर अति प्रसन्न हुईं। शाम होने के साथ ही मैं और माँ वापस मथुरा लौट लिए थे। वह बाइक पर सुविधाजनक रूप से नहीं बैठ पा रही थीं इसलिए मैंने उन्हें हाथरस से अपने एक जानकार कार ग्राहक के साथ मथुरा तक उनकी कार में बैठा दिया। वह सुरक्षित रूप से मथुरा पहुँच गईं।

 वर्ष 2023 के अंत में और वर्ष 2024 के शुरुआत में ही मेरी माँ हमेशा के लिए मुझे छोड़कर परलोक गमन कर गईं। इस प्रकार यह उनकी मेरे साथ अंतिम यात्रा रही।    






बुआ जी से बतियाती मेरी माँ 

मेरी  बीना बुआ जी 

बुआ जी के घर से विदा होती मेरी माँ 


 यात्रा पूर्ण 

A VILLAGE TRIP : DUMERI 2023

 ग्राम दुमेड़ी में मेरी यात्रायें - वर्ष 2023 

ग्राम दुमेड़ी में मेरी दोनों बहनों की ससुराल है। कभी कभी किसी खास मौके पर मेरा यहाँ आना होता रहता है। मेरी बहिन के ससुर जी ने अपने घर के निकट एक शिव मंदिर का निर्माण कराया है जिसके उद्घाटन पर उन्होंने अपने समस्त रिश्तेदारों और अपने ग्राम निवासियों को प्रसाद रुपी भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया था। इसी उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए मैं भी अपनी बहिनों के के गाँव पहुंचा। 

मुझे देखकर मेरी दोनों बहिने अति प्रसन्न हुईं। यहाँ मेरी मुलाक़ात मेरे बहनोई किशोरी लाल जी हुई जो उप पुलिस में कार्यरत हैं और वर्तमान में ग्रेटर नॉएडा में रहते हैं। मेरा मौसेरा भाई गोपाल और दिलीप भी इस समारोह में आये थे और उनसे भी मेरी भेंट हुई। आज अपने भांजों और बहनों से मिलकर मेरा मन अति प्रसन्न हुआ और समारोह के समाप्त होने के पश्चात मैं वापस घर लौट आया। 





मेरा छोटा भांजा - कुञ्ज त्रिवेदी  

मेरा बड़ा भांजा - यश त्रिवेदी 



यही है शिव मंदिर, जिसका आज उद्घाटन समारोह था 

मेरी छोटी बहिन निधि अपने बेटे कुञ्ज के साथ 

मेरी भांजी - वर्षा त्रिवेदी 

कुञ्ज अभी छोटा है 

कुञ्ज और वर्षा की मस्ती 

मेरी बहिन - रश्मि शर्मा 

किशोरी लाल त्रिवेदी 


यश ने बाइक की चाबी ले ली - ताकि मैं वापस ना जाऊ 

उद्घाटन समारोह से लौटने के बाद अगले माह ही मेरे भांजे कुञ्ज की जन्मदिन था, इस मौके पर आज मैं पुनः अपनी बहिनों के गाँव दुमेड़ी के लिए रवाना हुआ। मैं राया पहुंचा, यहाँ पहुंचकर मुझे जानकारी मिली कि यहाँ मेरे बड़े भाई धर्मेंद्र शर्मा जी की तबियत ख़राब है और वह राया में डॉक्टर राजेश के यहाँ अस्पताल में भर्ती हैं। मैंने उन्हें देखने हॉस्पिटल पहुंचा, भैया मुझे देखकर अति प्रसन्न हुए। यहाँ मेरी मुलाकात मेरे एक अन्य भाई कृष्णकांत से भी हुई जिसे सब प्यार से विट्टू कहते हैं। 

भैया से मिलने के पश्चात मैं भोला को लेकर दूमेड़ी के लिए रवाना हो चला। रास्ते में नीमगांव नाम का एक गाँव आया, आज यहाँ शाम की हाट लगी थी, मैं और भोला थोड़ी देर हाट में घूमे और इसके बाद आगे की यात्रा पर रवाना हो गए। 

 मैं कुञ्ज के लिए उसके जन्मदिन के उपहार में एक साईकिल रिक्शा लेकर गया जिसे पाकर वह बहुत खुश हुआ। हमने धूमधाम से कुञ्ज का जन्मदिन मनाया और पूरा दिन रुकने के बाद अगले दिन मैं और भोला वापस मथुरा लौट लिए। 






धर्मेंद्र भाई और विट्टू से अस्पताल में एक मुलाकात 


नीमगांव में लगी एक हाट 


निधि और कुञ्ज 

यश भी है 

रिक्शा पाकर कुञ्ज बहुत प्रसन्न हुआ 






 इति शुभम