अन्नू की शादी में
जम्मू शहर की एक यात्रा
20 अक्टूबर 2023
अगली सुबह हम जम्मू रेलवे स्टेशन पहुँच चुके थे। काफी देर प्रतीक्षा कराने के बाद अंततः लड़के वालों की ओर से एक गाडी आई और हम सभी उसमें सवार होकर अखनूर रोड पर स्थित जम्मू के N N रिसोर्ट पहुंचे। यह रिसोर्ट मुख्य राजमार्ग से थोड़ा सा अंदर था। रिसोर्ट में ही एक बड़ा हॉल था जिसमें हमारे रुकने की व्यवस्था की गई थी। यहीं हम सभी नहा धोकर तैयार हो गए। रिसोर्ट को शादी के लिए सजाने का कार्य चल रहा था, जो कि तीन दिन बाद ही थी।
अक्टूबर माह की सुबह सुबह की गुनगुनी धुप बहुत ही शानदार लगती है। यह मौसम सर्दियों का आगाज होता है और मौसम ठंडा होने की कगार पर होता है। आज यहाँ हमारा कोई विशेष काम नहीं था इसलिए मैं कुमार से पूछकर जम्मू शहर घूमने के लिए निकल गया। रिसोर्ट से राजमार्ग तक मैं पैदल पहुंचा और पहुँचते ही मुझे जम्मू शहर जाने वाली मिनी बस मिल गई जो कि जम्मू की नगरीय बस कहलाती हैं।
जल्द ही बस ने मुझे जम्मू के एक मुख्य चौक पर उतार दिया। यहाँ एक बाहु नामक प्रसिद्ध किला है जहाँ बाहु वाली माता का विशाल मंदिर है। यह मंदिर जम्मू के एक ऊँचे स्थान पर हैं जहाँ जाने के लिए अनेकों छोटी बसें चलती है। एक ऐसी ही बस द्वारा मैं बाहु वाली माता के मंदिर पहुँचा। चूँकि अभी नवरात्री चल रही हैं इसलिए मुझे यहाँ बहुत रोल चोल देखने को मिली। बाहु माता का मंदिर किले के बीच भाग में है, यहाँ देवी माता के महाकाली के रूप में दर्शन हैं। मैं माता के दर्शन करने के लिए लाइन में लग गया।
जल्द ही मुझे श्री बाहु माता के दर्शन करने का सौभाग्य मिला और उसके बाद यहाँ चलने वाले भंडारे में माता का प्रसाद भी मैंने प्राप्त किया। किले में आम यात्रियों को केवल मंदिर तक ही आने की अनुमति है, किले का बाकी का भाग भारतीय सेना के अधीन है और यह आम पर्यटकों के लिए दर्शनीय नहीं है। सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर परिसर में मोबाइल ले जाना सख्त मना है।
बाहू किला और बावे वाली माता का मंदिर
बाहु किले का इतिहास लगभग 3000 वर्ष प्राचीन है। माना जाता है इस प्राचीन किले का निर्माण जम्मू के संस्थापक राजा जम्बुलोचन के भाई बाहुलोचन ने तवी नदी के किनारे एक ऊँचे स्थान पर करवाया था। इस स्थान पर किले के निर्माण को लेकर एक पौराणिक कहानी जुडी हुई है जिसके अनुसार, राजा बाहुलोचन ने तवी नदी के किनारे इस स्थान पर एक शेर और एक बकरी दोनों को एक घाट पर निडर पानी पीते हुए देखा था।
अतः उन्होंने इस क्षेत्र की पवित्रता और धार्मिक महत्त्व को देखते हुए इसी स्थान पर बाहु किले का निर्माण कराया साथ ही किले के मध्य प्रांगण में महाकाली माता के एक मंदिर का निर्माण करवाया जो वर्तमान में बाहू वाली देवी अथवा बावे वाली माता के नाम से प्रख्यात हैं।
गुजरते समय के साथ यह किला अनेकों बार नष्ट हुआ और 19 वीं सदी के आते आते यह डोगरा राजाओं की मुख्य राजधानी बन गया। 19 वीं शताब्दी में डोगरा वंश के राजा गुलाब सिंह और उनके बाद महाराजा रणबीर सिंह ने इस किले का पुर्नोद्धार करवाकर इसकी मरम्मत कराई।
बाहु का किला एक ऊँचे पहाड़ी स्थान पर है और यह तवी नदी के किनारे स्थित है। किले के ठीक नीचे एक रेल सुरंग है जहाँ से जम्मू से उधमपुर, श्री माता वैष्णोंदेवी और कश्मीर घाटी जाने वाली रेलवे लाइन गुजरती है। किले के दूसरी तरफ पार्किंग स्थल से इस रेल सुरंग को आसानी से देखा जा सकता है और साथ ही यहाँ से तवी नदी का विहंगम दृश्य भी दिखाई देता है। रेल सुरंग के ऊपर बने पहाड़ पर चलती रोपवे को मैं काफी समय तक देखता रहा और फिर मातारानी को प्रणाम करके मैं यहाँ से आगे की तरफ रवाना हो चला।
रघुनाथ मंदिर, जम्मू
एक बस द्वारा मैं बाहु किले से नीचे पहुंचा और तवी नदी पार करने के बाद मुख्य शहर की तरफ बढ़ चला। यहाँ मैंने रघुनाथ मंदिर के बारे में सुन रखा था कि यह जम्मू नगर का एक प्राचीन मंदिर है और वर्तमान में महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल है। गूगल में इसकी तरफ जाने वाली लोकेशन सेट करके मैं रघुनाथ मंदिर की तरफ बढ़ चला और शीघ्र ही मंदिर तक पहुँच गया। यह रघुनाथ मंदिर है अर्थात भगवान श्री राम जी का मुख्य स्थान है।
यह मंदिर उत्तर भारत के सबसे बड़े और भव्य मंदिरों में से एक है। यह भगवान श्री राम अर्थात रघुनाथ जी को समर्पित है जो डोगरा वंश के इष्टदेव भी हैं। इस मंदिर का निर्माण सन 1835 में जम्मू - कश्मीर राज्य के संस्थापक और डोगरा वंश के प्रथम राजा गुलाब सिंह जी ने करवाया था और बाद में उनके सुपुत्र राजा रणबीर सिंह ने इसके निर्माण कार्य को सन १८६० तक पूर्ण करवाया था।
इस मंदिर के विशाल परिसर में सात अलग अलग हिन्दू मंदिर बने हुए हैं और प्रत्येक मंदिर के ऊँचे ऊँचे शिखर हैं जिनपर सोने के कलश स्थापित हैं। प्रत्येक हिन्दू मंदिर के गर्भगृह में हिन्दू धर्म के अलग अलग देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। मुख्य मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की मूर्तियां सुशोभित हैं और साथ ही यहाँ रामायणकालीन अन्य पात्रों की भी मूर्तियां देखने को मिलती हैं जिनमें हनुमान जी, सुग्रीव, विभीषण, सम्पाती, जटायु मुख्य हैं।
इसके साथ ही इस मंदिर में भगवान विष्णु के प्रतीक शालिग्राम जी और भगवान शिव के असंख्य शिवलिंग के भी दर्शन होते हैं। मंदिर का परिसर काफी विशाल है और हरे भरे वृक्षों और पुष्पदार पौधों वजह से प्राकृतक रूप से यहाँ हराभरा वातावरण देखने को मिलता है।
विशाल रघुनाथ मंदिर में सात ऊंचे 'शिखर' हैं, और हर मंदिर का अपना शिखर है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही महाराजा रणबीर सिंह की तस्वीर और भगवान हनुमान की मूर्ति इस जगह की शोभा बढ़ाती है। मुख्य मंदिर भगवान राम/रघुनाथ को समर्पित है, जो यहां के मुख्य देवता हैं।
मुख्य मंदिर के अलावा, अन्य मंदिरों में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की मूर्तियां हैं। भगवान सूर्य (सूर्य देव) का भी एक खास मंदिर है, जिसमें भगवान के विभिन्न रूप मौजूद हैं। मंदिर के अंदर अन्य मंदिर भी हैं जिनमें हिंदू देवी-देवताओं की विशाल मूर्तियां हैं।
यहां यह बताना ज़रूरी है कि मंदिर की तीन तरफ की अंदरूनी दीवारें सोने की चादरों से ढकी हुई हैं। इसमें एक गैलरी भी है, जहां विभिन्न 'लिंगम' (भगवान शिव का प्रतीक) और 'शालीग्राम' रखे गए हैं। रघुनाथ मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की लगभग सभी मूर्तियां मौजूद हैं, जो मंदिर वास्तुकला में एक अनोखी बात है। मंदिर की पूजा-अर्चना और रीति-रिवाजों में सुबह और शाम की आरती शामिल है।
रघुनाथ मंदिर की शानदार वास्तुकला में मुगल निर्माण शैली की झलक देखी जा सकती है। यहां की नक्काशी और मेहराब बेहद शानदार हैं और सबका ध्यान खींचते हैं।
यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का केंद्र नहीं, बल्कि वैदिक ज्ञान का भी बड़ा स्रोत रहा है। इसके परिसर में एक संस्कृत पुस्तकालय है, जिसमें विभिन्न भारतीय भाषाओं और शारदा लिपि की हजारों दुर्लभ पांडुलिपियाँ (Manuscripts) सुरक्षित रखी गई हैं।
24 नवंबर, 2002 को इस मंदिर परिसर में जब हिंदू भक्त पूजा कर रहे थे, तभी 'फिदायीन' (आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आत्मघाती रणनीति) आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और कई भक्त घायल हो गए। तभी से इस मंदिर की सुरक्षा बढ़ा दी गई जो आज भी देखने को मिलती है। यहाँ जगह जगह हमारे सैन्यबल मुश्तैदी से एक एक जगह पर पैनी नजर रखे हुए हैं और सतर्क हैं।
श्री रघुनाथ मंदिर देखने के बाद मैं जम्मू नगर को पैदल ही भ्रमण करके देखने लगा और अंत में पीवीआर सिनेमा पर पहुंचा। आज शुक्रवार था और इस सिनेमा में अमिताभ बच्चन और टाइगर श्रॉफ की एक नई फिल्म लगी थी जिसका नाम था गणपत। मैंने इस सिनेमा यह मूवीज देखी और इसे देखने के बाद मुझे एहसास हुआ कि व्यर्थ ही
मैंने अपना समय और अपना धन इस फिल्म पर खर्च किया। यह एकदम बकवास मूवीज थी जिसे माओं फ्री में भी देखना पसंद नहीं करता।
अब शाम हो चली थी, और मैं वापस रिसोर्ट की तरफ पहुंचा। कुमार किसी कार्य से बाजार गया हुआ था, उसके बिना मेरा यहाँ बिलकुल भी मन नहीं लगा किन्तु कुछ समय बाद वह वापस आ गया। इस बीच मैंने साहिल से फोन पर बात की जो यहाँ का स्थानीय निवासी था वह भी शाम को हमसे मिलने रिसोर्ट आ गया।
दरअसल साहिल, हमारे घर मथुरा में किराये पर रहता था और वहीँ एशियन पेंट्स कम्पनी में कार्य करता था। वह जम्मू कश्मीर का मूल निवासी है और उसका गांव अखनूर के नजदीक है। अभी कुछ माह पूर्व ही वह मथुरा से जम्मू आ गया था और अब यहीं नौकरी करता है। वह अपने गांव से प्रतिदिन जम्मू आता है और शाम को वापस अपने गाँव जाता है।
फोन पर जब मैंने उसे अपने यहाँ होने की जानकरी दी तो वह बहुत ही प्रसन्न हुआ और शाम को मुझसे मिलने चला आया। मैंने उसे, कुमार और उसके परिवार से भी मिलवाया। शाम को अपने गांव लौटते हुए उसने मुझे भी अपने साथ गाँव चलने के लिए कहा और मैं तुरंत तैयार हो गया क्योंकि मुझे अखनूर का किला और जम्मू कश्मीर के गाँव की एक झलक देखनी थी। कुमार की सहमति से, मैं साहिल के साथ शाम को उसके गाँव की तरफ रवाना हो गया।
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| अगली सुबह रिसोर्ट के बाहर मैं और कुमार |
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| जम्मू में चलने वाली नगरीय मिनी बसें |
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| जम्मू के एक चौक पर |
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| बावे वाली माता के दर्शन हेतु प्रस्थान |
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| बाहू वाली माता के मंदिर के बाहर एक बाजार |
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| बाग़ ए बाहू |
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| मंदिर की ओर |
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| बाग़ ए बाहू |
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| बाहू किले वाली माता का मंदिर |
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| बाग़ ए बाहू |
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| बाहू किले का एक दृश्य |
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| बाहू किला |
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| बाहू किला |
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| बाहू फोर्ट |
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| तवी नदी का विहंगम दृश्य |
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| कटरा और कश्मीर जाने वाली रेलवे लाइन की एक सुरंग |
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| रेल सुरंग |
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| रघुनाथ जी मंदिर, जम्मू |
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रघुनाथ जी मंदिर, जम्मू
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रघुनाथ जी मंदिर, जम्मू
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| जय माँ वैष्णों देवी |
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| शालिग्राम मंदिर |
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| शालिग्राम मंदिर |
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| सम्पाती की प्रतिमा |
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| जटायु की प्रतिमा |
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| जय बजरंग बली |
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| श्री राम मंदिर |
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रघुनाथ जी मंदिर, जम्मू
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| पीवीआर सिनेमा, जम्मू |
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| यहाँ मैंने गणपत मूवीज देखी |
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| शाम को रिसोर्ट पर कुमार और साहिल |
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| एक शाम मैं , साहिल और कुमार |
इति शुभम
अगली यात्रा : जम्मू कश्मीर में गाँव की एक सर्द रात