सादिक खान और सलाबत खान का मकबरा

सादिक खान और उनके पुत्र सलाबत खान, मुगल काल के प्रमुख रईस थे और जहांगीर एवं शाहजहाँ के अधीन उच्च पदस्थ अधिकारी थे, सलाबत खान, जो एक मीर बख्शी (कोषाध्यक्ष) थे, 1644 में आगरा किले में अमर सिंह राठौर द्वारा मारे गए, जबकि उनके पिता सादिक की मृत्यु 1633 में ही हो गई थी।
सादिक खां
सादिक खान एक ईरानी रईस, एत्माद्दौला की पदवी वाले मिर्जा ग्यास बेग के भतीजे थे जो मुगल बादशाह जहांगीर और शाहजहां के दरबार में भी रहे। जहांगीर ने मीर बख्शी के रूप में उन्हें 1622 में नियुक्त किया और उसके बाद 1623 में पंजाब का गवर्नर नियुक्त कर दिया। उन्होंने शाहजहाँ के अधीन मीर बख्शी के रूप में सेवा की, 1633 में उनकी मृत्यु हो गई, और उन्हें एक मकबरे में दफनाया गया है जिसे संभवतः उन्होंने खुद बनवाया था।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक जहांगीर के बाद शाहजहां ने सादिक खां को 4000 जात का मनसब और 4000 सवार का मनसब प्रदान किया। 3 सितंबर 1633 को सादिक खां के निधन के बाद बेटे सलावत खां ने उनका आगरा के गैलाना में मकबरा बनवाया।
सलाबत खान (मीर बख्शी)
सलाबत खान, सादिक खान का पुत्र, व शाहजहाँ का प्रिय था और 1644 में व्यक्तिगत अपमान के कारण राव अमर सिंह राठौर द्वारा आगरा किले के दीवान-ए-आम में उसकी हत्या कर दी गई थी। रिश्ते में यह शाहजहां के साले थे और उसके मीर बख्शी (शाही कोषाध्यक्ष) थे। सादिक खां के पुत्र सलाबत खां को शाहजहां के दरबार में चार हजार का मनसब मिला हुआ था।
भारत पुरातत्व विभाग के रिकार्ड के अनुसार शाहजहां के मीर बख्शी सलाबत खां ने अमर सिंह पर टिप्पणी कर दी थी। इस पर अमर सिंह राठौड़ ने आगरा किला के दीवान-ए-आम में शाहजहां के दरबार में ही सलाबत खां को मौत के घाट उतार दिया था। मुगल सैनिक उन पर टूट पड़े थे, मगर अमर सिंह राठौड़ उन्हें परास्त कर किले से निकलने में सफल रहे थे।
उन्होंने घोड़े पर सवार होकर आगरा किला की दीवार से छलांग लगा दी थी। बाद में उनकी हत्या आगरा किला के गेट के पास कर दी गई थी। यह गेट आज अमर सिंह गेट कहलाता है।
- सादिक खान का मकबरा:
- एक ऊंचे चबूतरे पर निर्मित अष्टकोणीय संरचना में निर्मित है साथ ही इसमें पारसीय वास्तुकला भी दृष्टिगोचर होती है।
- सलाबत खान का मकबरा (चौसठ खंबा):
- चौंसठ स्तंभों के हॉल के रूप में जाना जाने वाला, लाल बलुआ पत्थर का यह मंडप 1644-1650 के बीच बनाया गया था।
दोनों स्मारक अपनी अलग-अलग अनूठी वास्तु और निर्माण शैली के बने हैं। और सबसे मुख्य दोनों पिता - पुत्र की कब्रें एक सीध में निर्मित हैं।
यह मकबरे आगरा-दिल्ली राजमार्ग (एनएच19) के पास, अकबर के मकबरे के नजदीक स्थित हैं