Upadhyay Trips
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Saturday, September 19, 2026
JAMMU 2023 : ANU MARRIDGE
JAMMU 2023 : AMBARAN - A BUDDHIST SITE IN JAMMU
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| इसी पुल के नीचे अम्बारां का प्राचीन बौद्ध विहार है। |
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| प्राचीन बौद्ध विहार का प्रवेश द्वार |
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| अपनी बाइक खड़ी करता साहिल |
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| पुरास्थल अम्बारां का ऐतिहासिक पटल |
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| इंग्लिश में भी उपलब्ध है। |
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| प्राचीन बौद्ध स्तूप का अवशेष |
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| अन्य लघु स्तूपों के अवशेष |
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| प्राचीन बौद्ध स्तूप के अवशेष जहाँ से स्वर्ण मंजूषा प्राप्त हुई। |
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| अन्य लघु स्तूप |
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| संग्रहालय में रखी प्राचीन बौद्ध स्तूप की प्रति |
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| 2011 में अम्बारां बौद्ध विहार की यात्रा करते प्रसिद्ध बौद्ध गुरु दलाई लामा |
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| इस चित्र स्वर्ण मंजूषा की प्राप्ति का वर्णन देता है |
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| इस स्थल से प्राप्त हुए मृदभांड और उनके अवशेष |
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| दूसरी - पहली सदी ईसापूर्व के प्राचीन अवशेष |
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| इस बौद्ध स्थल की विस्तृत जानकारी |
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| बौद्ध विहार परिसर स्थित एक लघु संग्रहालय |
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| बौद्ध विहार के नजदीक बहती चिनाब नदी |
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| अम्बारां बौद्ध विहार से वापसी |
JAMMU 2023 : AKHNOOR FORT & CHINAB RIVER
अख़नूर का किला, चिनाब नदी और पांडव गुफा
21 अक्टूबर 2023
भारत के जम्मू कश्मीर राज्य में जम्मू शहर से 28 किमी दूर, चिनाब नदी के दाहिने तट पर स्थित अखनूर का किला, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यह किला एक प्राचीन स्थल पर स्थित है जिसे स्थानीय रूप से मांडा के नाम से जाना जाता है जो कि सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे उत्तरी छोर कहलाता है। यहाँ हुई खुदाई में तीन काल की संस्कृतियों के साक्ष्य मिले हैं—हड़प्पा कालीन बर्तन, आरंभिक ऐतिहासिक वस्तुएं और कुषाण काल के अवशेष।
यह कभी हड़प्पा कालीन नगर था जो कि आस्किन नदी के किनारे स्थित था। आस्किन नदी को वर्तमान में चिनाब नदी कहते है एवं इसका एक नाम चंद्रभागा भी है। किले के अंदर हुए उत्खनन से प्राप्त अवशेषों से ही इसके प्राचीन तीन संस्कृतियों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
मध्यकाल में इस किले का निर्माण 1762 ईसवीं में महाराजा तेज सिंह ने करवाया था, और उनके पश्चात उनके उत्तराधिकारी, राजा आलम सिंह ने 1802 ईस्वी में इसे पूर्ण करवाया। 17 जून 1822 को इसी किले के पास चिनाब नदी के जिया पोता घाट पर महाराजा रणजीत सिंह ने महाराजा गुलाब सिंह का राज्याभिषेक भी किया था।
'अखनूर' नाम के बारे में कहा जाता है कि मुगल सम्राट जहाँगीर की आँखों में संक्रमण हो गया था। यहाँ की ठंडी हवा और वातावरण से उनकी आँखों की रोशनी में सुधार हुआ, जिसके बाद इसे 'आँख-का-नूर' कहा गया जो बाद में अखनूर बन गया।
ऐसा भी माना जाता है कि अखनूर महाभारत काल की प्रसिद्ध विराट नगरी है। यहाँ पास में ही एक प्राचीन गुफा स्थित है जिसे पांडव गुफा के नाम से जाना जाता है, गुफा के अंदर पाँचो पांडवों सहित राजा विराट और महर्षि वेदव्यास जी की प्रतिमा दर्शनीय है।
Thursday, September 17, 2026
JAMMU 2023 : A NIGHT IN A VILLAGE OF JAMMU
Monday, September 14, 2026
JAMMU 2023 : BAHU FORT & TEMPLE
Friday, September 11, 2026
JAMMU 2023 : MTJ TO JAT BY KOTA EXPRESS
Tuesday, July 14, 2026
TRIP TO KASHMIR : 2026
17 मई 2026
सही पांच बजकर बीस मिनट पर हेमकुंट एक्सप्रेस श्रीमाता वैष्णोंदेवी कटरा के लिए योगनगरी ऋषिकेश से प्रस्थान कर गई। ट्रेन का कोच अभी लगभग खाली ही था। अगला स्टेशन वीरभद्र आया, यहाँ थोड़ी देर ट्रेन खड़ी रही और इसके बाद रायवाला जंक्शन पहुंची। रायवाला पर देहरादून से आने वाली रेलवे लाइन भी इसी में मिल जाती है इसलिए रायवाला एक जंक्शन स्टेशन है और यह राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्र में स्थित है। मोतीचूर के बाद अंततः हमारी ट्रेन हरिद्वार पहुंची और यहाँ हमारे पास की अन्य सीटों पर सभी सवारियां आ गईं।
पूरी रात सफर करने और दिन में घूमने के कारण मैं काफी थक चुका था और मुझे अब नींद भी आने लगी थी। हमारी सीट पूरी तरह कन्फर्म नहीं हुई थी और यह RAC में ही रह गई थी इसलिए हमें साइड लोअर सीट पर यात्रा करनी पड़ रही थी। हालांकि रात्रि के समय हमारी साइड अपर सीट लगभग खाली ही थी और कल्पना इसी पर सो चुकी थी। अगली सुबह जम्मू निकलने के बाद मेरी नींद खुली। हम तवी नदी को पार कर रहे थे।
जम्मू के बाद सुरंगों और घाटियों का नजारा शुरू हो जाता है और हम इन्हीं नजारों को देखते हुए यात्रा कर रहे थे।
Tuesday, June 23, 2026
GITA BHAWAN : RISHIKESH 2026
अमावस्या पर गंगा स्नान और गीता भवन - ऋषिकेश 2026
योगनगरी रेलवे स्टेशन के बाहर हमने नवनिर्मित जानकी झूला जाने के लिए ऑटो तलाश किये, किराया लगभग 40 रूपये माँगा उसने, किन्तु थोड़ी ही देर बाद वह पलट गया और 50 रूपये प्रति सवारी के हिसाब से किराया मांगने लगा। हमने तुरंत अपना रुख इस ऑटो वाले की तरफ से मोड़ लिया और दूसरे साधन का विकल्प ढूढ़ने लगे। जल्द ही हमें बैटरीचलित रिक्शा जानकी झूला जाने के लिए मिल गया। किराया वही चालीस रूपये प्रति सवारी।
चंद्रभागा नदी का पुल पार किया, यह एक बरसाती नदी है और अभी फिलहाल सुखी है बहुत एक छोटी सी धारा इसमें बहती हुई दिखाई दे रही थी और कुछ धाराएं इसमें नालों के रूप में भी बहती हुई दिखाई देती हैं। थोड़ी देर बाद हम श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के सामने पहुंचे। यूँतो श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा यहाँ से काफी दूर और ऊपर पहाड़ों में बद्रीनाथ जी के निकट है, जहाँ पहुंचने के लिए बहुत ही दुर्गम मार्ग पर पैदल यात्रा करनी पड़ती है। ऋषिकेश में स्थित यह गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट का मुख्यालय है।
Thursday, June 18, 2026
YOG NAGARI RISHIKESH RAILWAY STATION
उत्तराखंड से कश्मीर तक ग्रीष्मकालीन यात्रा : वर्ष 2026
यात्रा क्रमांक - 1
मथुरा से योगनगरी ऋषिकेश - एक रेल यात्रा
15 MAY 2026
प्राचीन काल से ही माँ गंगा के पावन तट पर बसी ऋषिकेश नगरी, साधु - संतो और ऋषि मुनियों की तपोस्थली रही है। यहाँ का सुरम्य वातावरण मन को मोह लेता है, यहाँ आकर मन को असीम शांति प्राप्त होती है और शरीर एक नई ऊर्जा को अनुभव करने लगता है।
शाम के समय माँ गंगा के घाट पर बैठकर गंगा आरती देखने का एक अलग ही आनंद है, मन आध्यत्मिक रूप से प्रफुल्लित हो उठता है ईश्वर का गुणगान करने लगता है। यहाँ आकर आध्यात्म की अनुभूति होना आम बात है।
ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला एक प्राचीन स्थल है। गंगा नदी के ऊपर बना तारों का एक झूला है जिसे हम बचपन से ही देखते और इसपर गुजरते हुए आ रहे है। लक्ष्मण झूला के आसपास अनेकों मंदिर हैं। यहीं से कुछ दूर गंगाजी के किनारे चलते हुए राम झूला के निकट पहुँच जाते है। लक्ष्मण झूला के बाद राम झूला का निर्माण हुआ था। अब वर्तमान में जानकी झूला का निर्माण होने के बाद यह ऋषिकेश का मुख्य सेतु बन गया है।
राम झूला और जानकी झूला के मध्य प्रसिद्ध गीता भवन है, यहाँ साधु संतो के ठहरने का अच्छा प्रबंध है। आम यात्रियों को यहाँ ठहरने की आज्ञा नहीं है। गीता भवन में सुबह और शाम अत्यंत ही स्वादिष्ट और सात्विक भोजन मिलता है।
इस बार मन बना लिया था कि इस अमावस्या पर गंगा स्नान हेतु ऋषिकेश ही जाऊंगा। ईश्वर की कृपा रही और मैंने मई के महीने में एक शानदार यात्रा प्लान की। यह यात्रा कश्मीर की यात्रा थी जिसमें हमने श्रीमाता वैष्णोंदेवी और श्रीनगर जाने का प्लान बनाया। इस यात्रा में मेरी ममेरी बहिन साधना और उसका परिवार, मेरा दोस्त, कुमार अपने परिवार सहित जाने के लिए तैयार थे।
Wednesday, December 31, 2025
MY TRIP IN AGRA : AGRA 2025
MY AGRA TRIPS IN 2025
📅10 FEB' 25
Tuesday, September 17, 2024
AGRA : LODI MOSQUE & TOMB
आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 12
लोदी काल की मस्जिद और मक़बरा
AGRA : SADIK KHAN & SALAWAT KHAN TOMB
आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 11
सादिक खान और सलाबत खान का मकबरा
सादिक खान और उनके पुत्र सलाबत खान, मुगल काल के प्रमुख रईस थे और बादशाह जहांगीर एवं शाहजहाँ के अधीन उच्च पदस्थ अधिकारी थे। सलाबत खान, बादशाह शाहजहाँ के मुग़ल दरबार में मीर बख्शी (कोषाध्यक्ष) थे, जो 1644 में आगरा किले में अमर सिंह राठौर द्वारा मारे गए थे जबकि उनके पिता सादिक खान की मृत्यु 1633 में ही हो गई थी। दोनों पिता पुत्र मुग़ल दरबार में क्रमशः बादशाह जहांगीर और शाहजहां के कार्यकाल के दौरान नियुक्त थे।
AGRA : AKBAR TOMB
आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 10
जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का मक़बरा
17 सितम्बर 2024,
जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का मकबरा आगरा के सिकंदरा में स्थित एक भव्य मुगलकालीन स्मारक है, जिसे उनके पुत्र जहांगीर ने 1605-1613 के बीच बनवाया था। लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित यह 119 एकड़ में फैली एक अनूठी पिरामिडनुमा संरचना है, जो इस्लामी, हिंदू और बौद्ध वास्तुकला का मिश्रण है।
यह एक पांच-मंजिला संरचना है जो पूरी तरह से बलुआ पत्थर से बनी है, जिसके शीर्ष पर एक सफेद संगमरमर का मंडप है। यह फारसी चारबाग शैली में निर्मित है। मुख्य मकबरे का प्रवेश द्वार बुलंद दरवाजे की शैली में बनाया गया है और जटिल नक्काशी से सजाया गया है।इस मकबरे की चारों कोनों पर सफेद संगमरमर की मीनारें हैं।
औरंगजेब के समय में इस मकबरे को जाटों द्वारा लूटा गया था, माना जाता है कि उन्होंने इस मकबरे से बादशाह अकबर के शरीर के अवशेषों को निकालकर उनका दाह संस्कार कर दिया। ब्रिटिश काल में अंग्रेजों (लॉर्ड कर्जन) ने इसकी मरम्मत कराई थी।

















































