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Sunday, January 27, 2013

MG TRIP : KANKROLI TO MARWAR JN.

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

कांकरोली से मारवाड़ मीटर गेज पैसेंजर ट्रेन यात्रा




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     मैं राजनगर से कांकरोली स्टेशन पहुंचा, अपने निर्धारित समय पर ट्रेन भी आ पहुंची, सर्दियों के दिन थे इसलिए मुझे धुप बहुत अच्छी लग रही थी। कांकरोली से आगे यह मेरा पहला सफ़र था, मुझे इस लाइन को देखना था, मेवाड़ से ट्रेन मारवाड़ की ओर जा रही थी, मेरे चारों तरफ सिर्फ राजस्थानी संस्कृति ही थी। ट्रेन लावा सरदारगढ़ नामक एक स्टेशन पर पहुंची, यहाँ भी मार्बल की माइंस थीं, और एक किला भी बना हुआ था, शायद उसी का नाम था सरदारगढ़। ट्रेन इससे आगे आमेट पहुंची, आमेट के स्टेशन का नाम चार भुजा रोड है, यहाँ से एक रास्ता चारभुजा जी के लिए जाता है, इससे आगे एक स्टेशन आया नाम था दौला जी का खेडा।

Friday, January 18, 2013

MEWAR TRIP : RAJSAMAND 2013

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

राजसमन्द में एक बार फिर

अपनी छत पर पतंग उड़ाते धर्मेन्द्र भाई 


     इस बार आगरा में सर्दी काफी तेज थी और इन सर्दियों में, मैं फ़ालतू घर पर बैठा था। कल्पना भी अपने मायके गई हुई थी इसलिए अपने आपको फ़ालतू और अकेला महसूस कर रहा था। कंप्यूटर भी इन दिनों खराब पड़ा था, सिवाय टीवी देखने के मेरे पास कोई काम नहीं था, लेकिन टीवी भी बेचारी कब तक मेरा मन लगाती।तभी जीतू का फोन आया तो उसे मैंने अपनी परेशानी बताई, उसने मुझे अपने पास आने की कहकर मेरी परेशानी मिनटों में हल कर दी ।मे 

     माँ की आज्ञा लेकर मैं सीधे स्टेशन गया और अनन्या एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करवा लिया । दुसरे दिन मैं राजसमन्द के लिए गया। ट्रेन सही समय पर आगरा फोर्ट पर आ गई और मैंने अपनी सीट ढूँढी, देखा तो ऊपर की थी।कमबख्त से मांगी तो साइड लोअर थी पर नसीब में ऊपर वाली ही लिखी थी। ट्रेन सवाई माधोपुर होते हुए जयपुर पहुंची । यहाँ मेट्रो का काम तेजी पर चल रहा था, ट्रेन दुर्गापुरा स्टेशन पर काफी देर खड़ी रही उसके बाद जयपुर स्टेशन पर पहुंची। यहाँ मुझे चाय पीने का मौका मिल गया, ट्रेन की चाय से यह चाय कई गुना बेहतर थी।

Monday, April 2, 2012

MEWAR TRIP : KUMBHALGARH

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S



कुम्भलगढ़ और परशुराम महादेव  




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     कल हम हल्दीघाटी घूमकर आये थे, आज हमारा विचार कुम्भलगढ़ जाने की ओर था और ख़ुशी की बात ये थी कि आज धर्मेन्द्र भाई भी हमारे साथ थे। राजनगर से कुम्भलगढ़ करीब पैंतालीस किमी दूर है, भैया ने मेरे लिए एक बाइक का इंतजाम कर दिया।  भैया, भाभी अपने बच्चों के साथ अपनी बाइक पर, जीतू अपनी पत्नी - बच्चों और दिलीप के साथ अपनी बाइक पर और तीसरी बाइक पर मैं और कल्पना थे। 

    पहाड़ी रास्तो से होकर हम कुम्भलगढ़ की तरफ बढ़ते जा रहे थे, मौसम भी काफी सुहावना सा हो गया था , जंगल और ऊँचे नीचे पहाड़ों के इस सफ़र का अलग ही आनंद आ रहा था, मैं बाइक चला रहा था और कल्पना मोबाइल से विडियो बना रही थी। यहाँ काफी दूर तक बाइक बिना पेट्रोल के ही चल रही थी, ढ़लान के रास्तों पर जो करीब तीन किमी लम्बे होते थे ।

MEWAR TRIP : HALDIGHATI 2012

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

हल्दीघाटी - एक प्रसिद्ध रणभूमि


मैं और मेरी पत्नी कल्पना ,चेतक की समाधी पर 



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   आज हमारा विचार हल्दीघाटी जाने का बना, जीतू ने आज छुटटी ले थी साथ ही एक बाइक का इंतजाम भी कर दिया। मैं ,कल्पना, दिलीप, जीतू और उसका बेटा अभिषेक दो बाइकों से चल दिए एक प्रसिद्ध रणभूमि की तरफ जिसका नाम था हल्दीघाटी। यूँ तो हल्दीघाटी के बारे में हम कक्षा चार से ही पढ़ते आ रहे हैं, और एक कविता भी आज तक याद है जो कुछ इसतरह से थी,
             
                        रण बीच चौकड़ी भर भर कर , चेतक बन गया निराला था।
                         महाराणा प्रताप के घोड़े से   , पड़  गया  हवा का पाला था ।।

    हल्दीघाटी के मैदान में आज से पांच सौ वर्ष पूर्व मुग़ल सेना और राजपूत सेना के बीच ऐसा भीषण संग्राम हुआ जिसने हल्दीघाटी को इतिहास में हमेशा के लिए अमर कर दिया और साबित कर दिया कि भारत देश के वीर सपूत केवल इंसान ही नहीं,  जानवर भी कहलाते हैं जो अपनी जान की परवाह किये बगैर अपने मालिक के प्रति सच्ची वफ़ादारी का उदाहरण पेश करते हैं और ऐसा ही एक उदाहरण हल्दीघाटी के मैदान में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक ने अपनी जान देकर दिया। ऐसे वीर घोड़े को सुधीर उपाध्याय का शत शत नमन।

Sunday, April 1, 2012

MEWAR TRIP : RAJSAMAND 2012

                                                      UPADHYAY TRIPS PRESENT'S                                                                                    
                                                                                                                                  
राजसमंद और कांकरोली
                                                          

कांकरोली स्टेशन पर जीतू 



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      श्री नाथजी के दर्शन करके हम राजनगर की ओर रवाना हो लिए, दिलीप एक मारुती वन में बैठ गया, मैं ,जीतू और कल्पना बाइक पर ही चल दिए। रात हो चली थी , राष्ट्रीय राजमार्ग - 8  पर आज हम बाइक से सफ़र कर रहे थे, सड़क के दोनों तरफ मार्बल की बड़ी बड़ी दुकाने और गोदाम थे और रास्ता भी बहुत ही शानदार था।
थोड़ी देर में हम कांकरोली पहुँच गए, यहाँ हमें दिलीप भी मिल गया और हम फिर जीतू के घर गए , भईया को अभी पता नहीं था कि मैं कांकरोली में आ गया हूँ, मेरा संपर्क सिर्फ जीतू के ही साथ था । जीतू और धर्मेन्द्र भैया मेरे बड़े मामा जी के लड़के हैं। दोनों ही यहाँ मार्बल माइंस में नौकरी करते हैं, इसलिए अपने परिवार को लेकर दोनों यहीं रहते हैं, मैं पहले भी कई बार कांकरोली और राजनगर आ चुका हूँ, कल्पना और दिलीप पहली बार आये थे। 

Saturday, March 31, 2012

MEWAR TRIP : UDAIPUR CITY 2012

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

झीलों की नगरी - उदयपुर

उदयपुर रेलवे स्टेशन 

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      अनन्या एक्सप्रेस ने हमें रात को तीन बजे ही हमें उदयपुर सिटी स्टेशन पहुँचा दिया। रेलवे सुरक्षा बल के सिपाहियों ने मुझे जगाया और कहा कि क्या ट्रेन में ही सोने का इरादा है ? यह ट्रेन आगे नहीं जाती। मैंने देखा ट्रेन उदयपुरसिटी पर खड़ी हुई है, जो दो चार सवारियां ट्रेन में थीं ,पता नहीं कब चली गई। मैंने जल्दी से कल्पना को जगाया और दिलीप को भी जगा दिया था ।

     ट्रेन से उतरकर हम वेटिंग रूम में गए, वहां से नहा धोकर उदयपुर घूमने निकल पड़े, यहाँ से राजमहल करीब तीन किमी था, सुबह सुबह हम पैदल ही राजमहल की ओर निकल पड़े, थोड़ी देर में हम राजमहल के करीब थे , अभी इसके खुलने में काफी समय था इसलिए पास ही के एक पहाड़ पर स्थित किले को देखने के लिए चल पड़े। यूँ तो उदयपुर की विशेषता का वर्णन मैं क्या कर सकता हूँ, इसकी विशेषता का एहसास तो खुद ही यहाँ आकर हो ही जाता है। हम पहाड़ पर पहुंचे, यहाँ एक करणी माता का मंदिर भी है, और एक पुराने किले के अवशेष आज भी देखने को मिलते हैं, यहाँ से पूरे उदयपुर शहर का नजारा स्पष्ट दिखाई देता है।