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Sunday, January 3, 2021

BADAMI : KARANATAKA 2021

 UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

                                                कर्नाटक की ऐतिहासिक यात्रा पर भाग - 8                                                  

चालुक्यों की वातापि - हमारी बादामी 


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TRIP DATE - 3 JAN 2021 

समस्त भारतवर्ष पर राज करने वाले गुप्त सम्राटों का युग जब समाप्ति की ओर था और देश पर बाहरी शक्तियाँ अपना प्रभुत्व स्थापित करने में लगी हुईं थी उस समय उत्तर भारत में पुष्यमित्र वंश की स्थापना हुई और भारत वर्ष में गुप्तशासकों के बाद हर्षवर्धन नामक एक योग्य और कुशल शासक उभर कर सामने आया जिसने अपनी बिना इच्छा के राजसिंहासन ग्रहण किया था क्योंकि उसके हाथों की लकीरों में एक महान सम्राट के संकेत जो छिपे थे। उसके सामने परिस्थितियाँ ऐसी उत्पन्न हुईं कि ना चाहते हुए भी वह भारत का सम्राट बना और देश को बाहरी शक्तियों के प्रभाव से रोका। 

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वहीं दक्षिण भारत में गुप्त सम्राटों द्वारा स्थापित अखंड भारत अब अलग अलग प्रांतों में विभाजित हो गया और यहाँ के शासक एक दूसरे से निरंतर युद्धों में लगे रहते थे। गुप्त काल के दौरान दक्षिण में वाकाटक शासकों का राज्य स्थापित था जिसके पतन के पश्चात दक्षिण में अनेक राजवंशों ने जन्म लिया। इन्हीं में से एक राजवंश था पश्चिमी चालुक्यों का, जिन्होंने एहोल को अपनी राजधानी बनाया और अपना शासन प्रारम्भ किया किन्तु कुछ समय बाद जब उनका साम्राज्य विस्तृत होने लगा तो उन्होंने अपनी नई राजधानी वातापी को चुना। उनकी यह प्राचीन वातापि ही आज आधुनिक बादामी है। 

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जैसा कि पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मैं बेंगलुरु से शाम को गोलगुम्बज स्पेशल से सुबह छः बजे ही बादामी पहुँच गया था। रेलवे स्टेशन पर सुबह नहा धोकर तैयार हो गया। मुझे यहाँ बादामी के रहने वाले मित्र नागराज मिलने आये और मैं उनके साथ बादामी के बस स्टैंड पहुँचा। उन्होंने मुझे यहाँ से एहोल की बस में बैठा दिया। दोपहर तक मैं एहोल और पत्तदकल घूमकर वापस बादामी आया। 

एहोल और पत्तदकल के मंदिर समूह देखने के बाद उतरती दोपहर तक मैं बादामी पहुँच गया। बादामी पहुंचकर मैंने नागराज को कॉल किया तो उन्होंने बताया कि वह किसी आवश्यक कार्य से अभी बादामी से बाहर हैं। उन्होंने मुझे बादामी घुमाने के लिए किसी दोस्त को भेजने के लिए कहा जिसके लिए मैंने उनसे मना कर दिया। अब दोपहर हो चुकी थी, मैं थोड़ा थक भी गया था और मुझे भूख भी लग रही थी। मैंने पैदल पैदल ही बादामी के बाजार को घूमना शुरू कर दिया किन्तु मुझे कोई शुद्ध शाकाहारी भोजनालय हिंदी या अंग्रेजी में लिखा कहीं नहीं दिखा। एक दो जगह मुझे कुछ रेस्टोरेंट से नजर आये भी जिनके बाहर लगे बोर्डों पर बढ़िया खाने की थाली छपी हुई थी, परन्तु लिखा कन्नड़ भाषा में था जो मेरी समझ से परे थी। कुछ देर बाद अंग्रेजी भाषा के जरिये मुझे एक शाकाहारी भोजनालय मिला गया।

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यहाँ आलू और गेँहू के आटे की रोटी का मिलना अत्यंत ही दुर्लभ है या मानिये कि ना के बराबर है। मैं इस शाकाहारी भोजनालय पर गया तो यहाँ भी वही चावल, इडली, डोसा और साँभर। अब पेट भरने के लिए कुछ तो खाना ही था इसलिए अपने पसंदीदा चावल ही लिए और दाल के साथ नहीं, बल्कि साम्भर के साथ। क्योंकि कि यह दक्षिण है यहाँ साम्भर को उतनी ही इज़्ज़त प्राप्त है जितनी उत्तर भारत में दालों को है। साम्भर और चावल खाकर कुछ देर के लिए पेट तो भर गया मगर जो पर्याप्त भूख मुझे लगी थी वह पूरी ना हो सकी क्योंकि पिछले तीन चार दिन से मैं ऐसा ही कुछ खाता आ रहा था। खाना खाकर मैं बादामी की गुफाओं की तरफ बढ़ चला जिनका निर्माण चालुक्य राजाओं ने करवाया था। 


 

 स्टेशन के बाहर चाय की दुकान 

मेरे बादामी के मित्र नागराजा 

स्टेशन से बादामी शहर की ओर 

बादामी बस स्टैंड 


 

Friday, September 6, 2013

AJMER 2013


अजमेर दर्शन और तारागढ़ किला 


DARGAAH AJMER SHARIF


      एक अरसा बीत चुका था बाबा से मिले, तो सोचा क्यों न उनके दर पर इस बार हाजिरी लगा दी जाय। बस फिर क्या था, खजुराहो एक्सप्रेस में आरक्षण करवाया और निकल लिए अजमेर की ओर। मैं रात में ही अजमेर पहुँच गया, और वहां से फिर दरगाह। अभी बाबा के दरबाजे खुले नहीं थे, मेरी तरह बाबा के और भी बच्चे उनसे मिलने आये हुए थे जो उनके दरबाजे खुलने का इंतज़ार कर रहे थे, इत्तफाक से आज ईद भी थी। दरगाह का नज़ारा आज देखने लायक था ।

Sunday, February 17, 2013

MS TO RMM : SETHU EXPRESS

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

चेन्नई एग्मोर से रामेश्वरम - सेतू एक्सप्रेस 



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शाम के पांच बज गए थे, सेतु एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से चेन्नई से प्रस्थान कर चुकी थी, मैंने सोचा नहीं था कि ये सफ़र इतना रोमांचक हो सकता है , कैसे ?  बताता हूँ , शाम का वक़्त तो था ही, ट्रेन को डीजल इंजन बड़ी मस्त गति से दौड़ा रहा था, और साथ ही साथ हमारे साथ अभी चेन्नई भी चल रहा था, काफी देर बाद मुझे लगा कि ट्रेन समुद्र के किनारे चल रही है परन्तु ये समुद्र नहीं था, ये कोलावई झील थी जो बहुत बड़ी और शानदार झील थी। ट्रेन झील के बिलकुल किनारे किनारे चल रही थी, ये मेरे सफ़र का एक वाकई सुखद अनुभव था ।

Sunday, April 1, 2012

MEWAR TRIP : RAJSAMAND 2012

                                                      UPADHYAY TRIPS PRESENT'S                                                                                    
                                                                                                                                  
राजसमंद और कांकरोली
                                                          

कांकरोली स्टेशन पर जीतू 



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      श्री नाथजी के दर्शन करके हम राजनगर की ओर रवाना हो लिए, दिलीप एक मारुती वन में बैठ गया, मैं ,जीतू और कल्पना बाइक पर ही चल दिए। रात हो चली थी , राष्ट्रीय राजमार्ग - 8  पर आज हम बाइक से सफ़र कर रहे थे, सड़क के दोनों तरफ मार्बल की बड़ी बड़ी दुकाने और गोदाम थे और रास्ता भी बहुत ही शानदार था।
थोड़ी देर में हम कांकरोली पहुँच गए, यहाँ हमें दिलीप भी मिल गया और हम फिर जीतू के घर गए , भईया को अभी पता नहीं था कि मैं कांकरोली में आ गया हूँ, मेरा संपर्क सिर्फ जीतू के ही साथ था । जीतू और धर्मेन्द्र भैया मेरे बड़े मामा जी के लड़के हैं। दोनों ही यहाँ मार्बल माइंस में नौकरी करते हैं, इसलिए अपने परिवार को लेकर दोनों यहीं रहते हैं, मैं पहले भी कई बार कांकरोली और राजनगर आ चुका हूँ, कल्पना और दिलीप पहली बार आये थे। 

Friday, March 30, 2012

AJMER 2012

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S


अजमेर की एक यात्रा 




       मैंने अपनी शादी के बाद अजमेर और उदयपुर जाने का प्लान बनाया, हालांकि मैंने पहले ही सियालदाह-अजमेर एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करवा रखा था, जिसका समय आगरा फोर्ट पर रात को आठ बजे है किन्तु आज यह ट्रेन अपने सही समय से काफी लेट हो गई और सुबह चार बजे आगरा फोर्ट पहुंची। आज हमारी पूरी रात इस ट्रेन के इंतजार में खराब हो गयी। 

मैं आज पहली बार अपनी पत्नी के साथ यात्रा कर रहा था, एक अजीब सी ख़ुशी मेरे दिल में थी, किन्तु हमारी इस  यात्रा की शुरुआत ही विलम्ब से शुरू हुई। ट्रैन आने के बाद हम अपनी सीट पर पहुंचे और सारी रात जगे और थके होने के कारण तुरंत ही अपनी सीट पर नींद के आगोश में समां गए।