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Saturday, April 25, 2026

MY TRIP IN AGRA : AGRA 2025

 

MY AGRA TRIPS IN 2025


📅10 FEB' 25

मैं आज अपनी कंपनी की किया करेन्स गाडी लेकर टेस्ट ड्राइव के लिए आगरा गया। पार्श्वनाथ पंचवटी, जो की फतेहाबाद रोड के नजदीक स्थित है, वहां मैं गाडी की एक ग्राहक को टेस्ट ड्राइव कराइ और उसके बाद लौटते समय प्रतापपुरा चौराहे पर मैं अपने मित्र कुमार से मिला। कुमार से थोड़ी देर मिलने के बाद मैं अपने एक अन्य मित्र पप्पू से भी मिला जो कि सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज में ही कार्यरत है। 

बचपन के शहर और दोनों मित्रों से मिलने के बाद मैं वापस आगरा आ गया। 

MY FRIND KUMAR BHATIA

MEET TO SATENDRA S CHAUHAN

Thursday, October 12, 2023

AGRA : ROMAN CATHOLIC CEMETERY


आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 6

 रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान


आगरा में रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान का निर्माण 1550 ई. में हुआ था और इसका इस्तेमाल सबसे पहले उन अर्मेनियाई ईसाइयों को दफनाने के लिए किया गया था, जो अकबर के शासनकाल के दौरान इस शहर में आकर बस गए थे। इनके बाद, जैसे-जैसे इस इलाके में दूसरे लोग आकर बसते गए, वैसे-वैसे अन्य ईसाई संप्रदायों के लोगों को भी यहाँ दफनाया जाने लगा।


इस कब्रिस्तान में सबसे पुरानी कब्र जॉन मिल्डेनहॉल की है। जॉन मिल्डेनहॉल एक अंग्रेज व्यापारी थे, जिनकी मृत्यु 1614 में हुई थी। कहा जाता है कि वह पहले ऐसे अंग्रेज थे, जिन्होंने "अकबर को आमने-सामने देखा था"। लेकिन यहाँ कुछ और कब्रें भी हैं, जो ध्यान देने लायक हैं न सिर्फ उन लोगों से जुड़ी कहानियों की वजह से, बल्कि उन कब्रों की वास्तुकला की वजह से भी।

Saturday, August 12, 2023

AGRA : MEHTAB BAGH & ELEVEN STAIRES




आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 2 

मेहताब बाग़ और ताजमहल का एक दृश्य 

       यूँ तो मैं बचपन से ही आगरा शहर में रहा किन्तु कभी ताजमहल को यमुना के दूसरी पार से देखने का मौका नहीं मिला, कारण था इस स्थान की दूरी, और यहाँ जाने वाला रास्ता जिसके बारे में मुझे कोई विशेष जानकारी नहीं थी। जब कभी ताजमहल देखने का मन होता था तो इसके मुख्य द्वार से ही इसे जाकर देख आता था। किन्तु आगरा शहर छोड़ने के अनेक वर्षों बाद अपने पुराने शहर को घूमने की इच्छा मन में जाग्रत हुई और मैं अपनी बाइक उठकर निकल चला आगरा की ऐतिहासिक यात्रा पर। 

    इस यात्रा के तहत मैंने आगरा के उन स्थानों को चिन्हित किया जो मैंने पहले कभी नहीं देखे थे। इसलिए सबसे पहले मैं पहुंचा यमुना नदी के दूसरी पार, जहाँ आगरा की विभिन्न मध्यकालीन ऐतिहासिक इमारतें देखीं जा सकती थीं। 

    इन सभी स्थलों में सबसे मुख्य था मेहताब बाग़, जो मुगलकाल का एक शानदार बगीचा था। इसका निर्माण औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान कराया था। इस बगीचे से ताजमहल का बहुत ही शानदार दृश्य दिखाई देता है बिलकुल वैसे ही, जैसे हम इसे ताज के परिसर में प्रवेश करने के बाद देखते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि मेहताब बाग़ से आप सिर्फ ताजमहल को निहार सकते हैं, इसके ख़ूबसूरती को महसूस कर सकते हैं, यमुना नदी के जल में इसका प्रतिबिम्ब देख सकते हैं किन्तु आप इसे छू नहीं सकते, इसके नजदीक नहीं जा सकते हैं क्योंकि मेहताब बाग़ और ताजमहल के बीच यमुना नदी है और यहाँ इसे पार करने की इजाजत नहीं है। 

AGRA : AGRA FORT


आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 1 

आगरा किला 



 आगरा किले का इतिहास


माना जाता है कि आगरा किले का निर्माण मुग़ल शासक अकबर ने करवाया था किन्तु उससे पूर्व भी आगरा किले के अस्तित्व में होने के कुछ उदाहरण मिलते हैं जिनके बाद स्पष्ट हो जाता है कि अकबर ने इस किले का निर्माण नहीं बल्कि इसके स्थान पर बने पुराने किले की मरम्मत कराकर इसे एक नया रूप दिया था। 

इससे पूर्व यह एक ईंटों का किला था, जो सिकरवार वंश के राजपूतों के पास था। इसका प्रथम विवरण 1080 ई० में आता है जब महमूद गजनवी की सेना ने इस पर कब्ज़ा किया था। 

सिकंदर लोदी (1487-1517), दिल्ली सल्तनत का प्रथम सुल्तान था जिसने आगरा की यात्रा की तथा इस किले की मरम्म्त 1504 ई० में करवायी और इस किले को अपने निवास के रूप में चुना। सिकंदर लोदी ने इसे 1506 ई० में राजधानी बनाया और यहीं से देश पर शासन किया। उसकी मृत्यु भी इसी किले में 1517 में हुई थी। 

बाद में उसके पुत्र इब्राहिम लोदी ने भी नौ वर्षों तक इस किले से राज्य किया, जब तक वो पानीपत के प्रथम युद्ध (1526) में बाबर द्वारा मारा नहीं गया। उसने अपने काल में यहां कई स्थान, मस्जिदें व कुएं बनवाये जो आज भी आगरा में विभिन्न स्थानों पर दृष्टिगोचर होते हैं। 

पानीपत के युद्ध के बाद मुगलों ने इस किले पर कब्ज़ा कर लिया साथ ही इसकी अगाध सम्पत्ति पर भी। इस सम्पत्ति में ही एक हीरा भी था जो कि बाद में कोहिनूर हीरा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। तब इस किले में इब्राहिम के स्थान पर बाबर आया। उसने यहां एक बावली बनवायी। 

सन 1530 में आगरा किले में हुमायुं का राजतिलक भी हुआ। हुमायुं इसी वर्ष बिलग्राम में शेरशाह सूरी से हार गया व किले पर उसका कब्ज़ा हो गया। इस किले पर अफगानों का कब्ज़ा पांच वर्षों तक रहा, जिन्हें अन्ततः मुगलों ने 1556 में पानीपत का द्वितीय युद्ध में हरा दिया।

Monday, June 5, 2023

KALPANA BIRTHDAY : AGRA 2023


 आगरा की एक दिवसीय यात्रा और कल्पना का जन्मदिन 


                             

5 जून 2023 

आज 5 जून है यानी मेरी पत्नी कल्पना का जन्मदिवस। इसलिए आज हमने इस दिन को विशेष बनाने के लिए अपने पूर्व गृहनगर आगरा को चुना। वैसे भी काफी समय बीत चुका था, अपने पूर्व गृहनगर आगरा गए हुए। 

दरअसल मैं बचपन से ही आगरा में रहा हूँ, वहां हम आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के समीप रेलवे कॉलोनी में रहते थे क्योंकि मेरे पिताजी वहां रेलवे में कार्यरत थे। आगरा में रहकर ही मैंने बहुत कुछ सीखा और अपनी शिक्षा पूरी की। युवावस्था में मेरा विवाह मथुरा निवासी कल्पना से हुआ और उसे पत्नी के रूप में पहली बार मैं आगरा ही लेकर आया। इसप्रकार आगरा शहर मेरे और कल्पना के लिए विशेष महत्त्व रखता है। यहाँ आकर हमारी वो समस्त पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। 

हम अपनी बाइक से ही मथुरा से आगरा के निकल पड़े। यह दूरी 50 किमी के लगभग थी जिसे पूरा करने में मात्र एक घंटा काफी है। स्प्लेंडर एक अच्छी बाइक होने के साथ साथ अच्छा माइलेज भी देती है, अतः हमें आगरा पहुँचने में ज्यादा विलम्ब नहीं हुआ। आगरा - मथुरा के बीच रैपुरा नामक स्थान है, यह दोनों नगरों का मध्य केंद्र भी है अतः यहाँ हम थोड़ी देर रुके और गन्ने का जूस पिया क्योंकि यह ग्रीष्म ऋतू है और इस ऋतू में जितना भी शीतल पेय लिया जाए, फायदेमंद ही होता है। 

इस स्थान से एक बाईपास रोड भी गुजरता है जो आगरा शहर को बाईपास करता है। यह दिल्ली - कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग को आगरा - मुंबई राजमार्ग से जोड़ता है। अतः धौलपुर , ग्वालियर की तरफ जाने के लिए यह मार्ग उपयोगी है। इसी मार्ग के पुल के नीचे हम गन्ने का जूस पीकर थोड़ी देर रुके और फिर अपने पुराने नगर की तरफ बढ़ चले। 



मेरे सफर के साथी 

आगरा शहर पहुंचकर सर्वप्रथम हम ओमेक्स मॉल पहुंचे। यह काफी बड़ा और अच्छा मॉल है और साथ ही इसमें एक अच्छा मल्टीप्लेक्स सिनेमा है जिसमें कई सारी फ़िल्में एक ही समय पर चलती हैं। हमें यहाँ द केरला स्टोरी मूवीज की टिकट मिली। यह मूवीज केरल से सम्बंधित थी इसलिए हमें अच्छी भी लगी क्योंकि इसी माह में हमारी अगली यात्रा केरला की ही निर्धारित थी। 

फिल्म में मुख्य भूमिका में अभिनेत्री अदा शर्मा हैं जिन्होंने अपने शानदार अभिनय से इस फिल्म को और शानदार बना दिया। वैसे मुझे अदा शर्मा की सभी फिल्में बहुत पसंद हैं क्योंकि वह अपने अभिनय से फिल्म के किरदार को बखूबी निभाती हैं। 

मूवीज देखने के बाद हमने थोड़ी देर इस मॉल को घूमकर देखा, अनेकों बड़ी बड़ी दुकानों और शोरूमों से यह मॉल और भी शानदार लग रहा था। मॉल घूमने के बाद हम अपने पुराने आवास आगरा कैंट की तरफ रवाना हो गए। 











आगरा कैंट पहुंचकर सर्वप्रथम हमने अपने उस रेल आवास को देखा जहाँ कभी कल्पना प्रथम बार अपने मातापिता का घर छोड़कर अपने नए घर में आई थी। इस समय इस रेल आवास में कोई अन्य रेल कर्मचारी निवास कर रहे थे। हमें यूँ घर की तरफ देखते हुए उन्होंने हमसे इसका कारण पूछा तो कारण जानने के बाद वह बहुत प्रसन्न हुए और अनजान होते हुए भी उन्होंने हमें अंदर बुलाया। 

काफी सालों बाद आज अपने पुराने घर को देखकर मन में बचपन की यादें और वैवाहिक यादें एक बार फिर से ताजा हो गईं। यह आज भी वैसा ही था जैसा हम इसे छोड़कर गए थे, इस घर की हरेक जगह से मेरी यादें जुडी हुईं थी। मैंने इस घर के नए मालिक का आभार व्यक्त किया और उन्हें धन्यवाद कहकर हम आगरा के शाहगंज बाजार की तरफ बढ़ चले। 

आगरा में शाहगंज एक बड़ा बाजार है जो आगरा कैंट के नजदीक ही है। शाहगंज के समीप कोठी मीना बाजार का बड़ा मैदान है। इस मैदान में हमेशा कुछ ना कुछ नया देखने को मिलता है जैसे कभी यहां सर्कस चलता है या काफी यहाँ हस्त शिल्प बाजार लगता है। 

अभी फ़िलहाल यहाँ डिस्नी लैंड मेला चल रहा था। यह अधिकतर गर्मियों  के दिनों में ही यहाँ लगता है। अभी जून का महीना है इसलिए हमें यह यहाँ देखने को मिला। मैंने इस मेले की दो टिकट लीं और कल्पना को यह मेला दिखाया। 

इस मेले में अनेकों दुकाने और झूले लगे थे, एक दो झूलों पर हम भी झूले और एकबार पुनः बचपन की मस्ती में खो गए। अब शाम करीब हो चली थी और दिन ढलने  की कगार पर था अतः एक दो घंटे यहाँ घूमने  के बाद अब हम अपने वर्तमान नगर मथुरा की ओर प्रस्थान कर गए। 

















डिस्नी लैंड मेला देखने के बाद हम मथुरा की तरफ प्रस्थान कर चुके थे किन्तु अभी हमारी यात्रा समाप्त नहीं हुई थी। आज कल्पना का जन्मदिन था इसलिए मैं इस शाम को भी विशेष बनाना चाहता था अतः हम मथुरा से पहले ही मैकडॉनल्ड के रेस्रोरेन्ट पहुंचे और यहाँ शाम का भोजन किया। कल्पना को आज का दिन बहुत ही अच्छा लगा और वह बहुत खुश थी। मैंने उसके चेहरे पर यही ख़ुशी देखना चाहता था। इस प्रकार हमने आज के दिन को एक यात्रा का रूप दे दिया और कल्पना का बर्थडे भी मन गया। 







धन्यवाद 

🙏


Sunday, August 5, 2018

Bateshwar


तीर्थराज भांजा बटेश्वर धाम - आगरा 


बटेश्वर रेलवे स्टेशन 


यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

       अब शाम करीब ही थी और मैं अभी भी आगरा से 72 किमी दूर बाह में ही था। नौगांवा किले से लौटने के बाद अब हम भदावर की प्राचीन राजधानी बाह में थे। मैंने सुना था कि यहाँ भी एक विशाल किला है परन्तु कहाँ है यह पता नहीं था। बस स्टैंड के पास पहुंचकर राजकुमार भाई को भूख लग आई पर उनका एक उसूल था कि वो जब तक मुझे कुछ नहीं खिलाएंगे खुद भी नहीं खाएंगे इसलिए मजबूरन मुझे भी कुछ न कुछ खाना ही पड़ता था। रक्षा बंधन का त्यौहार नजदीक था इसलिए मिठाइयों की दुकानें घेवरों से सजी हुई थीं। मैंने अपने लिए घेवर लिया और भाई ने वही पुरानी समोसा और कचौड़ी। दुकानदार से ही हमने किले के बारे में और बटेश्वर के लिए रास्ता पूछा। उसने हमें बाजार के अंदर से होकर जाती हुई एक सड़क की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये रास्ता सीधे बटेश्वर के लिए गया है इसी रास्ते पर आपको बाह का किला भी देखने को मिल जायेगा। 

Noungawa Fort


नौगँवा किला - एक पुश्तैनी रियासत




पिछली यात्रा - पिनाहट किला 
   
     अटेर किला न जा पाने के कारण अब हमने बाह की तरफ अपना रुख किया। पिनाहट से एक रास्ता सीधे भिलावटी होते हुए बाह के लिए जाता है। इस क्षेत्र में अभी हाल ही में रेल सेवा शुरू हुई है जो आगरा से इटावा के लिए नया रेलमार्ग है। इस रेल लाइन का उद्घाटन भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई के समय में हुआ था किन्तु कुछ साल केंद्र में विपक्ष की सरकार आने की वजह से इस रेल मार्ग को बनाने का काम अधूरा ही रहा। अभी हाल ही में ही रेल लाइन पर रेल सेवा शुरू हुई है। यह रेल मार्ग अब हमारे सामने था, जिसे पार करना हमें मुश्किल दिखाई दे रहा था। रेलवे लाइन के नीचे से सड़क एक पुलिया के जरिये निकलती है जिसमे अभी बहुत अत्यधिक ऊंचाई तक पानी भरा हुआ था इसलिए मजबूरन हमें बाइक पटरियों के ऊपर से उठाकर निकालनी  पड़ी और हम भिलावटी गांव पार करते हुए बाह के रेलवे स्टेशन पहुंचे। 

Pinahat Fort


चम्बल किनारे स्थित -  पिनाहट किला

पिनाहट किला 


    आज मेरा जन्मदिन था और आज सुबह से बारिश भी खूब अच्छी हो रही थी इसलिए आज मैं कहीं घूमने जाना चाहता था इसलिए मैंने भिंड में स्थित अटेर दुर्ग को देखने का प्लान बनाया। परन्तु मैं वहाँ अकेला नहीं जाना चाहता था इसलिए मैंने अपने साथ किसी मित्र को ले जाने के बारे में सोचा। आगरा में मेरे एक मित्र भाई है जिनका नाम है राजकुमार चौहान, मैंने आज कई सालों बाद उन्हें फोन किया तो मेरा फोन आने पर उन्हें कितनी ख़ुशी हुई ये मैं बयां नहीं कर सकता। उनके पास मेरा नंबर नहीं था और आगरा से मथुरा आने के बाद मैंने उनके पास कभी फोन नहीं किया, आज अचानक मेरा फोन आने से वो बहुत खुश हुए। 

Saturday, July 14, 2018

Agra : Mariam Tomb



मरियम -उज़ -जमानी का मक़बरा 

मरियम का मकबरा 


     सन 1527 में बाबर ने जब फतेहपुर सीकरी से कुछ दूर उटंगन नदी के किनारे स्थित खानवा के मैदान में अपने प्रतिद्वंदी राजपूत शासक राणा साँगा को हराया तब उसे यह एहसास हो गया था कि अगर हिंदुस्तान को फतह करना है और यहाँ अपनी हुकूमत स्थापित करनी है तो सबसे पहले हिंदुस्तान के राजपूताना राज्य को जीतना होगा, इसके लिए चाहे हमें ( मुगलों ) को कोई भी रणनीति अपनानी पड़े। बाबर एक शासक होने के साथ साथ एक उच्च कोटि का वक्ता तथा दूरदर्शी भी था। इस युद्ध के शुरुआत में राजपूतों द्वारा जब मुग़ल सेना के हौंसले पस्त होने लगे तब बाबर के ओजस्वी भाषण से सेना में उत्साह का संचार हुआ और मुग़ल सेना ने राणा साँगा की सेना को परास्त कर दिया और यहीं से बाबर के लिए भारत की विजय का द्धार खुल गया। इस युद्ध के बाद बाबर ने गाज़ी की उपाधि धारण की।  


Friday, January 26, 2018

AGRA FORT : 2018



आगरा किला



26 जनवरी 2018 मतलब गणतंत्र दिवस, भारतीय इतिहास का वो दिन जब भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् देश का संविधान बनकर लागू हुआ। भारतीय संविधान को बनकर तैयार होने में कुल 2 साल 11 महीने 18 दिन का समय लगा और जब इसे लागू किया गया वह दिन भारतीय इतिहास में एक राष्ट्रीय पर्व बन गया और इसे आज हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश रहता है जिसे मनाने के लिए आज मैं अपनी पत्नी कल्पना को लेकर अपने शहर आगरा पहुंचा और अपने शहर को करीबी से देखने का मौका हासिल किया।

...
ताजमहल पर आज के दिन काफी भीड़ रहती है, देश विदेश से हजारों पर्यटक इसे यहाँ देखने आते हैं अतः हमने इसे दूर से देखना ही उचित समझा और इसे देखने के लिए हम पहुंचे आगरा फोर्ट, जहाँ कभी अपने पुत्र औरंगजेब की कैद में रहकर मुग़ल सम्राट शाहजहाँ भी एक झरोखे में से इसे देखा करता था, जो उसने अपनी पत्नी मुमताज की याद में बनवाया था। यहीं इसी झरोखे से ताजमहल को निहारते हुए ही उसकी मृत्यु हो गई। आज आगरा फोर्ट में भी पर्यटकों की संख्या ज्यादा ही थी।

Wednesday, March 22, 2017

AGRA : JODHABAI KI CHHATRI


 मुग़ल महारानी जोधाबाई की छतरी 

यूँ तो आगरा शहर का नाम और यहाँ का इतिहास किसी से छुपा नहीं है। इस शहर को मध्यकालीन भारत में मुग़ल राजवंश की राजधानी होने का गौरव प्राप्त है। यह बाबर से लेकर औरंगजेव और उत्तर मुगलकालीन शासकों की कर्मभूमि रहा है। मुगलों ने यहाँ अलग अलग कालों में अनेकों ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण कराया जिसमें विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सिकरी, एत्माउद्दौला का मकबरा और अकबर का मकबरा, मुख्य इमारतें हैं। पंद्रहवीं शताब्दी में जब यहाँ बादशाह अकबर का शासन था तब यह शहर अपने चरमोत्कर्ष पर था। 

यहाँ के बाग़ बगीचे और यहाँ लगने वाला मीना बाजार प्रमुख था। मुग़ल काल में ही आगरा से लाहौर तक कोस मीनारों का निर्माण हुआ। वर्तमान में यहाँ मुगलकाल के शासकों द्वारा अलग अलग समय पर निर्मित अनेकों इमारतें आज भी दिखाई देती हैं। बादशाह अकबर ने अपना मकबरा अपने जीवन काल में ही निर्मित कराना शुरू कर दिया था। जहांगीर के शासनकाल के दौरान उसकी पत्नी नूरजहां ने भी अपने पिता गयासुद्दीन बेग का मकबरा यहाँ निर्मित कराया और उसके पश्चात मुग़ल बादशाह शाहजहां ने भी अपनी पत्नी मुमताज की याद में ताजमहल नामक एक मकबरे का निर्माण कराया जो आज दुनिया के सात अजूबों में से एक है। 

परन्तु इनमे जोधाबाई का नाम कहीं नहीं आता। हालाँकि फतेहपुर सीकरी में जोधाबाई का महल अवश्य दर्शनीय है परन्तु अकबर की मृत्यु के बाद जोधाबाई कहाँ गई कोई नहीं जानता। 


       भारतीय इतिहास के महानतम सम्राट अकबर की पत्नी जोधबाई का अंतिम स्थल आगरा की पॉश कॉलोनी अर्जुन नगर में स्थित है। जहाँ अधिकतर कोई भी टूरिस्ट नहीं पहुँचता। पुरातत्व विभाग वालों ने स्मारक की देखरेख सही ढंग से तो की हुई है परन्तु अगर आप वहां जाओगे भी तो हमेशा गेट पर ताला लटका मिलता है। इसका प्रमुख कारण है सैलानियों का वहां तक न पहुंचना। जोधाबाई एक हिन्दू राजपूत थी इसलिए उन्हें दफ़नाने के स्थान पर यहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया था। आगरा कैंट स्टेशन से 3 किमी दूर स्थित अर्जुन नगर में यह इकलौता मुगलकालीन स्मारक है जो अर्जुन नगर की पॉश कॉलोनी ज्योति नगर में कॉलोनी के बीचोबीच स्थित है।













Friday, October 11, 2013

AGRA : GURU KA TAAL


गुरु अर्जुनदेव का शहीदी स्थल - गुरु का ताल

   आज न जाने क्यों अपना ही शहर घूमने का ख्याल दिल में आया, सोचा दूर दूर से लोग जिस शहर को देखने आते हैं उसी शहर को छोड़ हम दूसरी जगहों पर जाते हैं और पाते हैं कि एक बार आगरा आना इस इस देश के हर इंसान का सपना है, और हो भी क्यों ना जब स्वर्ग में जिस महल की बुनियाद रखी गई हो और मोहब्बत के नाम पर जिसे जमीं  पे उतारा गया हो और उसकी ताजगी के नाम पर उसे ताज महल पुकारा गया हो उसे कौन नहीं देखना चाहेगा । 
 
     पर आज मैं आपको ताजमहल नहीं, आगरा की उन जगहों पर जाऊंगा जहाँ शायद ही लोग जाना पसंद करते हैं, उन जगहों में सबसे पहले मेरी यात्रा वाहेगुरु का नाम लेकर आगरा के प्रसिद्द गुरुद्वारा, गुरु का ताल से प्रारम्भ करूँगा। 


Tuesday, October 11, 2011

IDGAH AGRA TO BANDIKUI : DMU 2011


ईदगाह से बाँदीकुई डीएमयू यात्रा 

ईदगाह आगरा जंक्शन 

आज मैं घर पर फ्री था, कोई काम नहीं था तो स्टेशन की तरफ निकल गया। आज आगरा कैंट ना जाकर सीधे ईदगाह स्टेशन गया, यहाँ अभी कुछ दिन पहले जापानी ट्रेन जैसी दिखने वाली एक डीएमयू शुरू हुई है जो अब बाँदीकुई तक जाने लगी है। यह बांदीकुई जाती है और फिर वहां से वापस आगरा आ जाती है। अपना किराया तो  लगता ही नहीं है इसलिए चल दिए इसी ट्रैन से एक यात्रा बाँदीकुई की और करने।  काफी समय पहले में इस लाइन पर भरतपुर तक यात्रा कर चूका हूँ तब यह लाइन मीटर गेज हुआ करती थी। गेज परिवर्तन के बाद यह मेरा पहला मौका है जब मैं इस ट्रैक पर यात्रा कर रहा हूँ।  मैं ईदगाह स्टेशन पहुंचा, कुछ देर में ट्रेन भी पहुँच गई। ट्रैन में अपना स्थान ग्रहण कर मैं यात्रा पर रवाना हो चला।