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Sunday, September 24, 2023

BIKANER 2023 : DEE TO BKN & JHANJHEU VILLAGE


  मरुस्थलीय भूमि में एक रेल यात्रा - दिल्ली सराय रोहिल्ला से बीकानेर 



24 SEP 2023, 

आज पूरा दिन मैंने राजधानी दिल्ली की तमाम ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया और साथ ही इस्कॉन एवं लोटस टेम्पल जैसी जगहों को भी देखा। अब शाम हो चली थी और अब मुझे दिल्ली से बीकानेर की ओर प्रस्थान करना था। बीकानेर की ट्रेन दिल्ली के सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन से बनकर चलती हैं, मैं देर शाम दिल्ली की नगरीय बस द्वारा दिल्ली सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन पहुंचा। यह स्टेशन किसी समय में मीटर गेज का एक मुख्य स्टेशन था आज यह पूर्ण रूप से ब्रॉड गेज में परवर्तित हो चुका है। 

दिल्ली सराय रोहिल्ला से बीकानेर के लिए रात को दो रेलगाड़ियां प्रस्थान करती हैं। इनमें से एक तो सीधे रेवाड़ी, सादुलपुर और चूरू होते हुए बीकानेर जाती है और दूसरी ट्रैन भटिंडा, श्री गंगा नगर, सूरतगढ़ होते हुए बीकानेर जाती है। इनमें से पहली वाली में कई बार यात्रा कर चुका हूँ, आज दूसरी ट्रेन से मेरा जाने का मन था, इसलिए इसी ट्रेन की मैंने बीकानेर की एक टिकट ली और ट्रेन में पहुंचा। जनरल कोच में भी अधिकांश सीटें खाली पड़ी थीं। एक खाली ऊपर वाली सीट पर मैंने अपना आसन बिछाया और आराम से सो गया। 

Sunday, September 1, 2019

BIKANER 2019 : JUNAGARH FORT



जूनागढ़ - बीकानेर का किला



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आज शाम को ही मुझे और किशोर मामा जी को मथुरा निकलना था जिसके लिए मैंने पहले ही बीकानेर से हावड़ा जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में रिजर्वेशन करवा रखा था। झंझेऊ से दोपहर में विदा होकर मैं बीकानेर आया और आज मेरा मकसद बीकानेर का प्रसिद्ध किला जूनागढ़ देखना था। बस से उतारकर एक ऑटो द्वारा मैं जूनागढ़ किला पहुंचा।

राजस्थान के अधिकांश किले किसी ना किसी पहाड़ी पर स्थित होते हैं परन्तु यह राजस्थान का एक ऐसा किला है जो किसी पहाड़ी पर स्थित ना होकर शहर के बीचोंबीच स्थित है। इसकी बाहरी दीवारें मुझे ऐसा एहसास करा रही थी कि यह हूबहू आगरा किले के समान है।

Saturday, August 31, 2019

BIKANER 2019 : BIKANER MUSEUM



बीकानेर संग्रहालय 


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    झंझेऊ से जब मैं बस द्वारा बीकानेर आया तो बस ने मुझे गंगानगर चौक पर उतारा, यह चौक बीकानेर संग्रहालय के ठीक सामने है। जब मैं संग्रहालय के सामने खड़ा था तो मैंने सोचा चलो पहले इसे ही देख लिया जाय। यह राजकीय संग्रहालय है जो महाराजा गंगा सिंह जी के नाम से विख्यात है।  आज तापमान बहुत ज्यादा ही गर्म था इसलिए मैंने कुछ समय इस संग्रहालय में ही बिताना उचित समझा। एक दुकान से पानी की एक बोतल लेकर मैं टिकट खिड़की पर पहुंचा और 20 रूपये की एक टिकट लेकर मैं संग्रहालय देखने चल दिया।  आप भी देखिये क्या क्या था इस संग्रहालय में चित्रों के माध्यम से। ...

बीकानेर संग्रहालय 

Chila Mata Temple & Desert Village Jhanjheu

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

चीला माता मंदिर - मरुभूमि ग्राम झंझेऊ 



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श्री डूँगरगढ़ से झंझेऊ बस यात्रा 


     श्री डूंगरगढ़ स्टेशन से एक ऑटो द्वारा मैं राष्ट्रीय राजमार्ग 11 पर पहुंचा। यह आगरा से बीकानेर मार्ग है जो राजस्थान का एक मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग है। मामाजी ने मुझे बताया था कि यहाँ से ग्राम झंझेऊ 12 किमी के आसपास है और बीकानेर 50 किमी के आसपास। इसलिए मुझे यहाँ से बस द्वारा झंझेऊ उतरना है जो की इसी राजमार्ग पर स्थित है। मामाजी फ़िलहाल चूरू में एक रिश्तेदारी में गए हुए थे अतः वे शामतक झंझेऊ पहुंचेंगे इसलिए मैं अकेला ही अपने मामा की ससुराल झंझेऊ की तरफ एक बस द्वारा बढ़ चला। मैं यहाँ काफी सालों बाद आया था इसलिए मैंने अपने पास बैठे एक राजस्थानी सज्जन से झंझेऊ ग्राम आने पर बताने के लिए कह दिया था। 

     राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों और रेत के बड़े बड़े और ऊँचे ऊँचे टीले दिखने शुरू हो चुके थे जो मुझे एहसास करा रहे थे कि मैं अब मरुस्थलीय क्षेत्र में हूँ। यहाँ आबादी बहुत ही कम है इसलिए सड़क दूर दूर तक खाली ही नजर आ रही थी और इस खाली सड़क पर बस बड़ी ही तेज रफ़्तार से दौड़ी जा रही थी। कुछ समय बाद मैं झंझेऊ पहुँच गया। यहाँ रोड पर लगा चीला माता के मंदिर का बोर्ड ही इस ग्राम की पहचान कराता है। यह तंवरों का ग्राम है और चीला माता उनकी कुलदेवी हैं अतः यहाँ चीला माता की विशेष मान्यता है। बोर्ड के कुछ फोटो खींचने के बाद मैं ग्राम में अंदर अपने मामाजी की ससुराल की तरफ बढ़ चला।