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Saturday, September 23, 2023

DELHI 2023 : ASHOKA EDICT


दिल्ली में सम्राट अशोक का शिलालेख 


सन 1966 में जब राजधानी दिल्ली में आवासीय प्रसार अपने चरम पर था तभी आवासीय कॉलोनी बनाने वाले एक ठेकेदार की नजर एक ऐसी ऐतिहासिक चट्टान पर पड़ी जिस पर कुछ चिन्हों की भाषा उत्कीर्ण थी जो अपठनीय थी। उसने तुरंत इसकी सूचना सम्बंधित अधिकारी को दी और इसके बाद पुरातत्ववेत्ताओं इस चट्टान की  जाँच की। इस जांच में उन्होंने पाया कि यह भाषा प्राचीन समय की है और यह प्राकृत अथवा ब्राह्मी लिपि थी। 

इस भाषा के अक्षर,  इससे पूर्व दिल्ली में पाए गए अशोक स्तम्भों से मेल खाती थी, साथ ही बैराट स्थित शिलालेख से इसकी समानता प्रतीत होती थी, इससे यह स्पष्ट हो गया कि यह शिलालेख सम्राट अशोक द्वारा ही उत्कीर्ण है और बाद में जब इस भाषा का अनुवाद किया गया तो फिर इसमें कोई संदेह ही नहीं बचा कि यह सम्राट अशोक का ही शिलालेख है। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे सम्राट अशोक के लघु शिलालेख की श्रेणी में रखा है। 

DELHI 2023 : LOTUS TEMPLE


बहाई उपासना मंदिर - दिल्ली 


19 वीं सदी में ईरान में एक प्रमुख संत बहाउल्लाह द्वारा बहाई धर्म की स्थापना की गई थी जो सभी धर्मों के मूल महत्त्व और मानव - एकता की शिक्षा देता है। शुरुआत में यह ईरान और पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में विकसित हुआ और अंत में यह भारत में भी विकसित होने लगा। बहाई धर्म में कोई पुरोहित नहीं होता, यह केवल ईश्वरीय प्रार्थना पर निर्भर है। 

भारत में राजधानी दिल्ली में कालकाजी के संमीप स्थित कमल मंदिर बहाई धर्म का एक मुख्य केंद्र अथवा प्रार्थना स्थल है। सफ़ेद संगमरमर से बनी 9 पंखुड़ियों वाले इस कमल मंदिर की शोभा ना सिर्फ भारत देश में अपितु समूचे विश्व भर में प्रसिद्ध है। 

बहाई कमल मंदिर सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला है, यहाँ बिना किसी भेदभाव के, किसी भी धर्म या जाति के  लोग आसानी से प्रवेश कर सकते हैं और शांत वातावरण के बीच ईश्वर की प्रार्थना कर सकते हैं। बहाई धर्म, एक ईश्वर, एक धर्म और एक मानवता के जोर पर बल देता है। 

DELHI 2023 : ISCON TEMPLE

 

इस्कॉन मंदिर - दिल्ली 

23 SEP 2023

दिल्ली के पूर्वी कैलाश में श्री कृष्णा हिल्स में दिल्ली का इस्कॉन मंदिर स्थित है। इस मंदिर को श्री श्री राधा पार्थसारथी मंदिर कहते हैं क्योंकि मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री कृष्ण के साथ राधा रानी की प्रतिमा स्थापित है। इस मंदिर का उद्घाटन 5 अप्रैल 1998 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने किया था। यह भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। मंदिर में अनेकों कक्ष और सभागार हैं। 

इस मंदिर की सबसे मुख्य विशेषता है कि यहाँ विश्व की सबसे बड़ी पुस्तक अद्भुत भगवत गीता रखी हुई है जो इटली में मुद्रित हुई थी और जिसका वजन अनुमानित 800 किलोग्राम है। इसका अनावरण 26 फ़रवरी 2019 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। 

मैं आज सुबह ही यहाँ पहुँच गया और मंदिर के बाहर अपने जूते खोलकर दर्शन की लाइन में लग गया। अनेको दिल्लीवासी लोग यहाँ प्रभु के दर्शनों हेतु लाइन में लगे हुए थे और कुछ ही समय बाद मुझे भी ईश्वर के दर्शन हो गए। मंदिर काफी बड़ा है, अनेकों फुवारे मंदिर की शोभा को बढ़ाते हैं। सुरक्षा के लिए यहाँ हरसमय सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। 

Saturday, April 15, 2023

SAFDARJUNG HOSPITAL : NEW DELHI 2023


सफदरजंग हॉस्पिटल और मेरी दिल्ली यात्रा 

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल और आल इंडिया हॉस्पिटल के नाम देश भर में विख्यात हैं, कहते हैं जिस बीमारी का इलाज कहीं और नहीं हो पाता, वह यहाँ संभव हो जाता है। मैं पहले भी एक बार सफदरजंग हॉस्पिटल की यात्रा कर चूका हूँ।  उनदिनों मेरी बहिन रश्मि इस हॉस्पिटल में भर्ती रही थी, तब मैं अपनी माँ के साथ इस अस्पताल की यात्रा पर गया था और तभी मैंने इसकी विशालता को देखा था। देश भर के अनेकों अमीर - गरीब समुदाय के लोग यहाँ अपने रोगों से छुटकारा पाने के लिए यहाँ आते हैं और अनेकों दिन यहाँ रहकर अपना इलाज कराते हैं। 

Monday, February 22, 2021

HANUMAN STATUE : FARIDABAD

 UPADHYAY TRIPS PRESENT'S


दिल्ली लिंक रोड और हनुमान जी की विशाल प्रतिमा 

22 FEB 2021, देश में अनेकों स्थानों पर हिन्दू देवी देवताओं के मंदिर और प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं, ऐसी ही एक प्रतिमा मैंने फरीदाबाद से दिल्ली जाने के एक रास्ते में देखी। दरअसल, आज मेरी कंपनी का ट्रेनिंग प्रोग्राम दिल्ली के होटल में था जो छतरपुर ब्लॉक में स्थित था। मुझे सुबह तड़के ही कंपनी की गाडी से दिल्ली के लिए निकलना था इसलिए मैं सुबह जल्दी उठा और तैयार होकर हाईवे पहुँच गया। कुछ ही समय बाद कंपनी की गाडी भी आ गई और हम दिल्ली के लिए निकल पड़े। मेरे साथ मेरी कम्पनी में काम करने वाले और भी लड़के साथ थे।

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 हम फरीदाबाद से दिल्ली के लिए एक लिंक रोड से गए जो दिल्ली के सीमावर्ती इलाके से होकर गुजरता है। यह एक शानदार रास्ता है और यहाँ ट्रैफिक भी बहुत ही कम दिख रहा था। रास्ते में लगे बोर्ड के अनुसार यह दिल्ली का जंगली इलाका है और हम इसवक्त जंगल से ही होकर गुजर रहे थे। इसी रास्ते पर हमें हनुमान जी का एक बहुत बड़ा स्टेचू दिखाई दिया। हम हनुमान जी की इस प्रतिमा के दर्शन करना चाहते थे किन्तु हमें  ट्रेनिंग अटेंड करने के लिए समय से पहुंचना आवश्यक था इसलिए हमने लौटते वक़्त यहाँ थोड़ी देर रुकने का निर्णय लिया।

Friday, August 30, 2019

Sri Dungargarh Railway Station



मरुभूमि बीकानेर की तरफ़ - मथुरा से श्री डूँगरगढ़ 



यात्रा दिनाँक - 30 अगस्त 2019

      कभी कभी कुछ यात्रायें बिना किसी पूर्व विचार के भी बन जाया करती हैं और बिना किसी तैयारी के पूर्ण भी हो जाती हैं। ऐसी ही एक यात्रा मैंने भी की मरुभूमि बीकानेर की। दरअसल बीकानेर से कुछ पहले मेरे मामाजी की ससुराल एक ग्राम में है जिसका नाम है झंझेऊ। यह ग्राम मरुभूमि में रेगिस्तान के टीलों के बीच आगरा से बीकानेर मार्ग पर स्थित है। आजकल मामाजी यहीं थे और उन्होंने मुझे वहां बुलाया। आज से दस साल पहले भी यानी सन 2009 में भी मैं वहां उनके साथ जा चुका था और कई दिन वहां रहकर आया था। आज दस साल बाद मुझे फिर से वहां जाने का मौका मिल रहा था। प्लान गोगामेड़ी जाने का था कल्पना को लेकर, परन्तु अत्यधिक भीड़ के चलते कल्पना का प्लान कैंसिल हो गया और मुझे अकेले ही इस यात्रा पर निकलना पड़ा।

Sunday, November 18, 2018

DELHI 2018 : Safdarjung Tomb



सफदरजंग का मक़बरा 





नवंबर 2018 

मैं आज दिल्ली में हूँ और दिल्ली के पुराने अतीत के जीवन को वर्तमान में पहचानने की कोशिश में हूँ। मैं निकला था दिल्ली के प्राचीन शहर महरौली की तरफ जहाँ आज भी दिल्ली का सल्तनतकालीन और उसके वंशजों द्वारा बनवाये गए किले, मकबरे और महल अपने भव्य समय की याद दिलाते हैं जिनमे सबसे मुख्य तो विश्व प्रसिद्ध कुतुबमीनार है जो आज दिल्ली की ही नहीं पूरे भारतवर्ष की शान है। इससे पहले दिल्ली की सरकारी बस में बैठकर मैं सफ़दरजंग के मकबरे पर पहुंचा। आज सफदरजंग केवल एक व्यक्ति का नाम ही नहीं रह गया है बल्कि यह नाम दिल्ली में एक जाना माना स्थान बन चुका है और इसी नाम पर दिल्ली का रेलवे स्टेशन और अस्पताल भी मुख्य हैं।