Tuesday, June 23, 2026

GITA BHAWAN : RISHIKESH 2026


 अमावस्या पर गंगा स्नान और गीता भवन - ऋषिकेश 2026 



योगनगरी रेलवे स्टेशन के बाहर  हमने नवनिर्मित जानकी झूला जाने के लिए ऑटो तलाश किये, किराया लगभग 40  रूपये माँगा उसने, किन्तु थोड़ी ही देर बाद वह पलट गया और 50 रूपये प्रति सवारी के हिसाब से किराया मांगने लगा। हमने तुरंत अपना रुख इस ऑटो वाले की तरफ से मोड़ लिया और दूसरे साधन का विकल्प ढूढ़ने लगे। जल्द ही हमें बैटरीचलित रिक्शा जानकी झूला जाने के लिए मिल गया। किराया वही चालीस रूपये प्रति सवारी। 

चंद्रभागा नदी का पुल पार किया, यह एक बरसाती नदी है और अभी फिलहाल सुखी है बहुत एक छोटी सी धारा इसमें बहती हुई दिखाई दे रही थी और कुछ धाराएं इसमें नालों के रूप में भी बहती हुई दिखाई देती हैं। थोड़ी देर बाद हम श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के सामने पहुंचे। यूँतो श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा यहाँ से काफी दूर और ऊपर पहाड़ों में बद्रीनाथ जी के निकट है, जहाँ पहुंचने के लिए बहुत ही दुर्गम मार्ग पर पैदल यात्रा करनी पड़ती है। ऋषिकेश में स्थित यह गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट का मुख्यालय है। 

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जल्द ही हम जानकी झूला के निकट पहुँच गए। मैंने आज पहलीबार ही जानकी झूला देखा था, इससे पूर्व जब मैं ऋषिकेश आया था तब जानकी झूला बना ही नहीं था। ऋषिकेश सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध लक्ष्मण झूला है, इसकी प्रसिद्धि और भीड़ के बढ़ते दबाब को देखते हुए कुछ सालों बाद राम झूला का निर्माण हुआ और अब वर्तमान में जानकी झूला प्रमुख है। यह राम झूला और लक्ष्मण झूला से काफी बड़ा और विशाल है। पैदल यात्रियों के अलावा इससे बाइक लेकर भी गुजर सकते हैं। बाइक और पैदल यात्रियों के आने जाने के लिए इसपर अलग अलग बेरिकेडिंग की लाइन हैं जिससे आने जाने वालों को कोई समस्या नहीं होती। 

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जानकी झूला और राम झूला के मध्य में गीता भवन है। यह गीताप्रेस वालों की ही मुख्य शाखा है जिसमें साधु संतों और सन्यासियों के निवास हेतु उचित व्यवस्था है। यहाँ आम यात्रियों को ठहरने की अनुमति नहीं है। भवन में मध्य में भगवान विष्णु का सुन्दर मंदिर बना है। गीता भवन में प्रतिदिन दोपहर और शाम को भोजन मिलता है जो अत्यंत ही स्वादिष्ट और सात्विक होता है। मैंने और कल्पना ने गंगा स्नान के बाद आज दोपहर का भोजन यहीं किया। इस भोजन को पाने के लिए आपको बाजार से कम मूल्य पर कूपन मिलता है और उसी के बाद भोजन की थाली आपने हाथ में आती है। 

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हम जानकी झूला पार करने के बाद गीता भवन के समीप पहुंचे और यहीं बने गंगा घाट पर हमने माँ गंगा को प्रणाम करके स्नान किया। 

आज अमावस्या थी, अमावस्या पर गंगा स्नान करना अत्यंत ही पुण्यदायक माना जाता है, साथ ही हमारे पितृ और देव दोनों ही प्रसन्न होकर हमें आशीर्वाद प्रदान करते हैं। मैं प्रत्येक अमावस्या पर गंगा स्नान हेतु यात्रा करता हूँ और यदि किसी अमावस्या पर नहीं आ पाता हूँ तो घर के ही जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लेता हूँ। पूरे माह में व्यस्त जीवन में से इस दिन थोड़ा सा समय निकालकर मैं गंगातट पर आ जाता हूँ और अपने माता पिता को स्मरण करता हूँ। माँ गंगा के किनारे बैठकर मुझे अपने माता पिता की कमी पूरी होती दिखाई देती है। 

गंगा स्नान करने के बाद, अपने पितरों को जलतर्पण कराना चाहिए और अपनी सामर्थ्यानुसार थोड़ा बहुत दान दक्षिणा भी देनी चाहिए। अपने पितृ पूर्वजों से अपनी किसी भी त्रुटि की क्षमा चाहना करनी चाहिए इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और इससे पितृदोष भी समाप्त हो जाता है। 

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यहाँ गंगा जी के किनारे बैठकर और उनकी बहती धाराओं को देखकर, मन और आत्मा अपने आप ही शुद्ध होने लगते हैं, ह्रदय में आध्यात्मिक भाव जागृत होने लगता है और मन में ईश्वर के प्रति आस्था और भी दृढ़ हो जाती है, श्रद्धा का भाव उत्पन्न होने लगता है जिससे मन एकाग्रचित्त हो जाता है। हम जिन समस्यायों को लेकर ऋषिकेश या हरिद्वार आते हैं तो वे समस्याएँ यहाँ आकर समाधान बन जाती हैं। एक शुद्ध शरीर और पवित्र आत्मा लेकर हम वापस यहाँ से घर लौटते हैं। 

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आज हमें घर नहीं लौटना था, आज शाम को हम ऋषिकेश से श्री माता वैष्णोंदेवी कटरा के लिए यात्रा करेंगे जिसके लिए हमारा आरक्षण हेमकुंड एक्सप्रेस में है। यह ट्रेन शाम को पांच बजकर बीस मिनट पर ऋषिकेश से कटरा के लिए प्रस्थान करेंगे, कटरा से हम पहले श्रीनगर कश्मीर जायेंगे और उसके बाद लौटकर श्री माता वैष्णोंदेवी के दर्शन करेंगे, तत्पश्चात हम अपने घर की ओर प्रस्थान करेंगे। 

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अपनी पिछली ऋषिकेश यात्रा को याद करते हुए मैं और कल्पना, रामझूला  के नजदीक पहुंचे। ऋषिकेश की पिछली हमने 2017 में की थी, तब सहयात्री के रूप में मेरी ममेरी बहिन साधना और उसका परिवार हमारे साथ था, हम और कल्पना उस समय अपनी एवेंजर बाइक से यहाँ आये थे जबकि साधना ट्रेन से आई थी। आज पुनः इतने वर्षों के बाद हम उन्हीं स्थानों पर हैं। 

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अब धूप काफी तेज हो चली थी, इसलिए मैं और कल्पना वापस रेलवे स्टेशन की तरफ रवाना हो चले। हम रामझूला से जानकी झूला होते हुए वापस मुख्य मार्ग पर पहुंचे। यहाँ से हमें रेलवे स्टेशन के लिए एक टेम्पो  मिल गया जिसने 30 रुपया प्रति सवारी के हिसाब से हमसे किराया लिया और हम रेलवे स्टेशन पहुँच गए। तेज धूप और गर्मी ने हमें बेहाल कर दिया था, हम शीध्र ही स्टेशन के वातानुकूलित प्रतीक्षालय में पहुंचे जहाँ जाकर हमें थोड़ी राहत मिली। अभी हमारी ट्रेन के छूटने में काफी वक़्त था तब तक हमने यहीं आराम किया। 

शाम के पांच बजे हम हेमकुंड एक्सप्रेस में आरक्षित अपनी सीट पर पहुंचे और जय माता दी का नारा लगाकर हमने  यात्रा के लिए प्रस्थान किया। 

जय माँ गंगा 

जय माता दी 

स्टेशन से जानकी झूला जाते हुए 

श्री हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा 

जानकी सेतु 





जय बजरंग बली 






राम झूला 






गीता भवन 
























Thursday, June 18, 2026

YOG NAGARI RISHIKESH RAILWAY STATION

उत्तराखंड से कश्मीर तक ग्रीष्मकालीन यात्रा : वर्ष 2026 

यात्रा क्रमांक - 1 

मथुरा से योगनगरी ऋषिकेश - एक रेल यात्रा 

15 MAY 2026

    प्राचीन काल से ही माँ गंगा के पावन तट पर बसी ऋषिकेश नगरी, साधु - संतो और ऋषि मुनियों की तपोस्थली रही है। यहाँ का  सुरम्य वातावरण मन को मोह लेता है, यहाँ आकर मन को असीम शांति प्राप्त होती है और शरीर एक नई ऊर्जा को अनुभव करने लगता है। 

शाम के समय माँ गंगा के घाट पर बैठकर गंगा आरती देखने का एक अलग ही आनंद है, मन आध्यत्मिक रूप से प्रफुल्लित हो उठता है ईश्वर का गुणगान करने लगता है। यहाँ आकर आध्यात्म की अनुभूति होना आम बात है। 

ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला एक प्राचीन स्थल है। गंगा नदी के ऊपर बना तारों का एक झूला है जिसे हम बचपन से ही देखते और इसपर गुजरते हुए आ रहे है। लक्ष्मण झूला के आसपास अनेकों मंदिर हैं। यहीं से कुछ दूर गंगाजी के किनारे चलते हुए राम झूला के निकट पहुँच जाते है। लक्ष्मण झूला के बाद राम झूला का निर्माण हुआ था। अब वर्तमान में जानकी झूला का निर्माण होने के बाद यह ऋषिकेश का मुख्य सेतु बन गया है। 

राम झूला और जानकी झूला के मध्य प्रसिद्ध गीता भवन है, यहाँ साधु संतो के ठहरने का अच्छा प्रबंध है। आम यात्रियों को यहाँ ठहरने की आज्ञा नहीं है। गीता भवन में सुबह और शाम अत्यंत ही स्वादिष्ट और सात्विक भोजन मिलता है। 

इस बार मन बना लिया था कि इस अमावस्या पर गंगा स्नान हेतु ऋषिकेश ही जाऊंगा। ईश्वर की कृपा रही और मैंने मई के महीने में एक शानदार यात्रा प्लान की। यह यात्रा कश्मीर की यात्रा थी जिसमें हमने श्रीमाता वैष्णोंदेवी और श्रीनगर जाने का प्लान बनाया। इस यात्रा में मेरी ममेरी बहिन साधना और उसका परिवार, मेरा दोस्त, कुमार अपने परिवार सहित जाने के लिए तैयार थे। 

Thursday, May 7, 2026

DELHI 2023 : LOTUS TEMPLE


बहाई उपासना मंदिर - दिल्ली 


19 वीं सदी में ईरान में एक प्रमुख संत बहाउल्लाह द्वारा बहाई धर्म की स्थापना की गई थी जो सभी धर्मों के मूल महत्त्व और मानव - एकता की शिक्षा देता है। शुरुआत में यह ईरान और पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में विकसित हुआ और अंत में यह भारत में भी विकसित होने लगा। बहाई धर्म में कोई पुरोहित नहीं होता, यह केवल ईश्वरीय प्रार्थना पर निर्भर है। 

भारत में राजधानी दिल्ली में कालकाजी के संमीप स्थित कमल मंदिर बहाई धर्म का एक मुख्य केंद्र अथवा प्रार्थना स्थल है। सफ़ेद संगमरमर से बनी 9 पंखुड़ियों वाले इस कमल मंदिर की शोभा ना सिर्फ भारत देश में अपितु समूचे विश्व भर में प्रसिद्ध है। 

बहाई कमल मंदिर सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला है, यहाँ बिना किसी भेदभाव के, किसी भी धर्म या जाति के  लोग आसानी से प्रवेश कर सकते हैं और शांत वातावरण के बीच ईश्वर की प्रार्थना कर सकते हैं। बहाई धर्म, एक ईश्वर, एक धर्म और एक मानवता के जोर पर बल देता है। 

इस्कॉन मंदिर देखने के बाद एक पार्क में से होकर मैं शीघ्र ही कमल मंदिर पहुंचा। यह कालकाजी मेट्रो स्टेशन के नजदीक ही स्थित है। मैंने यहाँ कालकाजी माता के दर्शन हेतु अनेकों लोगों की लम्बी लाइन को लगे हुए देखा था। किन्तु मुझे तो आज कमल मंदिर देखना था इसलिए मैं कमल मंदिर की तरफ बढ़ चला। 

कमल मंदिर एक विस्तृत क्षेत्र में बना हुआ है। यहाँ का शांत और हरा भरा वातावरण अनायास ही मन को शीतलता प्रदान करता है। मैंने दूर से ही कमल की पंखुड़ियों वाले इस मंदिर को देखा किन्तु इसके अंदर प्रवेश नहीं किया अतः मैं नहीं जान सका कि इस मंदिर के अंदर कोई मूर्ति है अथवा यहाँ किसकी पूजा होती है। 

दरअसल मैं कभी किसी अन्य धर्म के धार्मिक स्थल के गर्भगृह में प्रवेश नहीं करता हूँ किन्तु यहाँ मिली जानकारी के अनुसार मैंने इतना तो जान ही लिया था कि यहाँ कोई मूर्ति, वेदी अथवा चित्र नहीं है, मंदिर में केवल प्रार्थना कक्ष है और यहाँ सभी धर्मों के लोग शांति से बैठकर ध्यान और मूक प्रार्थना करते हैं।  

मंदिर में कमल की पंखुड़ियों की आकृति में निर्मित 9 दरवाजे हैं जो शांति और एकता का प्रतीक हैं। 




































 


NEAREST RAILWAY STATION : - OKHALA ( NR )