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Friday, September 1, 2023

KURUKSHETRA 2023 : SRI KRISHNA MUSEUM

 

श्री कृष्ण संग्रहालय - कुरुक्षेत्र 


ज्योतिसर धाम देखने के बाद मैं वापस कुरुक्षेत्र आ गया। मैं श्री कृष्ण संग्रहालय के नजदीक ही बस से उतरा था, यहाँ आकर मुझे भगवान श्री कृष्ण से जुडी समस्त लीलाओं को एक छत के नीचे देखने की इच्छा  हुई इसलिए मैंने 30 रूपये का टिकट लेकर संग्रहालय में प्रवेश किया और ईश्वर के अलग अलग स्वरूपों के साथ साथ उनकी दिव्य लीलाओं के दर्शन किये। 

हालांकि मैं ब्रजवासी हूँ और मथुरा नगर में रहता हूँ जहाँ साक्षात् भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, किन्तु भगवान श्री कृष्ण के नाम से इस तरह का कोई भी संग्रहालय मथुरा अथवा वृन्दावन में नहीं है। अपने आराध्य के नाम से आज मुझे कुरुक्षेत्र की भूमि पर इस तरह का संग्रहालय देखने को मिला अन्यथा मैंने आज तक या तो ऐतिहासिक संग्रहालय देखे थे या फिर रेल संग्रहालय देखे हैं। 

इसी संग्रहालय के नजदीक ही कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञानं केंद्र भी स्थित है। किन्तु मेरे पास अब समय का आभाव था और मुझे शीघ्र ही कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पहुंचना था। वहां से साढ़े तीन बजे मुझे गीता जयंती एक्सप्रेस पकड़नी है जिससे मैं मथुरा पहुँच सकूँ। 

KURUKSHETRA 2023 : JYOTISAR TIRTH

 

ज्योतिसर तीर्थ - कुरुक्षेत्र 



ब्रह्म सरोवर देखने और यहाँ स्नान करने के पश्चात मैं ज्योतिसर तीर्थ के लिए रवाना हुआ जो कि यहाँ से लगभग 15 से 20 किमी दूर था। ब्रह्म सरोवर के बाहर से ही मुझे हरयाणा की एक रोडवेज बस मिल गई और मैं जल्द ही ज्योतिसर तीर्थ पहुँच गया। 

माना जाता है कि ज्योतिसर ही वह प्रमुख स्थान है जहाँ महाभारत के युद्ध के दौरान भगवान् श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था और यहीं उन्हें अपने विराट स्वरुप के दर्शन कराये थे। अतः यह बहुत ही पावन तीर्थ स्थल है और सुन्दर स्थान है। कुरुक्षेत्र के मैदान से यह थोड़ी दूरी पर स्थित है। इस पावन स्थल पर वट वृक्ष लगे हुए हैं और यहाँ हाल ही मैं भगवान् श्री कृष्ण के विराट स्वरुप की एक दिव्य प्रतिमा भी लगाईं गई है। शाम के समय यहाँ लाइट एंड साऊंड शो की व्यवस्था भी है। 

यहाँ के सभी पावन मंदिरों और स्थलों के दर्शन करने के पश्चात मैं कुछ देर ज्योतिसर ग्राम में भी घूमा और इस पावन धरा को प्रणाम किया। 





महाभारत महाकाव्य के रचियिता और लेखक 






















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KURUKSHETRA 2023 : STHANESHWAR TEMPLE & BHADRA KALI TEMPLE, DEVIKUP


स्थानेश्वर महादेव मंदिर एवं देवीकूप धाम 


कुरुक्षेत्र की भूमि, ना केवल पौराणिक ग्रंथों में विशेष महत्त्व रखती है बल्कि इसका भारत के प्राचीन इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। छटवीं शताब्दी में यहाँ पुष्यभूति वंश के महान सम्राट हर्षवर्धन का शासन रहा है जिनकी राजधानी कुरुक्षेत्र में स्थित थानेश्वर में ही थी। थानेश्वर शब्द, यहाँ स्थित स्थानेश्वर का ही अपभ्रंश है जो कि भगवान शिव का निवास माना जाता है।  

स्थानेश्वर मंदिर अत्यंत ही प्राचीन है और वर्धन काल में पुष्यभूति वंश के सम्राटों के कुलदेवता के रूप में विद्यमान हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों में हर्षवर्धन के पिता प्रभाकरवर्धन द्वारा इस मंदिर में पूजा का उल्लेख है। 

प्राचीन शक्ति पीठ श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित है। भद्रकाली मंदिर, जिसे श्री देवी कूप के नाम से भी जाना जाता है, 51 शक्ति पीठों में से एक है। यह शक्ति पीठ मंदिर माता भद्रकाली को समर्पित है, जो देवी काली के आठ रूपों में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी सती की दाहिनी एड़ी यहीं गिरी थी। महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान, पांडवों ने इसी भद्रकाली मंदिर में आशीर्वाद लिया था।














 













इस यात्रा के अन्य भाग 

KURUKSHETRA 2023 : BRAHM KUND

 

ब्रह्म सरोवर 


कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्म सरोवर, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने यहीं प्रथम यज्ञ किया था, जो सृष्टि की उत्पत्ति का प्रतीक है। ब्रह्म सरोवर का शांत और दिव्य वातावरण, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है, सूर्य ग्रहण और धार्मिक त्योहारों के दौरान  इसके जल में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान भी यह स्थान आकर्षण का केंद्र बन जाता है , जब हजारों भक्त भगवद् गीता की शाश्वत शिक्षाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित होते हैं। सुंदर ढंग से सजाए गए घाट, संध्या आरती और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ इस अवसर की भव्यता को और बढ़ा देती हैं। वर्षों से, ब्रह्म सरोवर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित हुआ है, जो पवित्रता, शांति और भारत की शाश्वत आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध ब्रह्मसरोवर लगभग 3600 फीट लंबा और 1500 फीट चौड़ा है। यह विशाल मानव निर्मित सरोवर लगभगके क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी गहराई लगभग 45 फीट है और यह एशिया के सबसे बड़े सरोवरों में से एक माना जाता है।

थानेसर स्टेशन से ब्रह्म सरोवर बहुत ही नजदीक है, इसलिए मैं पैदल ही यहाँ पहुँच गया और इसकी विशालता को देखकर ठहर सा गया। माना जाता है इसी सरोवर के निकट ही महाभारत के युद्ध का मैदान था जहाँ यह युद्ध लड़ा गया था। महाभारतकालीन अनेकों अवशेष यहाँ से प्राप्त होते रहे हैं। मैंने इस सरोवर में स्नान किया और फिर मैं आगे घूमने बढ़ चला। सरोवर के मध्य में भगवान् शिव का प्राचीन मंदिर है जिसे सर्वेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। भगवन शिव के दर्शन करने के पश्चात मैं आगे बढ़ चला। 

भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन का रथ, इस स्थान के महत्त्व को और बढ़ा देते हैं। यह देखने में सचमुच का ही प्रतीत होता है। रथ को देखकर ही महाभारत के युद्ध का आभास सा होने लगता है, हजारों वीर योद्धाओं से सजी यह धरती उस समय कैसी रही होगी,  इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। 

यही से कुछ दूरी पर प्राचीन भवन के अवशेष दिखाई देते हैं, इसे द्रोपदी कुआँ के नाम से जाना जाता है। यहाँ एक प्राचीन कुआँ है जिसके बारे में मान्यता है कि युद्ध के पश्चात द्रोपदी ने यहीं इसी कुए के जल से अपने केशों को धोया था। इसके बराबर में ही खाटू श्याम जी का मंदिर है, खाटू श्याम जी महाभारत के बर्बरीक थे जिन्होंने अपना शीश काटकर भगवान श्री कृष्ण को भेंट किया था।  














































इस यात्रा के अन्य भाग