श्री कृष्ण संग्रहालय - कुरुक्षेत्र
ज्योतिसर धाम देखने के बाद मैं वापस कुरुक्षेत्र आ गया। मैं श्री कृष्ण संग्रहालय के नजदीक ही बस से उतरा था, यहाँ आकर मुझे भगवान श्री कृष्ण से जुडी समस्त लीलाओं को एक छत के नीचे देखने की इच्छा हुई इसलिए मैंने 30 रूपये का टिकट लेकर संग्रहालय में प्रवेश किया और ईश्वर के अलग अलग स्वरूपों के साथ साथ उनकी दिव्य लीलाओं के दर्शन किये।
हालांकि मैं ब्रजवासी हूँ और मथुरा नगर में रहता हूँ जहाँ साक्षात् भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, किन्तु भगवान श्री कृष्ण के नाम से इस तरह का कोई भी संग्रहालय मथुरा अथवा वृन्दावन में नहीं है। अपने आराध्य के नाम से आज मुझे कुरुक्षेत्र की भूमि पर इस तरह का संग्रहालय देखने को मिला अन्यथा मैंने आज तक या तो ऐतिहासिक संग्रहालय देखे थे या फिर रेल संग्रहालय देखे हैं।
इसी संग्रहालय के नजदीक ही कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञानं केंद्र भी स्थित है। किन्तु मेरे पास अब समय का आभाव था और मुझे शीघ्र ही कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पहुंचना था। वहां से साढ़े तीन बजे मुझे गीता जयंती एक्सप्रेस पकड़नी है जिससे मैं मथुरा पहुँच सकूँ।
संग्रहालय देखने के बाद मैं चौराहे पर पहुंचा और एक ऑटो द्वारा फिर रेलवे स्टेशन पहुंचा। आज सुबह से मैंने भोजन नहीं किया था इसलिए स्टेशन के पास ही मैंने आज दोपहर का भोजन करने का मन बनाया किन्तु आज ज्यादातर पैदल चलने के कारण मैं काफी थक भी गया था इसलिए यहाँ मैंने जाम का आनंद लिया और उसके बाद भोजन करके रेलवे स्टेशन पहुंचा।
गीता जयंती एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर खड़ी हुई थी और अभी इसके चलने में पंद्रह बीस मिनट बचे थे। मैं इसमें कोई आपातकालीन खिड़की वाली सीट चाहता था किन्तु वह मुझे खाली नहीं मिली इसलिए गैर आपातकालीन साइड सीट पर बैठकर ही मैंने अपनी मथुरा की यात्रा को पूरा किया। ट्रेन के हजरत निजामुद्दीन पहुँचते ही यह भीड़ से ठसाठस भर गई। बमुश्किल मैंने इसमें दिल्ली से मथुरा के सफर को पूरा किया। इस प्रकार मेरी कुरुक्षेत्र यात्रा संपन्न हो गई।
जय श्री कृष्णा
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