Showing posts with label Agra Tombs. Show all posts
Showing posts with label Agra Tombs. Show all posts

Saturday, July 14, 2018

Agra : Mariam Tomb



मरियम -उज़ -जमानी का मक़बरा 

मरियम का मकबरा 


     सन 1527 में बाबर ने जब फतेहपुर सीकरी से कुछ दूर उटंगन नदी के किनारे स्थित खानवा के मैदान में अपने प्रतिद्वंदी राजपूत शासक राणा साँगा को हराया तब उसे यह एहसास हो गया था कि अगर हिंदुस्तान को फतह करना है और यहाँ अपनी हुकूमत स्थापित करनी है तो सबसे पहले हिंदुस्तान के राजपूताना राज्य को जीतना होगा, इसके लिए चाहे हमें ( मुगलों ) को कोई भी रणनीति अपनानी पड़े। बाबर एक शासक होने के साथ साथ एक उच्च कोटि का वक्ता तथा दूरदर्शी भी था। इस युद्ध के शुरुआत में राजपूतों द्वारा जब मुग़ल सेना के हौंसले पस्त होने लगे तब बाबर के ओजस्वी भाषण से सेना में उत्साह का संचार हुआ और मुग़ल सेना ने राणा साँगा की सेना को परास्त कर दिया और यहीं से बाबर के लिए भारत की विजय का द्धार खुल गया। इस युद्ध के बाद बाबर ने गाज़ी की उपाधि धारण की।  


Saturday, October 14, 2017

Agra : Akber Tomb




मुग़ल शहंशाह अकबर का मकबरा - सिकंदरा 



      



 यूँ तो आगरा शहर की स्थापना 1504 ईसवी में सिकंदर लोदी ने की थी। आगरा से कुछ दूर दिल्ली मार्ग पर उसने सिकंदराबाद नामक शहर बसाया था जो कालांतर में सिकंदरा ने नाम से आज भी स्थित है। परन्तु यह सिकंदरा आज सिकंदर लोदी के कारण नहीं बल्कि मुग़ल सम्राट अकबर के मकबरे के कारण विश्व भर में विख्यात है। यूँ तो आगरा शहर की स्थापना का श्रेय सिकंदर लोदी को जाता है किन्तु आगरा शहर को पहचान मुग़ल शासक अकबर के शासनकाल में ही मिली, उसने इसे अपनी राजधानी बनाया और आगरा किला का निर्माण कराया। अकबर ने अपनी मृत्यु से पूर्व ही अपने मकबरे का भी निर्माण भी आगरा में ही कराया था।  

Wednesday, March 22, 2017

AGRA : JODHABAI KI CHHATRI


 मुग़ल महारानी जोधाबाई की छतरी 

यूँ तो आगरा शहर का नाम और यहाँ का इतिहास किसी से छुपा नहीं है। इस शहर को मध्यकालीन भारत में मुग़ल राजवंश की राजधानी होने का गौरव प्राप्त है। यह बाबर से लेकर औरंगजेव और उत्तर मुगलकालीन शासकों की कर्मभूमि रहा है। मुगलों ने यहाँ अलग अलग कालों में अनेकों ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण कराया जिसमें विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सिकरी, एत्माउद्दौला का मकबरा और अकबर का मकबरा, मुख्य इमारतें हैं। पंद्रहवीं शताब्दी में जब यहाँ बादशाह अकबर का शासन था तब यह शहर अपने चरमोत्कर्ष पर था। 

यहाँ के बाग़ बगीचे और यहाँ लगने वाला मीना बाजार प्रमुख था। मुग़ल काल में ही आगरा से लाहौर तक कोस मीनारों का निर्माण हुआ। वर्तमान में यहाँ मुगलकाल के शासकों द्वारा अलग अलग समय पर निर्मित अनेकों इमारतें आज भी दिखाई देती हैं। बादशाह अकबर ने अपना मकबरा अपने जीवन काल में ही निर्मित कराना शुरू कर दिया था। जहांगीर के शासनकाल के दौरान उसकी पत्नी नूरजहां ने भी अपने पिता गयासुद्दीन बेग का मकबरा यहाँ निर्मित कराया और उसके पश्चात मुग़ल बादशाह शाहजहां ने भी अपनी पत्नी मुमताज की याद में ताजमहल नामक एक मकबरे का निर्माण कराया जो आज दुनिया के सात अजूबों में से एक है। 

परन्तु इनमे जोधाबाई का नाम कहीं नहीं आता। हालाँकि फतेहपुर सीकरी में जोधाबाई का महल अवश्य दर्शनीय है परन्तु अकबर की मृत्यु के बाद जोधाबाई कहाँ गई कोई नहीं जानता। 


       भारतीय इतिहास के महानतम सम्राट अकबर की पत्नी जोधबाई का अंतिम स्थल आगरा की पॉश कॉलोनी अर्जुन नगर में स्थित है। जहाँ अधिकतर कोई भी टूरिस्ट नहीं पहुँचता। पुरातत्व विभाग वालों ने स्मारक की देखरेख सही ढंग से तो की हुई है परन्तु अगर आप वहां जाओगे भी तो हमेशा गेट पर ताला लटका मिलता है। इसका प्रमुख कारण है सैलानियों का वहां तक न पहुंचना। जोधाबाई एक हिन्दू राजपूत थी इसलिए उन्हें दफ़नाने के स्थान पर यहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया था। आगरा कैंट स्टेशन से 3 किमी दूर स्थित अर्जुन नगर में यह इकलौता मुगलकालीन स्मारक है जो अर्जुन नगर की पॉश कॉलोनी ज्योति नगर में कॉलोनी के बीचोबीच स्थित है।