Thursday, May 7, 2026

DELHI 2023 : LOTUS TEMPLE


बहाई उपासना मंदिर - दिल्ली 


19 वीं सदी में ईरान में एक प्रमुख संत बहाउल्लाह द्वारा बहाई धर्म की स्थापना की गई थी जो सभी धर्मों के मूल महत्त्व और मानव - एकता की शिक्षा देता है। शुरुआत में यह ईरान और पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में विकसित हुआ और अंत में यह भारत में भी विकसित होने लगा। बहाई धर्म में कोई पुरोहित नहीं होता, यह केवल ईश्वरीय प्रार्थना पर निर्भर है। 

भारत में राजधानी दिल्ली में कालकाजी के संमीप स्थित कमल मंदिर बहाई धर्म का एक मुख्य केंद्र अथवा प्रार्थना स्थल है। सफ़ेद संगमरमर से बनी 9 पंखुड़ियों वाले इस कमल मंदिर की शोभा ना सिर्फ भारत देश में अपितु समूचे विश्व भर में प्रसिद्ध है। 

बहाई कमल मंदिर सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला है, यहाँ बिना किसी भेदभाव के, किसी भी धर्म या जाति के  लोग आसानी से प्रवेश कर सकते हैं और शांत वातावरण के बीच ईश्वर की प्रार्थना कर सकते हैं। बहाई धर्म, एक ईश्वर, एक धर्म और एक मानवता के जोर पर बल देता है। 

इस्कॉन मंदिर देखने के बाद एक पार्क में से होकर मैं शीघ्र ही कमल मंदिर पहुंचा। यह कालकाजी मेट्रो स्टेशन के नजदीक ही स्थित है। मैंने यहाँ कालकाजी माता के दर्शन हेतु अनेकों लोगों की लम्बी लाइन को लगे हुए देखा था। किन्तु मुझे तो आज कमल मंदिर देखना था इसलिए मैं कमल मंदिर की तरफ बढ़ चला। 

कमल मंदिर एक विस्तृत क्षेत्र में बना हुआ है। यहाँ का शांत और हरा भरा वातावरण अनायास ही मन को शीतलता प्रदान करता है। मैंने दूर से ही कमल की पंखुड़ियों वाले इस मंदिर को देखा किन्तु इसके अंदर प्रवेश नहीं किया अतः मैं नहीं जान सका कि इस मंदिर के अंदर कोई मूर्ति है अथवा यहाँ किसकी पूजा होती है। 

दरअसल मैं कभी किसी अन्य धर्म के धार्मिक स्थल के गर्भगृह में प्रवेश नहीं करता हूँ किन्तु यहाँ मिली जानकारी के अनुसार मैंने इतना तो जान ही लिया था कि यहाँ कोई मूर्ति, वेदी अथवा चित्र नहीं है, मंदिर में केवल प्रार्थना कक्ष है और यहाँ सभी धर्मों के लोग शांति से बैठकर ध्यान और मूक प्रार्थना करते हैं।  

मंदिर में कमल की पंखुड़ियों की आकृति में निर्मित 9 दरवाजे हैं जो शांति और एकता का प्रतीक हैं। 




































 

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