शेख़ चिल्ली का मक़बरा
हरियाणा के कुरुक्षेत्र के थानेसर में स्थित शेख चिल्ली का मकबरा, मुगल बादशाह शाहजहाँ के सबसे बड़े बेटे दारा शिकोह ने लगभग 1650 ईस्वी में बनवाया था। यह मकबरा दारा शिकोह के आध्यात्मिक गुरु और प्रसिद्ध सूफी संत शेख चिल्ली की याद में निर्मित है, जिसे 'हरियाणा का ताजमहल' भी कहा जाता है।
यह मकबरा सूफी संत शेख चिल्ली (अब्दुल करीम) की याद में बनवाया गया था। जिसमें फारसी शैली, सफेद संगमरमर और पीले बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। यह मकबरा एक ऊंचे चबूतरे पर बना है और इसके परिसर में एक मदरसा और संग्रहालय भी स्थित है।
शेखचिल्ली एक प्रसिद्ध मुस्लिम सूफ़ी संत थे। माना जाता है कि वह 17वीं सदी में मुगल राजकुमार दारा शिकोह के गुरु थे, जिनका वास्तविक नाम अब्द-उर-रजाक या अब्द-उर-रहीम था। हरियाणा के थानेसर में स्थित उनका मकबरा भी उनके मुस्लिम सूफी परंपरा से जुड़ा होने का प्रमाण है।
मैं जब यहाँ पहुंचा था तब इस मकबरे में स्थित संग्रहालय बंद था जिसकारण मैं यहाँ का संग्रहालय नहीं देख सका था। मकबरे के निकट ही एक पत्थर मस्जिद भी दिखलाई देती है जिसका निर्माण भी दारा शिकोह द्वारा 17 वीं शताब्दी में ही हुआ था। यह मक़बरा और पत्थर की मस्जिद, मध्य काल की एक प्रसिद्ध ईमारत है।
इस मकबरे की संरचना दो मंजिली है। शेख़ चिल्ली का मक़बरा में मुख्य कब्र नीचे के अहाते में स्थित है जबकि ऊपरी अहाते में स्थित मकबरे में स्थित कब्र उनकी पत्नी की मानी जाती है।
इसी के ठीक पीछे प्राचीन काल के कुछ अवशेष दिखाई देते हैं जिनके बारे में माना जाता है कि यह सम्राट हर्षवर्धन की थानेश्वर स्थित राजधानी के अवशेष हैं। इसका विवरण हम अगली पोस्ट में करेंगे।
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| शेख चिल्ली के मकबरे की दीवार |
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| शेख चिल्ली का मकबरा |
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| शेख चिल्ली का मकबरा |
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| मदरसा और जलाशय का एक चित्र |
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| ऊपरी अहाते में स्थित मकबरा |
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| लाल बलुआ पत्थर से निर्मित पत्थर मस्जिद |
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| हर्ष वर्धन की राजधानी के अवशेष |
अगला भाग - राजा हर्ष का टीला
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