उत्तराखंड से कश्मीर एक रेल यात्रा
17 मई 2026 सही पांच बजकर बीस मिनट पर हेमकुंट एक्सप्रेस श्रीमाता वैष्णोंदेवी कटरा के लिए योगनगरी ऋषिकेश से प्रस्थान कर गई। ट्रेन का कोच अभी लगभग खाली ही था। अगला स्टेशन वीरभद्र आया, यहाँ थोड़ी देर ट्रेन खड़ी रही और इसके बाद रायवाला जंक्शन पहुंची। रायवाला पर देहरादून से आने वाली रेलवे लाइन भी इसी में मिल जाती है इसलिए रायवाला एक जंक्शन स्टेशन है और यह राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्र में स्थित है। मोतीचूर के बाद अंततः हमारी ट्रेन हरिद्वार पहुंची और यहाँ हमारे पास की अन्य सीटों पर सभी सवारियां आ गईं।
पूरी रात सफर करने और दिन में घूमने के कारण मैं काफी थक चुका था और मुझे अब नींद भी आने लगी थी। हमारी सीट पूरी तरह कन्फर्म नहीं हुई थी और यह RAC में ही रह गई थी इसलिए हमें साइड लोअर सीट पर यात्रा करनी पड़ रही थी। हालांकि रात्रि के समय हमारी साइड अपर सीट लगभग खाली ही थी और कल्पना इसी पर सो चुकी थी। अगली सुबह जम्मू निकलने के बाद मेरी नींद खुली। हम तवी नदी को पार कर रहे थे।
जम्मू के बाद सुरंगों और घाटियों का नजारा शुरू हो जाता है और हम इन्हीं नजारों को देखते हुए यात्रा कर रहे थे।
उधमपुर निकलने के बाद सुबह आठ बजे तक हम कटरा पहुँच गए और स्टेशन के बाहर निकले। कटरा रेलवे स्टेशन से हमने त्रिकूट पर्वत के दर्शन किये और यहाँ स्थित श्रीमाता वैष्णोंदेवी जी को प्रणाम किया। हम माता के धाम में थे किन्तु हमारी आज की यात्रा माता के धाम जाने की नहीं थी। हमने दोपहर में अपने अन्य साथियों के साथ आज वन्दे भारत से श्रीनगर कश्मीर जाना था। हमारे अन्य साथी मथुरा से कोटा - कटरा एक्सप्रेस से यहाँ पहुँच रहे हैं जो कि लगभग एक बजे तक यहाँ आ जायेंगे। तब तक हमने रेलवे स्टेशन पर ही रुकने का फैसला किया।
कटरा रेलवे स्टेशन के प्रथम तल पर बने वातानुकूलित प्रतीक्षालय में हम नहा धोकर तैयार हो गए और अपने अन्य साथियों का इंतज़ार करने लगे। इस प्रथम तल पर IRCTC की तरफ से बने एक भोजनालय में हमने आज सुबह दो मैसूर डोसे का नाश्ता किया और यहीं पास में बने एक बाजार में थोड़ी देर खरीदारी भी की। हमें पल पल अपने साथियों का इंतज़ार था और हम उनकी ट्रेन की लोकेशन निरंतर देख रहे थे। क्योंकि उनकी ट्रेन के यहाँ पहुँचने में और कश्मीर के लिए वन्दे भारत के छूटने में मात्र एक घंटे का ही अंतर् था।
हमें डर था कि कहीं उनकी ट्रेन लेट ना हो जाये जिससे हमारी आगे की यात्रा रद्द हो जाये। मैं अपने साथियों के बिना अकेला कश्मीर नहीं जाना चाहता था।
अंततः ढाई बजे तक उनकी ट्रेन कटरा पहुँच गई, और शीघ्र ही वह हमारे पास प्लेटफॉर्म न एक पर पहुँच गए। अपने साथियों को सही समय से आए देख और उनसे मिलकर मुझे अपार प्रसन्नता हुई। जल्द ही श्रीनगर जाने के लिए वंदेभारत भी प्लेटफॉर्म पर आ गई। इस ट्रैन में हम सभी के कोच अलग अलग थे इसलिए हम अपने अपने कोच नंबर के हिसाब से प्लेटफॉर्म पर खड़े हो गए थे और ट्रेन के आने पर उसमें सवार हो गए।
वंदेभारत में यह हमारी पहली यात्रा थी, और कश्मीर जाने की भी। कटरा से निकलने के बाद ट्रेन लम्बी लम्बी सुरंगों को पार करती हुई बनिहाल पहुंची। हम कश्मीर घाटी में आ चुके थे, यह थोड़ी देर बनिहाल रुकी और आगे बढ़ चली, काजीगुंड के बाद सुरंगों का सिलसिला लगभग समाप्त हो जाता है और ट्रेन कश्मीर घाटी में दौड़ती नजर आती है। अनंतनाग और अवंतीपोरा जैसे स्टेशनों पर वंदेभारत का ठहराव नहीं है। यह बनिहाल से निकलने के बाद सीधे श्रीनगर ही रूकती है।
वंदेभारत की इस यात्रा के दौरान हमें रेलवे की ओर से एक पानी की बोतल, एक भेलपुरी की नमकीन की पैकेट और एक कचौरी, गुड़ मूंगफली वाली गजक के साथ शाम के नाश्ते में मिली। शाम को लगभग पांच बजे हम श्रीनगर पहुँच गए। यहाँ हमारा कमरा लालचौक स्थित यात्री निवास में बुक था। एक गाडी के जरिये हम शाम को लाल चौक पहुंचे।
यात्रा अगले भाग में जारी
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| योगनगरी ऋषिकेश के वेटिंग रूम में एक सेल्फी |
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| वीरभद्र रेलवे स्टेशन |
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| रायवाला जंक्शन |
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| मोतीचूर रेलवे स्टेशन |
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| हरिद्वार रेलवे स्टेशन |
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| जम्मू किले का एक दृश्य और तवी नदी |
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| ऊधमपुर रेलवे स्टेशन |
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| कटरा स्टेशन से त्रिकूट पर्वत का एक दृश्य |
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| कटरा स्टेशन पर सुबह का नाश्ता करती कल्पना |
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| और मैं भी |
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| अंततः हमारे साथी हमें मिले |
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| वंदेभारत में मिला नाश्ता |
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| श्रीनगर स्टेशन पर पहली सेल्फी |
🙏
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