Friday, February 24, 2017

BRAJYATRA : SHRI LADILI JI TEMPLE & RANGILI MAHAL - BARSANA

 

श्रीजी मंदिर 

कोकिलावन से हम अब बरसाना की तरफ रवाना हो गए . 

रास्ते में नंदगाँव भी आया परन्तु अभी मंदिर खुलने में काफी समय था इसलिए यहाँ न रूककर हम सीधे बरसाना के रंगीली महल पहुंचे। यह रंगीली महल जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा निर्मित है और देखने में काफी रमणीक लगता है, प्रेम मंदिर की तरह रंगीली महल में भी भगवन श्री कृष्ण और राधा के दर्शन हैं। 

रंगीली महल के पश्चात् हम लाड़िली जी के मंदिर की तरफ चल दिए इसे श्रीजी मंदिर भी कहते हैं और यह बरसाने का मुख्य मंदिर है। श्री राधारानी का यह दिव्य धाम और उनका प्रसिद्ध मंदिर एक ऊँचे पहाड़ पर है जहाँ जाने के लिए या तो आप सीढ़ियों द्वारा जा सकते हो अथवा गोल पहाड़ चढ़कर भी पहुँच सकते हो।

        उ. प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी द्वारा यहाँ रोपवे के निर्माण की घोषणा हुई और उद्घाटन भी हुआ परन्तु अन्य सरकारी प्रोजेक्टों की तरह यह भी ठन्डे बस्ते में चला गया। हमारे यहाँ पहुंचनेपर हमने देखा यहाँ पहले से काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे और श्रीजी के दर्शन करने की प्रतीक्षा में थे, कोई यहाँ अपना जन्मदिन मानाने आता है और कोई कुछ और बहाना लेकर परन्तु लाड़िलीजी के दरबार में आने के बाद मानव अपने हर दुःख को भूल जाता है और राधेरानी का गुणगान करने लग जाता है। जो यहाँ एक बार आया बस यहीं का होकर रह गया।


नंदगाँव का एक दृशय 


रंगीली महल, बरसाना 











बरसाना से दूर दिखाई  नंदगाँव 

 श्रीजी मंदिर खुलने की प्रतीक्षा में 

बरसाना की गलियां 







बरसाना में कल्पना 








Monday, November 28, 2016

BRAJYATRA : BRAHMAND GHAT



ब्रह्माण्डघाट

     भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा में जन्म लिया और मथुरा की भूमि पर अनगिनत लीलाएं की।  इनकी लीलाओं से जुड़े अनेकों स्थान आज भी मथुरा और उसके आसपास देखे जा सकते हैं। हमने आगरा छोड़कर अपना स्थाई निवास अब मथुरा बना लिया है इसलिए आज मैं मथुरा नगर के आसपास घूमने के लिए निकला और गोकुल के नजदीक एक घाट पर पहुंचा। 

      गोकुल के नजदीक ही यमुना नदी के किनारे ब्रह्माण्ड घाट स्थित है। कहते हैं यह वही स्थान है जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने बचपन में माटी खाई थी, उन्हें माटी खाते देख माँ यशोदा उन्हें मुँह खोलने को कहती हैं तो श्री कृष्ण के छोटे से मुख में सारा ब्रह्माण्ड देखकर, आश्चर्य चकित रह जाती हैं। भगवान श्री कृष्ण की यह दिव्य लीला इसी स्थान पर हुई थी इसलिए इसे ब्रह्माण्ड घाट कहा जाता है। 

महावन के चौरासी खम्भा मंदिर से इसकी दूरी लगभग एक किमी है। इसी मंदिर से थोड़ा सा आगे भगवन शिव का चिंताहरण नाम से प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर भी है। 




Wednesday, August 10, 2016

Mumbai CST

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

मुम्बई - मेरी पहली यात्रा

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      एक बार मुम्बई देखने का हर किसी का सपना होता है, मेरा भी सपना था और साथ में मेरी माँ का भी । ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के पश्चात् हम सुबह मनमाड पहुंचे और राज्य रानी एक्सप्रेस पकड़कर मुम्बई सीएसटी ।
पहली बार मुम्बई देखने की एक अलग ही ख़ुशी थी आज मेरे मन में और इससे भी ज्यादा ख़ुशी थी अपनी माँ को मुम्बई दिखाने की। यूँ तो मैंने अपनी माँ को दिल्ली, कलकत्ता और चेन्नई तीनो महानगर दिखा रखे हैं पर  हर किसी के दिल में बचपन से ही जिस शहर को देखने का सपना होता है वो है मुम्बई । सीएसटी स्टेशन पर पहले मैंने और माँ ने भोजन किया और उसके बाद हम सीएसटी के बाहर निकले ।

     अंग्रेजों के समय में बना यह स्टेशन आज भी कितना खूबसूरत लगता है इसीलिए ये विश्व विरासत सूचि में दर्ज है। यहाँ हमने दोमंजिला बस भी पहली बार ही देखी थी। इसी बस द्वारा हम गेट वे ऑफ़ इंडिया पहुंचे। समुद्र तट पर स्थित यह ईमारत भी मुझे ताजमहल से कम नहीं लगी और साथ ही ताज होटल जिसे हम बचपन से टीवी अख़बारों में देखते आ रहे थे आज आँखों के सामने था ।

Tuesday, August 9, 2016

GHUSHMESHWAR JYOTIRLING 2016

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग

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          त्रयंम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के पश्चात् मैं, माँ को साथ नाशिक रोड स्टेशन आ गया । अब मेरा प्लान माँ को घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करवाना था। घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग, महाराष्ट्र प्रान्त के औरंगाबाद जिले से 25 किमी दूर एलोरा गुफाओं के पास वेरुल में स्थित है। मैंने मोबाइल में औरंगाबाद जाने वाली ट्रेन देखी। आज मुम्बई से काजीपेट के लिए एक नई ट्रेन शुरू हुई थी, जिसका उद्घाटन मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनल स्टेशन पर हुआ। जब यह ट्रेन स्टेशन पर आई तो यह पूरी तरह खाली और फूलमालाओं से सजी हुई थी। मैं और माँ इसी ट्रेन से औरंगाबाद की तरफ बढ़ चले। मनमाड के बाद से रेलवे का दक्षिण मध्य जोन शुरू हो जाता है, इस रेलवे लाइन पर यात्रा करने का यह मेरा पहला मौका था। रास्ते में एक स्टेशन और भी मिला दौलताबाद । यहीं से मुझे एक गोल पहाड़ सा नजर आ रहा था, पता नहीं क्या था ।

TRYAMBKESHWAR JYOTIRLING 2016

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग 

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      पूरी रात बस द्धारा सफर करने के बाद मैं और माँ सुबह चार बजे ही नाशिक बस अड्डे पहुँच गए , बारिश अब भी अपनी धीमी धीमी गति से बरस रही थी । त्रयंबकेश्वर जाने वाली कोई बस यहाँ नहीं थी, काफी देर इंतज़ार करने के बाद  हमे एक बस मिल गई जिससे हम सुबह पांच बजे तक त्रयंबकेश्वर पहुँच गए । यूँ तो मैं पहले भी एक बार नाशिक आ चुका हूँ, जब हमने पंचवटी और शिरडी के दर्शन ही किये थे। यहाँ तक आना नहीं हो पाया था परन्तु इसबार हमारी त्रयंबकेश्वर की यात्रा भी पूरी हो चली थी। अभी दिन निकला नहीं था, बरसात की वजह से थोड़ा ठंडा मौसम था। त्रयंम्बकेश्वर मंदिर के लिए हमने बस स्टैंड से ऑटो किया जिसने पांच मिनट बाद हमे मंदिर पर उतार दिया, बस स्टैंड से मंदिर की दूरी करीब एक किमी से भी कम है।

Sunday, August 7, 2016

BHIMASHANKAR JYOTIRLING 2016

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S


भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग 


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     शनिवारवाड़ा देखने के बाद दादाजी ने अपनी कार से हमें शिवाजी बस स्टैंड पर छोड़ दिया। उनसे दूर होने का मन तो नहीं कर रहा था परंतु मैं और माँ इस वक़्त सफर पर थे और सफर मंजिल पर पहुँच कर ही पूरा होता है, राह में अपने मिलते हैं और बिछड़ जाते हैं परंतु मंजिल हमेशा राही का इन्तज़ार करती है। और इसवक्त हमारी अगली मंजिल थी भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की ओर। बस स्टैण्ड पर धीमी धीमी बारिश हो रही थी, काफी बसें यहाँ खड़ी हुई थीं परन्तु भीमाशंकर की ओर कौन सी जाएगी ये पता नहीं चल पा रहा था।

PUNE 2016

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पुणे की एक शाम और शनिवार वाड़ा 

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         करीब चौबीस घंटे का सफर तय करने के बाद गोवा एक्सप्रेस ने हमें पुणे के रेलवे स्टेशन पर उतार दिया, मैंने पहली बार पुणे का रेलवे स्टेशन देखा था, इससे पहले सिर्फ इसके बारे में सुना था। ट्रेन का सफर पूरा होने के बाद अभी हम आगे के बारे में सोच ही रहे थे कि कहाँ जाना है अंजान शहर है तभी माँ ने बताया कि मेरे दादाजी जो मेरे गाँव के ही हैं यहाँ रहते हैं उनका नाम योगेंद्र कुमार उपाध्याय है। मैंने घर पर फ़ोन करके उनका नंबर लिया और उनके पास कॉल किया ।

        जब मैंने उन्हें बताया कि मैं और माँ पुणे स्टेशन पर हैं तो मैं कह नहीं सकता कि उन्हें यह सुनकर कितनी ख़ुशी हुई होगी क्योंकि अचानक कोई अपना इतनी दूर से इतने पास आ जाए तो वो ख़ुशी छिपाये नहीं छिपती और साथ ही उन्होंने मुझे डांटा भी कि हमने अपने आने की खबर उन्हें पहले नहीं दी जबकि हमें दौण्ड जँ. पर उन्हें बताना चाहिए था कि हम पुणे स्टेशन पहुँच रहे हैं। ताकि हमें स्टेशन पर इतना इंतज़ार न करना पड़ता। दादाजी अपनी कार लेकर हमे स्टेशन लेने पहुंचे।

Saturday, August 6, 2016

GOA EXPRESS : MTJ TO PUNE

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मथुरा जं. से पुणे जं. -  गोवा एक्सप्रेस से एक सफर 

     अगस्त का महीना मेरे प्रिय महीनों में से एक है, इसलिए नहीं कि यह मेरा जन्मदिन का माह है बल्कि इसलिए कि यह एक मानसूनी महीना है, एक ख़ूबसूरती सी दिखाई देती है इस माह में। सूर्यदेव का लुकाछिपी का खेल और इंद्रधनुष के दर्शन, मन को काफी लुभाते हैं। इस मानसूनी महीने में यात्रा करने का एक अपना ही मज़ा है, कुछ दिन पहले मथुरा से नजदीक भरतपुर जिले की शानदार मानसूनी यात्रा मैंने अपनी एवेंजर बाइक से की थी पर यह एक छोटी सी यात्रा थी। मेरा मन इस माह में कहीं दूर जाना चाहता था पर कहाँ ये समझ नहीं आ रहा था।

Saturday, July 16, 2016

ऊषा मंदिर और वैर का किला


 DATE :- 16 JULY 2016

ऊषा मंदिर और वैर का किला 

       यात्रा एक साल पुरानी है परन्तु पब्लिश होने में एक साल लग गई, इसका एक अहम् कारण था इस यात्रा के फोटोग्राफ का गुम हो जाना परन्तु भला हो फेसबुक वालों का जिन्होंने मूमेंट एप्प बनाया और उसी से मुझे मेरी एक साल पुरानी राजस्थान की मानसूनी यात्रा के फोटो प्राप्त हो सके। यह यात्रा मैंने अपनी बाइक से बरसात में अकेले ही की थी। मैं मथुरा से भरतपुर पहुंचा जहाँ पहली बार मैंने केवलादेव घाना पक्षी विहार देखा परन्तु केवल बाहर से ही क्योंकि इसबार मेरा लक्ष्य कुछ और ही था और मुझे हर हाल में अपनी मंजिल तक पहुंचना ही था, मेरे पास केवल आज का ही समय था शाम तक मुझे मथुरा वापस भी लौटना था।

Saturday, April 2, 2016

PASHUPATI NATH TEMPLE : KATHMANDU




पशुपतिनाथ मंदिर- काठमांडू 

मेरी माँ और पशुपतिनाथ मंदिर 



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     शाम को जनकपुर के रामानंद चौक से काठमांडू के लिए मैंने डीलक्स बस में सीट बुक करवा दिया । और शाम को चौक पहुंचकर बस के इंतज़ार मे बैठे रहे। यहाँ से या बस पूरी रात पहाड़ो में चलकर सुबह नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंची, काठमांडू में पशुपतिनाथ के मंदिर के पास बस ने हमें उतार दिया। काफी तलाश करने के बाद हमें एक होटल में कमरा मिल गया, कमरे में नहा धोकर मैं और माँ पशुपतिनाथ के दर्शन करने पहुंचे। 

Friday, April 1, 2016

JANAKPUR 2016

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

जनकपुर धाम मिथिला 



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     शाम ढलने तक ट्रेन दरभंगा पहुँच चुकी थी, पहले इस ट्रैन का यही आखिरी स्टॉप था, अब इसे दरभंगा से आगे जयनगर तक बढ़ा दिया गया है। दरभंगा पर ट्रेन लगभग खाली हो चुकी थी, शेष जो कुछ यात्री बचे थे वे मधुबनी पर उतर गए, मधुबनी से थोड़ा आगे ही जयनगर है जो भारत - नेपाल की सीमा पर स्थित है। यह पूरा क्षेत्र मिथिला कहलाता है। यहाँ का रहन सहन, यहाँ की भाषा मैथिली है।

Wednesday, March 30, 2016

SWATANTRTA SAINANI EXP : NDLS TO JYG

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

स्वतंत्रता सैनानी एक्सप्रेस से एक सफर 



      अयोध्या की यात्रा के पश्चात् इस बार मेरा मन मिथिला की ओर जाने का था। मिथिला भगवान श्री राम की ससुराल तथा माता सीता की जन्मस्थली है। मिथिला का आधा भाग आज भारत में है और आधा भाग नेपाल में। मिथिला राजा जनक के राज्य का नाम था, तथा अवध राजा दशरथ के राज्य का नाम था। मिथिला की राजधानी जनकपुर थी जो आज नेपाल में स्थित है। तो बस इसबार नेपाल की तरफ ही जाना था। सहयात्री के रूप में इसबार माँ को चुना और स्वतंत्रता सैनानी एक्सप्रेस में नई दिल्ली से जयनगर तक रिजर्वेशन करवा लिया। जयनगर नेपाल के सीमा पर स्थित आखिरी भारतीय रेलवे स्टेशन है और बिहार के मधुबनी जिले के अंतर्गत आता है। 

Saturday, March 26, 2016

SATYA GRAH EXPRESS

सत्याग्रह एक्सप्रेस से वापसी यात्रा 

Monday, February 1, 2016

M.G. PASSENGER : NEPALGANJ TO PILIBHIT

                                                UPADHYAY TRIPS PRESENT'S     


                                                 
  नेपालगंज  - पीलीभीत पैसेंजर ट्रेन यात्रा



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     नानपारा से हम मैलानी ओर चल दिए, यह सफर मीटर गेज ट्रेन का एक अदभुत सफर है जो सरयू नदी के ऊपर बने बाँध के किनारे होता हुआ नेपाल की तराई में दुधवा नेशनल पार्क के बीच से होकर गुजरता है। मेरी बचपन की पसंदीदा ट्रेन गोकुल एक्सप्रेस इसी रास्ते से होकर गोंडा आगरा फोर्ट पहुंचती थी और आज यह ट्रेन केवल पीलीभीत तक ही सीमित है क्योंकि पीलीभीत से आगे की लाइन अब ब्रॉड गेज में कन्वर्ट हो चुकी है जल्द ही यह ट्रेन गोंडा से मैलानी रह जाएगी।

Sunday, January 31, 2016

M.G. PASSENGER : GONDA TO NEPALGANJ


गोंडा से नेपालगंज पैसेंजर यात्रा 

NEPALGANJ ROAD


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     सुबह करीब तीन बजे मैं वेटिंग रूम में नहा धोकर तैयार हो गया और बाहर जाकर गर्मागर्म चाय पीकर आया और कृष्णा को जगाया। मोबाईल भी अब चार्ज हो चुका था। सुबह चार बजे गोंडा से मीटर गेज की ट्रेन नेपालगंज के लिए रवाना होती है , हम इसी ट्रेन में आये और खली पड़ी सीट पर सो गए। मुझे बहराइच स्टेशन देखना था इसलिए सोया नहीं और वैसे भी नहाने के बाद मुझे नीँद नहीं आती है। अभी दिन निकलने में काफी समय था, ट्रेन गोंडा के बाद अगले स्टेशन पर रुकी यह गंगागढ़ स्टेशन था मैंने ट्रेन से बाहर देखा तो घने कोहरे के अलावा मुझे बड़ी लाइन के स्लीपर दिखाई दिए जिसका मतलब था कि जल्द ही ये लाइन भी बड़ी लाइन में बदल जाएगी। 

Saturday, January 30, 2016

AYODHYA 2016



  प्रभु श्री राम की जन्मभूमि - अयोध्या 


अयोध्या रेलवे स्टेशन 


      मेरा काफी दिनों से मन कर रहा था कि एकबार प्रभु श्री राम लला के दर्शन किये जाएँ और अयोध्या नगरी की सैर की जाए। इसबार मेरी ऑफिस में काम करने वाला कन्हैया भी मेरे साथ चलने के लिए तैयार था। मैंने 13238 कोटा - पटना एक्सप्रेस में दो सीट बुक कर दी और यात्रा की तैयारी आरम्भ कर दी। आजकल ट्रेन अपने रूट से डाइवर्ट होकर चल रही थी। यह आगरा कैंट - टूंडला -कानपुर की बजाय, कासगंज - फर्रुखाबाद -कानपुर अनवरगंज के रास्ते चल रही थी।


    हम शाम को ट्रेन के नियत समय पर रेलवे स्टेशन पहुंचे परंतु यह ट्रेन कोहरे की वजह से पांच - छह घंटे लेट हो गई और रात को दो बजे मथुरा आई। हमारी नींद तो ट्रैन के इंतज़ार में पूरी हो गई अब तो बस दिन निकलने का इंतज़ार था पर हमारा दिन निकला कानपुर अनवरगंज पर।

Friday, June 26, 2015

HARIDWAR 2015


हरिद्धार यात्रा - 2015 


जून 2015, 

मेरे पिताजी के स्वर्गवास के बाद मैं उनकी अस्थियों को लेकर हरिद्वार जाना चाहता था। हरिद्वार, वही स्थान है जहाँ मैं बचपन से ही अपने माता पिता के साथ गया था और उन्हीं के साथ मैंने गंगा के तट और इसकी धार्मिक महिमा को समझा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि जीवन में मुझे हरिद्वार की एक ऐसी भी यात्रा करनी पड़ेगी जिसमें मेरे पिताजी सशरीर ना होकर केवल अस्थियों के रूप में होंगें और यह मेरे पिताजी के साथ मेरी अंतिम यात्रा होगी। 

मेरे बड़े भाई धर्मेंद्र भरद्वाज जी इस यात्रा में मेरे सहयात्री के रूप में मेरे साथ थे। नईदिल्ली से देहरादून चलने वाली नंदादेवी एक्सप्रेस में विनोद जी ने हमारा हरिद्वार तक आरक्षण करा रखा था। शाम को मैं और भैया, पिताजी की अस्थियां लेकर नईदिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां विनोद जी हमें मिले और उन्होंने काउंटर से कराई गई ट्रेन की टिकट हमें दी और फिर हम हरिद्वार के लिए निकल पड़े। हमारी टिकट कन्फर्म नहीं हुई थी इसलिए हमें कोई सीट नहीं मिली थी। पूरी रात का यह सफर हमने खड़े खड़े ही पूरा किया गनीमत थी कि यह AC कोच था, अन्यथा गर्मी कोई कसर नहीं छोड़ रही थी। 

अगली सुबह हम हरिद्वार पहुंचे, यहाँ पहुंचकर अनायास ही मेरी आँखों में आंसू आ गए, रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर को देखकर मुझे मेरी बीती हरिद्वार की यात्रा की याद आ गई जिसमें अब तक मेरे पिताजी मेरे साथ थे किन्तु आज वह मेरे साथ मौजूद नहीं थे, बस उसके फूल मेरे साथ थे। भैया ने मेरे दुःख को समझ लिया और वह मुझे एक चाय नाश्ते के दुकान पर लेकर गए। हरिद्वार में सुबह की चाय पीने के बाद हम हरि की पैडी की ओर रवाना हो चले। 

...

हरि की पैडी पर पहुंचकर माँ गंगा को नमन करके मैंने अपने पिता जी की अस्थियां गंगा जी में विसर्जित कीं और फिर गंगा स्नान के पश्चात अपने पिताजी को नमन करते हुए उनसे अंतिम विदा ली और वापस स्टेशन की ओर प्रस्थान किया। यह क्षण मेरे लिए अत्यंत ही भावुक थे और सहज ही ना सम्भलने वाले थे, परन्तु भैया मेरे साथ थे जिनकी वजह से मुझमे हौंसला भी था और हिम्मत भी, इन दुख्नों के क्षणों को ग्रहण करने की। मेरा हृदय यह स्वीकार ही नहीं कर पा रहा था कि मेरे सिर से मेरे पिता का साया हट चुका है, मैंने अपने पिता को खो दिया है। 

...

पिता की याद मन में बसाये आँखों में आंसू लिए मैं, भैया के साथ रेलवे स्टेशन की ओर रवाना हो चला। मार्ग में एक पुलिस स्टेशन के नजदीक लगे एक बड़े पोस्टर को मैंने पढ़ा, जिसमें जीवन और मृत्यु से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें लिखी हुईं थीं। इसमें एक पिता और पुत्र के दायित्वों का भी विशेष विवरण दिया हुआ था। इसे पढ़कर मुझे एहसास हुआ कि एक पिता का अपने पुत्र के जीवन में कितना महत्वपूर्ण योगदान रहता है। 

...

एक भोजनालय पर भोजन करने के बाद हम रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहाँ से हमारा वापसी का आरक्षण नहीं था, इसलिए सामान्य श्रेणी की टिकट लेकर हम ट्रेन में सवार हो गए। कोच में सीट तो कोई भी खाली नहीं थी, इसलिए दरवाजे के पास ही खड़े होकर हमने यात्रा की।  पिताजी के जीवन काल में मैंने कभी जनरल कोच में यात्रा नहीं की थी, मेरे पिताजी के पास स्लीपर का पास था, जिससे मैं किसी भी ट्रैन के स्लीपर कोच में यात्रा कर सकता था बिना किसी मूल्य के। आज उनके जाने बाद मैं सामान्य श्रेणी का मुसाफिर बन चुका हूँ। 


IN DELHI METRO

HARIDWAR ARRIVED AT 4 AM 




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MY BIG BROTHER DHARMENDRA BHARDWAJ

HARI KI PAIRI 

HARI KI POURI, HARIDWAR 


GANGA RIVER 


GANGA RIVER 





























जय श्री राधे 





Monday, March 23, 2015

DURG TRIP 2015

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

 पिताजी के साथ दुर्ग की एक रेल यात्रा 




   मेरे पिताजी अभी छ महीने पहले ही अपनी रेल सेवा से सेवानिवृत हुए हैं परन्तु उनका स्वास्थ्य अब उनका साथ नहीं दे रहा था। मधुमेह की बीमारी ने उनके पूरे शरीर पर पूरा प्रभाव रखा हुआ था जिस वजह से वह शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो चले थे। हजारों डॉक्टरों की दवाइयों से भी जब उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ तो किसी ने मुझे सलाह दी कि आप इन्हें दुर्ग ले जाओ, वहां एक शेख साहब हैं जो मधुमेह के रोगियों को एक काढ़ा बनाकर पिलाते हैं और ईश्वर चाहा तो वह जल्द ही इस बीमारी से सही हो जायेंगे। मुझे मेरे पिताजी के स्वस्थ होने की एक आस सी दिखाई देने लगी। 

   मैंने दुर्ग जाने की तैयारी शुरू कर दी। मथुरा से दुर्ग के लिए मैंने गोंडवाना एक्सप्रेस में रिजर्वेशन कराया और मैं पिताजी को लेकर दुर्ग की तरफ रवाना हो गया। अगले दिन शाम तक मैं और पिताजी दुर्ग पहुँच चुके थे। पिताजी किसी होटल या लॉज में रुकने के इच्छुक नहीं थे क्योंकि वह पैदल चलने में असमर्थ थे इसलिए मैंने प्लेटफॉर्म पर ही अपना और पिताजी का चटाई बिछाकर बिस्तर बनाया और पिताजी को वहीँ बैठा दिया और बाद में मैंने दुर्ग स्टेशन पर ही डोरमेट्री बुक की और दो बिस्तर हमें सोने के लिए मिल गए। 

मैं स्टेशन से बाहर आकर दुर्ग के बाजार गया और शेख साहब के पते पर पहुँचा। वहाँ पहुँचकर मुझे पता चला कि शेख साहब दवा को सुबह मरीजों को पिलायेंगे। यहाँ और भी मरीज थे जो काफी दूर दूर से यहाँ शेख साहब दवा पीने के लिए आये हुए थे। यहाँ इसीप्रकार प्रतिदिन मरीज आते हैं और दवा पीते हैं। 

Saturday, November 22, 2014

SHIMLA 2014

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

कालका - शिमला रेल यात्रा और चंडीगढ़ 

कल्पना और शिमला रेलवे स्टेशन 


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      अम्बाला स्टेशन पर इतनी भीड़ हो सकती है ये सोचा ही नहीं था, प्लेटफॉर्म पर लोग ऐसे पड़े थे कि पैदल निकलने तक को जगह नहीं थी फिर भी एक सुरक्षित जगह मैं कल्पना को बैठाकर खाना लेने के लिए बाहर चला गया। जब तक वापस आया हमारी कालका जाने वाली पैसेंजर भी आ चुकी थी, हमने ट्रेन में ही खाना खाया और सुबह दो तीन बजे तक कालका पहुँच गए। यहाँ सर्दी बहुत तेज थी पर हमें नहीं लग रही थी, आज शिमला जाने की ख़ुशी जो दिल में थी, कालका स्टेशन पर कॉफी बहुत ही उत्तम थी इसलिए जब तक ट्रेन का टाइम हुआ चार पांच बार कॉफी पी गया। हमारा 52453 कालका शिमला ट्रेन में रिजर्वेशन था यह ट्रेन कालका से सुबह छ बजे चलती है और सुबह 11 बजे शिमला पहुँच जाती है।

Friday, November 21, 2014

NAINADEVI TEMPLE 2014

UPADHYAY TRIPS PRESENTS

 माँ नैनादेवी के दरबार में 



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     हिमालय के हरे भरे जंगलों और पहाड़ों में चढ़ाई चढ़ने के बाद हमारी बस नैनादेवी पहुंची। यह नौदेवियों और 51 शक्तिपीठों में से एक हैं। कहा जाता है कि यहाँ सती की बाई आँख गिरी थी जिससे इस स्थान को शक्तिपीठों में गिना जाता है। मुख्य बाजार से सीढ़ियों के रास्ते हम मंदिर पहुंचे। मंदिर ऊंचाई पर होने के साथ साथ काफी सुन्दर बना है और हिमालय की खूबसूरत वादियां और दृश्यावलियां यहाँ से बखूबी दिखाई देती हैं।मंदिर का प्रांगण काफी बड़ा बना हुआ है और यहाँ एक ब्रिज है जो अत्यधिक भीड़ होने की स्थिति में माँ के दर्शन करने के लिए काफी राहत देता है। पिछले कुछ दिनों पहले इसी ब्रिज पर भगदड़ मच जाने के कारण यहाँ काफी बड़ी दुर्घटना घटित हो गई थी जिसमे कुछ श्रद्धालुओं को अपनी जान गँवानी पड़ी थी।

Thursday, November 20, 2014

NANGAL DAM 2014

UPADHYAY TRIPS PRESENTS

भाखड़ा बाँध का एक दृशय 


नांगल डैम रेलवे स्टेशन 


        अभी एक साल ही हुआ था शिमला गए हुए जब पवन भाई का चंडीगढ़ में रेलवे का टेस्ट था और मैं उनके साथ गया था, चंडीगढ़ से हम लोग शिमला और कुफरी तक गए थे। इसबार मेरा रेलवे का टेस्ट था चंडीगढ़ में पर इसबार मेरे साथ मेरी पत्नी कल्पना थी। मैंने यात्रा का प्लान कुछ इस प्रकार बनाया था कि जिसमे केवल चंडीगढ़ और शिमला ही शामिल न हो। 

       मैं और कल्पना जनरल का टिकट लेकर इंदौर - चंडीगढ़ एक्सप्रेस में बैठ लिए, दिल्ली के बाद सोने के लिए बड़े आराम से जगह मिल गई क्योंकि ट्रेन पूरी खाली हो चुकी थी। सुबह हम अम्बाला कैंट जंक्शन स्टेशन उतरे और एक शटल में बैठ गए, अम्बाला सिटी पर हमने ये शटल भी छोड़ दी क्योंकि हमे इसमें बैठने बाद पता चला कि ये अमृतसर की तरफ जा रही थी और जबकि हमें नांगल डैम जाना था। कुछ देर बाद अम्बाला सिटी स्टेशन पर नांगल डैम की शटल आई और इसका उचित टिकट लेकर नांगल डैम की तरफ रवाना हो गए। 

Saturday, February 1, 2014

UJJAIN 2014

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S



     उज्जैन दर्शन ( अवंतिकापुरी )


 उज्जैन जंक्शन 


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       सुबह पांच बजे ही मैं और माँ तैयार होकर उज्जैन दर्शन के लिए निकल पड़े। अपना सामान हमने वेटिंगरूम में ही छोड़ दिया था। सबसे पहले हमें महाकाल दर्शन करने थे, आज दिन भी सोमवार था। यहाँ महाकालेश्वर के अलावा और भी काफी दर्शनीय स्थल हैं। महाकाल के दर्शन के बाद हमने एक ऑटो किराए पर लिया और ऑटो वाले ने हमें दो तीन घंटे में पूरा उज्जैन घुमा दिया। आइये अब मैं आपको उज्जैन के दर्शन कराता हूँ ।  


Thursday, January 30, 2014

OMKARESHWAR JYOTIRLING 2014

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन 


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      मुझे मेरी माँ को बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराने हैं जिनमें से इस बार मैं ओम्कारेश्वर एवं महाकाल की तरफ जा रहा हूँ। पहली बार मैंने माँ का आरक्षण स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के AC कोच में करवाया था, और मैं जनरल टिकट लेकर जनरल डिब्बे में सवार हो गया, यह ट्रेन सुबह साढ़े आठ बजे आगरा कैंट से चली और रात दस बजे के करीब हम खंडवा पहुँच गए। यहाँ से हमें मीटर गेज की ट्रेन से ओम्कारेश्वर जाना है जो सुबह जाएगी। 

MG TRIP : KHANDAWA TO UJJAIN 2014

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

 खंडवा से उज्जैन मीटर गेज यात्रा 

KHANDWA


हम रात भर मीटर गेज की ट्रेन की काठ की सीटों पर ही सोते रहे। सुबह चार बजे के आसपास ट्रेन में सवारियों का आना शुरू हो गया। बड़े बड़े ढोल लेकर कुछ निमाड़ वासी हमारी भी नजदीकी सीटों पर आकर बैठ गए। पांच बजे के लगभग ट्रेन ने एक जोरदार सीटी दी और खंडवा से आगे बढ़ चली। थोड़ी देर बाद ब्रॉड गेज लाइन हमसे दूर होती दिखाई देती गई और हमारी ट्रेन पश्चिमी निमाड़ की तरफ बढ़ चली। कुछ समय बाद दिन निकल आया था और अब निमाड़ के खेत भी दिखने शुरू हो चुके थे। कुछ समय बाद कोटला खेड़ी के नाम से एक रेलवे स्टेशन आया। यहाँ प्लेटफॉर्म पर ट्रेन को सिग्नल देने के लीवर लगे हुए हैं। 

Friday, October 11, 2013

AGRA : GURU KA TAAL


गुरु अर्जुनदेव का शहीदी स्थल - गुरु का ताल

   आज न जाने क्यों अपना ही शहर घूमने का ख्याल दिल में आया, सोचा दूर दूर से लोग जिस शहर को देखने आते हैं उसी शहर को छोड़ हम दूसरी जगहों पर जाते हैं और पाते हैं कि एक बार आगरा आना इस इस देश के हर इंसान का सपना है, और हो भी क्यों ना जब स्वर्ग में जिस महल की बुनियाद रखी गई हो और मोहब्बत के नाम पर जिसे जमीं  पे उतारा गया हो और उसकी ताजगी के नाम पर उसे ताज महल पुकारा गया हो उसे कौन नहीं देखना चाहेगा । 
 
     पर आज मैं आपको ताजमहल नहीं, आगरा की उन जगहों पर जाऊंगा जहाँ शायद ही लोग जाना पसंद करते हैं, उन जगहों में सबसे पहले मेरी यात्रा वाहेगुरु का नाम लेकर आगरा के प्रसिद्द गुरुद्वारा, गुरु का ताल से प्रारम्भ करूँगा। 


Thursday, October 10, 2013

SARNATH 2013

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

सारनाथ दर्शन 

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     माँ को वाराणसी स्टेशन पर छोड़कर मैं एक पैसेंजर ट्रेन के जरिये सारनाथ पहुँच गया, सबसे पहले स्टेशन के शाइन बोर्ड को देखा, यह और स्टेशनों की अपेक्षा कुछ अलग लगा फिर ध्यान आया कि मैं महात्मा बुद्ध की भूमि में हूँ और उन्ही के धम्म के अनुसार रेलवे ने इस स्टेशन का बोर्ड भी बनाया है। सारनाथ पूर्वोत्तर रेलवे का एक छोटा सा स्टेशन है परन्तु ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण भी है।

Monday, October 7, 2013

VARANASI 2013

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

पहली काशी यात्रा 

वाराणसी रेलवे स्टेशन 


    अभी एक महीना ही हुआ था इलाहाबाद से लौटे हुए कि दुबारा रेलवे का कॉल लैटर आ गया,  इसबार यह मेरे नाम से आया था। सेंटर इलाहाबाद में ही था इसलिए एक इलाहाबाद की टिकिट बुक करा ली, इसबार मेरी माँ मेरे साथ इलाहाबाद जा रही थी, उनका भी पी टी ओ पापाजी बनवा दिया और इलाहाबाद की एक और टिकिट बुक हो गई ।

    एग्जाम से एक दिन पहले ही हम इलाहाबाद के लिए निकल लिए, दुसरे दिन हम इलाहाबाद में थे स्टेशन पर काफी लड़कों की भीड़ थी जिन्हे देखकर यह एहसास दिल को हुआ कि इस देश के अंदर एक अकेले हम ही बेरोजगार नहीं थे, हमारे जैसे जाने कितने ही न थे जो आज मुझे यहाँ देखने को मिले।