वर्ष 2023 में ग्राम रतमान गढ़ी में मेरी यात्रायें

रातमान गढ़ी, मेरी छोटी मौसी का गाँव है जोकि हाथरस जिले में मुरसान के नजदीक स्थित है। बचपन से ही मैं यहाँ आता रहा हूँ, आज मैं अपनी कंपनी की गाडी लेकर अपने मौसा जी से मिलने पहुंचा। गाँव में मेरे दोनों छोटे भाई दिलीप और वीके मुझे मिले जो मुझसे मिलकर अत्यंत ही प्रसन्न हुए। मौसाजी अभी घर नहीं थे, वह शाम के समय अपने खेतों पर निकल जाते हैं। वीके के साथ मैं उनसे मिलने खेतों पर गया और मौसाजी से मिला। मेरे मौसाजी मुझे देखकर बहुत खुश हुए और उन्होंने मुझसे एक रात यहां रुकने की बात कही किन्तु अभी मैं अपनी ड्यूटी पर था और कम्पनी की गाडी भी मेरे साथ थी, इसलिए मैं यहाँ नहीं ठहर सका और मौसाजी से पुनः आने का वादा करके मैं वापस मथुरा चला गया।
मकर सक्रांति के बाद इस गाँव में यह मेरी दूसरी यात्रा थी।
 |
| मेरी कंपनी की गाडी |
 |
| वीके मेरे लिए आलू की बोरी सिलता हुआ |
 |
| वीके के साथ एक सेल्फी |
 |
| दिलीप के साथ एक सेल्फी |
 |
| मौसाजी के खेत के नजदीक खड़ी मेरी कार |
 |
| खेत किनारे मेरे मौसा जी |
 |
| अपनी कुटिया के बाहर बैठे मौसाजी और वीके व दिलीप का बेटा |
मार्च के माह में मेरा पुनः रातमान गढ़ी जाना हुआ। इस बार मेरे मौसाजी के यहाँ रामायण कथा का पाठ हुआ था जिसके दूसरे दिन भंडारा स्वरूप प्रसाद भी वितरित किया गया था। इस मौके पर जब मैं यहाँ पहुंचा तो यहाँ मुझे मेरे बड़े मामा जी और मामी जी एवं उनके पुत्र अर्थात मेरे बड़े भाई धर्मेंद्र शर्मा भी उपस्थित थे।
मौसी और मौसा जी से मिलकर तथा मामाजी और मामी जी से मिलकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। हम सभी भाइयों ने मिलकर एकसाथ भोज स्वरूप प्रसाद ग्रहण किया और इसके पश्चात हम मौसाजी के नौहरे पर पहुंचे। गाँव से बाहर मौसाजी का यह फार्म हाउस है जिसे वो नौहरा कहते हैं। यहाँ मौसाजी के कृषिकार्य से सम्बंधित उपकरण और सामान रखे रहते हैं साथ ही उनका ट्रैक्टर भी यही खड़ा होता है।
नौहरे पर कुछ देर बैठने और घूमने के पश्चात मैं वापस अपने घर मथुरा की तरफ रवाना हो गया।
 |
| मैं और मेरे भाई |
 |
| मेरे बड़े मामा और मामी जी |
 |
| धर्मेंद्र शर्मा |
 |
| मेरे मौसाजी का फार्म हाउस अर्थात नौहरा |
 |
| मेरी मौसी - कुसमा देवी |
यात्रा संपन्न
No comments:
Post a Comment
Please comment in box your suggestions. Its very Important for us.