A Journey for the Immersion of Mother's Ashes
3 FEB 2024
हरिद्वार यात्रा
मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब अपनी सबसे प्रिय सहयात्री अपनी माँ को अस्थिरूप में हरिद्वार लेकर आऊंगा। वो हरिद्वार जहाँ मुझे पहली बार मेरी माँ और पिताजी ही लेकर गए थे। इसके बाद अनेकों बार मैं अपनी माँ के साथ इस पावन धाम की यात्रा कर चुका हूँ। यहाँ की एक एक जगह मेरे माता और पिता की स्मृतियों से जुडी हुई है। हरिद्वार में ही मैंने माँ गंगा के पावन तट पर मैंने अपने माता पिता के साथ एक पूरी रात बिताई थी।
आज माँ गंगा की इस पावन भूमि में आकर मुझे अपने माता पिता की बहुत याद आने लगी और मेरी आँखों में आँसू आ गए परन्तु बड़ा भाई साथ था जिसने मुझे सँभाल रखा था। हम माँ के अस्थिपुष्पों के साथ हरिद्वार के हरि की पैड़ी गंगा घाट पर पहुंचे और माँ के अस्थिपुष्पों को गंगाजी की पावन धारा में प्रवाहित कर दिया। मेरी माँ अब गंगाजी को समर्पित हो चुकी थीं इसलिए आज के बाद यह हरिद्वार धाम मेरी माँ का अंतिम स्थान और माँ गंगा ही मेरे लिए अब मेरी माँ स्वरुप रहेंगी। इसलिए मैंने प्रत्येक वर्ष यहाँ आने का निश्चय किया।
गंगा स्नान के पश्चात ही हल्की हल्की वर्षा शुरू हो गई। नीटू ने इसे बहुत ही शुभ संकेत माना और माँ गंगा को प्रणाम करके हम वापस स्टेशन की तरफ रवाना हो गए। रास्ते में मैंने मेरी माँ जैसे शरीर वाली एक वृद्ध महिला को देखा, मैंने उसे उसकी पसंद का भोजन कराया और कुछ पैसे दान स्वरूप दिए। इसके बाद हम रेलवे स्टेशन की तरफ रवाना हो चले।
हम सुबह देहरादून एक्सप्रेस से यहाँ आये थे अब यहाँ से वापसी भी हमारी इसी ट्रेन से थी। दोपहर के बारह - एक बजे का समय हो चला था और इस ट्रैन के छूटने में बहुत ही कम समय बचा था। हमने सुबह से कुछ भी नहीं खाया था और अब कुछ भी खाने के लिए समय भी नहीं बचा था। हम शीघ्र ही स्टेशन पहुंचे, हमारे प्लेटफॉर्म पर पहुँचते ही ट्रेन रवाना हो चुकी थी। चलती ट्रेन के जनरल कोच में हम भी सवार हो गए। नीटू एक बोतल में गंगाजल ले आया था जो बाद के आगामी कार्यों में बहुत काम आया और इसके अलावा उसने प्लेटफॉर्म से चलते चलते ही चार समोसे भी ले लिए थे जिन्हें खाकर हम दोनों ने अपनी भूख को थोड़ी राहत दी।
मैं जैसे जैसे हरिद्वार से दूर हो रहा था, मुझे यही एहसास हो रहा था कि मैं अपनी माँ को छोड़कर जा रहाहूँ। किन्तु माँ अपनी जीवन यात्रा पूरी करके गोलोक को जा चुकी थीं।


































