अमोखरी ग्राम में मेरी यात्रायें - वर्ष 2023
नए साल की शुरुआत में मकर सक्रांति के पर्व पर मैंने एक यात्रा आयोजित की थी जिसका टाइटल मैंने रखा था - रिश्तों के सफर पर। इस यात्रा के दौरान मैंने अपने सभी रिश्तेदारों के पास बाइक यात्रा की थी और उन्हें सक्रांति के पर्व पर भेंट स्वरूप गजक का बॉक्स दान किया था। इसी यात्रा के दौरान मैं अपनी बड़ी बुआ जी के गाँव अमोखरी भी गया था।
अमोखरी गाँव से ही मुझे इस पर्व पर अपनी इस यात्रा को करने का विचार आया था जब पिछली बार भी मकर सक्रांति पर, मैं केवल अमोखरी ही आया था और मैंने सोचा था क्यों ना प्रत्येक वर्ष मकर सक्रांति पर और नए साल की शुरुआत पर अपने सभी रिश्तेदारों के पास घूमने जाया जाये क्योंकि फिर पूरी साल मैं अपने कार्यक्षेत्र और अन्य यात्राओं में व्यस्त हो जाता हूँ और अपनों से मिलने का समय भी नहीं निकल पाता है।
इसी वर्ष में दूसरी बार मैं, अपनी माँ के साथ अमोखरी गया था। ना जाने क्यों माँ को शायद एहसास सा हो गया था कि यह उनके जीवन की अंतिम वर्ष है इसलिए वह सभी अपनों के पास जाकर कुछ दिन उनके साथ रहीं थीं, फिर चाहे वो उनका अपना गाँव आयराखेड़ा हो या फिर उनकी ससुराल धौरपुर गाँव हो। मैं पांच दिन पहले माँ को अपने गाँव धौरपुर छोड़ गया था और उनके बाद जब मैं उन्हें लेने के लिए वापस गाँव पहुंचा तो उन्होंने वहां से बुआ जी के गाँव अमोखरी जाने की भी इच्छा प्रकट की।
धौरपुर से अमोखरी की दूरी लगभग 10 किमी के आसपास है. मैं अपनी नई बाइक स्प्लेंडर से उन्हें अमोखरी लेकर गया। यहाँ वह दोनों बुआ जी से मिली और उनसे उनका हालचाल जाना। बुआ जी भी आज माँ से मिलकर अति प्रसन्न हुईं। शाम होने के साथ ही मैं और माँ वापस मथुरा लौट लिए थे। वह बाइक पर सुविधाजनक रूप से नहीं बैठ पा रही थीं इसलिए मैंने उन्हें हाथरस से अपने एक जानकार कार ग्राहक के साथ मथुरा तक उनकी कार में बैठा दिया। वह सुरक्षित रूप से मथुरा पहुँच गईं।
वर्ष 2023 के अंत में और वर्ष 2024 के शुरुआत में ही मेरी माँ हमेशा के लिए मुझे छोड़कर परलोक गमन कर गईं। इस प्रकार यह उनकी मेरे साथ अंतिम यात्रा रही।
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| बुआ जी से बतियाती मेरी माँ |
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| मेरी बीना बुआ जी |
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| बुआ जी के घर से विदा होती मेरी माँ |
यात्रा पूर्ण


















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