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Saturday, October 21, 2023
JAMMU 2023 : ANU MARRIDGE
JAMMU 2023 : AMBARAN - A BUDDHIST SITE IN JAMMU
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| इसी पुल के नीचे अम्बारां का प्राचीन बौद्ध विहार है। |
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| प्राचीन बौद्ध विहार का प्रवेश द्वार |
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| अपनी बाइक खड़ी करता साहिल |
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| पुरास्थल अम्बारां का ऐतिहासिक पटल |
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| इंग्लिश में भी उपलब्ध है। |
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| प्राचीन बौद्ध स्तूप का अवशेष |
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| अन्य लघु स्तूपों के अवशेष |
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| प्राचीन बौद्ध स्तूप के अवशेष जहाँ से स्वर्ण मंजूषा प्राप्त हुई। |
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| अन्य लघु स्तूप |
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| संग्रहालय में रखी प्राचीन बौद्ध स्तूप की प्रति |
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| 2011 में अम्बारां बौद्ध विहार की यात्रा करते प्रसिद्ध बौद्ध गुरु दलाई लामा |
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| इस चित्र स्वर्ण मंजूषा की प्राप्ति का वर्णन देता है |
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| इस स्थल से प्राप्त हुए मृदभांड और उनके अवशेष |
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| दूसरी - पहली सदी ईसापूर्व के प्राचीन अवशेष |
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| इस बौद्ध स्थल की विस्तृत जानकारी |
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| बौद्ध विहार परिसर स्थित एक लघु संग्रहालय |
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| बौद्ध विहार के नजदीक बहती चिनाब नदी |
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| अम्बारां बौद्ध विहार से वापसी |
JAMMU 2023 : AKHNOOR FORT & CHINAB RIVER
अख़नूर का किला, चिनाब नदी और पांडव गुफा
21 अक्टूबर 2023
भारत के जम्मू कश्मीर राज्य में जम्मू शहर से 28 किमी दूर, चिनाब नदी के दाहिने तट पर स्थित अखनूर का किला, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यह किला एक प्राचीन स्थल पर स्थित है जिसे स्थानीय रूप से मांडा के नाम से जाना जाता है जो कि सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे उत्तरी छोर कहलाता है। यहाँ हुई खुदाई में तीन काल की संस्कृतियों के साक्ष्य मिले हैं—हड़प्पा कालीन बर्तन, आरंभिक ऐतिहासिक वस्तुएं और कुषाण काल के अवशेष।
यह कभी हड़प्पा कालीन नगर था जो कि आस्किन नदी के किनारे स्थित था। आस्किन नदी को वर्तमान में चिनाब नदी कहते है एवं इसका एक नाम चंद्रभागा भी है। किले के अंदर हुए उत्खनन से प्राप्त अवशेषों से ही इसके प्राचीन तीन संस्कृतियों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
मध्यकाल में इस किले का निर्माण 1762 ईसवीं में महाराजा तेज सिंह ने करवाया था, और उनके पश्चात उनके उत्तराधिकारी, राजा आलम सिंह ने 1802 ईस्वी में इसे पूर्ण करवाया। 17 जून 1822 को इसी किले के पास चिनाब नदी के जिया पोता घाट पर महाराजा रणजीत सिंह ने महाराजा गुलाब सिंह का राज्याभिषेक भी किया था।
'अखनूर' नाम के बारे में कहा जाता है कि मुगल सम्राट जहाँगीर की आँखों में संक्रमण हो गया था। यहाँ की ठंडी हवा और वातावरण से उनकी आँखों की रोशनी में सुधार हुआ, जिसके बाद इसे 'आँख-का-नूर' कहा गया जो बाद में अखनूर बन गया।
ऐसा भी माना जाता है कि अखनूर महाभारत काल की प्रसिद्ध विराट नगरी है। यहाँ पास में ही एक प्राचीन गुफा स्थित है जिसे पांडव गुफा के नाम से जाना जाता है, गुफा के अंदर पाँचो पांडवों सहित राजा विराट और महर्षि वेदव्यास जी की प्रतिमा दर्शनीय है।
Friday, October 20, 2023
JAMMU 2023 : A NIGHT IN A VILLAGE OF JAMMU
JAMMU 2023 : BAHU FORT & TEMPLE
Thursday, October 19, 2023
JAMMU 2023 : MTJ TO JAT BY KOTA EXPRESS
Thursday, October 12, 2023
AGRA : ROMAN CATHOLIC CEMETERY
आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 6
रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान
आगरा में रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान का निर्माण 1550 ई. में हुआ था और इसका इस्तेमाल सबसे पहले उन अर्मेनियाई ईसाइयों को दफनाने के लिए किया गया था, जो अकबर के शासनकाल के दौरान इस शहर में आकर बस गए थे। इनके बाद, जैसे-जैसे इस इलाके में दूसरे लोग आकर बसते गए, वैसे-वैसे अन्य ईसाई संप्रदायों के लोगों को भी यहाँ दफनाया जाने लगा।
इस कब्रिस्तान में सबसे पुरानी कब्र जॉन मिल्डेनहॉल की है। जॉन मिल्डेनहॉल एक अंग्रेज व्यापारी थे, जिनकी मृत्यु 1614 में हुई थी। कहा जाता है कि वह पहले ऐसे अंग्रेज थे, जिन्होंने "अकबर को आमने-सामने देखा था"। लेकिन यहाँ कुछ और कब्रें भी हैं, जो ध्यान देने लायक हैं न सिर्फ उन लोगों से जुड़ी कहानियों की वजह से, बल्कि उन कब्रों की वास्तुकला की वजह से भी।
Sunday, September 24, 2023
BIKANER 2023 : DEE TO BKN & JHANJHEU VILLAGE
Saturday, September 23, 2023
DELHI 2023 : ASHOKA EDICT
DELHI 2023 : LOTUS TEMPLE
DELHI 2023 : ISCON TEMPLE
इस्कॉन मंदिर - दिल्ली
23 SEP 2023
दिल्ली के पूर्वी कैलाश में श्री कृष्णा हिल्स में दिल्ली का इस्कॉन मंदिर स्थित है। इस मंदिर को श्री श्री राधा पार्थसारथी मंदिर कहते हैं क्योंकि मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री कृष्ण के साथ राधा रानी की प्रतिमा स्थापित है। इस मंदिर का उद्घाटन 5 अप्रैल 1998 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने किया था। यह भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। मंदिर में अनेकों कक्ष और सभागार हैं।
इस मंदिर की सबसे मुख्य विशेषता है कि यहाँ विश्व की सबसे बड़ी पुस्तक अद्भुत भगवत गीता रखी हुई है जो इटली में मुद्रित हुई थी और जिसका वजन अनुमानित 800 किलोग्राम है। इसका अनावरण 26 फ़रवरी 2019 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।
मैं आज सुबह ही यहाँ पहुँच गया और मंदिर के बाहर अपने जूते खोलकर दर्शन की लाइन में लग गया। अनेको दिल्लीवासी लोग यहाँ प्रभु के दर्शनों हेतु लाइन में लगे हुए थे और कुछ ही समय बाद मुझे भी ईश्वर के दर्शन हो गए। मंदिर काफी बड़ा है, अनेकों फुवारे मंदिर की शोभा को बढ़ाते हैं। सुरक्षा के लिए यहाँ हरसमय सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं।
Friday, September 1, 2023
KURUKSHETRA 2023 : SRI KRISHNA MUSEUM
श्री कृष्ण संग्रहालय - कुरुक्षेत्र
ज्योतिसर धाम देखने के बाद मैं वापस कुरुक्षेत्र आ गया। मैं श्री कृष्ण संग्रहालय के नजदीक ही बस से उतरा था, यहाँ आकर मुझे भगवान श्री कृष्ण से जुडी समस्त लीलाओं को एक छत के नीचे देखने की इच्छा हुई इसलिए मैंने 30 रूपये का टिकट लेकर संग्रहालय में प्रवेश किया और ईश्वर के अलग अलग स्वरूपों के साथ साथ उनकी दिव्य लीलाओं के दर्शन किये।
हालांकि मैं ब्रजवासी हूँ और मथुरा नगर में रहता हूँ जहाँ साक्षात् भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, किन्तु भगवान श्री कृष्ण के नाम से इस तरह का कोई भी संग्रहालय मथुरा अथवा वृन्दावन में नहीं है। अपने आराध्य के नाम से आज मुझे कुरुक्षेत्र की भूमि पर इस तरह का संग्रहालय देखने को मिला अन्यथा मैंने आज तक या तो ऐतिहासिक संग्रहालय देखे थे या फिर रेल संग्रहालय देखे हैं।
इसी संग्रहालय के नजदीक ही कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञानं केंद्र भी स्थित है। किन्तु मेरे पास अब समय का आभाव था और मुझे शीघ्र ही कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पहुंचना था। वहां से साढ़े तीन बजे मुझे गीता जयंती एक्सप्रेस पकड़नी है जिससे मैं मथुरा पहुँच सकूँ।

















































