Thursday, September 17, 2026

JAMMU 2023 : A NIGHT IN A VILLAGE OF JAMMU


जम्मू और कश्मीर के गांव की एक रात 



20 - 21 अक्टूबर 2023 

शाम को साहिल के साथ मैं रिसोर्ट से उसके गाँव की तरफ रवाना हो चला। मेरे लिए यह पहला मौका था जब मैं जम्मू कश्मीर राज्य के किसी गाँव को देखूंगा और साथ ही एक रात वहां ठहरूंगा। जम्मू से अखनूर जाने वाला राजमार्ग बहुत ही शानदार था, सर्दियों की शुरुआत हो चुकी थी इसलिए साहिल की बाइक पर मुझे हलकी हलकी ठण्ड सी भी लग रही थी। इसी रास्ते से दूर कहीं पहाड़ों में माता वैष्णोंदेवी का धाम भी नजर आ रहा था, जो कि पहाड़ पर जलती बत्तियों की रौशनी से स्पष्ट पहचान में आ रहा था। मुझे साहिल ने ही बताया था कि यह माता वैष्णों देवी का मंदिर है और यह साहिल के गाँव और उसके घर की छत से भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। 



मैंने बाइक पर बैठे बैठे ही दूर से माता को प्रणाम किया और जम्मू कश्मीर क्षेत्र में आज बाइक यात्रा का आनंद लिया। जम्मू कश्मीर की रात की यह ठंडी हवा और दूर पहाड़ों पर बैठी माता श्री वैष्णोंदेवी के धाम का आकर्षक नजारा आज मेरी यात्रा को बहुत ही यादगार बना रहा था। कुछ समय बाद अखनूर जाने वाले मुख्य राजमार्ग को हमने छोड़ दिया और चिनाव नदी पार करने के बाद हम साहिल के गाँव की तरफ बढ़ते रहे। यह पूरा क्षेत्र भारतीय सेना के अधीन है, यहाँ भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के अनेकों लोग हमें देखने को मिले। कुछ  देर बाद मैं साहिल  के गाँव में उसके घर पहुंचा। 

जम्मू कश्मीर राज्य के किसी गांव में यह मेरी पहली रात थी, इससे पहले मैं सिर्फ माता वैष्णोदेवी के दर्शन के लिए ही जम्मू आया था, बाकी कभी यहां आना नही हुआ।

साहिल का यह गाँव बहुत ही शानदार और प्राकृतिक वातावरण से भरपूर था, इस गाँव का नाम सांगनि है और यह अखनूर के नजदीक स्थित है। इस गाँव का मुख्य बाजार, तहसील अखनूर ही है जो कि जम्मू जिले का ही एक भाग है। चिनाब नदी यहाँ पास से ही होकर बहती है। 

घर में मुझे साहिल के दादाजी मिले, मैंने उन्हें प्रणाम किया। साहिल के गाँव में आज उसके पड़ोस में रहने वाले रिश्तेदारों के यहाँ कोई शादी का कार्यक्रम था, उसके पिताजी वहीँ गए हुए थे। उसकी माँ ने बहुत ही स्वादिष्ट भोजन बनाया और हमें खिलाया। मैंने और साहिल ने साथ में ही भोजन किया और देर रात मैं और साहिल एक ही कमरे में सोने  चले गए। इससे पूर्व हम खाना खाने के बाद उसके घर की छत पर टहलने भी गए जहाँ से उसने मुझे श्री माता वैष्णोदेवी के धाम  के दर्शन करवाए जो बहुत दूर एक पहाड़ पर रौशनी से जगमगाता हुआ हमें नजर आ रहा था। 

मैने पहलीबार जम्मू कश्मीर का कोई गांव देखा था और एक रात रुका था। साहिल के दादाजी, मां और पिताजी सभी का व्यवहार बहुत प्रिय और मधुर था। यह अपने घर की छत से ही माता वैष्णोदेवी को प्रणाम करके मत्था टेक लेते हैं और जब माता का बुलावा आता है तो दरबार भी चले जाते हैं।
यहां की भाषा भी हिंदी पंजाबी मिक्स है जो मेरी बहुत कम समझ में आती है।
मुझे किसी की भाषा समझ आए नही आए, पर मेरी भाषा सभी को समझ आती है और मेरी यात्रा आसान हो जाती है

अगली सुबह सुबह हमने फिर से छत पर चढ़कर माता वैष्णोंदेवी के दर्शन किये। साहिल के घर में आम और अमरुद के वृक्ष थे और उसके आसपास अनेकों फलदार वृक्ष यहाँ मुझे देखने को मिले। साहिल के दादाजी बहुत ही उम्रदराज व्यक्ति हैं उन्होंने मुझे यहाँ की अनेकों  जानकारियां दी। 

साहिल की बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर मथुरा का ही है, यह उसने वहीँ से खरीदी थी। जल्दी  ही साहिल ऑफिस जाने के लिए तैयार हो गया और हम सुबह का नाश्ता करके वापस जम्मू के लिए निकल चले। उसके गाँव में बिताई यह एक रात मुझे जीवनभर याद रहने वाली थी, क्योंकि इस गाँव का प्राकृतिक वातावरण, यहाँ का मौसम और यह राज्य मेरे लिए बिलकुल नए थे और शायद ही मुझे कभी दूसरा मौका मिले जब मैं जम्मू कश्मीर राज्य के किसी गाँव में पुनः ठहर सकूँ। 

माँ और दादाजी का आशीर्वाद लेकर मैं और साहिल वापस जम्मू के लिए निकल गए किन्तु इससे पूर्व साहिल ने मुझे अखनूर का किला और अम्बरां बौद्ध स्तूप भी दिखवाया जिसका विवरण हम अगले ब्लॉग में करेंगे। जम्मू पहुंचकर साहिल ने मुझे कुछ रूपये भी उधार दिए क्योंकि मेरे पास यहाँ कैश नहीं था। जम्मू में कुमार मेरा पहले से ही इंतज़ार कर रहा था, साहिल मुझे एक चौक पर उतार कर अपनी ऑफिस चला गया और मैं कुमार को खोजते हुए उसके पास पहुंचा। वह यहाँ फलों की एक टोकरी तैयार करवाने आया था, आज हम अन्नू की सगाई लेकर उसके ससुराल जाने वाले हैं। 


साहिल का घर 

उसके पिता जी की कार 






साहिल के दादाजी 



साहिल और उसकी बाइक 


यह बाइक मथुरा नंबर की है 

सुबह सबेरे साहिल 




साहिल की छत से माता वैष्णो देवी के त्रिकूट पर्वत का एक दृश्य 









मैं और साहिल 

साहिल के घर आम का वृक्ष 








 

अगली यात्रा : - अखनूर किले की तरफ 

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