Saturday, September 19, 2026

JAMMU 2023 : AKHNOOR FORT & CHINAB RIVER


 अख़नूर का किला, चिनाब नदी और पांडव गुफा 


21 अक्टूबर 2023

     भारत के जम्मू कश्मीर राज्य में जम्मू शहर से 28 किमी दूर, चिनाब नदी के दाहिने तट पर स्थित अखनूर का किला, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यह किला एक प्राचीन स्थल पर स्थित है जिसे स्थानीय रूप से मांडा के नाम से जाना जाता है जो कि सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे उत्तरी छोर कहलाता है। यहाँ हुई खुदाई में तीन काल की संस्कृतियों के साक्ष्य मिले हैं—हड़प्पा कालीन बर्तन, आरंभिक ऐतिहासिक वस्तुएं और कुषाण काल के अवशेष।

यह कभी हड़प्पा कालीन नगर था जो कि आस्किन नदी के किनारे स्थित था। आस्किन नदी को वर्तमान में चिनाब नदी कहते है एवं इसका एक नाम चंद्रभागा भी है। किले के अंदर हुए उत्खनन से प्राप्त अवशेषों से ही इसके प्राचीन तीन संस्कृतियों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। 

मध्यकाल में इस किले का निर्माण 1762 ईसवीं में महाराजा तेज सिंह ने करवाया था, और उनके पश्चात उनके उत्तराधिकारी, राजा आलम सिंह ने 1802 ईस्वी में इसे पूर्ण करवाया। 17 जून 1822 को इसी किले के पास चिनाब नदी के जिया पोता घाट पर महाराजा रणजीत सिंह ने महाराजा गुलाब सिंह का राज्याभिषेक भी किया था।

'अखनूर' नाम के बारे में कहा जाता है कि मुगल सम्राट जहाँगीर की आँखों में संक्रमण हो गया था। यहाँ की ठंडी हवा और वातावरण से उनकी आँखों की रोशनी में सुधार हुआ, जिसके बाद इसे 'आँख-का-नूर' कहा गया जो बाद में अखनूर बन गया।

ऐसा भी माना जाता है कि अखनूर महाभारत काल की प्रसिद्ध विराट नगरी है। यहाँ पास में ही एक प्राचीन गुफा स्थित है जिसे पांडव गुफा के नाम से जाना जाता है, गुफा के अंदर पाँचो पांडवों सहित राजा विराट और महर्षि वेदव्यास जी की प्रतिमा दर्शनीय है। 

    सुबह सबेरे मैं, साहिल के साथ उसके गाँव से अखनूर की तरफ रवाना हुए। अखनूर किले के बारे में मैंने बहुत पहले से सुन रखा था और इसे देखने की मेरी प्रबल इच्छा थी किन्तु जम्मू कश्मीर के एक संवेदनशील जैसे स्थान पर इसके होने के कारण मैंने यहाँ आने के बारे में कभी नहीं सोचा,  परन्तु वो कहते हैं ना कि जब आपका निश्चय दृढ हो और आप किसी वस्तु को पाने अथवा किसी स्थान पर जाना चाहते हों तो ईश्वर भी आपकी पूरी सहायता करते हैं। मैं अपने मित्र कुमार के साथ सिर्फ जम्मू तक आया था और यहाँ मुझे साहिल मिला जिसके साथ एक रात में अखनूर के नजदीक उसके गाँव में भी रुका और दूसरे दिन साहिल के साथ अखनूर का किला भी देखने के लिए आया। 

अगली सुबह मैं साहिल के साथ उसके गाँव से अखनूर किला देखने के लिए निकल पड़ा और जल्दी ही हम अख़नूर पहुँचकर, किले के परिसर में पहुंचे, समय के हिसाब से यह अब काफी खंडित अवस्था में दिखाई देता है। किले का कोई भाग ऐसा नहीं था जो पूर्ण रूप से सुरक्षित हो, किसी समय जहाँ महल हुआ करते थे वहां वर्तमान में सिर्फ उनके ध्वंशावशेष देखने को मिलते हैं, महलों की नींव और इसकी मोटी मोटी दीवारें इसकी प्राचीन भव्यता को दर्शाती हैं। 

इस किले के अंदर राजा आलम सिंह का महल ही देखने योग्य बचा है जो बहुत ही शानदार रूप से निर्मित हैं, इसकी वास्तु कला अनोखी है। महल के पीछे के भाग की तरफ चिनाब नदी बहती है और उत्तर पूर्व की तरफ हिमालय की शिवालिक और त्रिकुट पर्वत की पहाड़ियां हैं जहाँ श्री माता वैष्णों देवी का धाम स्पष्ट रूप से नजर आता है। किले के प्रांगण में से हो त्रिकूट पर्वत के दर्शन होते हैं। 

किले के अंदर हुए उत्खनन और खुदाई के अवशेष भी देखने को मिलते हैं जहाँ से इस किले की प्राचीनता के प्रमाण मिले हैं। यह किला सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे उत्तरी छोर पर स्थित हड़प्पा कालीन नगर मांडा के खंडहरों पर निर्मित है। यहीं पुरातत्वविदों को इसके हड़प्पा सभ्यता के साथ साथ इसके कुषाणकालीन होने के भी प्रमाण मिले हैं जिसका अर्थ है यह किला कुषाणों के समय में एक विकसित नगर रहा होगा और सम्राट कनिष्क और उनके वंशजों का इसपर अधिपत्य रहा होगा और यह सत्य भी हो सकता है क्योंकि भारतीय इतिहास में कश्मीर, सम्राट कनिष्क के राज्य का मुख्य भाग था और यहीं कश्मीर में ही उन्होंने तीसरी बौद्ध संगीति का आयोजन भी किया था। 

सोलहवीं शताब्दी में मुग़ल काल के दौरान बादशाह जहांगीर ने इस स्थल का दौरा किया था। ऐसा माना जाता है कि बादशाह जहांगीर की आँख में संक्रमण हो गया था जो यहाँ आने के बाद यहाँ की शुद्ध वायु और स्वछन्द वातावरण के कारण ठीक हो गया था। इस कारण बादशाह ने इस स्थान को अखनूर कहकर पुकारा था जिसका अर्थ होता है आँखों का नूर। तभी से इस स्थान का नाम अखनूर प्रचलित हो गया। 

अखनूर का किला और यह स्थान, पाकिस्तान की सीमा के नजदीक स्थित हैं इसकारण यह क्षेत्र को अति संवेदनशील माना जाता है और यहाँ जगह जगह पर भारतीय सेना की उपस्थिति यहाँ के नागरिकों और पर्यटकों को सुरक्षित होने का एहसास कराती है। 

अब हम  किले के नजदीक स्थित, ऐतिहासिक स्थान जिआ पोता घाट पर पहुंचे, जहाँ मैंने प्रथम बार चिनाब नदी के दर्शन किये और जल आचमन लेकर इस नदी को प्रणाम किया। 

जिआ पोता घाट एक ऐतिहासिक घाट है जहाँ 17 जून 1822 को पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने अखनूर के जिया पोटा घाट पर महाराजा गुलाब सिंह का राज्याभिषेक करके उन्हें जम्मू का राजा घोषित किया था।

सुबह सुबह चिनाब नदी में सूर्य की किरणें अलग ही रूप से चमक रहीं थीं। मैं थोड़ी देर इस घाट पर बैठकर दूर पहाड़ों से बहकर आती इस चिनाब नदी को देखता रहा और सोचता रहा कि आगे चलकर हमारी यही नदी पाकिस्तान चली जाती है। 

नदी के किनारे किनारे चलते हुए हम पांडव गुफा पहुंचे, जो अखनूर किले की तलहटी में स्थित एक प्राचीन गुफा है। यहाँ महाभारतकालीन प्रतिमाओं के दर्शन होते हैं, माना जाता है कि अखनूर, प्राचीन समय की विराट नगरी है और पाँचो ने द्रौपदी सहित एक वर्ष का अज्ञातवास यहीं काटा था।

 यूँ तो राजस्थान के अलवर जिले के नजदीक भी एक विराट नगर है जिसके बारे में सबसे ज्यादा प्रचलित है कि यही प्राचीन विराट नगरी है। इसके अलावा एक विराट नगर नेपाल में भी है। खैर जो भी हो, जहाँ भी हो, हमारे लिए हमारा भारत देश ही समुचा तीर्थ स्थान है। 


अख़नूर किले का उत्तरी प्रवेश द्वार 
अखनूर किले का विवरण देता पुरात्तव विभाग का ये बोर्ड 

किले के अंदर आने के बाद, उत्तरी द्वार के पीछे का भाग 

अखनूर किले का अंदर का दृश्य 





अखनूर किले की दीवारें 


राजा आलम सिंह का महल 




किले के पार्श्व में बहती चिनाब नदी 

राजा आलम सिंह के महल का पीछे का दृश्य 






आगे साहिल और पीछे मैं 

किले के अंदर सिंधु घाटी सभ्यता के प्राचीन स्थलों की एक झलक देखता मैं 

अखनूर किले के खंडहर और बराबर से बहती चिनाब, एवं सबसे पीछे दिखाई देता त्रिकूट पर्वत 

दूर दिखाई देते त्रिकूट पर्वत पर ही है, श्री माता वैष्णों देवी का धाम 

किले में उत्खनन का एक स्थान 



किले की मजबूत दीवारें 



किले के इसी स्थान पर उत्खनन हुआ था 


अखनूर किले से चिनाब नदी का एक दृश्य 

किला परिसर में एक वाशरूम और उत्खनन स्थल 



किले का बाहरी दृश्य 

किले में एक पुलिस स्टेशन और किले मुख्य प्रवेश द्वार 

पांडव गुफाओं की ओर 



चिनाब नदी और पांडव गुफा की और जाता रास्ता 

आस्किन अथवा चंद्रभागा या चिनाब नदी 


पांडव गुफा का प्रवेश द्वार 

गुफा के अंदर साहिल 

पांडव गुफा 

पांडव गुफा 

गुफा में शंकराचार्य जी की प्रतिमा 


पांडव गुफा में 

गुफा में पांडवों की प्रतिमाएं 


पांडव गुफा 

साहिल खजुरीआ 

प्रातःकालीन चिनाब दर्शन 



पांडव गुफा का रास्ता 



अखनूर किला, पांडव गुफा और सीधे पाकिस्तान की ओर जाती चिनाब नदी 


अखनूर किले का पूर्वी गेट 














नदी किनारे कश्मीरी पंडितों की स्मृति में लगा एक स्मृति पटल 



जिया पोता घाट - एक ऐतिहासिक घाट 


जिया पोता घाट - जहाँ कभी महाराजा गुलाब सिंह का राज्यभिषेक हुआ था 


जिया पोता घाट 



चिनाब नदी और जिया पोता घाट का एक दृश्य 



जिया पोता घाट पर स्थित एक मंदिर 





अखनूर बस स्टैंड 

अखनूर बस स्टैंड 


अखनूर बस स्टैंड 


अखनूर बस स्टैंड 

🙏


अगली यात्रा :- अम्बारां - जम्मू कश्मीर का एक प्राचीन बौद्ध स्थल 



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