पागलबाबा मंदिर
मेरी माँ बचपन से ही हर अमावस्या को श्री ठाकुर जी के दर्शन करने आगरा से वृन्दावन जाती थीं, मथुरा से वृन्दावन जाते समय एक बहुमंजिला मंदिर पड़ता था जिसे देखकर मैं माँ से पूछता था कि माँ यह मंदिर किसका है, माँ जवाब दे देती थी पागल बाबा का। भच्पन बहुत ही चंचल होता है जानने की बड़ी इच्छा होती थी कि इन्हे पागलबाबा क्यों कहते हैं। धीरे धीरे समय गुजर गया और मैं बड़ा हो गया, आज जब ठाकुरजी की कृपा से अपना आशियाना और नौकरी ब्रज में ही है तो क्विड लेकर मांट से सीधे कालिंदी के किनारे पहुँचा एक पीपों से बने हुए पल को पारकर मैं वृन्दावन पहुँचा और मथुरा रोड पर स्थित पागलबाबा के दर्शन किये। और वहां जाकर जाना कि पागलबाबा कौन थे।
वृंदावन के प्रसिद्ध पागल बाबा का असली नाम संत श्री शीला नंद जी महाराज था। उन्हें श्री लीलानंद ठाकुर के नाम से भी जाना जाता है। वे मूल रूप से एक जज थे, जो बाद में कृष्ण भक्ति में लीन होकर संत बन गए और उन्होंने वृंदावन में 11 मंजिला प्रसिद्ध पागल बाबा मंदिर का निर्माण करवाया।
वृंदावन का पागल बाबा मंदिर (1969-1981 में निर्मित) संत शीला नंद जी महाराज (पागल बाबा) की कृष्ण भक्ति को समर्पित है। वे अपनी दीवानगी की हद तक भक्ति के कारण 'पागल' कहलाए। यह 9-मंजिला भव्य मंदिर, जो आधुनिक वास्तुकला का नमूना है,
इनका असली नाम संत श्री शीला नंद जी महाराज था। वे वृंदावन में अपनी मस्ती और कृष्ण प्रेम में खोए रहते थे, जिसके कारण स्थानीय लोग उन्हें प्यार से 'पागल बाबा' कहते थे।
कहा जाता है कि वे अपनी भक्ति के प्रति इतने समर्पित थे कि उन्होंने अपना जीवन कृष्ण प्रेम में ही बिता दिया। उन्होंने इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया और यहीं बाबा ने अपना शरीर छोड़ा था। मंदिर परिसर में उनकी समाधि भी बनी हुई है।
यह मंदिर मथुरा-वृंदावन मार्ग पर स्थित है, जो 221 फीट ऊँचा और 9 मंजिला है।मंदिर में राधा-कृष्ण की भव्य प्रतिमाएं हैं और यहाँ के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
यह मंदिर न केवल एक पूजा स्थल है, बल्कि यह एक समर्पित भक्त की अनूठी कहानी का गवाह भी है।
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| कालिंदी नदी |
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| कालिंदी के तीरे, वृन्दावन |
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| पागलबाबा मंदिर , वृन्दावन |
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| श्री पागलबाबा |









वाह, शानदार मन्दिर दिखाया, नाम भी गजब।
ReplyDeleteहमने भी ये मन्दिर देखा है , हमे तो बहुत ही सुन्दर लगा , यादे ताजा करने के लिए धन्यवाद ।
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