Sunday, January 28, 2024

MY MOTHER LOST HER LIFE IN 2024

मेरी माँ का गौलोक प्रस्थान और उनकी अंतिम यात्रा - वर्ष 2024 




28 JAN 2024 

आज की सुबह मेरे जीवन की दूसरी सबसे बुरी सुबह थीं क्योंकि आज मेरी माँ अपनी जीवन यात्रा पूरी करके गोलोक धाम को प्रस्थान कर गईं। उनके यूँ अचानक मुझे अकेला छोड़कर चले जाने का मुझे बहुत भारी दुःख हुआ। मेरा मन स्वीकार ही नहीं करपा रहा था कि मेरी माँ, जो मेरे लिए मेरी दुनिया थीं, मेरा सबकुछ थीं, वो एक दिन मुझे अकेला सोता हुआ छोड़कर, स्वयं चिरनिद्रा में चली गई थीं। अभी तो मुझे उनके साथ बहुत समय बिताना था, अभी और भी दुनिया देखनी थी परन्तु यूँ असमय उनका चले जाना मेरे मन और हृदय बहुत ही व्यथित कर रहा था। 

माँ के जाने की खबर सुनकर मेरे सभी रिश्तेदार और मेरी दोनों बहिने मेरे पास थीं। मेरे चाचाजी मुझे धीरज बंधाने के लिए हर समय मेरे पास थे। मेरा चचेरा भाई नीटू भी अपने परिवार सहित मेरे पास रुका था। मेरे दोनों मामाजी, मामी जी, मेरी दोनों मौसी, मेरी बुआ सभी मेरे पास थे, और मेरी पत्नी कल्पना जिसकी वजह से मेरे अंदर थोड़ी हिम्मत बची थी क्योंकि आज मैं अनाथ था, पिता को पहले ही खो चुका था आज माँ को भी खो बैठा था। 

जिसने मुझे अपनी गोदी में उठाया था आज उसे मैं अपने कंधे पर उठाकर ले जा रहा था, अपने आप से हमेशा के लिए दूर करने। श्मशान भूमि की तरफ जाने वाली यह यात्रा, माँ के साथ मेरे लिए अब तक की सबसे असहनीय यात्रा थी। पावनपुरी मथुरा नगरी में यमुना नदी के किनारे ध्रुवघाट पर मैंने अपनी माँ को अग्निदान देकर उनकी जीवन यात्रा को पूर्ण किया। इसी ब्रजधरा पर माँ जन्म लेकर इसी ब्रजभूमि पर पंचतत्वों में विलीन हो गईं। चिता की आग ठंडी होने तक मैं ध्रुवघाट पर ही रहा और अपनी माँ को ही याद करता रहा। 

सभी रिश्तेदार धीरे धीरे वापस अपने अपने घर लौटने लगे थे, किन्तु मेरा मन बिलकुल भी यहाँ से जाने का नहीं था, यह वही स्थान है जहाँ कभी मैं अपने पिता को ही लेकर आया था और उन्हें अग्निदान देकर अकेला घर लौटा था, किन्तु आज अपनी माँ के बगैर मैं यहाँ से बिल्कुल भी नहीं जाना चाहता था। मेरे रिश्ते के भाई मेरे साथ थे, उन्होंने मुझे बहुत समझाया और कल पुनः यहाँ आने का आश्वासन देकर मुझे घर लेकर लौटे। आज की यह पहली रात थी जब मेरी माँ इस संसार में कहीं नहीं थी और मैं आज बिना अपने माता पिता के इस भारी सर्दभरी रात का सामना कर रहा था। 

अगले दिन मैं अपने एक बड़े भाई धर्मेंद्र और छोटे भाई जीतेन्द्र व दीपक के साथ ध्रुवघाट पहुंचा। यहाँ मैं अपनी माँ के अस्थि स्वरूप फूलों को लेने के लिए आया था। माँ तो पंचतत्वों में विलीन  हो चुकी थीं, अब उनकी राख ही यहाँ शेष बची थी। माँ कहाँ चली गई होगी बस यही प्रश्न मेरे मष्तिष्क में अब घर कर चुका था। माँ के अस्थि पुष्पों को लेकर मैं घर पहुंचा और अपने घर के बाहर लगे नीम के पेड़ पर उनको स्थान दिया। अगले दिन मुझे उन्हें गंगा जी में प्रवाहित करने के लिए पंडित जी ने मुझे कहा। 

मेरे मामा और चाचा जी ने मुझे गंगा जी जाने के लिए गंगा तट का स्थान पूछा। मैं अपनी माँ के अस्थिपुष्पों को हरिद्वार में गंगाजी में प्रवाहित करना चाहता था और यही मेरी माँ की भी इच्छा थी जो उन्होंने अपने जीवित रहते एक बार हरिद्वार यात्रा के दौरान कही थी। इसके अलावा मैंने अपने पिताजी के अस्थिपुष्पों को हरिद्वार में ही विसर्जित किया था। इसलिए मैंने मामा जी और चाचाजी से हरिद्वार जाने की आज्ञा ली। 

2015 में जब मैं अपने पिताजी के अस्थिपुष्पों को लेकर हरिद्वार आया था तब मेरे ममेरे बड़े भाई धर्मेंद्र भारद्वाज मेरे साथ थे किन्तु इसबार मेरा चचेरा बड़ा भाई और बचपन का मित्र नीटू अर्थात यतेश उपाध्याय मेरे साथ हरिद्वार जाने के लिए तैयार था। मेरा हृदय भी यही चाहता था क्योंकि नीटू मेरा मित्र होने के साथ साथ मेरा बड़ा भाई भी है और उसने मुझे हमेशा सही सुझाव देकर मेरी राह आसान बनाने में मेरी सहायता की है। मैंने नीटू के साथ हरिद्वार जाने के लिए ट्रेन में रिजर्वेशन करा लिया और रात को हम हरिद्वार के लिए घर से प्रस्थान कर गए। 

इस वर्ष सर्दी बहुत अधिक थी और घना कोहरा पूरे उत्तर भारत में व्याप्त था। देहरादून एक्सप्रेस का मथुरा स्टेशन पर आने का अब समय भी हो चला था। हम समय से ही स्टेशन पहुँच गए किन्तु ट्रेन एक से डेढ़ घंटे आउटर पर खड़ी रही और हम प्लेटफॉर्म पर ठण्ड से सिकुड़ते रहे। कुछ समय बाद ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची और हम हरिद्वार की ओर प्रस्थान कर गए। 
















































Sunday, December 31, 2023

AGRA TRIP : AGRA 2023

 वर्ष 2023 में आगरा शहर में मेरी यात्रायें 




26 जनवरी 2023 

आज गणतंत्र दिवस था, ऑफिस का आज के दिन अवकाश था इसलिए शाम को मथुरा से आगरा के लिए मैंने गोंडवाना एक्सप्रेस से जनरल कोच में यात्रा की जो कि पूरा खाली था। गोंडवाना एक्सप्रेस एक सुपरफास्ट ट्रेन है जो हजरत निजामुद्दीन से भुसावल के बीच अपनी यात्रा पूरी करती है। आगरा कैंट स्टेशन से पूर्व ही ट्रेन आउटर पर रुक गई और मैं यहीं उतर गया और पैदल पैदल ही ईदगाह बस स्टैंड तक पहुंचा। 

कुछ समय बाद मेरा मित्र कुमार भाटिया भी अपनी ऑफिस से छुट्टी पाकर मुझे लेने आ गया और फिर हम दोनों शाम को बालूगंज में मेहर सिनेमा पर पहुंचे। यहाँ  आज हमने शाहरुख़ खान की पठान मूवीज देखी।  उसके बाद कुमार ने मुझे वापस कैंट स्टेशन छोड़ दिया और मैं पुडुचेरी सुपरफास्ट पकड़कर रात वापस घर आ गया। इस तरह इस साल की शुरुआत में यह मेरी और कुमार की पहली मुलाकात थी। 





25 मार्च 2023 

चैत्र का महीना है, नवरात्री का त्यौहार है। शाम को काली माँ के मंदिर में दर्शन किये और पप्पू के साथ भंडारा खाया। 



21 अप्रैल 2023 

आज श्री टॉकीज में सलमान खान की किसी का भाई किसी की जान मूवीज देखी। 





15 जुलाई 2023 






4 अगस्त 2023 

आज कंपनी की गाडी लेकर आगरा जाने का अवसर मिला। अभी यमुना नदी पर एक नए पुल का निर्माण हुआ है, आज इसी सेतु को देखने में यहाँ पहुंचा और यहाँ से इस नए सेतु पर खड़े होकर मैंने यमुना नदी के दर्शन किये। 

आगरा में यमुना नदी 

नया यमुना सेतु 

मेरी कम्पनी की गाडी 



मैं और यमुना जी 



7 अगस्त 2023 

आज संजय टॉकीज में रॉकी और रानी की प्रेम कहानी मूवीज देखी। मूवीज में रनवीर सिंह और आलिया भट्ट के अलावा धर्मेंद्र, जया बच्चन और शबाना आजमी ने भी अच्छा अभिनय किया है। 

संजय टॉकीज, आगरा 

8 अगस्त 2023 

आज मैं जब ऑफिस में था तो मेरे पास मेरे चाचाजी का कॉल आया और उन्होंने बताया कि आज मेरे छोटे भाई गौरव की पत्नी दीक्षा ने दो बेटियों को जन्म दिया है किन्तु अस्वस्थ होने के कारण उन दोनों को बचाया नहीं जा सका। यह बहुत ही दुखद हुआ। या दोनों बच्चियां ऑपरेशन से हुई थीं जिस कारण गौरव की पत्नी अभी भी आगरा में अस्पताल में भर्ती है और अभी उसे होश नहीं आया। 

मैं तुरंत ऑफिस से छुट्टी लेकर अपनी बाइक से आगरा पहुंचा और न्यू आगरा के नजदीक एक हॉस्पिटल में दीक्षा भर्ती थी। यहाँ मेरी मुलाकात मेरे दोनों भाइयों गौरव और नीटू से हुई। कुछ देर बाद यहाँ रूककर मैं वापस लौट गया। 

नीटू और गौरव, आगरा में 



11 अगस्त 2023 

आगरा के छीपीटोला में एक बहुत ही पुरानी पानी की टंकी है, जिस पर लिखी दिनांक के अनुसार यह भारतीय  ब्रिटिश काल के दौरान निर्मित कराइ गई  जिससे अधिकांश शहर में जलापूर्ति की जाती थी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह आज भी कार्यरत है और आज भी अधिकांश शहर की जलापूर्ति इसी पानी की टंकी पर निर्भर है। 

स्थानीय ऐतिहासिक दस्तावेजों और रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पानी की टंकी करीब 131 साल से अधिक पुरानी है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल के दौरान हुआ था। आज यह टंकी सिर्फ पानी सप्लाई का साधन नहीं, बल्कि छीपीटोला और रकाबगंज इलाके की एक पुरानी पहचान और ऐतिहासिक लैंडमार्क बन चुकी है, जिसे देखने और जानने के लिए स्थानीय लोग आज भी उत्सुक रहते हैं। 

 

ब्रिटिशकालीन पानी की टंकी, छीपीटोला, आगरा 


12 अगस्त 2023 

आगरा से मैं जब कभी भी बाइक से मथुरा की तरफ प्रस्थान करता हूँ तो अधिकांशतः मैं पुराने मथुरा मार्ग का प्रयोग करता हूँ।  यह पुराना मथुरा मार्ग मुझे इसलिए पसंद हैं क्योंकि यह ऐतिहासिक राजमार्ग है, मुगलकाल के दौरान आगरा से दिल्ली जाने के लिए मुग़ल बादशाह और उनकी सेना इसी मार्ग का प्रयोग करते थे। 

यह मार्ग वर्तमान में राजा की मंडी रेलवे स्टेशन के निकट से गुजरते हुए गुरु के ताल के पास आकर मुख्य वर्तमान राजमार्ग से जुड़ जाता है। इस मार्ग पर अनेकों ऐतिहासिक धरोहरें हमें दिखलाई पड़ती हैं जिनमें सबसे पहले दिल्ली दरवाजा दिखाई देता है जो राजा की मंडी स्टेशन के बिलकुल नजदीक है। मुग़ल काल में दिल्ली दरवाजा, आगरा शहर का उत्तरी दरवाजा था जो दिल्ली जाने वाले मार्ग पर स्थित था। 

इस दरवाजे से निकलने के बाद आगरा शहर की सीमा समाप्त हो जाती थी और फिर दूरी का आकलन करने के उद्देश्य से बनवाई गईं कोस मीनारों का सिलसिला शुरू हो जाता था। प्रत्येक 3 से 4 किमी पर एक कोस मीनार बनाई गई थी जो वर्तमान में भी दिखाई देती है। 

मार्ग का अगला पड़ाव सिकंदरा नामक स्थान था जहाँ मुगलकाल से पूर्व सुल्तान सिकंदर लोदी ने यहाँ आगरा शहर की स्थापना की थी और इसे प्राचीन आगरा शहर नाम दिया था। वर्तमान में यह सिकंदरा ही कहलाता है और इसी स्थान पर मुगलकाल के सबसे मुख्य शासक बादशाह अकबर का मकबरा भी है। अकबर के मकबरे से थोड़ा सा आगे एक मुगलकालीन मस्जिद मुख्य मार्ग पर राहगीरों के इबादत हेतु बनाई गई थी। 

मस्जिद से थोड़ा आगे चलने पर मरियम का मकबरा है जो कि बादशाह अकबर की रानी का मकबरा कहलाता है। 

  

दिल्ली गेट 

दिल्ली दरवाजा 

कोस मीनार 

पत्थर घोडा और काफूर की मस्जिद 

शहंशाह अकबर का मकबरा 

एक मस्जिद 
मैं और कुमार 

29 अगस्त 2023 

आज चित्रा सिनेमा में OMG 2 मूवीज देखी। 


चित्रा सिनेमा में एक मूवीज 





9 सितम्बर 2023 


आज मैं और कल्पना किसी आवश्यक कार्य से आगरा गए। वहां हमने राजा की मंडी बाजार में स्थित भारत स्टार वर्ल्ड सिनेमा में शाहरुख़ खान की जवान मूवीज देखी जो कि एक शानदार मूवीज थी। मूवीज देखने के बाद हम आगरा कैंट स्टेशन पहुंचे जहाँ हमारी मुलाक़ात मेरे मित्र कुमार भाटिया से हुई। देर शाम चम्बल एक्सप्रेस से हम मथुरा की ओर रवाना हो गए। इस चम्बल एक्सप्रेस के आज के ट्रैन मैनेजर हमारे ललित मामा जी थे जो मथुरा में ही रहते हैं। 






मैं और कल्पना 





चम्बल एक्सप्रेस में कल्पना 

19 सितम्बर 2023 

राजीव सिनेमा में एक मूवीज 


12 अक्टूबर 2023 

आज आगरा में भगवान टॉकीज के निकट लाल ताजमहल देखने का अवसर मिला। यह रोमन कैथोलिक कब्रस्तान है जो ब्रिटिश कालीन है। यहाँ अनेकों कब्रें हैं जिनमें सबसे मुख्य मकबरा जॉन विलियम हेंशिंग का है जिसकी वास्तुकला बहुत ही शानदार है। इस यात्रा का मैंने एक अलग ब्लॉग तैयार किया है - आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके इस यात्रा का विस्तृत वर्णन प्राप्त कर हैं।  रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान


जॉन विलियम हेसिंग का मकबरा 







रोमन कैथोलिक कब्रस्थान का दरवाजा 


इसी के साथ ही आज श्री सिनेमा में मिशन रानीगंज मूवीज देखी जो कि अक्षय कुमार द्वारा अभिनीत एक शानदार मूवीज थी। 





16 अक्टूबर 2023 

कुमार की छोटी बहिन अनु की शादी तय हो गई है। आज उसने रिश्ता पक्का होने के अवसर पर अपने यहाँ माता रानी का जागरण रखा और शाम को अपने चुनिंदा लोगों के लिए शाम की दावत देने का आयोजन भी किया। मैं भी अपनी बाइक से इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचा। 



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17 दिसंबर 2023 








22 दिसंबर 2023 

साल का अंतिम सप्ताह चल रहा है। सर्दियाँ जोरो पर हैं, आज मैंने आगरा के मेहर सिनेमा में शाहरुख़ खान की तीसरी मूवीज दुनकी देखी। मूवीज देखने के बाद मैं और कुमार कैंट स्टेशन के नजदीक नए बने रेल कोच रेस्टोरेंट पहुंचे। यहाँ बहुत महंगे रेट में सस्ता भोजन मिल रहा था हमने यहाँ से कुछ नहीं लिया।  






समाप्त