वर्ष 2023 में आगरा शहर में मेरी यात्रायें
25 मार्च 2023
चैत्र का महीना है, नवरात्री का त्यौहार है। शाम को काली माँ के मंदिर में दर्शन किये और पप्पू के साथ भंडारा खाया।
21 अप्रैल 2023
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| आगरा में यमुना नदी |
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| नया यमुना सेतु |
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| मेरी कम्पनी की गाडी |
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| मैं और यमुना जी |
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| संजय टॉकीज, आगरा |
8 अगस्त 2023
आज मैं जब ऑफिस में था तो मेरे पास मेरे चाचाजी का कॉल आया और उन्होंने बताया कि आज मेरे छोटे भाई गौरव की पत्नी दीक्षा ने दो बेटियों को जन्म दिया है किन्तु अस्वस्थ होने के कारण उन दोनों को बचाया नहीं जा सका। यह बहुत ही दुखद हुआ। या दोनों बच्चियां ऑपरेशन से हुई थीं जिस कारण गौरव की पत्नी अभी भी आगरा में अस्पताल में भर्ती है और अभी उसे होश नहीं आया।
मैं तुरंत ऑफिस से छुट्टी लेकर अपनी बाइक से आगरा पहुंचा और न्यू आगरा के नजदीक एक हॉस्पिटल में दीक्षा भर्ती थी। यहाँ मेरी मुलाकात मेरे दोनों भाइयों गौरव और नीटू से हुई। कुछ देर बाद यहाँ रूककर मैं वापस लौट गया।
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| नीटू और गौरव, आगरा में |
11 अगस्त 2023
आगरा के छीपीटोला में एक बहुत ही पुरानी पानी की टंकी है, जिस पर लिखी दिनांक के अनुसार यह भारतीय ब्रिटिश काल के दौरान निर्मित कराइ गई जिससे अधिकांश शहर में जलापूर्ति की जाती थी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह आज भी कार्यरत है और आज भी अधिकांश शहर की जलापूर्ति इसी पानी की टंकी पर निर्भर है।
स्थानीय ऐतिहासिक दस्तावेजों और रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पानी की टंकी करीब 131 साल से अधिक पुरानी है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल के दौरान हुआ था। आज यह टंकी सिर्फ पानी सप्लाई का साधन नहीं, बल्कि छीपीटोला और रकाबगंज इलाके की एक पुरानी पहचान और ऐतिहासिक लैंडमार्क बन चुकी है, जिसे देखने और जानने के लिए स्थानीय लोग आज भी उत्सुक रहते हैं।
ब्रिटिशकालीन पानी की टंकी, छीपीटोला, आगरा 12 अगस्त 2023
आगरा से मैं जब कभी भी बाइक से मथुरा की तरफ प्रस्थान करता हूँ तो अधिकांशतः मैं पुराने मथुरा मार्ग का प्रयोग करता हूँ। यह पुराना मथुरा मार्ग मुझे इसलिए पसंद हैं क्योंकि यह ऐतिहासिक राजमार्ग है, मुगलकाल के दौरान आगरा से दिल्ली जाने के लिए मुग़ल बादशाह और उनकी सेना इसी मार्ग का प्रयोग करते थे।
यह मार्ग वर्तमान में राजा की मंडी रेलवे स्टेशन के निकट से गुजरते हुए गुरु के ताल के पास आकर मुख्य वर्तमान राजमार्ग से जुड़ जाता है। इस मार्ग पर अनेकों ऐतिहासिक धरोहरें हमें दिखलाई पड़ती हैं जिनमें सबसे पहले दिल्ली दरवाजा दिखाई देता है जो राजा की मंडी स्टेशन के बिलकुल नजदीक है। मुग़ल काल में दिल्ली दरवाजा, आगरा शहर का उत्तरी दरवाजा था जो दिल्ली जाने वाले मार्ग पर स्थित था।
इस दरवाजे से निकलने के बाद आगरा शहर की सीमा समाप्त हो जाती थी और फिर दूरी का आकलन करने के उद्देश्य से बनवाई गईं कोस मीनारों का सिलसिला शुरू हो जाता था। प्रत्येक 3 से 4 किमी पर एक कोस मीनार बनाई गई थी जो वर्तमान में भी दिखाई देती है।
मार्ग का अगला पड़ाव सिकंदरा नामक स्थान था जहाँ मुगलकाल से पूर्व सुल्तान सिकंदर लोदी ने यहाँ आगरा शहर की स्थापना की थी और इसे प्राचीन आगरा शहर नाम दिया था। वर्तमान में यह सिकंदरा ही कहलाता है और इसी स्थान पर मुगलकाल के सबसे मुख्य शासक बादशाह अकबर का मकबरा भी है। अकबर के मकबरे से थोड़ा सा आगे एक मुगलकालीन मस्जिद मुख्य मार्ग पर राहगीरों के इबादत हेतु बनाई गई थी।
मस्जिद से थोड़ा आगे चलने पर मरियम का मकबरा है जो कि बादशाह अकबर की रानी का मकबरा कहलाता है।
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| दिल्ली गेट |
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| दिल्ली दरवाजा |
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| कोस मीनार |
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| पत्थर घोडा और काफूर की मस्जिद |
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| शहंशाह अकबर का मकबरा |
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| एक मस्जिद |
मैं और कुमार
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| चित्रा सिनेमा में एक मूवीज |
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| मैं और कल्पना |
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| चम्बल एक्सप्रेस में कल्पना |
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| राजीव सिनेमा में एक मूवीज |
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| जॉन विलियम हेसिंग का मकबरा |
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| रोमन कैथोलिक कब्रस्थान का दरवाजा |
समाप्त


































































