मेवाड़ की ऐतिहासिक यात्रा पर - वर्ष 2024
भाग 2 - राजसमन्द किला और रूठी रानी का महल
कांकरोली स्टेशन से अभिषेक के साथ मैं, राजसमंद स्थित अपने छोटे भाई जीतू के घर पहुंचा। जीतू और उसकी पत्नी सुगंधा मुझे देखकर अति प्रसन्न हुए। उन्होंने बड़े प्यार और आदर के साथ मेरी आवभगत की। मैं काफी लम्बे समय बाद राजसमंद आया था इसलिए यहाँ अधिकतर जगहें मुझे बदली भी लगीं और अधिकांश जगहें पहले की तरह भी दिखी। जीतू मार्बल माइंस में काम करता है, उसके अपने कार्यक्षेत्र पर जाने का समय होने वाला था इसलिए वो अपनी ड्यूटी जाने की तैयारी में लग गया और मैं उसके पुत्र अभिषेक के साथ राजसमंद का किला देखने निकल गया।
एक ऊँची पहाड़ी पर हम राजसमंद के किले के नजदीक पहुंचे। अब यहाँ तक आने के लिए पक्की सड़क बन गई है जिससे यहाँ अपने निजी वाहन द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। लगभग दस और पंद्रह साल पहले जब मैं यहाँ आया था तो किले तक पैदल ही चढ़कर आया था, उस समय यहाँ तक आने का पैदल ही एक मात्र मार्ग था। अभिषेक की एक्टिवा स्कूटर द्वारा हम किले की रूठी रानी नामक महल पर पहुंचे।
पिछली बार जब मैं राजसमद के किले पर आया था तब यह रूठी रानी का महल खंडहर के रूप दिखाई देता था। इस महल तक आने का कोई मार्ग उस समय नहीं था क्योंकि यह किले से कुछ दूर दूसरी पहाड़ी पर था और इस तक पहुँचने वाले मार्ग को पर्वतीय जंगल की कँटीली झाड़ियों ने घेर रखा था। किन्तु इस बार इसका दृश्य पूर्ण रूप से मुझे बदला हुआ प्रतीत हुआ।
वर्षों पहले रूठी रानी नामक इस महल को जब मैंने देखा था तब यह खंडहर में तब्दील हो चुका था। यहाँ तक पहुँचने का कोई सुगम मार्ग भी उपलब्ध नहीं था किन्तु अब यहाँ बहुत परिवर्तन हो चुका है। अब सीधे सड़कमार्ग द्वारा रूठी रानी के महल तक आसानी से आया जा सकता है। पुरातत्व विभाग और राजसमंद जिला प्रशासन ने इस महल का जीर्णोद्धार कराकर इसे शानदार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया है। अब यह देखने में बहुत सुन्दर और शानदार लगता है।
सोलहवीं शताब्दी में मेवाड़ के महाराणा राजसिंह जी ने उदयपुर से कुछ दूर राजनगर की स्थापना की और यहाँ की एक ऊँची पहाड़ी पर उन्होंने एक किले का निर्माण करवाया। इस किले को राजनगर किला कहा जाता है। किले का अलावा यहाँ महाराणा ने एक विशाल झील का निर्माण भी करवाया था जिसे उन्होंने राजसमंद झील नाम दिया। इस झील का निर्माण सन 1662 से 1676 ईस्वी के बीच गोमती, केलवा और ताली नदी के जल को संगृहीत करके किया गया था।
किले के ठीक सामने ही दूसरी पहाड़ी पर एक महल के अवशेष थे जिन्हें रूठी रानी के महल के नाम से जाना जाता है। इसके निर्माण के पीछे एक कथा प्रचलित है कि जब एक बार महाराजा से उनकी रानी रुष्ट हो गईं तो उन्होंने किले से दूर अपने लिए एक निजी महल बनवाया और वह वहां जाकर रहने लगी। रानी के राजा से रुष्ट होने और किले से दूर दूसरी पहाड़ी पर अपने लिए एक अलग महल बनवाये जाने के कारण इस महल का नाम रूठी रानी का महल पड़ा।
वैसे राजस्थान में इस नाम से और भी महल देखने को मिलते हैं और सभी की ऐसी ही एक कथा भी सुनने को मिलती है जैसे उदयपुर के निकट जयसमंद और अजमेर की पहाड़ियों में भी रूठी रानी के महल देखने को मिलते हैं।
- रूठी रानी का महल
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| रूठी रानी का महल |
| रूठी रानी का महल |
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| रूठी रानी का महल |
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| रूठी रानी का महल |
| रूठी रानी का महल |
| RAJSAMAND LAKE |
| RAJSAMAND LAKE |
- राजगढ़ किला
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| राजगढ़ किला |
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| राजगढ़ किला |
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| राजगढ़ किला |
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