Friday, September 1, 2023

KURUKSHETRA : SHEIKH CHILLI TOMB


शेख़ चिल्ली का मक़बरा 


 

हरियाणा के कुरुक्षेत्र के थानेसर में स्थित शेख चिल्ली का मकबरा, मुगल बादशाह शाहजहाँ के सबसे बड़े बेटे दारा शिकोह ने लगभग 1650 ईस्वी में बनवाया था। यह मकबरा दारा शिकोह के आध्यात्मिक गुरु और प्रसिद्ध सूफी संत शेख चिल्ली की याद में निर्मित है, जिसे 'हरियाणा का ताजमहल' भी कहा जाता है।

यह मकबरा सूफी संत शेख चिल्ली (अब्दुल करीम) की याद में बनवाया गया था। जिसमें फारसी शैली, सफेद संगमरमर और पीले बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है।  यह मकबरा एक ऊंचे चबूतरे पर बना है और इसके परिसर में एक मदरसा और संग्रहालय भी स्थित है। 

शेखचिल्ली एक प्रसिद्ध मुस्लिम सूफ़ी संत थे।  माना जाता है कि वह 17वीं सदी में मुगल राजकुमार दारा शिकोह के गुरु थे, जिनका वास्तविक नाम अब्द-उर-रजाक या अब्द-उर-रहीम था। हरियाणा के थानेसर में स्थित उनका मकबरा भी उनके मुस्लिम सूफी परंपरा से जुड़ा होने का प्रमाण है।
शेख चिल्ली के मकबरे की दीवार 



शेख चिल्ली का मकबरा 

शेख चिल्ली का मकबरा 



मदरसा और जलाशय का एक चित्र 




ऊपरी अहाते में स्थित मकबरा 








लाल बलुआ पत्थर से निर्मित पत्थर मस्जिद 






हर्ष वर्धन की राजधानी के अवशेष 






अगला भाग - राजा हर्ष का टीला 

KURUKSHETRA 2023 : BRAHM KUND

 

ब्रह्म सरोवर 


कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्म सरोवर, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने यहीं प्रथम यज्ञ किया था, जो सृष्टि की उत्पत्ति का प्रतीक है। ब्रह्म सरोवर का शांत और दिव्य वातावरण, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है, सूर्य ग्रहण और धार्मिक त्योहारों के दौरान  इसके जल में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान भी यह स्थान आकर्षण का केंद्र बन जाता है , जब हजारों भक्त भगवद् गीता की शाश्वत शिक्षाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित होते हैं। सुंदर ढंग से सजाए गए घाट, संध्या आरती और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ इस अवसर की भव्यता को और बढ़ा देती हैं। वर्षों से, ब्रह्म सरोवर सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित हुआ है, जो पवित्रता, शांति और भारत की शाश्वत आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध ब्रह्मसरोवर लगभग 3600 फीट लंबा और 1500 फीट चौड़ा है। यह विशाल मानव निर्मित सरोवर लगभगके क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी गहराई लगभग 45 फीट है और यह एशिया के सबसे बड़े सरोवरों में से एक माना जाता है।

थानेसर स्टेशन से ब्रह्म सरोवर बहुत ही नजदीक है, इसलिए मैं पैदल ही यहाँ पहुँच गया और इसकी विशालता को देखकर ठहर सा गया। माना जाता है इसी सरोवर के निकट ही महाभारत के युद्ध का मैदान था जहाँ यह युद्ध लड़ा गया था। महाभारतकालीन अनेकों अवशेष यहाँ से प्राप्त होते रहे हैं। मैंने इस सरोवर में स्नान किया और फिर मैं आगे घूमने बढ़ चला। सरोवर के मध्य में भगवान् शिव का प्राचीन मंदिर है जिसे सर्वेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। भगवन शिव के दर्शन करने के पश्चात मैं आगे बढ़ चला। 

भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन का रथ, इस स्थान के महत्त्व को और बढ़ा देते हैं। यह देखने में सचमुच का ही प्रतीत होता है। रथ को देखकर ही महाभारत के युद्ध का आभास सा होने लगता है, हजारों वीर योद्धाओं से सजी यह धरती उस समय कैसी रही होगी,  इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। 

यही से कुछ दूरी पर प्राचीन भवन के अवशेष दिखाई देते हैं, इसे द्रोपदी कुआँ के नाम से जाना जाता है। यहाँ एक प्राचीन कुआँ है जिसके बारे में मान्यता है कि युद्ध के पश्चात द्रोपदी ने यहीं इसी कुए के जल से अपने केशों को धोया था। इसके बराबर में ही खाटू श्याम जी का मंदिर है, खाटू श्याम जी महाभारत के बर्बरीक थे जिन्होंने अपना शीश काटकर भगवान श्री कृष्ण को भेंट किया था।