Monday, March 6, 2023

VARODARA BUS STAND : GUJRAT 2023

गुजरात की एक अधूरी यात्रा - 2023 

 वड़ोदरा बस स्टैंड पर एक दिन 



गिरनार पर्वत की दस हजार सीढ़ियाँ उतरने के बाद मैं जूनागढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचा, यहाँ कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि मेरे पैरों ने काम करना बंद कर दिया है। अब मैं स्टेशन पर बनी एक ब्रेंच से दूसरी ब्रेंच तक जाने में असमर्थ था। इसलिए यहीं सीट पर लेटे लेटे ही मैं ट्रेन का इंतज़ार करने लगा। 

मुझे अगली सुबह वड़ोदरा स्थित चम्पानेर और पावागढ़ की यात्रा करनी थी इसलिए अब मुझे रात को सोमनाथ एक्सप्रेस से अहमदाबाद तक जाना था। इसी बीच रेलवे का मैसेज आया जिसमें लिखा था आपकी सीट कन्फर्म नहीं हुई है, कैंसिल चार्ज काटकर आपका भुगतान वापस कर दिया जायेगा। जब हम घर से कहीं दूर किसी नगर में हों और हमें पूरी रात एक ट्रेन में सफर करना हो तब ऐसा मैसेज आ जाये तो बड़ी ही गुस्सा आती है पर यह ऐसी गुस्सा होती है जिसका किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ता। 

Sunday, March 5, 2023

GIRNAR HILL : GUJRAT 2023

UPADHYAY TRIPS PRESENT'S

 गिरनार पर्वत की एक साहसिक यात्रा 

यात्रा दिनाँक - 5 मार्च 2023 

गिरनार पर्वत एक प्राचीन पर्वत है, प्राचीनकाल में यह रैवतक पर्वत कहलाता था और इसके आसपास का भू भाग रैवत प्रदेश कहलाता था जो वर्तमान में सौराष्ट्र प्रान्त है। 

पौराणिक काल के हिसाब से सतयुग में यहाँ महाराज रैवत का राज्य था, उनकी पुत्री रेवती थीं जो द्वापर युग में भगवान् श्री कृष्ण के बड़े भ्राता बलराम जी की पत्नी बनी। इसप्रकार भगवान् श्रीकृष्ण और बलराम ने इस प्रदेश को अपने निवास स्थान के रूप में चुना, यहीं समुद्र से थोड़ी से जगह मांगकर द्वारिका नगरी का निर्माण किया। मगध सम्राट जरासंध ने गिरनार पर्वत तक श्री कृष्ण और बलराम का पीछा  किया और जब वह गिरनार पर्वत पर आकर, जरासंध की नजरों से ओझल हो गए तो उसने इस पर्वत पर आग लगा दी। 

जरासंध यह सोचकर यहाँ से वापस लौट गया कि दोनों भाई इस पर्वत की आग में जलकर भस्म हो गए। किन्तु भगवान् श्री कृष्ण और बलराम यहाँ से बच निकलकर सीधे द्वारिका द्वीप पहुंचे और वहां देवशिल्पी विश्वकर्मा का आहवान कर एक नई नगरी का निर्माण कराया। यही नगरी द्वारिका नगरी के नाम से आज प्रसिद्ध है। 

JUNAGARH : GUJRAT 2023

गुजरात यात्रा - 2023 

 जूनागढ़ - गुजरात का एक ऐतिहासिक नगर 


5 MAR 2023

श्री गिरनार पर्वत की तलहटी में बसा जूनागढ़ नगर, गुजरात के सौराष्ट्र प्रान्त का एक प्रमुख नगर है। जूनागढ़ ना केवल ऐतिहासिक अपितु पौराणिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।पौराणिक काल में यह रैवत प्रदेश कहलाता था, इसलिए गिरनार पर्वत का दूसरा नाम रैवतक पर्वत भी है। जूनागढ़, श्री नरसी जी की भूमि है जिनकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने उनकी अनेकों बार सहायता की थी। 

ऐतिहासिक दृष्टि से जूनागढ़ अथवा गिरनार मौर्य काल से ही इतिहास में अपना योगदान रखता है, सम्राट अशोक, रुद्रदामन, स्कन्द गुप्त जैसे महान सम्राटों के शिलालेख यहाँ देखने को मिलते हैं। 

चूँकि जूनागढ़ नगर का भ्रमण करना, मेरी इस यात्रा का उद्देश्य नहीं था, मैं तो केवल जूनागढ़ से देलवाड़ा जाने वाली मीटर गेज ट्रेन से यात्रा करना चाहता था परन्तु कल वघई से लौटने के बाद, जूनागढ़ आने वाली सौराष्ट्र ट्रेन के निकल जाने के कारण मेरी आगे की यात्रा का सारा कार्यक्रम रद्द हो गया और फिर भी मैं उस ट्रैन के मिलने की उम्मीद लिए जूनागढ़ आ गया। मीटर गेज की ट्रैन सुबह सात बजे यहाँ से रवाना हो गई जबकि मैं यहाँ सुबह दस बजे पहुंचा था। अब मेरे पास जूनागढ़ नगर को देखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। 

Saturday, March 4, 2023

SURAT TO JUNAGARH : GUJRAT 2023

 गुजरात की एक अधूरी यात्रा - भाग 3 

वघई से जूनागढ़ रेल यात्रा 

यात्रा दिनाँक :- 4 MAR 2023 TO 5 MAR 2023 

वघई आने के बाद मेरी यह नेरो गेज रेल यात्रा तो पूरी हो गई किन्तु मुझे अभी मीटर गेज की भी रेल यात्रा करनी थी जिसके लिए मुझे सुबह जल्दी जूनागढ़ पहुंचना होगा और इसके लिए सौराष्ट्र जनता एक्सप्रेस सबसे बेस्ट ट्रेन है जो शाम को साढ़े पांच बजे सूरत से चलकर अगली सुबह चार बजे जूनागढ़ उतार देगी और वहां से सुबह सात बजे मीटरगेज ट्रेन देलवाड़ा के लिए चलती है। 

देलवाड़ा, दीव का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है अतः अब यात्रा दीव तक प्रस्तावित है। इसप्रकार हमारी मीटर गेज रेल यात्रा भी हो जायेगी और दीव शहर भी घूम लिया जायेगा जोकि एक केंद्र शासित प्रदेश है। 

BILIMORA TO WAGHAI NG RAIL TRIP : GUJRAT 2023

 

बिलिमोरा से वघई नेरोगेज रेल यात्रा 
 

4 MAR 2023

बिलिमोरा से वघई रेल लाइन, पश्चिम रेलवे के मुंबई मंडल की एकमात्र नेरोगेज रेल लाइन है। यह गुजरात के एकमात्र हिल स्टेशन सापुतारा रेंज की तरफ सैर कराती हुई ले जाती है। वघई इस रेल लाइन का अंतिम स्टेशन है जो गुजरात के डांग जिले में स्थित है। वघई से 50 किमी दूर गुजरात और महाराष्ट्र राज्य की सीमा के नजदीक सापुतारा, एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। वघई रेलवे स्टेशन के नजदीक ही बस स्टैंड है जहाँ से सापुतारा जाने के लिए बस और अन्य साधन उपलब्ध मिलते हैं। रेल शौकीन, इस रेल यात्रा का लुफ्त उठाने के लिए एकबार इसमें अवश्य यात्रा करते हैं। 

तत्कालीन बड़ौदा राज्य के शासक सयाजी राव गायकवाड के निर्देशानुसार सन 1913 में अंग्रेजों ने इस रेल लाइन का शुभारम्भ किया और इसकी शुरुआत बिलिमोरा से रन्कुवा रेलवे स्टेशन के बीच की गई। इस रेलमार्ग की कुल लम्बाई 63 किमी है जोकि बिलिमोरा से वघई तक है। वघई तक का रेलमार्ग 1926 में बनकर तैयार हुआ।  बड़ौदा स्टेट रेलवे के अंतर्गत शामिल इस रेल लाइन को बनाने का मुख्य उद्देश्य जंगल से सागौन की लकड़ियों की ढुलाई करना था, तत्पश्चात इन लकड़ियों को बिलिमोरा बंदरगाह से अन्य देशों को भेजा जाता था। देश की आजादी के बाद इस रेल लाइन का भारतीय रेलवे में विलय कर दिया गया। 

सन 2020 में पश्चिम रेलवे ने इस रेल लाइन को अनिश्चित काल के लिए बंद करने का फैसला लिया किन्तु कुछ समय पश्चात ही यहाँ के स्थानीय लोगों ने इसे बंद करने के चलते भारतीय रेलवे और स्थानीय राजनीती का विरोध करना शुरू कर दिया। अंततः गुजरात के राजनीतिक दबाब के चलते भारतीय रेलवे ने इसका पुनः सुचारु रूप से सञ्चालन करना शुरू कर दिया और आज वर्तमान में यह हेरिटेज सेवा के रूप में स्थानीय यात्रियों और पर्यटकों हेतु पूर्ण रूप से संचालित है। इसमें पर्यटकों हेतु एक वातानुकूलित विस्टाडैम कोच भी लगाया गया है जिसमें कि सापुतारा रेंज के साथ साथ पूर्णा वन्यजीव अभयारण्य के शानदार नजारों को देखते हुए सफर का आनंद लिया जा सकता है। 

Friday, March 3, 2023

GARIBRATH EXPRESS : MTJ TO SURAT 2023

 गुजरात की यात्रा पर - भाग 1 

गरीबरथ एक्सप्रेस और सूरत रेलवे स्टेशन 

3 MARCH 2023

    भारतीय रेलवे बहुत ही शीघ्रता के साथ आमान परिवर्तन का कार्य कर रही है, जिसका मतलब है कि देश की पुरानी मीटर गेज और नेरो गेज की पटरियों को उखाड़कर उन्हें ब्रॉड गेज में बदलना, जिसके बाद ब्रिटिश काल में बिछाई गई सभी पटरियां और उसी समय में बनाये गए रेलवे स्टेशन एक इतिहास बनकर रह जायेंगे और उनकी जगह आधुनकिता ही सिर्फ देखने को मिलेगी। 

अभी भी देश में कुछ ऐसी पुरानी मीटर गेज और नेरो गेज की रेलवे लाइन बची हैं जो आज भी संचालित और भविष्य में कभी भी आमान परिवर्तन हेतू हमेशा के लिए बंद हो जाएँगी। अधिकतर ये रेलवे लाइन गुजरात में संचालित है जहाँ किसी समय केवल मीटर गेज और नेरो गेज का ही राज था। इसलिए इस बार इन रेल लाइन पर यात्रा करने हेतु मैंने गुजरात की यात्रा का प्लान किया।