श्री शनिदेव धाम - कोकिलावन
कोकिलावन धाम उत्तर प्रदेश के मथुरा के पास कोसी कलां में स्थित प्रसिद्ध शनि देव मंदिर का स्थान है। यह शनि देव और उनके गुरु बरखंडी बाबा का एक बहुत प्राचीन मंदिर है। भारत भर से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं।
आज शनिवार है और 25 फरवरी भी। आज मेरी ऑफिस की छुट्टी थी और कल मेरी शादी की सालगिरह थी इसलिए कल तो कहीं जा न सका पर आज की इस छुट्टी को बेकार नहीं जाने देना चाहता था। कल्पना ने और मैंने श्री राधारानी के दरबार में जाने का विचार बनाया और हम चल दिए अपनी एवेंजर बाइक लेकर ब्रज की एक अनोखी सैर पर।
सबसे पहले हम माँ नरी सेमरी के द्वार पहुंचे, यह ब्रज की कुलदेवी हैं और नगरकोट वाली माँ का ही दूसरा रूप हैं यह यहाँ कैसे पधारीं इसका वरन आपको जल्द ही अगले ब्लॉग में जानने को मिल जायेगा। यहाँ आगे से हम सीधे कोसीकलां पहुंचे यह उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा पर स्थित मथुरा जनपद का आखिरी क़स्बा है यहीं से एक रास्ता कोकिलावन, नंदगाँव, बरसाना होते हुए गोवर्धन को जाता है।
जब कृष्ण जी का जन्म हुआ, तो यशोदा मैया ने शनिदेव को उनके पास जाने से रोक दिया क्योंकि उन्हें लगा कि शनि की दृष्टि से बालक पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। निराश होकर शनिदेव ने इस वन में कठोर तप किया, जिसके बाद कृष्ण ने कोयल बनकर उन्हें दर्शन दिए।
चूँकि कृष्ण भगवान यहाँ कोयल के रूप में शनिदेव को दर्शन देने आए थे, इसलिए इस स्थान का नाम 'कोकिलावन' या 'कोकिला वन' पड़ा।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, राधिकाजी की सास जटिला द्वारा कृष्ण से मिलने से रोके जाने पर, कृष्ण ने इसी वन में पेड़ पर चढ़कर कोयल की मीठी आवाज़ निकाली, जिसे सुनकर राधिकाजी उनसे मिलने आ सकीं, इसलिए भी इसे कोकिलावन कहा जाता है।
यह माना जाता है कि कोकिलावन में शनिदेव की पूजा करने से सारे कष्ट दूर होते हैं और शनि दोष का प्रभाव कम होता है। यहाँ शनिदेव के साथ उनके गुरु 'बर्खंडी बाबा' की भी पूजा की जाती है।
इसी रास्ते पर हम भी कोकिलावन पहुंचे, मुख्य सड़क से कोकिलावन की दूरी 1 किमी है, परन्तु प्रवेश द्वार पर ही भगवान श्री शनिदेव जी की एक विशालकाय मूर्ति के हमें दर्शन होते हैं। श्री कृष्ण के शनिदेव का यह अनोखा मिलान कोकिलावन में ही देखने को मिलता है इसलिए प्रत्येक शनिवार हज़ारों की संख्या में काफी श्रद्धालु दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों से यहाँ आकर शनिदेव जी के दर्शन करते हैं साथ ही कोकिलावन की परिक्रमा लगाते हैं।
कोकिलावन की सम्पूर्ण परिक्रमा 5 किमी की है। ब्रज के 12 वनों कोकिलावन का एक अलग ही माहात्म्य है क्योंकि यह भूमि भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं से अछूती नहीं रही है इसलिए श्रद्धालु शनिदेव के साथ साथ कोकिला बिहारी ( श्री कृष्ण ) के दर्शन करके अपने को धन्य महसूस करते हैं।
यहाँ कल्पना को अपनी बचपन की एक सहेली मिल गई पति और बच्चे के साथ शनिदेव जी के दर्शन करने आई थी।
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| कोसीकलां से एक लोकेशन |
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| कोकिलावन प्रवेश द्धार |
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| कोकिलबिहारी जी मंदिर |
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| कोकिलावन |
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| कोकिलावन धाम में कल्पना |
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| शनिदेव मंदिर, कोकिलावन |








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