पातालपानी जलप्रपात
PATALPANI WATERFALL

मालवा प्रान्त में इंदौर के निकट एक बहुत ही खूबसूरत जलप्रपात है। यह पातालपानी ग्राम के निकट है इसलिए इसे पातालपानी जलप्रपात कहते हैं। चोरल नदी जब यहाँ 300 फ़ीट की ऊँचाई से नीचे गिरती है तो यह एक प्राकृतिक सुन्दर जलप्रपात का निर्माण करती है। वर्तमान में यह ट्रैकिंग और पिकनिक स्थल के रूप में पर्यटकों का एक पसंदीदा स्थल बनकर उभरा है।
ब्रिटिश काल के दौरान इस जलप्रपात के नजदीक से अंग्रेजों ने रेल ट्रेक का निर्माण किया और इसी जलप्रपात के नाम से रेलवे स्टेशन का भी निर्माण कराया। वर्तमान में यह रेलवे स्टेशन जलप्रपात से थोड़ी दूर स्थित है किन्तु जब यहाँ से ट्रैन गुजरती थी तब ट्रेन से भी इस जलप्रपात को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था।
मैं और सोहन भाई इंदौर के रशिया ढाबे से खाना खाकर और मोबाइल चार्ज करने के बाद महू क्षेत्र में पहुंचे। यूँ तो महू, डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्मस्थान है साथ ही यह इंदौर नगर का छावनी क्षेत्र भी है। छावनी क्षेत्र से निकलकर हम जाम गेट की तरफ बढ़ रहे थे कि अचानक सोहन भाई को पातालपानी जलप्रपात की तरफ जाने वाला एक एक मार्गसूचक पट दिखाई दिया, भाई ने गाडी पातालपानी की तरफ घुमा दी और बहुत ही शानदार रास्तों से होकर शीध्र ही हम पातलपानी जलप्रपात की तरफ पहुंचे।
गाडी खड़ी करने के लिए यहाँ उचित पार्किंग व्यवस्था थी। गाड़ी खड़ी करने के बाद हम पातालपानी जलप्रपात के नजदीक पहुंचे। जलप्रपात का विहंगम दृश्य देखकर एकबार को तो हमारी नजरें उसी पर ठहर सी गई थीं। चोरल नदी का पानी लगभग 91 मीटर की ऊंचाई से नीचे गिर रहा था। यह सचमुच प्रकृति का एक अनुपम दृश्य था जिसे आज हमने अपनी आँखों से देखा था। अनेकों पर्यटक यहाँ इस दृश्य को देखने के लिए उपस्थित थे।
इस जलप्रपात को देखने का सबसे उचित मौसम मानसून का ही है और हम इस समय अपनी मालवा की मानसूनी यात्रा पर ही थे। मानसून के समय चोरल नदी में पानी की अत्यधिक मात्रा हो जाने के कारण जलप्रपात का विहंगम दृश्य दिखाई देता है साथ ही इसके चारों तरफ हरा भरा वातावरण मन को मोह लेता है। अतः यहाँ आने सबसे उपयुक्त मौसम मानसून ही है। जलप्रपात के अनेकों फोटो लेने के बाद हम अंग्रेजों द्वारा बनाये उस रेलवे ट्रैक पर पहुंचे जो जलप्रपात के नजदीक स्थित है। भूतपूर्व काल में यही पातालपानी रेलवे स्टेशन था और ट्रैन बिलकुल जलप्रपात के नजदीक से होकर गुजरती थी जिसे ट्रैन में बैठकर भी आसानी से देखा जा सकता था।
यह एक मीटर गेज लाइन थी जो इंदौर से ओम्कारेश्वर और खंडवा होती हुई अकोला तक जाती थी। इससे पूर्व भी यह इंदौर को सीधे हैदराबाद से जोड़ती थी। कुछ वर्षों पूर्व मैं अपनी माँ के साथ इस रेल लाइन पर यात्रा कर चुका हूँ। परन्तु तब मुझे इस जलप्रपात की अधिक जानकारी नहीं थी इसलिए मैं ट्रैन से इस जलप्रपात को नहीं देख सका था। आज इस रेल लाइन पर कोई ट्रैन नहीं चलती है। हालांकि इंदौर के महू स्टेशन से पातालपानी स्टेशन तक एक टूरिस्ट हेरिटेज ट्रैन अवश्य चलती है। जो सिर्फ एक पर्यटक ट्रैन है।
यहाँ काफी देर तक घूमने के बाद हम चोरल नदी की दिशा में बढ़ गए। मुख्य रास्ते को छोड़कर हमने वनों का रास्ता पकड़ लिया था। यह रास्ते घने जंगलों से होकर गुजरते हैं, जहाँ दूर दूर तक कोई भी आता जाता हुआ हमें नहीं दिखाई देता था। हालांकि सोहन भाई मेरे सहयात्री थे और रास्ता मनोहारी था इसलिए डर तो दूर दूर तक नहीं था बस एक यही चिंता थी कि यहाँ कहीं रास्ते में बाइक का पेट्रोल ना बीत जाये अन्यथा आगे की यात्रा का रोमांच समाप्त हो जाता। परन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और हम जल्द ही मालवा के ग्रामीण क्षेत्रों से होते हुए चोरल बांध पर पहुंचे।
चोरल नदी पर बने जलप्रपात को देखने के बाद हम अब इस नदी पर बने बांध को देखने आ गए थे। यूँ तो चोरल नदी पर पातालपानी जलप्रपात के अलावा और भी छोटे छोटे जलप्रपात बनते हैं किन्तु मानसून का मौसम होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से उन तक जाना प्रतिबंधित था इसलिए हम उन्हें नहीं देख सके। किन्तु बांध का दृश्य देखकर हमें हमारी यात्रा का एक और मुख्य आकर्षण मिल गया। चोरल बांध देखने के बाद हम जाम गेट की तरफ बढ़ चले।
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| इंदौर नगर से गुजरते हुए |
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| रशिया ढाबा, जहाँ हमने खाना खाया और मोबाइल चार्ज किया |
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| ढाबे से निकलते हुए सोहन भाई |
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| महू के छावनी क्षेत्र में |
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| महू कैंट एरिया |
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| पातालपानी मार्गसूचक पट |
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| चोरल नदी नीचे गिरती हुई |
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| खूबसूरत पातालपानी जलप्रपात |
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| पातालपानी जलप्रपात |
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| जलप्रपात बनाने के बाद आगे बढ़ती चोरल नदी |
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| सोहन भाई |
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| सुधीर उपाध्याय |
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| एक मंदिर |
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| रेलवे ट्रैक पर मस्ती करते सोहन भाई |
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| यह लाइन कभी इंदौर से खंडवा होते हुए अकोला जाती थी |
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| पातालपानी ग्राम का एक दृश्य |