JAM GATE
जाम गेट
पातालपानी जलप्रपात और चोरल बांध देखने के बाद हम महू - मंडलेश्वर मार्ग पर आ गए थे। पूरा रास्ता जंगली वनों से घिरा हुआ था। यह रास्ता मालवा को निमाड़ प्रान्त से जोड़ने का कार्य करता है। अभी हम विंध्याचल पर्वतमाला के उच्च पठारी भाग में थे। रास्ते में छोटी जाम के नाम से एक गाँव आया जहाँ हमने कुछ समय रुकने के लिए एक दुकान पर ठहरे। दुकानदार ने हमारे घूमने के उद्देश्य को जानकर बतलाया कि इस गांव में जाम किला है उसे आप देखकर आ सकते हो। यह किला हमें सड़क से स्पष्ट दिखाई दे रहा था। हम बिना देर किये इस किले की तरफ बढ़ चले।
इस किले को छोटी जाम के नाम से जाना जाता है। किले से थोड़ी दूर प्रसिद्ध पर्यटक स्थल जाम गेट है जिसका निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने सन 1791 में कराया था। महेश्वर स्थित अपने किले से वह जब भी पालकी द्वारा इंदौर आया करती थीं तो यह जाम किला ही उनका रात्रि विश्राम स्थल हुआ करता था। जाम किले अथवा गांव से थोड़ी दूर जाम गेट एक भव्य दरवाजा है जहाँ से पर्वतों की तराई में स्थित सम्पूर्ण निमाड़ प्रान्त का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है।
जाम गेट से महेश्वर की तरफ बढ़ने वाला रास्ता ढलान युक्त है, जिसका तात्पर्य है कि हम विंध्याचल पर्वतमाला को पार करके नर्मदा घाटी की तरफ बढ़ रहे होते हैं अर्थात मालवा प्रान्त से निमाड़ प्रान्त की तरफ यह रास्ता जाता है। जाम गेट का निर्माण सीमा सुरक्षा के हिसाब अत्यंत महत्वपूर्ण था इसलिए माता अहिल्याबाई होल्कर ने यहाँ इस विशाल दरवाजे का निर्माण कराया और इसे सैनिक सुरक्षा से युक्त किया। यहाँ खड़े सैनिक निमाड़ में होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखते थे।
हमने भी यहाँ बारिश की धीमी धीमी फुहारों के बीच प्रकृति का सुंदरता का आनंद लिया और काफी देर यहाँ इंजॉय करने के बाद मैं और सोहन भाई यहाँ से आगे बढ़ चले।
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| जाम गेट की ओर |
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| जाम किले का एक दृश्य |
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| SOHAN SINGH SOLANKI AT JAM FORT |
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| जाम किला / JAM FORT |
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| सोहन भाई गायों के साथ मस्ती करते हुए |
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| JAM FORT |
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| JAM FORT |
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| JAM FORT |
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| A VIEW OF PARVATI TEMPLE |
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| JAM GATE |
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| JAM GATE |
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| JAM GATE |
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| DEPART FROM JAM GATE |
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