Friday, March 20, 2026

MEHTAB BAGH : TAJMAHAL, AGRA




आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 1 

मेहताब बाग़ और ताजमहल का एक दृश्य 

       यूँ तो मैं बचपन से ही आगरा शहर में रहा किन्तु कभी ताजमहल को यमुना के दूसरी पार से देखने का मौका नहीं मिला, कारण था इस स्थान की दूरी, और यहाँ जाने वाला रास्ता जिसके बारे में मुझे कोई विशेष जानकारी नहीं थी। जब कभी ताजमहल देखने का मन होता था तो इसके मुख्य द्वार से ही इसे जाकर देख आता था। किन्तु आगरा शहर छोड़ने के अनेक वर्षों बाद अपने पुराने शहर को घूमने की इच्छा मन में जाग्रत हुई और मैं अपनी बाइक उठकर निकल चला आगरा की ऐतिहासिक यात्रा पर। 

    इस यात्रा के तहत मैंने आगरा के उन स्थानों को चिन्हित किया जो मैंने पहले कभी नहीं देखे थे। इसलिए सबसे पहले मैं पहुंचा यमुना नदी के दूसरी पार, जहाँ आगरा की विभिन्न मध्यकालीन ऐतिहासिक इमारतें देखीं जा सकती थीं। 

    इन सभी स्थलों में सबसे मुख्य था मेहताब बाग़, जो मुगलकाल का एक शानदार बगीचा था। इसका निर्माण औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान कराया था। इस बगीचे से ताजमहल का बहुत ही शानदार दृश्य दिखाई देता है बिलकुल वैसे ही, जैसे हम इसे ताज के परिसर में प्रवेश करने के बाद देखते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि मेहताब बाग़ से आप सिर्फ ताजमहल को निहार सकते हैं, इसके ख़ूबसूरती को महसूस कर सकते हैं, यमुना नदी के जल में इसका प्रतिबिम्ब देख सकते हैं किन्तु आप इसे छू नहीं सकते, इसके नजदीक नहीं जा सकते हैं क्योंकि मेहताब बाग़ और ताजमहल के बीच यमुना नदी है और यहाँ इसे पार करने की इजाजत नहीं है। 

    मेहताब बाग़ ऐतिहासिक बगीचा है, खुदाई के दौरान यहाँ लाल ईंटों की एक विशाल मोटी दीवार के अवशेष प्राप्त हुए हैं जो इसे यमुना के जल से क्षतिग्रस्त  होने से बचाती थी। शाहजहां ने यहाँ एक काला ताजमहल का निर्माण करने का विचार किया था, वह इसे स्वयं के लिए काले संगमरमर के पत्थरों से बनाना चाहता था किन्तु सत्ता परिवर्तन और औरंगजेब द्वारा नजरबन्द किये जाने के कारण उसका यह ख्वाब पूरा न हो सका और फिर इस स्थान पर औरंगजेब एक शानदार बगीचे का निर्माण कराया। मेहताब बाग़ को चाँदनी बाग़ भी कहा जाता है।  

    वर्तमान में मेहताब बाग़ को देखने के लिए ताजमहल के ही समान पुरातत्व विभाग द्वारा टिकट दिया जाता है, इससे होने वाली आय से ही बगीचे का रख रखाव होता है। आज भी अनेकों पर्यटक मेहताब बाग़ से ताजमहल का दीदार करते हैं। अनेकों फिल्मों की शूटिंगें मेहताब बाग़ में हुईं हैं और इनमें ताजमहल को एक अलग ही रूप से दिखाया जाता है। मेहताब बाग में अनेकों किस्म के पेड़ पौधे हैं जिनमें बहुत ही सुन्दर सुन्दर फूल खिलते हैं, इन फूलों की सुगंध से मेहताब बाग़ और भी खिल उठता है, फूलों की सुंगधित महक और ताज महल का दीदार हमने एक पल के लिए मुग़ल काल में ले जाती हैं। 

   मेहताब बाग़ में ना केवल फूलों की सुगंध महकती थी बल्कि इसमें लगे विशेष तकनीकों से बने फुब्बारे भी इसे अधिक खूबसूरत बनाते थे। माना जाता है कि मुग़ल काल के दौरान इन फुब्बारों से जल की विभिन्न तरह के धाराएं तो मन को मोह ही लेती थीं साथ ही फुब्बारों से निकलने वाला जल भी रंगीन किस्म का होता था। फुब्बारों से निकलने वाला जल विभिन्न तरह के रंगों में परिवर्तित होता रहता है, इसलिए इसे रंगीन फुब्बारा भी कहा जाता था। मुगल शासकों को बगीचे और फुब्बारे बनाने का शौक शुरू से ही रहा है। 

   मेहताब बाग़ जाने के लिए आगरा के रामबाग चौराहे से सीधा रास्ता गया है। इसी रास्ते पर अनेकों मुगलकालीन ऐतिहासिक इमारत भी देखने को मिलते हैं जिनमें सबसे मुख्य ईमारत है नूरजहां के पिता का मकबरा जिसे वर्तमान में एत्माउद्दौला कहते हैं। यह भी एक शानदार ईमारत है, इसकी चर्चा हम अगले भाग में करेंगे। 

      मेहताब बाग़ के निकट मुगलकालीन लाल पत्थरों से निर्मित एक सीढ़ी दिखाई देती है, इसे ग्यारह सीढ़ी कहा जाता है क्योंकि इस सीढ़ी में कुल ग्यारह स्टेप हैं, यह भी मुगलकालीन धरोहर है और इसे देखकर लगता है कि मुगलकाल में इसका प्रयोग यमुना नदी से जल को खींचने के लिए किया जाता होगा, बिलकुल एक कुएं की तरह, अथवा ये भी हो सकता है कि शाही परिवार के लोग इस सीढ़ी से चढ़कर ताजमहल का दीदार करते होंगे। 

   किन्तु जब मैंने यहाँ के स्थानीय निवासियों से इस ग्यारह सीढ़ी संरचना के बारे में विस्तार से जानकारी ली तो मुझे पता चला कि यह एक प्राचीन खगोलीय वेधशाला का एक भाग है जिसका निर्माण द्वितीय मुग़ल बादशाह हुमांयू के समय में हुआ था और यह खगोलीय जानकारी प्राप्त करने हेतु निर्मित की गई थी। इसके साथ इस वेधशाला की और भी संरचनाएं थीं जो यमुना नदी में आई बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गईं, बस वर्तमान में यह ग्यारह सीढ़ी ही यहाँ दिखाई देती है। 

   आज के इस ब्लॉग में हमने आगरा के मेहताब बाग़ और ग्यारह सीढ़ी के बारे में जानकारी दी है जो मुगलकाल के शासक क्रमशः हुमांयु, शाहजहां और औरंगजेब द्वारा निर्मित ऐतिहासिक स्थलों को देखा। जल्द ही अगले ब्लॉग में हम आगरा शहर के अन्य ऐतिहासिक स्थलों को उजागर करेंगे। आइये अब चित्र दीर्धा देखते हैं। 

मेहताब बाग़ जाने वाले रास्ते से आगरा किले का एक दृश्य यमुना पार दिखाई देता हुआ 

मेहताब बाग़ की विस्तृत जानकारी देता एक सुचना पट्ट