Tuesday, July 14, 2026

TRIP TO KASHMIR : 2026


उत्तराखंड से कश्मीर एक रेल यात्रा 



 17 मई 2026 

सही पांच बजकर बीस मिनट पर हेमकुंट एक्सप्रेस श्रीमाता वैष्णोंदेवी कटरा के लिए योगनगरी ऋषिकेश से प्रस्थान कर गई। ट्रेन का कोच अभी लगभग खाली ही था। अगला स्टेशन वीरभद्र आया, यहाँ थोड़ी देर ट्रेन खड़ी रही और इसके बाद रायवाला जंक्शन पहुंची। रायवाला पर देहरादून से आने वाली रेलवे लाइन भी इसी में मिल जाती है इसलिए रायवाला एक जंक्शन स्टेशन है और यह राजाजी नेशनल पार्क के क्षेत्र में स्थित है। मोतीचूर के बाद अंततः हमारी ट्रेन हरिद्वार पहुंची और यहाँ हमारे पास की अन्य सीटों पर सभी सवारियां आ गईं। 

पूरी रात सफर करने और दिन में घूमने के कारण मैं काफी थक चुका था और मुझे अब नींद भी आने लगी थी। हमारी सीट पूरी तरह कन्फर्म नहीं हुई थी और यह RAC में ही रह गई थी इसलिए हमें  साइड लोअर सीट पर यात्रा करनी पड़ रही थी। हालांकि रात्रि के समय हमारी साइड अपर सीट लगभग खाली ही थी और कल्पना इसी पर सो चुकी थी। अगली सुबह जम्मू निकलने के बाद मेरी नींद खुली। हम तवी नदी को पार कर रहे थे। 

जम्मू के बाद सुरंगों और घाटियों का नजारा शुरू हो जाता है और हम इन्हीं नजारों को देखते हुए यात्रा कर रहे थे। 

Tuesday, June 23, 2026

GITA BHAWAN : RISHIKESH 2026


 अमावस्या पर गंगा स्नान और गीता भवन - ऋषिकेश 2026 



योगनगरी रेलवे स्टेशन के बाहर  हमने नवनिर्मित जानकी झूला जाने के लिए ऑटो तलाश किये, किराया लगभग 40  रूपये माँगा उसने, किन्तु थोड़ी ही देर बाद वह पलट गया और 50 रूपये प्रति सवारी के हिसाब से किराया मांगने लगा। हमने तुरंत अपना रुख इस ऑटो वाले की तरफ से मोड़ लिया और दूसरे साधन का विकल्प ढूढ़ने लगे। जल्द ही हमें बैटरीचलित रिक्शा जानकी झूला जाने के लिए मिल गया। किराया वही चालीस रूपये प्रति सवारी। 

चंद्रभागा नदी का पुल पार किया, यह एक बरसाती नदी है और अभी फिलहाल सुखी है बहुत एक छोटी सी धारा इसमें बहती हुई दिखाई दे रही थी और कुछ धाराएं इसमें नालों के रूप में भी बहती हुई दिखाई देती हैं। थोड़ी देर बाद हम श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा के सामने पहुंचे। यूँतो श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा यहाँ से काफी दूर और ऊपर पहाड़ों में बद्रीनाथ जी के निकट है, जहाँ पहुंचने के लिए बहुत ही दुर्गम मार्ग पर पैदल यात्रा करनी पड़ती है। ऋषिकेश में स्थित यह गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट का मुख्यालय है। 

Thursday, June 18, 2026

YOG NAGARI RISHIKESH RAILWAY STATION

उत्तराखंड से कश्मीर तक ग्रीष्मकालीन यात्रा : वर्ष 2026 

यात्रा क्रमांक - 1 

मथुरा से योगनगरी ऋषिकेश - एक रेल यात्रा 

15 MAY 2026

    प्राचीन काल से ही माँ गंगा के पावन तट पर बसी ऋषिकेश नगरी, साधु - संतो और ऋषि मुनियों की तपोस्थली रही है। यहाँ का  सुरम्य वातावरण मन को मोह लेता है, यहाँ आकर मन को असीम शांति प्राप्त होती है और शरीर एक नई ऊर्जा को अनुभव करने लगता है। 

शाम के समय माँ गंगा के घाट पर बैठकर गंगा आरती देखने का एक अलग ही आनंद है, मन आध्यत्मिक रूप से प्रफुल्लित हो उठता है ईश्वर का गुणगान करने लगता है। यहाँ आकर आध्यात्म की अनुभूति होना आम बात है। 

ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला एक प्राचीन स्थल है। गंगा नदी के ऊपर बना तारों का एक झूला है जिसे हम बचपन से ही देखते और इसपर गुजरते हुए आ रहे है। लक्ष्मण झूला के आसपास अनेकों मंदिर हैं। यहीं से कुछ दूर गंगाजी के किनारे चलते हुए राम झूला के निकट पहुँच जाते है। लक्ष्मण झूला के बाद राम झूला का निर्माण हुआ था। अब वर्तमान में जानकी झूला का निर्माण होने के बाद यह ऋषिकेश का मुख्य सेतु बन गया है। 

राम झूला और जानकी झूला के मध्य प्रसिद्ध गीता भवन है, यहाँ साधु संतो के ठहरने का अच्छा प्रबंध है। आम यात्रियों को यहाँ ठहरने की आज्ञा नहीं है। गीता भवन में सुबह और शाम अत्यंत ही स्वादिष्ट और सात्विक भोजन मिलता है। 

इस बार मन बना लिया था कि इस अमावस्या पर गंगा स्नान हेतु ऋषिकेश ही जाऊंगा। ईश्वर की कृपा रही और मैंने मई के महीने में एक शानदार यात्रा प्लान की। यह यात्रा कश्मीर की यात्रा थी जिसमें हमने श्रीमाता वैष्णोंदेवी और श्रीनगर जाने का प्लान बनाया। इस यात्रा में मेरी ममेरी बहिन साधना और उसका परिवार, मेरा दोस्त, कुमार अपने परिवार सहित जाने के लिए तैयार थे। 

Wednesday, December 31, 2025

MY TRIP IN AGRA : AGRA 2025

 

MY AGRA TRIPS IN 2025


📅10 FEB' 25

मैं आज अपनी कंपनी की किया करेन्स गाडी लेकर टेस्ट ड्राइव के लिए आगरा गया। पार्श्वनाथ पंचवटी, जो की फतेहाबाद रोड के नजदीक स्थित है, वहां मैं गाडी की एक ग्राहक को टेस्ट ड्राइव कराइ और उसके बाद लौटते समय प्रतापपुरा चौराहे पर मैं अपने मित्र कुमार से मिला। कुमार से थोड़ी देर मिलने के बाद मैं अपने एक अन्य मित्र पप्पू से भी मिला जो कि सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज में ही कार्यरत है। 

बचपन के शहर और दोनों मित्रों से मिलने के बाद मैं वापस आगरा आ गया। 

Tuesday, September 17, 2024

AGRA : LODI MOSQUE & TOMB

 

आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 12

लोदी काल की मस्जिद और मक़बरा 




🖍 - 17 सितम्बर 2024, 

आगरा, मध्यकालीन भारत का ऐतिहासिक नगर है, इस शहर को मुग़लकालीन राजधानी होने का गौरव प्राप्त है इसलिए यहाँ मुग़ल काल से जुड़े हुए अनेकों भव्य स्मारक मौजूद हैं, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण ताजमहल है जिसके कारण आगरा को दुनिया भर में पहचान मिली है। नूरजहां के पिता एत्माउद्दौला का मकबरा, चीनी का रोजा, आगरा किला, जामामस्जिद, फतेहपुर सीकरी और सिकंदरा ये सभी आगरा की प्रमुख मुगलकालीन स्मारक हैं। 

 यूँ तो आगरा शहर की स्थापना 1504 ईसवी में सिकंदर लोदी ने की थी। आगरा से कुछ दूर दिल्ली मार्ग पर उसने सिकंदराबाद नामक शहर बसाया था जो कालांतर में सिकंदरा ने नाम से आज भी स्थित है। परन्तु यह सिकंदरा आज सिकंदर लोदी के कारण नहीं बल्कि मुग़ल सम्राट अकबर के मकबरे के कारण विश्व भर में विख्यात है। 

आगरा शहर की स्थापना का श्रेय सिकंदर लोदी को जाता है किन्तु आगरा शहर को पहचान मुग़ल शासक अकबर के शासनकाल में ही मिली, उसने इसे अपनी राजधानी बनाया और आगरा किला का निर्माण कराया। अकबर ने अपनी मृत्यु से पूर्व ही अपने मकबरे का भी निर्माण भी आगरा में ही कराया था।  

AGRA : SADIK KHAN & SALAWAT KHAN TOMB


आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 11

 सादिक खान और सलाबत खान का मकबरा


सादिक खान और उनके पुत्र सलाबत खान, मुगल काल के प्रमुख रईस थे और बादशाह जहांगीर एवं शाहजहाँ के अधीन उच्च पदस्थ अधिकारी थे। सलाबत खान, बादशाह शाहजहाँ के मुग़ल दरबार में मीर बख्शी (कोषाध्यक्ष) थे, जो 1644 में आगरा किले में अमर सिंह राठौर द्वारा मारे गए थे  जबकि उनके पिता सादिक खान की मृत्यु 1633 में ही हो गई थी। दोनों पिता पुत्र मुग़ल दरबार में क्रमशः बादशाह जहांगीर और शाहजहां के कार्यकाल के दौरान नियुक्त थे। 

AGRA : AKBAR TOMB



आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 10

जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का मक़बरा  


17 सितम्बर  2024,

जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का मकबरा आगरा के सिकंदरा में स्थित एक भव्य मुगलकालीन स्मारक है, जिसे उनके पुत्र जहांगीर ने 1605-1613 के बीच बनवाया था। लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित यह 119 एकड़ में फैली एक अनूठी पिरामिडनुमा संरचना है, जो इस्लामी, हिंदू और बौद्ध वास्तुकला का मिश्रण है।

 मुख्य मकबरे का प्रवेश द्वार बुलंद दरवाजे की शैली में बनाया गया है और जटिल नक्काशी से सजाया गया है।इस मकबरे की चारों कोनों पर सफेद संगमरमर की मीनारें हैं।

औरंगजेब के समय में इस मकबरे को जाटों द्वारा लूटा गया था, माना जाता है कि उन्होंने इस मकबरे से बादशाह अकबर के शरीर के अवशेषों को निकालकर उनका दाह संस्कार कर दिया। ब्रिटिश काल में अंग्रेजों (लॉर्ड कर्जन) ने इसकी मरम्मत कराई थी।

Thursday, August 8, 2024

AGRA : FIROZ KHAN TOMB

 

आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 9


फिरोज खान का मकबरा / FIROZ KHAN TOMB



  • फिरोज खान के मकबरे का निर्माण 17वीं शताब्दी में मुगल बादशाह शाहजहां के शासनकाल के दौरान हुआ था, जब फिरोज खान दीवान-ए-कुल के पद पर थे। फिरोज खान शाहजहां के एक विश्वसनीय अधिकारी थे, जो शाही हरम के प्रभारी के रूप में काम करते थे। उनकी मृत्यु 1637 में हुई थी।

फिरोज खान शाहजहां के शाही हरम के प्रभारी और दीवान-ए-कुल थे। 

लाल बलुआ पत्थर से निर्मित यह दो मंजिला मकबरा मुगलकालीन वास्तुकला का उदाहरण है।
  • यह मकबरा लाल बलुआ पत्थर से बना है और अष्टकोणीय (octagonal) आकार का है। यह दो मंजिला इमारत है।
  •  यह स्मारक एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) द्वारा संरक्षित है, लेकिन यह एत्माद्दौला के मकबरे की तुलना में बहुत कम प्रसिद्ध और उपेक्षित है।
  • यह मकबरा आगरा शहर से लगभग 5 किमी दूर आगरा-ग्वालियर रोड पर स्थित है।

Friday, March 22, 2024

AGRA : ETMAUDDOULA


आगरा की ऐतिहासिक विरासतें - भाग 7

एत्माउद्दौला का मक़बरा 


एत्माउद्दौला का मक़बरा, नूरजहाँ के पिता मिर्ज़ा ग्यासबेग़ का मकबरा है जिसे नूरजहाँ ने 1622-1628 के बीच अपने पिता मिर्ज़ा ग़ियासबेग की याद में बनवाया था। इसे 'बेबी ताज' या 'छोटा ताजमहल' भी कहा जाता है, क्योंकि यह पूरी तरह से सफेद संगमरमर से बना पहला मुगल मकबरा है और इसमें पित्रदुरा (कीमती पत्थरों की जड़ाई) का उत्कृष्ट काम किया गया है।

यह मकबरा मुगल साम्राज्ञी नूरजहाँ ने अपने पिता मिर्ज़ा ग़ियासबेग (जिन्हें जहाँगीर ने एतमादुद्दौला की उपाधि दी थी) की स्मृति में बनवाया था।

यह पूरी तरह से सफेद संगमरमर से निर्मित पहली मुगल इमारत है।

यह उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में यमुना नदी के पूर्वी तट पर स्थित है और यह भारत में पूरी तरह सफेद संगमरमर से बने पहले मकबरों में से एक है।

Saturday, February 3, 2024

Haridwar 2024 : A Journey for the Immersion of Mother's Ashes



A Journey for the Immersion of Mother's Ashes






 3 FEB 2024

 हरिद्वार यात्रा 

मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब अपनी सबसे प्रिय सहयात्री अपनी माँ को अस्थिरूप में हरिद्वार लेकर आऊंगा। वो हरिद्वार जहाँ मुझे पहली बार मेरी माँ और पिताजी ही लेकर गए थे। इसके बाद अनेकों बार मैं अपनी माँ के साथ इस पावन धाम की यात्रा कर चुका हूँ। यहाँ की एक एक जगह मेरे माता और पिता की स्मृतियों से जुडी हुई है। हरिद्वार में ही मैंने माँ गंगा के पावन तट पर मैंने अपने माता पिता के साथ एक पूरी रात बिताई थी।  

आज माँ गंगा की इस पावन भूमि में आकर मुझे अपने माता पिता की बहुत याद आने लगी और मेरी आँखों में आँसू आ गए परन्तु बड़ा भाई साथ था जिसने मुझे सँभाल रखा था। हम माँ के अस्थिपुष्पों के साथ हरिद्वार के हरि की पैड़ी गंगा घाट पर पहुंचे और माँ के अस्थिपुष्पों को गंगाजी की पावन धारा में प्रवाहित कर दिया। मेरी माँ अब गंगाजी को समर्पित हो चुकी थीं इसलिए आज के बाद यह हरिद्वार धाम मेरी माँ का अंतिम स्थान और माँ गंगा ही मेरे लिए अब मेरी माँ स्वरुप रहेंगी। इसलिए मैंने प्रत्येक वर्ष यहाँ आने का निश्चय किया। 

Sunday, January 28, 2024

MY MOTHER LOST HER LIFE IN 2024

मेरी माँ का गौलोक प्रस्थान और उनकी अंतिम यात्रा - वर्ष 2024 




28 JAN 2024 

आज की सुबह मेरे जीवन की दूसरी सबसे बुरी सुबह थीं क्योंकि आज मेरी माँ अपनी जीवन यात्रा पूरी करके गोलोक धाम को प्रस्थान कर गईं। उनके यूँ अचानक मुझे अकेला छोड़कर चले जाने का मुझे बहुत भारी दुःख हुआ। मेरा मन स्वीकार ही नहीं करपा रहा था कि मेरी माँ, जो मेरे लिए मेरी दुनिया थीं, मेरा सबकुछ थीं, वो एक दिन मुझे अकेला सोता हुआ छोड़कर, स्वयं चिरनिद्रा में चली गई थीं। अभी तो मुझे उनके साथ बहुत समय बिताना था, अभी और भी दुनिया देखनी थी परन्तु यूँ असमय उनका चले जाना मेरे मन और हृदय बहुत ही व्यथित कर रहा था। 

माँ के जाने की खबर सुनकर मेरे सभी रिश्तेदार और मेरी दोनों बहिने मेरे पास थीं। मेरे चाचाजी मुझे धीरज बंधाने के लिए हर समय मेरे पास थे। मेरा चचेरा भाई नीटू भी अपने परिवार सहित मेरे पास रुका था। मेरे दोनों मामाजी, मामी जी, मेरी दोनों मौसी, मेरी बुआ सभी मेरे पास थे, और मेरी पत्नी कल्पना जिसकी वजह से मेरे अंदर थोड़ी हिम्मत बची थी क्योंकि आज मैं अनाथ था, पिता को पहले ही खो चुका था आज माँ को भी खो बैठा था। 

जिसने मुझे अपनी गोदी में उठाया था आज उसे मैं अपने कंधे पर उठाकर ले जा रहा था, अपने आप से हमेशा के लिए दूर करने। श्मशान भूमि की तरफ जाने वाली यह यात्रा, माँ के साथ मेरे लिए अब तक की सबसे असहनीय यात्रा थी। पावनपुरी मथुरा नगरी में यमुना नदी के किनारे ध्रुवघाट पर मैंने अपनी माँ को अग्निदान देकर उनकी जीवन यात्रा को पूर्ण किया। इसी ब्रजधरा पर माँ जन्म लेकर इसी ब्रजभूमि पर पंचतत्वों में विलीन हो गईं। चिता की आग ठंडी होने तक मैं ध्रुवघाट पर ही रहा और अपनी माँ को ही याद करता रहा। 

सभी रिश्तेदार धीरे धीरे वापस अपने अपने घर लौटने लगे थे, किन्तु मेरा मन बिलकुल भी यहाँ से जाने का नहीं था, यह वही स्थान है जहाँ कभी मैं अपने पिता को ही लेकर आया था और उन्हें अग्निदान देकर अकेला घर लौटा था, किन्तु आज अपनी माँ के बगैर मैं यहाँ से बिल्कुल भी नहीं जाना चाहता था। मेरे रिश्ते के भाई मेरे साथ थे, उन्होंने मुझे बहुत समझाया और कल पुनः यहाँ आने का आश्वासन देकर मुझे घर लेकर लौटे। आज की यह पहली रात थी जब मेरी माँ इस संसार में कहीं नहीं थी और मैं आज बिना अपने माता पिता के इस भारी सर्दभरी रात का सामना कर रहा था। 

Tuesday, January 16, 2024

TRIP WITH SAURABH MANDLIK 2024 : LOHAGARH FORT

जनवरी के घने कोहरे के बीच लोहागढ़ किले की एक यात्रा  

16 JAN 2024,

बीती रात वृन्दावन से लौटने के बाद हम अपने घर पर आराम से सोये और अगली सुबह हम बाइक से आज भरतपुर जाने के लिए तैयार हो गए। आज , कल की अपेक्षा ठण्ड अत्यधिक थी और कोहरा भी बहुत घना था। दिन निकल आया है ऐसा प्रतीत ही नहीं हो रहा था। सौरभ भाई के अनुसार उन्हें उत्तर भारत की इस भयंकर सर्दी का एहसास नहीं था, इस कोहरे का उन्हें तनिक भी आभास नहीं था अन्यथा वह इस यात्रा को जनवरी में प्लान नहीं करते। 

हम बाइक से भरतपुर मार्ग पर पहुंचे, शीतलहर चल रही थी और सड़क पर घने कोहरे का साम्राज्य था। आज मथुरा से भरतपुर की यह 30 किमी की छोटी सी दूरी भी बहुत लम्बी प्रतीत हो रही थी। मेरे पास मफलर देखकर सौरभ भाई के मित्रों ने मुझसे इसके बारे में पूछा और कल रात ही अपने लिए एक नया मफलर खरीद लिया था। आज की इस यात्रा  में इस मफलर ने उन्हें बहुत राहत पहुंचाई। 

रास्ते में एक दुकान पर हमने रूककर गर्मागर्म चाय पी और उनके पश्चात पुनः भरतपुर की ओर रवाना हो गए। 

Monday, January 15, 2024

TRIP WITH SAURABH MANDLIK 2024 : VRINDAVAN & MATHURA


नववर्ष पर सौरभ मंडलीक भाई और उनके मित्रों के साथ वृन्दावन की एक यात्रा 



15 JAN 2024,

अभी इसी नववर्ष पर ग्वालियर यात्रा के कुछ दिनों बाद ही मेरे एक आभासी मित्र सौरभ मंडलीक, अपने अन्य दो मित्रों के साथ महाराष्ट्र से ब्रज यात्रा पर पधारे। सौरभ मंडलीक भाई महाराष्ट्र में पुणे के नजदीक एक नगर में रहते हैं और वह महाराष्ट्र तथा देश अन्य नगरों के प्राचीन और मध्यकालीन किलों का भ्रमण कर चुके हैं और अपने यूट्यूब चैनल पर इन किलों से संबंधित अनेकों वीडियो साझा कर चुके हैं। 

चूँकि फेसबुक की आभासी दुनिया में हम ऐतिहासिक यात्रा पटल के घुमक्कड़ होने के नाते आपस में मित्र हैं, और अभी तक हमारी बात कॉल और मैसेज पर होती रहीं हैं। वह काफी दिनों से मथुरा - वृन्दावन यात्रा  का प्लान कर रहे थे, अंततः इस जनवरी  में उन्होंने अपनी इस यात्रा को पूर्ण किया और बृज दर्शन हेतु मथुरा पधारे। उनके साथ उनके अन्य दो मित्र भी इस यात्रा पर मथुरा आये। 

हालांकि यह मौसम बृज यात्रा के अनुकूल नहीं है, जनवरी का महीना है और इस माह में उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी पड़ती है। चारों ओर घने कोहरे का साम्राज्य रहता है और इस वर्ष तो सर्दी अपने चरम पर थी, कई दिनों से धूप नहीं निकली थी, बस पूरा दिन कोहरे के बीच गुजर रहा था। कब सुबह से शाम हो जाती कुछ पता ही नहीं चल रहा था। लोग अपने घरों में रहकर ही अपने को सुरक्षित महसूस कर रहे थे। 

इस बीच मेरे पास महाराष्ट्र से सौरभ भाई का कॉल आया और उन्होंने मुझे अपने ब्रजभूमि आने का कार्यक्रम बताया। चूँकि उनका यात्रा कार्यक्रम निर्धारित हो चुका था इसलिए मैंने भी उन्हें इस यात्रा की अग्रिम बधाइयाँ दी और उनकी प्रतीक्षा की। मकर सक्रांति के अगले दिन सौरभ भाई अपने मित्रों के साथ मथुरा आ गए। मैंने उन्हें अपने घर ही आने का सुझाव दिया और अगले दिन सौरभ भाई से मेरी वास्तविक भेंट हुई। 

मैंने सौरभ भाई की मुलाक़ात अपनी माँ से और पत्नी से कराई, सभी उनसे मिलकर अति प्रसन्न हुए। सौरभ भाई हमारे लिए महाराष्ट्र से स्वादिष्ट मुंबई की भेलपुरी और भाकरी लाये थे इसके अलावा वीर शिवाजी महाराज की सिंहासनारूढ़ प्रतिमा भी उन्होंने मुझे भेंट की। उनके द्वारा प्रेम से लाये गए इन उपहारों को मैंने माँ को भेंट किया। माँ मेरे इन नए मित्रों से मिलकर अति प्रसन्न हुईं। 

सौरभ भाई के आने से पूर्व मैं एक गाडी का इंतज़ाम करना चाहता था किन्तु समयाभाव के कारण नहीं कर सका। परन्तु मैंने एक अतिरिक्त बाइक का इंतज़ाम अवश्य ही कर लिया था। इसलिए आज की यात्रा हमारी बाइक यात्रा थी और हम शीघ्र ही मथुरा से वृन्दावन के लिए निकल पड़े। भयंकर सर्दी और घने कोहरे के बीच हम मदन मोहन जी के मंदिर पहुंचे जो कि वृन्दावन के सप्त देवालयों में से एक मध्यकाल का ऐतिहासिक मंदिर है।  

Friday, January 5, 2024

GWALIOR 2024 : GWALIOR FORT & TEMPLES



 ग्वालियर किले की एक यात्रा 


5 JAN 2024,

     नववर्ष का आगाज  हो चुका था किन्तु इस बार मैं अपनी दक्षिण भारत की यात्रा पर नहीं जा पाया था, क्योंकि मेरा कर्नाटक एक्सप्रेस में रिजर्वेशन था जो इन सर्दियों में घने कोहरे के वजह से काफी विलम्ब से चल रही थी। शाम को साढ़े 9 बजे जाने वाली यह ट्रेन अगले दिन सुबह दस बजे के आसपास मथुरा पहुंची, जिसकारण मेरी आगे की सारी यात्रा का प्लान विफल हो गया और मैंने ट्रेन छोड़ दी। 

    इसके अलावा दूसरा कारण यह भी था कि इस यात्रा पर मेरे साथ जाने वाला मेरा मित्र सोहन सिंह अभी स्वस्थ नहीं है, उनके पैर में हुए फ्रैक्चर के कारण वह इस यात्रा को करने में असमर्थ थे। अतः इस कारण इस नववर्ष की मेरी दक्षिण भारत की दूसरी कर्नाटक यात्रा इस बार असफल होकर रह गई। 

   साल के शुरूआती दिनों में जहाँ लोग नए साल की खुशियां मनाने में व्यस्त थे और एक दूसरे को नए साल के सुन्दर सुन्दर सन्देश मोबाइल पर भेज रहे थे, वहीँ मैं मथुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के जाने के बाद उदास मन से बैठा हुआ था। मेरे दिमाग में सिर्फ मेरी यात्रा चल रही थी जिसकी तैयारी मैंने कई महीने पहले से शुरू कर दी थी। 

    अब स्टेशन पर बैठे बैठे, मैं या तो अपनी आगामी यात्रा की कन्फर्म टिकटों को कैंसिल कर रहा था अथवा फिर विलम्बित ट्रेनों का टीडीआर फाइल कर रहा था। मेरी इस वर्ष की दक्षिण भारत यात्रा पूर्ण रूप से कैंसिल हो चुकी थी। 

     मैं काफी देर मथुरा जंक्शन पर बैठा रहा और फिर कुछ समय बाद घर लौट आया। माँ, मुझे देखकर अति प्रसन्न हुई कि मैं उनसे दूर नहीं गया और उनके पास रहा। किन्तु मेरे मष्तिष्क में मेरी यात्रा का पूरा प्लान घूम रहा था, मैं चाहकर भी अपने आप को संतुष्ट नहीं करपा रहा था। मुझे सिर्फ अपनी इस यात्रा के कैंसिल होने का दुःख सताये जा रहा था, सारी तैयारियों के बाबजूद मेरा यह यात्रा प्लान असफल हो गया। मैने यात्रा के लिए ऑफिस से छुट्टियां भी ले रखी थीं इसलिए मैं अभी ऑफिस नहीं जाना चाहता था। 

       इस वर्ष सर्दियाँ जोरो पर थीं, घने कोहरे ने पूरे उत्तर भारत को अपने आगोश में ले रखा था। लोग घरों से बाहर नहीं निकलना चाहते थे, किन्तु मेरा मन घर में बैठे बैठे बाहर की यात्राओं का प्लान कर रहा था। अंततः मेरे मन ने एक ऐसी  यात्रा प्लान की जो ज्यादा दूर की तो नहीं थी किन्तु ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत ही महत्वपूर्ण थी।

   यह यात्रा थी ग्वालियर किले की , जहाँ मुझे वो समस्त ऐतिहासिक स्थल देखने को मिलने वाले थे जिन्हें खोजने में कर्नाटक जा रहा था। ग्वालियर किले में जैन प्रतिमाएं और गुफाएं, गोपांचल पर्वत, प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर, गुरुद्वारा, जलकुंड और महल देखने को मिल सकते थे। 

    मैंने तुरंत यह एकदिवसीय यात्रा प्लान की और माँ से आज्ञा लेकर रेलवे स्टेशन की ओर प्रस्थान किया। रेलवे स्टेशन पर आज भी वही हाल था जो एक जनवरी को था। घना कोहरा और लेट लतीफ़ ट्रेनें। लेट लतीफ़ ट्रेनों की वजह अक्सर नुकसान तो होता ही है परन्तु कभी कभी बहुत फायदा भी होता है। 

   ऐसा ही एक फायदा मुझे 20 घंटे  की देरी से चल रही पातालकोट एक्सप्रेस से हुआ, जो  मेरे सामने मथुरा जंक्शन पर जब आई तो यह पूरी खाली पड़ी हुई थी।  इसके देरी के चलने की वजह से मुझे बिना भीड़भाड़ वाली एक खाली ट्रेन ग्वालियर जाने के लिए मिल गई। और मैं इसके जनरलकोच में सवार हुआ। 

Sunday, December 31, 2023

AGRA TRIP : AGRA 2023

 वर्ष 2023 में आगरा शहर में मेरी यात्रायें 




26 जनवरी 2023 

आज गणतंत्र दिवस था, ऑफिस का आज के दिन अवकाश था इसलिए शाम को मथुरा से आगरा के लिए मैंने गोंडवाना एक्सप्रेस से जनरल कोच में यात्रा की जो कि पूरा खाली था। गोंडवाना एक्सप्रेस एक सुपरफास्ट ट्रेन है जो हजरत निजामुद्दीन से भुसावल के बीच अपनी यात्रा पूरी करती है। आगरा कैंट स्टेशन से पूर्व ही ट्रेन आउटर पर रुक गई और मैं यहीं उतर गया और पैदल पैदल ही ईदगाह बस स्टैंड तक पहुंचा। 

कुछ समय बाद मेरा मित्र कुमार भाटिया भी अपनी ऑफिस से छुट्टी पाकर मुझे लेने आ गया और फिर हम दोनों शाम को बालूगंज में मेहर सिनेमा पर पहुंचे। यहाँ  आज हमने शाहरुख़ खान की पठान मूवीज देखी।  उसके बाद कुमार ने मुझे वापस कैंट स्टेशन छोड़ दिया और मैं पुडुचेरी सुपरफास्ट पकड़कर रात वापस घर आ गया। इस तरह इस साल की शुरुआत में यह मेरी और कुमार की पहली मुलाकात थी। 





25 मार्च 2023 

चैत्र का महीना है, नवरात्री का त्यौहार है। शाम को काली माँ के मंदिर में दर्शन किये और पप्पू के साथ भंडारा खाया। 



21 अप्रैल 2023 

आज श्री टॉकीज में सलमान खान की किसी का भाई किसी की जान मूवीज देखी। 





15 जुलाई 2023 






4 अगस्त 2023 

आज कंपनी की गाडी लेकर आगरा जाने का अवसर मिला। अभी यमुना नदी पर एक नए पुल का निर्माण हुआ है, आज इसी सेतु को देखने में यहाँ पहुंचा और यहाँ से इस नए सेतु पर खड़े होकर मैंने यमुना नदी के दर्शन किये। 

आगरा में यमुना नदी 

नया यमुना सेतु 

मेरी कम्पनी की गाडी 



मैं और यमुना जी 



7 अगस्त 2023 

आज संजय टॉकीज में रॉकी और रानी की प्रेम कहानी मूवीज देखी। मूवीज में रनवीर सिंह और आलिया भट्ट के अलावा धर्मेंद्र, जया बच्चन और शबाना आजमी ने भी अच्छा अभिनय किया है। 

संजय टॉकीज, आगरा 

8 अगस्त 2023 

आज मैं जब ऑफिस में था तो मेरे पास मेरे चाचाजी का कॉल आया और उन्होंने बताया कि आज मेरे छोटे भाई गौरव की पत्नी दीक्षा ने दो बेटियों को जन्म दिया है किन्तु अस्वस्थ होने के कारण उन दोनों को बचाया नहीं जा सका। यह बहुत ही दुखद हुआ। या दोनों बच्चियां ऑपरेशन से हुई थीं जिस कारण गौरव की पत्नी अभी भी आगरा में अस्पताल में भर्ती है और अभी उसे होश नहीं आया। 

मैं तुरंत ऑफिस से छुट्टी लेकर अपनी बाइक से आगरा पहुंचा और न्यू आगरा के नजदीक एक हॉस्पिटल में दीक्षा भर्ती थी। यहाँ मेरी मुलाकात मेरे दोनों भाइयों गौरव और नीटू से हुई। कुछ देर बाद यहाँ रूककर मैं वापस लौट गया। 

नीटू और गौरव, आगरा में 



11 अगस्त 2023 

आगरा के छीपीटोला में एक बहुत ही पुरानी पानी की टंकी है, जिस पर लिखी दिनांक के अनुसार यह भारतीय  ब्रिटिश काल के दौरान निर्मित कराइ गई  जिससे अधिकांश शहर में जलापूर्ति की जाती थी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह आज भी कार्यरत है और आज भी अधिकांश शहर की जलापूर्ति इसी पानी की टंकी पर निर्भर है। 

स्थानीय ऐतिहासिक दस्तावेजों और रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पानी की टंकी करीब 131 साल से अधिक पुरानी है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल के दौरान हुआ था। आज यह टंकी सिर्फ पानी सप्लाई का साधन नहीं, बल्कि छीपीटोला और रकाबगंज इलाके की एक पुरानी पहचान और ऐतिहासिक लैंडमार्क बन चुकी है, जिसे देखने और जानने के लिए स्थानीय लोग आज भी उत्सुक रहते हैं। 

 

ब्रिटिशकालीन पानी की टंकी, छीपीटोला, आगरा 


12 अगस्त 2023 

आगरा से मैं जब कभी भी बाइक से मथुरा की तरफ प्रस्थान करता हूँ तो अधिकांशतः मैं पुराने मथुरा मार्ग का प्रयोग करता हूँ।  यह पुराना मथुरा मार्ग मुझे इसलिए पसंद हैं क्योंकि यह ऐतिहासिक राजमार्ग है, मुगलकाल के दौरान आगरा से दिल्ली जाने के लिए मुग़ल बादशाह और उनकी सेना इसी मार्ग का प्रयोग करते थे। 

यह मार्ग वर्तमान में राजा की मंडी रेलवे स्टेशन के निकट से गुजरते हुए गुरु के ताल के पास आकर मुख्य वर्तमान राजमार्ग से जुड़ जाता है। इस मार्ग पर अनेकों ऐतिहासिक धरोहरें हमें दिखलाई पड़ती हैं जिनमें सबसे पहले दिल्ली दरवाजा दिखाई देता है जो राजा की मंडी स्टेशन के बिलकुल नजदीक है। मुग़ल काल में दिल्ली दरवाजा, आगरा शहर का उत्तरी दरवाजा था जो दिल्ली जाने वाले मार्ग पर स्थित था। 

इस दरवाजे से निकलने के बाद आगरा शहर की सीमा समाप्त हो जाती थी और फिर दूरी का आकलन करने के उद्देश्य से बनवाई गईं कोस मीनारों का सिलसिला शुरू हो जाता था। प्रत्येक 3 से 4 किमी पर एक कोस मीनार बनाई गई थी जो वर्तमान में भी दिखाई देती है। 

मार्ग का अगला पड़ाव सिकंदरा नामक स्थान था जहाँ मुगलकाल से पूर्व सुल्तान सिकंदर लोदी ने यहाँ आगरा शहर की स्थापना की थी और इसे प्राचीन आगरा शहर नाम दिया था। वर्तमान में यह सिकंदरा ही कहलाता है और इसी स्थान पर मुगलकाल के सबसे मुख्य शासक बादशाह अकबर का मकबरा भी है। अकबर के मकबरे से थोड़ा सा आगे एक मुगलकालीन मस्जिद मुख्य मार्ग पर राहगीरों के इबादत हेतु बनाई गई थी। 

मस्जिद से थोड़ा आगे चलने पर मरियम का मकबरा है जो कि बादशाह अकबर की रानी का मकबरा कहलाता है। 

  

दिल्ली गेट 

दिल्ली दरवाजा 

कोस मीनार 

पत्थर घोडा और काफूर की मस्जिद 

शहंशाह अकबर का मकबरा 

एक मस्जिद 
मैं और कुमार 

29 अगस्त 2023 

आज चित्रा सिनेमा में OMG 2 मूवीज देखी। 


चित्रा सिनेमा में एक मूवीज 





9 सितम्बर 2023 


आज मैं और कल्पना किसी आवश्यक कार्य से आगरा गए। वहां हमने राजा की मंडी बाजार में स्थित भारत स्टार वर्ल्ड सिनेमा में शाहरुख़ खान की जवान मूवीज देखी जो कि एक शानदार मूवीज थी। मूवीज देखने के बाद हम आगरा कैंट स्टेशन पहुंचे जहाँ हमारी मुलाक़ात मेरे मित्र कुमार भाटिया से हुई। देर शाम चम्बल एक्सप्रेस से हम मथुरा की ओर रवाना हो गए। इस चम्बल एक्सप्रेस के आज के ट्रैन मैनेजर हमारे ललित मामा जी थे जो मथुरा में ही रहते हैं। 






मैं और कल्पना 





चम्बल एक्सप्रेस में कल्पना 

19 सितम्बर 2023 

राजीव सिनेमा में एक मूवीज 


12 अक्टूबर 2023 

आज आगरा में भगवान टॉकीज के निकट लाल ताजमहल देखने का अवसर मिला। यह रोमन कैथोलिक कब्रस्तान है जो ब्रिटिश कालीन है। यहाँ अनेकों कब्रें हैं जिनमें सबसे मुख्य मकबरा जॉन विलियम हेंशिंग का है जिसकी वास्तुकला बहुत ही शानदार है। इस यात्रा का मैंने एक अलग ब्लॉग तैयार किया है - आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके इस यात्रा का विस्तृत वर्णन प्राप्त कर हैं।  रोमन कैथोलिक कब्रिस्तान


जॉन विलियम हेसिंग का मकबरा 







रोमन कैथोलिक कब्रस्थान का दरवाजा 


इसी के साथ ही आज श्री सिनेमा में मिशन रानीगंज मूवीज देखी जो कि अक्षय कुमार द्वारा अभिनीत एक शानदार मूवीज थी। 





16 अक्टूबर 2023 

कुमार की छोटी बहिन अनु की शादी तय हो गई है। आज उसने रिश्ता पक्का होने के अवसर पर अपने यहाँ माता रानी का जागरण रखा और शाम को अपने चुनिंदा लोगों के लिए शाम की दावत देने का आयोजन भी किया। मैं भी अपनी बाइक से इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचा। 



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17 दिसंबर 2023 








22 दिसंबर 2023 

साल का अंतिम सप्ताह चल रहा है। सर्दियाँ जोरो पर हैं, आज मैंने आगरा के मेहर सिनेमा में शाहरुख़ खान की तीसरी मूवीज दुनकी देखी। मूवीज देखने के बाद मैं और कुमार कैंट स्टेशन के नजदीक नए बने रेल कोच रेस्टोरेंट पहुंचे। यहाँ बहुत महंगे रेट में सस्ता भोजन मिल रहा था हमने यहाँ से कुछ नहीं लिया।  






समाप्त