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Saturday, April 29, 2023

KACHHALA GHAT : GANGA RIVER 2023

 कछला घाट पर गंगा स्नान - वर्ष 2023 

29 अप्रैल 2023 

अप्रैल का माह चल रहा है और गर्मी अपने चरमोत्कर्ष पर है। इस समय तो केवल ठन्डे स्थानों और नदियों की तरफ यात्रा का रुख स्वतः ही हो जाता है। इस सप्ताह के अंत में शनिवार के अवकाश को मैंने अपनी एक यात्रा में बदल दिया। इस बार गंगा जी जाने का विचार मन में आया और शनिवार को गंगा जी के लिए प्रस्थान करने के पूरी तैयारी कर ली। मेरी पत्नी कल्पना भी मेरे साथ गंगा स्नान के लिए तत्पर हो उठी तो अपनी इस यात्रा में शामिल कर लिया। 

मथुरा से सुबह साढ़े पांच बजे कासगंज जाने वाली पैसेंजर ट्रेन जाती है इसलिए सुबह पांच बजे ही घर से तैयार होकर, माँ को प्रणाम कर हम स्टेशन की तरफ प्रस्थान कर गए। स्टेशन से पहले ही एक रेल फाटक पर बाइक खड़ी करके हम स्टेशन की तरफ दौड़ लिए क्योंकि अब ट्रेन को चलने में ज्यादा समय नहीं रहा गया था और जैसे ही हम स्टेशन पर पहुंचे, तो एक जोरदार सीटी हमारी ट्रेन के इंजन की सुनाई दी और ट्रेन चल पड़ी। मतलब ये था कि अगर हम थोड़ी बहुत और देर से आते तो शायद इस ट्रेन का मिलना मुश्किल ही था। 

मथुरा जंक्शन स्टेशन के बाद मथुरा छावनी स्टेशन आया और इसके बाद यमुना जी  को पार करती हुई ट्रेन गंगा जी की तरफ रवाना हो चली। सुबह सुबह की ठंडी हवा ने मन को प्रफुल्लित कर दिया और यात्रा का आनंद दुगना कर दिया। राया, सोनाई और मुरसान के बाद हम हाथरस पहुंचे, यहीं से अगला स्टेशन हमारे गांव का है हाथरस रोड। 

मीटरगेज के समय में यह मुख्य स्टेशन था क्योंकि अधिकतर मीटरगेज की ट्रेनों का क्रॉस एक दूसरे से इसी स्टेशन पर होता था परन्तु जब से ये बड़ी लाइन हुई है तब से इस स्टेशन की महत्ता और सुंदरता दोनों ही समाप्त हो चले हैं। एक समय में मेरे दादाजी इसी रेलवे स्टेशन पर नौकरी करते थे, आज उनकी ऑफिस एक खंडहर के रूप में बची है सिर्फ।  इस स्टेशन से मेरा गांव सिर्फ एक किमी की दूरी पर है।  यहाँ आकर अनायास ही मुझे मेरे बचपन के दिनों की याद आ जाती है। 

अब आगे बढ़ते हैं - रति का नगला, बस्तोई, सिकंदरा राऊ, अगसौली और मारहरा के बाद आखिर कार हम  अपने अंतिम गंतव्य स्टेशन कासगंज पहुंचे। यह ट्रेन यहीं तक थी और इस समय कछला घाट जाने वाली कोई ट्रेन नहीं थी इसलिए अब आगे की यात्रा बस द्वारा ही होनी थी। इसलिए हम पैदल ही स्टेशन से बस स्टैंड की तरफ रवाना हो चले। एक चौक पर हमने नाश्ते की दूकान देखी, जहाँ बहुत से लोगों की भीड़ सी भी लगी थी। 

 अगर किसी कचौड़ी वाली दूकान पर अत्यधिक भीड़ देखने को मिले तो समझ जाना चाहिए कि वो उस नगर की प्रसिद्ध नाश्ते की दुकान है। मैंने और कल्पना ने भी यहाँ सुबह सुबह गर्मागर्म कचौड़ी का नाश्ता किया। जो कि अत्यंत ही स्वादिष्ट था। 

कुछ समय तक हम बस स्टैंड पर खड़े रहे और फिर थोड़ी देर बाद हमें अलीगढ डिपो की एक बस मिल गई जो कि बरेली जा रही थी। हम इस बस द्वारा कछला घाट पहुंचे। गंगा जी पार करने के बाद हम रेलवे स्टेशन की तरफ से गंगा नदी में उतरे, और पूजा अनुष्ठान के बाद हमने जी भर कर गंगा जी में स्नान किया।  यहाँ गंगा जी की गहराई थोड़ी कम है इसलिए गंगा नहाने का असली आनंद प्राप्त होता है। 

गंगा नदी में ही वो पुराने पिलर दिखाई देते हैं जिनपर कभी मीटरगेज की ट्रैन और बरेली जाने वाला सड़कमार्ग एक साथ गुजरता था। बदलते समय के साथ अब गंगा जी पर दो पुल नए बन गए हैं जिनमें से एक सड़कमार्ग का और दूसरा रेल मार्ग का है। 

गंगा जी में काफी देर नहाने के बाद हम कछला घाट स्टेशन पहुंचे, क्योंकि थोड़ी बहुत देर में अब यहाँ कासगंज  जाने वाली पैसेंजर ट्रेन आने वाली है। कछला घाट स्टेशन पर पुरानी मीटरगेज की अनेकों निशानियाँ आज भी दिखाई देती हैं, जैसे कि गंगा जी पर बने पुराने पुल के अवशेष, कछला घाट का पुराना मीटरगेज का रेलवे स्टेशन और प्लेटफॉर्म। 

इन सबको देखकर मुझे मेरे बचपन के दिनों की और मीटरगेज के दौर की पुरानी यादें ताजा हो उठती हैं। कुछ समय बाद कासगंज जाने वाली ट्रेन आ पहुंची और एक बार  फिर से हम गंगा से यमुना की तरफ रवाना हो चले। यह ट्रेन कासगंज तक ही थी, और अब मथुरा जाने के लिए शाम से पहले यहाँ कोई ट्रेन नहीं थी इसलिए अब वापसी का प्लान बस द्वारा कन्फर्म हुआ। 

 कासगंज स्टेशन के बोर्ड के साथ कुछ फोटो लेने के बाद हम मथुरा रोड पर पहुंचे। यहाँ गन्ने के जूस की स्टाल से दो दो गिलास हमने जूस पिया जिससे एक बार फिर से हमारा मन और शरीर तरोताज़ा हो गया। कुछ समय बाद हमें मथुरा जाने वाली एक रोडवेज बस मिल गई और हम मथुरा अपने घर की तरफ  प्रस्थान कर गए। 



KALPANA AT KASGANJ RAILWAY STATION 

OLD PILLER OF METER GUAGE RAIL TRACK

BANK OF GANGA 

BAREILLY HIGHWAY


KALPANA IN GANAGA





मीटर गेज रेलवे के समय के अवशेष 

मीटर गेज ट्राली 

कभी यहीं होकर गोकुल एक्सप्रेस गुजरती थी। 



गंगा सेतु की तरफ से कछला घाट स्टेशन का एक दृश्य 


गंगा रेल सेतु 


KACHHALA BRIDGE 


मीटर गेज के समय का स्टेशन नामपट 



मीटर गेज का प्लेटफॉर्म 






SORON SHUKAR KSHETRA STATION

KALPNA IN TRAIN 

GANGAGARH RAILWAY STATION 

GANGAGARH HALT

KASGANJ CITY STATION 

KASGANJ JUNCTION


🙏

Friday, June 26, 2015

HARIDWAR 2015


हरिद्धार यात्रा - 2015 


जून 2015, 

मेरे पिताजी के स्वर्गवास के बाद मैं उनकी अस्थियों को लेकर हरिद्वार जाना चाहता था। हरिद्वार, वही स्थान है जहाँ मैं बचपन से ही अपने माता पिता के साथ गया था और उन्हीं के साथ मैंने गंगा के तट और इसकी धार्मिक महिमा को समझा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि जीवन में मुझे हरिद्वार की एक ऐसी भी यात्रा करनी पड़ेगी जिसमें मेरे पिताजी सशरीर ना होकर केवल अस्थियों के रूप में होंगें और यह मेरे पिताजी के साथ मेरी अंतिम यात्रा होगी। 

मेरे बड़े भाई धर्मेंद्र भरद्वाज जी इस यात्रा में मेरे सहयात्री के रूप में मेरे साथ थे। नईदिल्ली से देहरादून चलने वाली नंदादेवी एक्सप्रेस में विनोद जी ने हमारा हरिद्वार तक आरक्षण करा रखा था। शाम को मैं और भैया, पिताजी की अस्थियां लेकर नईदिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां विनोद जी हमें मिले और उन्होंने काउंटर से कराई गई ट्रेन की टिकट हमें दी और फिर हम हरिद्वार के लिए निकल पड़े। हमारी टिकट कन्फर्म नहीं हुई थी इसलिए हमें कोई सीट नहीं मिली थी। पूरी रात का यह सफर हमने खड़े खड़े ही पूरा किया गनीमत थी कि यह AC कोच था, अन्यथा गर्मी कोई कसर नहीं छोड़ रही थी। 

अगली सुबह हम हरिद्वार पहुंचे, यहाँ पहुंचकर अनायास ही मेरी आँखों में आंसू आ गए, रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर को देखकर मुझे मेरी बीती हरिद्वार की यात्रा की याद आ गई जिसमें अब तक मेरे पिताजी मेरे साथ थे किन्तु आज वह मेरे साथ मौजूद नहीं थे, बस उसके फूल मेरे साथ थे। भैया ने मेरे दुःख को समझ लिया और वह मुझे एक चाय नाश्ते के दुकान पर लेकर गए। हरिद्वार में सुबह की चाय पीने के बाद हम हरि की पैडी की ओर रवाना हो चले। 

...

हरि की पैडी पर पहुंचकर माँ गंगा को नमन करके मैंने अपने पिता जी की अस्थियां गंगा जी में विसर्जित कीं और फिर गंगा स्नान के पश्चात अपने पिताजी को नमन करते हुए उनसे अंतिम विदा ली और वापस स्टेशन की ओर प्रस्थान किया। यह क्षण मेरे लिए अत्यंत ही भावुक थे और सहज ही ना सम्भलने वाले थे, परन्तु भैया मेरे साथ थे जिनकी वजह से मुझमे हौंसला भी था और हिम्मत भी, इन दुख्नों के क्षणों को ग्रहण करने की। मेरा हृदय यह स्वीकार ही नहीं कर पा रहा था कि मेरे सिर से मेरे पिता का साया हट चुका है, मैंने अपने पिता को खो दिया है। 

...

पिता की याद मन में बसाये आँखों में आंसू लिए मैं, भैया के साथ रेलवे स्टेशन की ओर रवाना हो चला। मार्ग में एक पुलिस स्टेशन के नजदीक लगे एक बड़े पोस्टर को मैंने पढ़ा, जिसमें जीवन और मृत्यु से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें लिखी हुईं थीं। इसमें एक पिता और पुत्र के दायित्वों का भी विशेष विवरण दिया हुआ था। इसे पढ़कर मुझे एहसास हुआ कि एक पिता का अपने पुत्र के जीवन में कितना महत्वपूर्ण योगदान रहता है। 

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एक भोजनालय पर भोजन करने के बाद हम रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहाँ से हमारा वापसी का आरक्षण नहीं था, इसलिए सामान्य श्रेणी की टिकट लेकर हम ट्रेन में सवार हो गए। कोच में सीट तो कोई भी खाली नहीं थी, इसलिए दरवाजे के पास ही खड़े होकर हमने यात्रा की।  पिताजी के जीवन काल में मैंने कभी जनरल कोच में यात्रा नहीं की थी, मेरे पिताजी के पास स्लीपर का पास था, जिससे मैं किसी भी ट्रैन के स्लीपर कोच में यात्रा कर सकता था बिना किसी मूल्य के। आज उनके जाने बाद मैं सामान्य श्रेणी का मुसाफिर बन चुका हूँ। 


IN DELHI METRO

HARIDWAR ARRIVED AT 4 AM 




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MY BIG BROTHER DHARMENDRA BHARDWAJ

HARI KI PAIRI 

HARI KI POURI, HARIDWAR 


GANGA RIVER 


GANGA RIVER 





























जय श्री राधे