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Sunday, December 11, 2022

BHOPAL : MADHYA PRADESH 2022

सेठ जी परिवार के साथ, भोपाल की दो जश्न 'ए' शाम 

यात्रा तिथि - 11 DEC 2022 and 12 DEC 2022 




मैं और मेरे मित्र रूपक जैन जी 

अभी गत दिनों दीपावली के त्यौहार की खुशियां मनाकर मन भरा ही था कि आज फिर से एक खुश खबरी सुनने को मिल गई और यह खुश खबरी मुझे मेरी यात्रापटल के माध्यम से मेरे प्रिय घुमक्कड़ मित्र रूपक जैन जी की तरफ से प्राप्त हुई। रूपक जैन जी एक सफल व्यापारी होने के साथ साथ देश के बहुत बड़े घुमक्कड़ों में से एक हैं जिन्होंने समस्त भारतवर्ष में शायद ही कोई जगह छोड़ी हो जो अपनी आँखों से ना देखी हो। ऊँचे ऊँचे बर्फीले पहाड़ों से लेकर समुद्र तक और इसके अलावा देश के छोटे बड़े सभी शहरों की खाने पीने की मशहूर दुकानों तक उन्होंने घुमक्कड़ी में ऊँचा मुकाम हाँसिल किया है। 

करीब तीन साल पहले उन्होंने मुझे यात्रापटल के माध्यम से फेसबुक की आभासी दुनिया से निकालकर, अपनी वास्तविक दुनिया में अपना मित्र बनाया था और मुझे भी उनकी मित्रता पाकर काफी खुशी महसूस हुई। हमारी पहली मुलाकात मथुरा में हुई, जहाँ वह अक्सर अपने आराध्य भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करने आते रहते हैं। 

इसके बाद मैं भी अपने बचपन के मित्र कुमार के साथ उनके यहाँ भोपाल गया था, जहाँ उन्होंने हमारी काफी अच्छे से आवभगत की और अपने प्रेम और स्नेह से हम दोनों को सदा के लिए अपने प्रेम का ऋणी बना लिया। उन्होंने अपनी गाड़ी से ही हमें भीमबेटका की गुफाएँ और भोजपुर शिव मंदिर का दर्शन कराया जहाँ उनके पुत्र शुभ जैन भी हमारे साथ हमारे सहयात्री थे और अगले दिन उन्होंने हमें साँची स्तूप के साथ साथ उदयगिरि की प्राचीन गुफाओं के दर्शन भी कराये। 

इसके बाद हम साथ में चंदेरी की यात्रा पर भी गए और फिर जैन साब मथुरा पधारे और उसके बाद हम हाथरस की यात्रा पर भी गए, जहाँ जैन साब ने हाथरस की मशहूर चाट और हन्नो लाला की रबड़ी का भी भरपूर स्वाद लिया। इसके बाद उन्हें मैं अपना गाँव भी दिखाकर लाया जो हाथरस से थोड़ी दूर ही था। शाम को हम मथुरा के लिए वापस हो लिए, रास्ते में मुरसान में हमने एक विवाह समारोह में प्रतिभोज का आनंद लिया। 

रात को हम वापस मथुरा आ गए। रात को जैन साब मेरे पास ही रुके, इस तरह इन मुलाकातों के दौरान जैन साब से अब दिली रिश्ता बन गया था, मैंने मन ही मन बिहारी जी को धन्यवाद किया कि उन्होंने अपनी कृपा से जैन साब के रूप में इतना अच्छा मित्र दिया, जिनके साथ रहने पर मुझे सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। 

रूपक जैन जी खुद भी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर के निवासी हैं और अगले दो महीने बाद उन्होंने मुझे अपने बड़े पुत्र शुभ जैन के विवाह समारोह में आमंत्रित करने के लिए विशेष आग्रह किया, जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार किया। इस वैवाहिक कार्यक्रम में मेरे अलावा मेरा बचपन का दोस्त कुमार भाटिया और मेरी पत्नी कल्पना भी शामिल थे। 

Sunday, December 22, 2019

BHOPAL 2019 : BHOPAL CITY


भोपाल शहर और घर वापसी 



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भोजपुर से लौटने के बाद दिन ढल चुका था और भोपाल शहर ने काले रंग की शॉल से ओढ़ ली थी परन्तु मध्य प्रदेश की राजधानी होने के नाते इसकी चमक बरकरार थी जिससे यह लग ही नहीं रहा था कि शाम हो चुकी है और अँधेरा बढ़ने लगा है। जैनसाब, शाम के भोजन के लिए एक आलिशान रेस्टोरेंट में हमें लेकर पहुंचे। यहाँ उज्जैनी के प्रसिद्ध दाल फाफले मिलते हैं जो मैंने जीवन में पहली बार खाये थे। यह खाने में अत्यंत ही स्वादिष्ट थे और हमारे खाने के बाद रेस्टोरेंट की मैनेजर ने हमसे खाने की गुणवत्ता को लेकर फीडबैक भी लिया जो हमारी तरफ से शानदार था। 

Saturday, December 21, 2019

BHOPAL 2019 : Bhojpur Shiv Temple



भोजपुर शिव मंदिर 



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    भीमबेटका से लौटकर अब जैन साब के साथ हम भोजपुर शिव मंदिर की तरफ रवाना हुए। दिन ढलने की कगार पर था और शाम अब करीब आ चली थी। भोपाल से होशंगाबाद वाले इस राजमार्ग पर अभी मार्ग चौड़ीकरण का कार्य चल रहा था, आने वाले समय में यह रास्ता भोपाल से भीमबेटका या होशंगाबाद जाने वाले राहगीरों के लिए बहुत ही सुविधा जनक हो जाएगा। अब्दुल्लागंज आने पर जैनसाब ने गाडी सड़क के बाईं ओर खड़ी करके शुभ भाई को यहाँ की मशहूर दुकान से कचौड़ी लाने के लिए कहा जो कि दाल की बनी बेहद ही स्वादिष्ट और गर्मागर्म थीं जिन्हें शाम की चाय के साथ हमें खाने बहुत ही आनंद आया। 

BHOPAL 2019 : BHIMBETKA CAVES - A ROCK SHELTERS



आदिमानव का आश्रय स्थल - भीमबेटका गुफ़ाएँ



आदिमानव और उसका निवास 
    
     देश के मध्यभाग में स्थित और मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 40 - 50 किमी दूर दक्षिण दिशा में विंध्यांचल पर्वत की विशाल श्रृंखला है जहाँ प्राचीन काल से ही ऋषिमुनियों के आश्रम तथा जीव जंतुओं का निवास रहा है और इसके साथ ही यह स्थान मानव के उस युग से सीधा सम्बन्ध रखता है जब मनुष्य को अपने मनुष्य होने का ज्ञान भी नहीं था, वह कौन था, किसलिए था इन सभी जानकारियों से परे शिकार करके जीवन निर्वाह करना और मौसम की मार से बचने के लिए प्राकृतिक गुफाओं में आश्रय लेना ही उसकी मानवता को दर्शाती है। यह काल प्रागेतिहासिक काल के नाम से जाना गया और उस समय का मानव 'आदिमानव' के नाम से। 


Bhopal City and Jain Sab



मैं, कुमार और जैनसाहब से एक मुलाकात - झीलों के शहर भोपाल में  





  रूपकजैन साहब से मुलाकात होने के बाद हमारी एक दूसरे से काफी अच्छी मित्रता हो गई। जल्द ही जैन साब ने मुझे अपने शहर भोपाल घूमने के लिए आने को कहा। मेरी लिस्ट में भोपाल व उसके आसपास के दर्शनीय स्थल थे जो मुझे कभी ना कभी तो देखने ही थे इसलिए अब उन जगहों पर जाने का वक़्त आ चुका था। मैंने भोपाल का रिजर्वेशन करा लिया और साथ में कुमार को भी भोपाल घुमाने के लिए राजी कर लिया।

   उसने भी अपनी टिकट अपने पीटीओ पर बुक कर ली और साल के आखिरी माह में हमारी 2019 की आखिरी ट्रिप भोपाल फाइनल हो गई। मैंने और कुमार ने अपना रिजर्वेशन ग्रांडट्रक एक्सप्रेस में कराया था। हालांकि सर्दियों के दिन थे इसलिए ट्रैन का प्रतिदिन भोपाल पहुँचने का स्टेटस रूपकजैन साब मुझे फोन पर देते थे। मैं हैरान था कि भला कोई मेरा अपना भी ऐसा भी हो सकता है जो इतनी बेसब्री से मेरी प्रतीक्षा कर रहा हो।